गंगोत्री यात्रा

Discussion in 'Travelogues' started by PEEYUSH GUPTA, Oct 28, 2017.

  1. PEEYUSH GUPTA

    PEEYUSH GUPTA Member

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    गंगोत्री यात्रा व्रतान्त

    कहने को तो यह एक बाईक राइड थी, मगर गंगोत्री दर्शन के उपरांत यह तीर्थयात्रा में बदल गयी. गंगाजी के अदबुध द्रश्य, हरे भरे पर्वत और घुमावदार रास्तों ने तन मन आत्मा तक को प्रसन्न कर दिया.
    २०.१०.१७ को शुरू हुई ये यात्रा २३.१०.१७ को समाप्त हुई. यात्रा का व्रतान्त इस प्रकार है :

    २०.१०.१७
    हम सुबह ४ बजे अपने घर से निकल पड़े थे. सारा सामान रात को ही बाईक पर बांध दिया था. केवल ३.३० घंटे में ही हम हरिद्वार पहुँच गए. हर की पौड़ी से कुछ ही दूरी पर एक ही रेस्तरां खुला मिला. परांठे और चाय का नाश्ता किया और आगे की यात्रा शुरू की.
    मनोरम द्रश्यों ने बाइक की रफ़्तार ज्यादा नहीं होने दी. चारों और हरे भरे पर्वत, बीच में पावन गंगाजी और गंगाजी के किनारे किनारे हम. सुंदर सुंदर छोटे बड़े अनगिनत झरने. बहुत ही पावन और मनोरम द्रश्य थे. प्रक्रति का आनंद लेते हुए शाम ३.३० तक उत्तरकाशी पहुँच गए.
    दुपहर का खाना और रात का खाना एक ही हो गया. थकन ज्यादा होने की वजह से ५.०० बजे ही सो गए.


    २१.१०.१७
    सुबह ६.०० उठ कर तैयार हुए और अगले पड़ाव यानि गंगोत्री की तरफ चल पड़े. प्रकर्ति का सौन्दर्य अपने चरम पे था. सुबह १०.०० बजे हर्षिल नाश्ता करने के लिए रुके. यहीं से हमने आगे की जानकारी ली. गंगोत्री के कपाट बंद हो चुके थे, और माताजी का किरीट मुख्बा आ रहा था.
    फिर भी हमने गंगोत्री जाने का ही निश्चय किया. गंगोत्री मंदिर के बाहर से ही दर्शन किये. पर्यटक अब वहां नहीं थे, सभी दुकाने बंद मिलीं. बस एक चाय की छोटी सी दुकान खुली मिली. मंदिर से ही आस पास की दर्शनीय स्थानों का पता किया. गोमुख, गौरी कुंड, सूर्य कुंड, पांडव गुफा, प्रमुख स्थान थे.
    गोमुख जाने का समय निकल चूका था, इसीलिए गौरी कुंद, सूर्य कुंड और पांडव गुफा के दर्शन किये. यहाँ हमें एक SURPRIZE मिला, वो था पाताल गुफा, जहाँ जाने का कोई रास्ता नहीं है, रस्सी के सहारे, लटक कर जाना पड़ता है. ये भी एक रोमांचक अनुभव था.
    ४.०० बजे गंगोत्री से वापस हर्षिल की तरफ चल पड़े. हर्षिल पहुच कर भोजन किया और होटल में जा कर आराम किया. हर्षिल से गंगोत्री पर्वत का नज़ारा भी अदबुध था.

    २२.१०.१७
    आज हमने मुख्बा (मुखी मठ) जाने का तय किया. कच्चा रास्ता करीब ४ किलोमीटर का तय करके मुख्बा पहुंचे. मंदिर के कपाट अभी खुले नहीं थे. करीब २ घंटे इंतज़ार के बाद दर्शन हुए. इस बीच वहां के प्रमुख पुरोहित जी से काफी बात चीत हुई. वे हमें अपने घर ले गए और चाय नाश्ते से स्वागत किया.
    बहुत ही मिलनसार और आत्मीय स्वभाव वाले थे. दर्शन के उपरांत हम लोगों ने पुरोहितजी से आज्ञा ली और वापस दिल्ली की और चल पड़े. उत्तरकाशी पहुँच कर इरादा कुछ बदला और अब सोचा की क्यूँ ना पहाड़ों की रानी मंसूरी जाया जाये. उत्तरकाशी से मंसूरी तक का रास्ता सीधी चढाई वाला था मगर
    ट्रैफिक ना होने की वजह से ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. शाम के ५ बजे तक आसानी से मंसूरी पहुँच गए.

    २३.१०.१७
    मंसूरी से दिल्ली.

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  2. adsatinder

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    Great Rider !
    Great Speed !
    Great Captures !
    Great Destination !
     
  3. SJM1214

    SJM1214 Well-Known Member

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    Thank you Very much, Gupta ji. One Request from my side can you elaborate some more baout route. Like till which point one can take his/her motorcycle.etc. Thanks Once again.
     
  4. PEEYUSH GUPTA

    PEEYUSH GUPTA Member

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    Dear Friend, to be very precise,i took my motorcycle right infront of the Gangotri Temple, as there was no rush, no shop was open. Darshan is not possible at Gangotri but you may go to Mukhba for Darshan. Mukhba is just 4 kms away from Harshil. Road is pretty good except some bad patches.
     
  5. Gaurav Dutt

    Gaurav Dutt Shivoham Shivoham

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    Wahh Guptaji, अदबुध kya baat... mazza aagaya
     
  6. Pardeep Dhounchak

    Pardeep Dhounchak जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है

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    Shaandar.........
     
  7. Alpha

    Alpha Going to Neverland

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    bahut badhiya
     

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