2013 flash floods and cloudbursts

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
This pic is in circulation on Internet (Facebook, Dainik Jagran etc.)
View attachment 406260

You can check this in Dainik Jagran Site also:
Uttarakhand flood: Dainik Jagran warned govt of threat 9 years ago
View attachment 406261

Check Wiki for Cloud cover pic on the area:
2013 North India floods - Wikipedia, the free encyclopedia

Hindustan Times - Something wrong in Himalya
Uttarakhand: Warning bells on deaf ears - Hindustan Times

Uttarakhand floods: The prophecy that was? - Hindustan Times


Youtube - Cloud cover by ISRO :
A disaster that was waiting to happen Video


दैनिक जागरण ने 9 साल पहले ही जता दी थी केदारनाथ त्रासदी की आशंका

Publish Date:Fri, 16 Jun 2017 09:30 PM (IST)

1586816618673.png


लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि वे पिछले साल भी केदारनाथ गए थे। जब उनसे साल 2013 और आज के हालात के बारे में बात की और पूछा कि उस घटना से हमने क्या सीखा है?

उनका जवाब था कुछ भी नहीं!

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]।
केदारनाथ में 16 और 17 जून 2013 को आयी भीषण आपदा ने एकाएक सब कुछ लील लिया। हजारों लोग आज भी लापता हैं और सैंकड़ों की संख्या में लोगों की जानें गईं। पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस त्रासदी ने आर्थिक तौर पर राज्य की कमर तोड़कर रख दी थी। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ऐसी किसी आपदा के बारे में पहले से पूर्वानुमान नहीं था। मौसम विभाग ने भीषण बारिश की चेतावनी जारी की हुई थी। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह कि आपदा से करीब 9 साल पहले जागरण ने एक ऐसी खबर छापी थी, जिसने ऐसी ही किसी आपदा की आशंका जतायी थी।
सोमवार 2 अगस्त 2004 को दैनिक जागरण ने 'अब केदारनाथ भी खतरे में' इस हेडिंग के साथ खबर छापी थी। इस खबर में स्पष्ट कहा गया था कि केदारनाथ के ऊपर स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर बम की तरह फटेगा। देहरादून पेज पर छपी रिपोर्टर लक्ष्मी प्रसाद पंत की बायलाइन खबर में आशंका जतायी गई थी कि अगर केदारनाथ के ठीक पीछे स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर टूटा या खतरनाक झील फटी तो केदारनाथ में भारी तबाही मच जाएगी। 15 जून की शाम 5 बजे से लेकर 16 जून की शाम 5 बजे तक इन 24 घंटों में चौराबाड़ी ग्लेशियर पर 325 मिलीलीटर बारिश हुई। इसके बाद 17 जून को आखिरकार जागरण ने 9 साल पहले जो आशंका जतायी थी, वह सच साबित हुई। चौराबाड़ी झील टूट गई और नीचे केदारनाथ घाटी में तबाही मच गई।



आज से करीब 12 साल पहले जागरण में छपी खबर की कुछ पंक्तियां यहां शब्दश: पढ़ें...
आस्था के सर्वोच्च शिखरों में से एक केदारनाथ धाम पर कभी भी चौराबाड़ी ग्लेशियर बम की तरह फटकर कहर बरपा सकता है। मंदिर के ठीक पीछे स्थित करीब 6 किमी लंबे इस ग्लेशियर के हिमस्खलन लगातार सक्रिय हो रहे हैं। जबकि मौसम के गर्म होने से चौराबाड़ी के इर्द-गिर्द बर्फीली झीलों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। चूंकि ये झीलें ग्लेशियर के पीठ पर सवार हैं, इसलिए अगर पानी का बोझ बढ़ा तो झीलें फट पड़ेंगी और मौका ताड़कर यमुनोत्री और बदरीनाथ से भीषण तबाही केदारनाथ धाम में कहर मचाने निकल पड़ेगी।

1586816653245.png



चौराबाड़ी ग्लेशियर का सर्वेक्षण पूरा कर हाल ही में केदारनाथ से लौटे देश के नामचीन हिम विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर अगर गौर करें तो हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक केदारनाथ मंदिर से महज दो किमी दूरी पर स्थित चौराबाड़ी ग्लेशियर के मुरैन पर बर्फीली झीलों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। जिन झीलों की संख्या 2003 में सिर्फ तीन थी वर्ष 2004 में वह बढ़कर 16 हो गई है। दुखद बात यह है कि मौसम के गर्म होने से पिघल रहे चौराबाड़ी ग्लेशियर के कारण झीलों के आयतन में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है। आयतन में वृद्धि के चलते झीलों के पानी के भार से इनके फटने की आशंका बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि जब तक ग्लेशियर में इन झीलों को रोकने की क्षमता है या झीलें छोटी हैं तब तक तो ठीक है, लेकिन तापमान बढ़ने से ग्लेशियर में दरारें पड़ीं या एक झील दूसरे से मिल गई तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।


आज लक्ष्मी प्रसाद पंत क्या कहते हैं...

Jagran.Com की टीम ने इस समय एक हिन्दी अखबार में एडिटर लक्ष्मी प्रसाद पंत से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि वाडिया इंस्टीट्यूट के डीबी डोभाल उस समय केदारनाथ पर एक गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर रहे थे। जब पंत को इस बात की भनक लगी तो वे केदारनाथ जा पहुंचे और डोभाल से बात की। उस घटना को याद करते हुए पंत ने बताया, 'वे चौराबाड़ी ग्लेशियर का अध्ययन कर रहे थे। मैंने उनसे पूछा कि मंदिर के पीछे का अध्ययन क्यों कर रहे हैं। उन्होंने चौकाने वाली बात बतायी कि चौराबाड़ी झील का पानी लगातार बढ़ रहा है और इसको हम नाप रहे हैं। फिर उन्होंने कहा कि जिस दिन यह झील फटेगी, जैसे बम फटता है वैसा ही कुछ होगा और केदारनाथ को तबाह कर देगी।' बाद में जब यह रिपोर्ट दैनिक जागरण में छपी तो पूरे देश में हंगामा मच गया। सभी लोग इस रिपोर्ट के खिलाफ खड़े हो गए। भारी दबाव में डॉ. डोभाल ने उस रिपोर्ट पर काम करना बंद कर दिया।



2013 से क्या सीखा कुछ नहीं...




लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि वे पिछले साल भी केदारनाथ गए थे। Jagran.Com ने जब उनसे साल 2013 और आज के हालात के बारे में बात की और पूछा कि उस घटना से हमने क्या सीखा है? उनका जवाब था कुछ भी नहीं! उन्होंने कहा कि जैसे हालात 2013 में थे, वैसे ही हालात आज भी हैं। जहां केवल 20-25 हजार लोगों की क्षमता है वहां से रोज खबरें आती हैं कि रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं, जो 50 हजार से ऊपर हैं। उन्होंने आशंका जतायी कि अगर आज फिर ऐसी ही कोई घटना होती है तो तबाही फिर वैसी ही होगी। न तो प्रशासन ने और न ही आम लोगों ने 2013 की त्रासदी से कुछ सीखा है।


दैवीय आपदा नहीं थी वो...
लक्ष्मी प्रसाद साल 2013 की केदार आपदा को दैवीय आपदा की बजाय मानव जन्य आपदा मानते हैं। वह बताते हैं कि 2004 के बाद से केदारनाथ में खूब अतिक्रमण हुआ और वहां से गुजरने वाली मंदाकिनी नदी को निकलने का रास्ता ही नहीं मिलता। नदी के स्वभाविक प्रवाह के अतिक्रमण को रोक दिया और 16-17 जून 2013 में पानी इतना ज्यादा आया कि सब कुछ तबाह हो गया। वे कहते हैं कि जिस अतिक्रमण को प्रशासन को हटाना चाहिए था, उसे प्रकृति ने हटाया। उन्होंने बताया कि केदारनाथ में 20-25 हजार लोग होने चाहिए थे, लेकिन आपदा के समय वहां 80 हजार से 1 लाख लोग मौजूद थे। लक्ष्मी प्रसाद का मानना है कि केदारनाथ आपदा में कम से कम 25 हजार लोगों की मौत हुई है, जबकि सरकारी आंकड़ा इससे काफी कम है। देहरादून स्थित मौसम विभाग ने 14 से 17 जून तक भारी बारिश की आशंका जताते हुए चारधाम यात्रा पर रोक लगाने की सिफारिश की थी, लेकिन इसके बावजूद वहां यात्रियों को जाने दिया गया। अगर मौसम विभाग की हिदायत को माना जाता तो मौतों का आंकड़ा काफी कम होता।


दैनिक जागरण ने 9 साल पहले ही जता दी थी केदारनाथ त्रासदी की आशंका
 

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
केदारनाथ त्रासदी के 4 साल: जल प्रलय से पहले ऐसे 'डरावने' थे हालात

Publish Date:Fri, 16 Jun 2017 04:19 PM (IST)

केदारनाथ त्रासदी के 4 साल: जल प्रलय से पहले ऐसे 'डरावने' थे हालात


16 जून को भारी बारिश के कारण तमाम ताल भर गए, इसी क्रम में चोराबारी ताल का बांध टूट गया। इससे लाखों गैलन पानी सरस्वती और मंदाकिनी नदी में काल बनकर बहने लगा।


नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]।
बम भोले... बाबा केदारनाथ की जय... ऐसे ही नारों से केदारघाटी गूंज रही थी।

दिनभर की यात्रा के बाद तीर्थयात्री कुछ पलों के लिए सुस्ता रहे थे। पुजारी व अन्य लोग भी आराम कर रहे थे। लेकिन यह रात उन सबके लिए जैसे कयामत की रात बनकर आयी थी। 14 से 17 जून के बीच उत्तराखंड व आसपास के इलाकों में मानसून की बादल जमकर बरस रहे थे। यह बारिश साधारण बारिश से कहीं ज्यादा थी और इन चार दिनों में मानसून के दिनों में होने वाली बारिश के मुकाबले 375 फीसद ज्यादा बादल बरसे। इस बारिश के कारण केदारनाथ घाटी के ऊपर 3800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चौराबारी ग्लेशियर पर भारी दबाव पड़ा। यहीं से निकलने वाली मंदाकिनी नदी में जलस्तर लगातार बढ़ता चला गया।
16 जून को भारी बारिश के कारण तमाम ताल भर गए, इसी क्रम में चौराबारी ताल का बांध टूट गया। इससे लाखों गैलन पानी सरस्वती और मंदाकिनी नदी में काल बनकर बहने लगा। जल्द ही बाढ़ ने केदारनाथ मंदिर के आसपास और गोविंदघाट तक में तबाही मचा दी। केदारनाथ से करीब 2 किमी ऊपर करीब 400 मीटर लंबे, 200 मीटर चौड़े और 15-20 मीटर गहरे चौराबारी ताल को गांधी सरोवर के नाम से भी जाना जाता है। 5-10 मिनट के अंदर पूरे ताल का पानी यहां से निकला और काल बनकर नीचे केदारघाटी में बसे लोगों और श्रद्धालुओं पर जैसे टूट पड़ा।


काल बनकर बरस रहे थे बादल

वाडिया इंस्ट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी ने चौराबारी ग्लेशियर के पास एक ऑब्जरवेटरी बनायी है। उसके अनुसार 15 जून शाम 5 बजे से लेकर 16 जून सुबह 5 बजे तक सिर्फ 12 घंटे में ही चौराबारी ग्लेशियर पर 210 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद 16 जून सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक अगले 12 घंटे में 115 मिली बारिश और हो गई। इस तरह सिर्फ 24 घंटे में ही यहां 325 मिली बारिश हो चुकी थी। मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी पहले ही जारी की हुई थी। दक्षिण-पश्चिम मानसून और पश्चिमी विक्षोभ के यहां टकराने के कारण काले घने बादलों ने हिमालय के ऊपर डेरा डाल दिया था। इससे एक साथ कई बादल फटने की घटनाएं हुईं और बादलों से मौत बरसने लगी।
केदानाथ मंदिर और टाउन मध्य हिमालय के पश्चिमी छोर पर बसा है। यहां घाटी में मंदाकिनी नदी बहती है और रामबाड़ा तक यहां इसका कुल कैचमेंट एरिया 67 स्क्वायर किमी का है। इसमें से भी करीब 23 फीसद इलाके में ग्लेशियर हैं। इस त्रासदी के इतना बड़ा होने के पीछे समूचे कैचमेंट एरिया का यू आकार की घाटी होना है। यहां भर्त खूंटा (6578 मी), केदारनाथ (6940 मी) महालय चोटी (5970 मी) और हनुमान टॉप (5320 मी) जैसी ऊंची-ऊंची चोटियां हैं।

'U' आकार की घाटी के कारण मची ज्यादा तबाही
लगातार हो रही बारिश के कारण 'U' आकार की इस घाटी में खैरू गंगा जैसी छोटी धाराओं ने भी रौद्र रूप ले लिया। पतली-पतली धाराओं के रूप में बहने वाले इन नालों में पानी के साथ ही हजारों टन मलबा और पत्थर बहकर आने लगे। ऐसी सभी धाराएं जब पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही मंदाकिनी नदी में मिलीं, तो तबाही को रोकना शायद किसी के बस की बात नहीं थी। इस जल प्रलय ने केदारनाथ घाटी में तबाही की वो इबारत लिख दी, जिसे इससे पहले शायद ही कभी सुना गया होगा। इसमें 100 से ज्यादा गांव और 40 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। आपदा के 4 साल बीत जाने के बावजूद 4 हजार से ज्यादा लोग आज तक लापता हैं। पिछले चार साल में साढ़े 6 सौ से ज्यादा नरकंकाल इलाके में जहां-तहां पड़े हुए मिल चुके हैं।


केदारनाथ त्रासदी के 4 साल: जल प्रलय से पहले ऐसे 'डरावने' थे हालात
 

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Uttarakhand Flood 2013: Uttarakhand ripped apart
4,213,381 views
•Jun 21, 2013



6.7K
1.2K



inKhabar

3.3M subscribers
India News: It will take a long time for the lives hit in one of Uttarakhand's worst natural disasters be rebuilt. In the absence of roads, many of which have dissolved into the Ganga, Alaknanda and Bhagirath, rescue will be slow and rehabilitation torturous. In fact, the government is not even thinking about loss to property and infrastructure. The single-minded focus right now is to bring to safety those who can be saved.
 
Last edited:

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Watch exclusive video of Kedarnath after 10 days of flood fury
762,093 views
•Jun 26, 2013


4.8K
390



Aaj Tak

42.8M subscribers
Uttarakhand Flood Video - Watch this exclusive video of Kedarnath.
 

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Worst of the Uttarakhand floods: a compilation of frightening imagery
3,810,295 views
•Jul 30, 2013


9.6K
1.6K



WildFilmsIndia

3.07M subscribers
The worst of the Uttarakhand floods: a compilation of frightening imagery from our favourite mountains... What we did to the river before what the river did to us...
 
Top