Just come back from spiti circuit.
Weather was good.
Water crossing at chota dhara was considerable as we reach around 13:30 Hrs.
There is two big water crossing including chota dgara between batal to chatru.
two water crosssng still there while on chandrataal road.
medium to small 5-6 water crossing after chatru to till grmphu.
Kaza to manali , take chicham bridge as it is good till kiyoto.
Tabo to kaza road was offroad . Nako to tabo road is good.
Only few bad strectch after spillow to pooh most of road is now metalled.
Keep target to reach spillow before 11 am as blasting Hrs starts after 11:30.

Rest detailed log will be updated soon.
 

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Himachal
Snowfall in Rohtang Pass, Baralacha La
Posted at: Sep 22, 2019, 7:04 AM; last updated: Sep 22, 2019, 11:43 AM (IST)

Bus service suspended on Manali-Leh highway, police rescue post removed | Rain lashes Queen of Hills


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The Manali-Leh highway crosses through the Rohtang Pass and Baralacha La in Lahaul-Spiti.

Tribune News Service

Mandi, September 21

With the Rohtang Pass and Baralacha La receiving mild snowfall on Friday, ride is going to be riskier on the Manali-Leh highway in the coming days.
The Manali-Leh highway crosses through the Rohtang Pass and Baralacha La in Lahaul-Spiti.
With the temperature plummeting, the road has become slippery due to frost. The Himachal Road Transport Corporation (HRTC) has stopped its bus service on the Manali-Leh highway and the district police have also removed their check post from Sarchu.
The Lahaul-Spiti police set up a rescue post at Sarchu every year to keep a tab on the movement of vehicles from Himachal to Leh or those entering from the Leh side.

Sarchu is a disputed land as the state government has claimed encroachment by Jammu and Kashmir on it. The matter is being looked into by the Central Government. In the absence of a police post, travellers won’t have an easy access and will get no help in times of need.
However, Keylong SDM Amar Singh Negi said: “After September 15, the police post is removed from the area. Travellers should be cautious while commuting on the route.”
Regional Manager of the HRTC depot at Keylong Mangal Chand Manepa said the bus service had been stopped on the Manali-Leh highway in view of public safety. Last year on September 21 and 22, sudden snowfall had left over 4,000 tourists stranded in Lahaul-Spiti.
The police also removed their check post from the Chandertal lake, which is also prone to heavy snowfall.


https://www.tribuneindia.com/news/himachal/snowfall-in-rohtang-pass-baralacha-la/836140.html
 

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सेब के दाम पर आग बबूला हुए सैकड़ों बागवानों ने सड़क पर किया हल्ला, जाम में फंसे कई मरीज


सेब के दाम पर आग बबूला हुए सैकड़ों बागवानों ने सड़क पर किया हल्ला, जाम में फंसे कई मरीज

9/23/2019 3:16:03 PM





ठियोग (सुरेश): ऊपरी शिमला के पर्यटन स्थल नारकण्डा में बागवानों ने आज चक्का जाम कर दिया। ठियोग के विधायक राकेश सिंघा के साथ मिलकर बागवानों ने सेब सीजन के दौरान आनी वाली समस्याओं को लेकर रोष जाहिर किया। इस दौरान बागवानों ने नारकण्डा बाजार में रैली निकाली ओर सरकार और एपीएमसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बागवानों ने नारेबाजी के दौरान सड़क को जाम कर दिया और बागवान सड़क पर बैठ गए। इस दौरान सड़क के दोनों ओर लंबा जाम लग गया और लोग काफी देर तक जाम में फंसे रहे।
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हालांकि इस दौरान कई मरीज भी जाम में फंस गए। लेकिन बागवानों ने मरीजों को रास्ता दे दिया। इस रोष प्रदर्शन में नारकण्डा, ठियोग, कुमारसैन ओर कोटखाई के बागवान शामिल हुए। यही नहीं नारकण्डा के आसपास की पंचायतों की महिलाओं ने भी इस दौरान सड़क पर अपना रोष जाहिर किया। लोगों ने प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए लगातार नारेबाजी की। बागवानों का कहना है कि सेब प्रदेश के बागवानों की आर्थीकी का मुख्य साधन है। लेकिन सरकार इसकी ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रही है।
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सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही और बागवान लूट रहे है। आढ़ती अपनी मनमानी से सेब बेच रहे है। कोई सेब के आकार के हिसाब से बेच रहा है कोई गढ़ में बेच रहा और समय पर बागवानों को पैसे नहीं मिल रहे है। जिसके चलते बागवान परेशान है। वहीं ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सरकारी तंत्र सेब को लेकर बिलकुल सुस्त है। खुद सरकार के मंत्री ने माना है कि मंडी के नियमों को लागू नहीं किया जा रहा है और कानून की उलंघना कर बागवानों से मनमानी कटौती की जा रही है। बागवानों को लूटा जा रहा है।
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नारकण्डा में सबसे ज्यादा मार्किट की फीस आढ़ती देते है लेकिन सरकार ने आज तक यंहा मंडी खोलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि सेब के दाम गिर रहे है। आढ़ती सेब को स्टोर कर रहे है और बागवानों को स्टोर करने के लिए कोल्ड स्टोर में जगह नहीं है। जिसके चलते कम दाम बागवानों को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों का गुस्सा सड़कों पर आ गया है जिस पर सरकार ध्यान दे और बागवानों की समस्याओं को दूर करें।
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सेब के दाम पर आग बबूला हुए सैकड़ों बागवानों ने सड़क पर किया हल्ला, जाम में फंसे कई मरीज(Video)
 

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Apple Farmers : Road Jam for 35 Minutes at Narkanda


नारकंडा में किसान संघर्ष समिति ने किया 35 मिनट चक्का जाम
Updated Mon, 23 Sep 2019 09:54 PM IST

प्रदेश सरकार और एपीएमसी के खिलाफ नारेबाजी करते किसान संघर्ष समिति और क्षेत्र के बागवान

प्रदेश सरकार और एपीएमसी के खिलाफ नारेबाजी करते किसान संघर्ष समिति और क्षेत्र के बागवान - फोटो : RAMPUR-HP


कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। बागवानों की समस्याओं को लेकर नारकंडा में सोमवार किसान संघर्ष समिति और नारकंडा क्षेत्र के सेब उत्पादकों ने जमकर हल्ला बोला। गुस्साए बागवानों और किसानों ने प्रदेश सरकार-एपीएमसी के खिलाफ लगभग 35 मिनट तक एनएच-54 पर सांकेतिक चक्का जाम किया। इस धरना प्रदर्शन में ठियोग कुमारसैन विधानसभा क्षेत्र के विधायक राकेश सिंघा विशेष रूप से मौजूद रहे।

बागवानों का आरोप है कि नारकंडा में सबसे ज्यादा मंडी फीस जमा की जाती है, लेकिन बागवानों को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। हिमाचल में फल मंडियों में सोलन और ढली के बाद नारकंडा में सबसे ज्यादा मंडी फीस जमा करने के बावजूद प्रदेश सरकार किसान-बागवानों को सुविधाएं देने में नाकाम साबित हुई है। 2018 में नारकंडा से सबसे ज्यादा मार्केटिंग फीस जमा हुई है। नारकंडा और इसके आसपास सेब की दूसरी मंडियों में भी बागवानों को उनके उत्पाद का पैसा समय पर नहीं दिया जा रहा है। बहुत से आढ़ती किसानों और बागवानों का पैसा हड़प कर फरार हो चुके हैं। किसानों ने इसके विरुद्ध केस तक दर्ज करवाए हैं।
प्रदर्शन कर रहे बागवानों और किसानों के अनुसार नारकंडा के भीतर कुछ आढ़ती गैरकानूनी तरीके से कारोबार कर रहे हैं जिस पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं कर रही है। प्रति पेटी अनलोडिंग के नाम पर 20.50 रुपये कम किए जा रहे हैं जबकि अधिनियम के मुताबिक ये 5 रुपये से अधिक नहीं वसूल जा सकता। नारकंडा और शिलारू के मध्य कुछ मंडियों की शिकायत ग्रामीणों द्वारा किए जाने के बाद उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह यहां गंदगी के कारण पानी के स्रोत खराब हो रहे हैं।
किसान संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में इस आंदोलन को तेज किया जाएगा। जिसके लिए बागवानों और किसानों से मिलकर रणनीति तैयार की जा रही है। इस मौके पर कुलदीप तंवर, रीना ठाकुर, देवकी नंद, ओमप्रकाश भारती, दयाल सिंह, जगदीश, प्रेम चौहान, दिनेश मेहता, सत्यवान पुंडीर, सुमित्रा, शीला, अंजू भारती, इंद्रा, सविता, आशा, हेमराज, सुरेश, सहित कई बागवान मौजूद रहे।
नारकंडा में किसान संघर्ष समिति और आसपास क्षेत्र के बागवानों की ओर से लगभग 35 मिनट तक एनएच-54 पर चक्का जाम किया गया। जिसके कारण शिमला और रामपुर-किन्नौर की ओर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 12:35 से 1: 05 बजे तक किसान संघर्ष समिति और बागवानों ने पूरी तरह से चक्का जाम किया। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंच कर यातायात को बहाल करवाया।


नारकंडा में किसान संघर्ष समिति ने किया 35 मिनट चक्का जाम
 

Ummed Singh

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Very sad to hear about the YOGESH bhai death may god give peace to the soul you will be missed forever brother you have inspired so many of us to explore the tribal Himalayan vellies.
 
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