2020 Manali-Leh Road Status

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Cloudburst | Gadsa Valley | District Kullu | Himachal
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•Aug 27, 2020


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Himachal Abhi Abhi

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Kullu / Mandi (Himachal Pradesh) : Cloudburst has occurred on a hill near Nihargadu shrine in Gadsa valley of district Kullu in Himachal Pradesh, causing heavy damage. Debris and water came down from the hill, which has completely destroyed the holy site. At the same time, due to heavy rains, huge water came from the hill near Aut Tunnel, due to which traffic was disrupted. There have been queues of vehicles on both sides due to traffic disruptions.
 
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बैरियर न खोलने पर बिफरी कांग्रेस, प्रदेश सरकार के खिलाफ बोला हमला
दून विस क्षेत्र के पूर्व विधायक राम कुमार चौधरी ने साधा निशाना, कार्यकर्ताओं ने लगाए नारे


Anil Bhardwaj
BY ANIL BHARDWAJ

September 15, 2020

in Himachal, News, slidermain, Solan

बैरियर न खोलने पर बिफरी कांग्रेस, प्रदेश सरकार के खिलाफ बोला हमला

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पवन कुमार। बद्दी
हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर स्थित बैरियरों को खोलने की मांग को लेकर मंगलवार को दून विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राम कुमार चौधरी ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला।
इस मौके पर उन्होंने हाथ में तख्तियां लेकर प्रदेश सरकार तथा स्थानीय विधायक के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं व लोगों को संबोधित करते हुए राम कुमार चौधरी ने कहा कि दूसरे राज्य के साथ किसानों की जमीनें सटी होने के कारण लोगों को अपना काम करना मुश्किल हो गया है। यदि किसान अपनी भूमि में कार्य करने के बाद अपने घर लौटते हैं तो नाके पर उनसे पास मांगे जाते हैं तथा आईकार्ड के आधार पर उन्हें अपने ही प्रदेश में प्रवेश नहीं दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि उनके धरने प्रदर्शन की खबर फैलते ही स्थानीय विधायक ने मुख्यमंत्री के साथ पुरानी फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी कि बैरियर को खोलने को लेकर उनसे बातचीत हुई है तथा एक-दो दिन में बैरियर खोलने की बात कही है। इस पर उन्होंने आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विधायक को उनकी धरने प्रदर्शन की सूचना मिलने से पहले लोगों की समस्या से छुटकारा दिलाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कालका के लोगों को ट्रक लेकर 7 किलोमीटर के स्थान पर 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बैरियर पर प्रवेश खोल देती तो ट्रक ऑपरेटरों को अतिरिक्त सफर तय नहीं करना पड़ता।


उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सीमा पर पंजाब तथा हरियाणा राज्य के साथ सटे कालूझिंडा, बगगूबाल, बद्दी, बरोटीबाला, दबोटा बैरियर को खोलने की मांग की। उन्होंने बैरियरों को खोलने की मांग को लेकर कहा कि यदि दो या तीन दिन के भीतर प्रदेश सरकार निर्णय नहीं लेती है तो एसडीएम कार्यालय के बाहर कांग्रेस अनशन पर बैठ जाएगी धरना प्रदर्शन करने के बाद राम कुमार चौधरी ने अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया, जिसमें बैरियरों को खोलने की मांग की गई है।


बैरियर न खोलने पर बिफरी कांग्रेस, प्रदेश सरकार के खिलाफ बोला हमला
 

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Unlock 4: Himachal Pradesh Allows Inter-State Travel Without E-passes, Movement of State Buses Still Banned

Himachal Pradesh had relaxed lockdown norms for tourists and allowed a streamlined interstate movement with e-passes in efforts to revive the tourism industry.


Updated: September 15, 2020 9:05 PM IST

By India.com News Desk
Edited by Sharmita Kar



Unlock 4: Himachal Pradesh Allows Inter-State Travel Without E-passes, Movement of State Buses Still Banned



New Delhi: The Himachal Pradesh government on Tuesday allowed inter-state travel without an e-pass after shutting borders for more than five months due to the ongoing coronavirus pandemic. the state cabinet has, however, decided not to resume inter-state transport buses as of now.

Last month, Himachal Pradesh had relaxed lockdown norms for tourists and allowed a streamlined interstate movement with e-passes in efforts to revive the tourism industry, the biggest profit-making sector of the state.

The state government had permitted the entrance of tourists who bring along Covid-19 negative reports/certificates.

Notably, the Himalayan state recorded eight more deaths to the viral infection, pushing the COVID death toll to 89, while the positive count mounted to 10,060 with 143 fresh cases being reported today morning.

Of the new cases, 76 were reported from Mandi, 30 from Kangra, 12 from Sirmaur, eight from Shimla, seven from Kullu, five from Chamba, four from Bilaspur and one from Hamirpur, Special Secretary, Health, Nipun Jindal told PTI.


Meanwhile, the total number of recoveries in Himachal Pradesh has risen to 6,167, the official said, adding that at least 15 patients have migrated.


Currently, Solan has the highest number of active cases in the state at 828, followed by Kangra 636, Mandi 569, Una 358, Sirmaur 311, Shimla 288, Bilaspur 184, Chamba 134, Hamirpur 129, Kullu 110, Kinnaur 42 and Lahaul-Spiti 21, the data stated.



Unlock 4: Himachal Pradesh Allows Inter-State Travel Without E-passes, Movement of State Buses Still Banned
 

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This news article mentions covid report is not required.




Himachal Pradesh ›
Big Decisions Of Himachal Cabinet Meeting Held Today, Himachal's Borders Will Open Soon

हिमाचल में अब बिना पंजीकरण कर सकेंगे प्रवेश, सीमाएं खुलेंगी, जानें कैबिनेट के बड़े फैसले


अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Updated Tue, 15 Sep 2020 10:33 PM IST



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हिमाचल कैबिनेट की बैठक(फाइल) - फोटो : अमर उजाला



कोरोना महामारी के बीच 181 दिन के लंबे अंतराल के बाद बुधवार यानि 16 सितंबर से हिमाचल प्रदेश की सीमाएं देश के हर नागरिक के लिए खुल जाएंगी। प्रदेश में आने के लिए किसी भी व्यक्ति को अब कोविड 19 ई-पास सॉफ्टवेयर में पंजीकरण नहीं करवाना होगा। पर्यटकों को न कोविड की निगेटिव रिपोर्ट लानी होगी और न होटलों में एडवांस बुकिंग करवानी होगी। बाहर से आने वाले क्वारंटीन भी नहीं होंगे। मंगलवार को जयराम कैबिनेट की बैठक में यह बहुप्रतीक्षित फैसला लिया गया।

कैबिनेट बैठक में यह भी फैसला लिया कि बाहर से आने वालों में यदि कोरोना के लक्षण दिखें तो उन्हें बॉर्डर पर ही रोक दिया जाएगा। उनका टेस्ट लेने पर जरूरत पड़ी तो अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। वहीं अभी सरकार ने अंतरराज्यीय बसों के संचालन पर फैसला नहीं लिया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि एक अक्तूबर के बाद बसों का संचालन शुरू हो सकता है। इस पर सितंबर के अंतिम या अक्तूबर के पहले हफ्ते में होने वाली कैबिनेट बैठक में फैसला लेने की संभावना है। अगर संचालन शुरू हुआ तो प्राथमिकता चंडीगढ़ और हरिद्वार के लिए बसें चलाने पर होगी।
यह भी फैसला लिया गया कि अब अस्पतालों में भर्ती कोविड पॉजिटिव मरीज को दस दिन बाद लक्षण न होने की स्थिति में बिना टेस्ट किए घर पर अगले 10 दिन के लिए आईसोलेट किया जाएगा। राज्य आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग बुधवार को आधिकारिक रूप से आदेश भी जारी कर देगा। जयराम मंत्रिमंडल पर केंद्र सरकार के उस निर्देश का दबाव था, जिसमें प्रदेश में प्रवेश को लेकर सभी शर्तें हटाने को कहा था। चूंकि पिछली कैबिनेट में सरकार ने कोविड-ई पास की व्यवस्था को तो खत्म कर दिया, लेकिन प्रदेश में बाहर से कोरोना के प्रभाव को रोकने के लिए पंजीकरण की व्यवस्था जारी रखी थी। केंद्र के लगातार तल्ख तेवरों के बाद आखिरकार प्रदेश सरकार ने राज्य की सीमाएं खोलने का एलान कर दिया।
शहरी आवास योजना में सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला लिया है। जिला शिमला के नेरवा को नगर पंचायत बनाने का फैसला लिया गया है। प्रदेश सरकार हिमाचल के नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ कड़े कदम उठाने जा रही है। अगर कॉलेज प्रबंधन के पास आधारभूत ढांचा नहीं हुआ नर्सिंग कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। आधारभूत ढांचे में प्रयोगशाला, शिक्षण स्टाफ, खेल मैदान, बैठने की क्षमता होना अनिवार्य होगा। इनकी जांच करने के लिए कमेटियां गठित होंगी। 3 महीने के भीतर यह नर्सिंग कॉलेजों के इंस्पेक्शन करेंगी। कैबिनेट की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया है।
100 बेड वाले अस्पतालों में नर्सिंग कोर्स होंगे, शराब बार खोलने को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने ईको टूरिज्म और नर्सिंग पॉलिसी को भी मंजूरी दी। ईको टूरिज्म पॉलिसी के जरिये जहां रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों को वन्य पर्यटन के लिए खोलने का प्रयास किया गया है। वहीं नर्सिंग पॉलिसी में सौ बेड वाले अस्पतालों में नर्सिंग कोर्स शुरू करने को मंजूरी दी।

कैबिनेट ने शराब बार खोलने की मंजूरी दे दी है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए एसओपी भी बनाया गया है, जिसका सख्ती से पालन करना होगा। इनमें मास्क पहनकर ही सर्विस देने से लेकर दो टेबल के बीच उचित दूरी, कटलरी को धोने और साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन के निर्देश दिए हैं।

परवाणू और लंबलू में राजस्व सब तहसील खोलने को मंजूरी
कैबिनेट ने परवाणू और लंबलू में राजस्व सब तहसील खोलने को मंजूरी दे दी है। सूत्रों से मालूम हुआ है कि कैबिनेट ने जिला सोलन के परवाणू और हमीरपुर जिला के लंबलू में सब तहसील खोलने का निर्णय लिया है। इन दोनों दफ्तरों के लिए स्टाफ भी स्वीकृत किया है।


हिमाचल में अब बिना पंजीकरण कर सकेंगे प्रवेश, सीमाएं खुलेंगी, जानें कैबिनेट के बड़े फैसले
 
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Rohtang Tunnel may open on 25 September or later in last week only of September 2020.

A peek inside the Atal Rohtang Tunnel | India Today Insight
The view from inside the world’s longest high-altitude road tunnel built under the Rohtang Pass




Varada Gupta
Delhi
August 24, 2020
UPDATED: August 25, 2020 00:58 IST



Director General of Border Roads (DGBR) Lt Gen Harpal Singh reviews the progress of the Atal Tunnel, Rohtang, on July 24.



After a struggle spanning nearly a decade, an amazing example of tunnel engineering is now ready on the Manali-Leh highway. Important from a strategic and security point of view, the Atal Rohtang Tunnel carved out under the Rohtang Pass is the longest high-altitude road tunnel in the world. Scheduled to be inaugurated by Prime Minister Narendra Modi in late September, the tunnel will ensure uninterrupted, round-the-year traffic between Manali and Leh. Himachal's tribal district Lahaul-Spiti, too, will be connected with other parts of the state even during winters. The tunnel is along one of only two routes into Ladakh and will become key to resupplying the military garrison there. The other route into Ladakh is via the Zojila Pass which connects the Kashmir Valley with Drass.
As you enter the 10-metre wide, horse shoe shaped tunnel, located at 10,000 feet, you are hit by a strong gust of wind sweeping in from the treeless, snow clad mountains. There is no human habitation for miles around. It would normally take around five hours to cross the Rohtang Pass—a route marked by heavy vehicular traffic, tourists stopping for a glimpse of the snow, and military convoys headed north. The tunnel changes all that. It zips you under the pass in just 10 minutes. It shrinks the Manali-Leh road by 46 km.

Atal Rohtang tunnel
Making this 8.8 km-long tunnel was no easy task. This part of the country remains cut-off for about six months in a year because of heavy snow cover. The Atal Rohtang Tunnel will prove very important for smooth movement of goods to and from Lahaul. Four more tunnels across passes on the way to Leh have been proposed. Outlines for one such tunnel, passing through the Baralacha Pass, have been drawn and forwarded to the Centre for approval. The other two tunnels will be built at Lachung La and Tang Langla, which will be connected directly to Leh. Reflecting on the importance of the tunnel, Major General D.V.S. Rana (retd) says, “All weather roads are very important for the military.”

About the tunnel
Named for former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee, the Atal Rohtang tunnel connects Manali in Kullu district and Himachal Pradesh’s Lahaul-Spiti district. It is 8,802-metres long and about 3,000 metres above sea level. The single tube bi-lane tunnel, 5.5 metres high, was bored through solid rock nearly two kilometres under the Rohtang Pass. The makers used a drill and blast technique for excavation, coupled with the New Austrian Tunnelling Method for construction.
Another parallel tunnel of 3.3x2.2 metres, an emergency passage of sorts, has been constructed under the Atal Rohtang tunnel with staircases at every 500 metres connecting it to the main tunnel. Three thousand cars and 1,500 trucks can pass through the Atal Tunnel at 80 km per hour.

About Lho-yul
People of both Buddhist and Hindu religions live in Lahaul. Since it lies to the south of Ladakh, it has been given the name Lho-yul, meaning the southern province in Tibetan. People also consider it as a country of passes. To Lahaul’s east is the Kunjam Pass, while Rohtang lies in the southwest, Baralacha in the north and the Saach Pass in the south, which connect Lahaul to Ladakh, Spiti, Kullu and Chamba.
In the month of June-July, people used to carry their goods on cattle and travel through these passes to the other main parts of the country. The Atal Tunnel ripping through the Rohtang Pass is significant for the people in the area who had, till 1964, not even seen a car in the region and for whom, convenient transportation was a distant dream.

Distance reduced
The need for an 'all-weather' route from Leh to Manali became important after the 1999 Kargil war. A plan to build a 4.15 km tunnel reaching the Nimu-Padam-Darcha green zone was floated. The Geological Survey of India gave the green signal for the tunnel in 2,000 with a warning that the rocks on the south portal were unstable. In 2002, former prime minister Atal Bihari Vajpayee gave orders to build the tunnel. The BRO, along with some private firms, started work on the project, with construction officially beginning on March 4, 2010.
The tunnel’s south portal area is 25 km from Manali, while the north portal is located near the Teling village in Lahaul at an altitude of 3,071 meters.

Big challenges
The tunnel project faced major challenges due to excessive snowfall. When the work picked up pace near the south portal, water from the Seri drain and the mountain silt seemed relentless, severely complicating work. Then technical arrangements were made to control silting by creating a separate route for the drainage water. About Rs 4,000 crore have been spent to build the tunnel which has extensive air management and also fire-fighting equipment fitted every 50 metres.



A peek inside the Atal Rohtang Tunnel
 

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लद्दाख में जारी गतिरोध के बीच ठंड की एंट्री, तापमान माइनस 4 डिग्री तक गिरा

लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) के डेपसांग और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्रों में, न्यूनतम तापमान पहले से ही माइनस 14 डिग्री के आसपास पहुंच गया है, और हर गुजरते दिन के साथ तेजी से तापमान में गिरावट आएगी.


लद्दाख के बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ने लगी है ठंड (फोटो-इंडिया टुडे)


लद्दाख के बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ने लगी है ठंड (फोटो-इंडिया टुडे)

शिव अरूर

शिव अरूर
  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2020,
  • (अपडेटेड 18 सितंबर 2020, 9:24 PM IST)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 29 अगस्त से पैंगोंग सेक्टर में तनाव की स्थिति
  • जमने लगा है पैंगोंग झील का किनारा
  • अक्टूबर मध्य तक झील की सतह जम जाएगी

पिछले महीने तक विशेषज्ञों और दिग्गजों की ओर से लगातार दावा किया जाता रहा कि अगली सर्दियों में लद्दाख में जारी भारत-चीन सैन्य गतिरोध का जवाब किस तरह से दिया जा सकता है. आपने पहले ऐसी कई तस्वीरें भी देखी होंगी जिसमें भारत और चीन के सैनिक सर्दियों के मौसम में बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्र में किस तरह गरम कपड़ों में ढके होते हैं. दोनों तरफ से इस बार भी जबर्दस्त ठंड से बचने को लेकर खासी तैयारी की जा रही है.
खैर, अब और इंतजार नहीं करना है. वह खतरनाक सर्दी आ गई है.
पैंगोंग सेक्टर में, जहां 29 अगस्त से स्थिति विशेष रूप से तनावपूर्ण है, इस हफ्ते पैंगोंग झील के किनारे जमने लगे हैं. फिंगर 4 में जहां भारतीय और चीनी सैनिक हैं वहां का तापमान गिरकर शून्य से 4 डिग्री नीचे चला गया है. अक्टूबर के मध्य तक, झील की सतह पूरी तरह से जम जाएगी.

सब-सेक्टर नॉर्थ में -14 डिग्री तापमान
लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) के डेपसांग और दौलत बेग ओल्डी क्षेत्रों में, न्यूनतम तापमान पहले से ही माइनस 14 डिग्री के आसपास पहुंच गया है, और हर गुजरते दिन के साथ तेजी से तापमान में गिरावट आएगी.
29 अगस्त से 8 सितंबर के बीच दोनों पक्षों के सैनिकों की ओर से चेतावनी के रूप में 4 बार हवा में गोलीबारी की जा चुकी है. मौसम में तेजी से बदलाव आने लगा है. पिछले चार दिनों में, भारत की ओर से फिंगर्स एरिया में उच्च ऊंचाई वाले स्थानों से स्ट्रेचर के जरिए पीएलए सैनिकों को इलाज के लिए ले जाते हुए देखा गया है. इस दौरान तेज हवा और अत्यधिक ठंड की स्थिति और खराब होती जा रही है.

हर गुजरते दिन के साथ यहां पर स्थितियां और खराब होती जाएंगी. वहां से हटाए गए सैनिकों की जगह नियमित रूप में नए सैनिकों को उनकी जगह लाया जा रहा है और यह सब कुछ भारतीय पोजिशन से महज एक किलोमीटर से कम की दूरी है.
सैन्य सूत्रों का कहना है कि फिंगर 4 क्षेत्र से निकाले गए चीनी सैनिकों को अंतरिम उपचार के लिए फिंगर 6 के पास एक फील्ड अस्पताल में ले जाया जा रहा है. दोनों पक्षों में सैनिकों की संख्या बढ़ने से डेपसांग क्षेत्र के दोनों तरफ फील्ड अस्पताल खुल गए हैं, जहां पैंगोंग क्षेत्र को लेकर तनाव बना हुआ है.

अब बदल गया माहौल
भारतीय और चीनी फॉरवर्ड पोस्ट एक-दूसरे की सेना पर मौसम के प्रभाव पर लगातार नजर रख रहे हैं. जबकि एक साल पहले तक स्थिति यह थी कि दोनों ओर के सैनिक एक-दूसरे की मेडिकल स्तर पर मदद किया करते थे. लेकिन अब बदले हालात में अविश्वास और शत्रुता के माहौल में ऐसा सोचना असंभव सा है.
निश्चित रूप से, ऐसा नहीं है कि भारतीय सैनिक उच्च ऊंचाई की स्थिति के लिए असुरक्षित नहीं हैं. हालांकि चीनी पोस्टों की तरह, भारतीय पोस्टों में भी विशेष चिकित्सा उपकरणों और स्ट्रेचर के साथ मेडिकल की सुविधा उपलब्ध हैं, जिसमें सैनिकों को भीषण ठंड से होने वाले शीतदंश (frostbite), चिलब्लेन्स (chilblains) और हाई अल्टीट्यूड पुलमोनरी ओडेमा (HAPO) जैसे खतरनाक स्थितियों के शिकार लोगों के इलाज की व्यवस्था की गई है.
हालांकि भारतीय सेना के सैनिकों को पैंगोंग झील की तुलना में कहीं अधिक ऊंचाई पर रहने का लंबा और गहरा अनुभव है. भारतीय सेना बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों सियाचिन ग्लेशियर और साल्टोरो रिज में साल भर तैनात रहती है.

पैंगोंग हाइट्स में जहां 16,000 फीट की ऊंचाई पर सैनिक तैनात किए जाते हैं तो सियाचिन में पद करीब 22,000 फीट की ऊंचाई पर सैनिकों की तैनाती होती है. माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 29,000 फीट है. दशकों से बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों की तैनाती की वजह से भारतीय सेना को ऐसी परिस्थितियों का सामना करने का खासा अनुभव है.


लद्दाख में जारी गतिरोध के बीच ठंड की एंट्री, तापमान माइनस 4 डिग्री तक गिरा
 

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World’s longest highway tunnel ready: Atal Tunnel to reduce Manali to Leh distance by 46 km
India

Kriti Mehta
Kriti Mehta

Updated Sep 16, 2020 | 16:22 IST



Built under the Rohtang Pass on the Leh-Manali Highway, the Atal Tunnel will provide all-weather connectivity from Himachal Pradesh to remote border areas of Ladakh.

Atal Tunnel is the world’s longest highway tunnel above 10,000 feet.

Atal Tunnel is the world’s longest highway tunnel above 10,000 feet. | Photo Credit: ANI
KEY HIGHLIGHTS
  • It is the world’s longest highway tunnel above 10,000 feet.
  • The 8.8 km-long tunnel is built at a cost of Rs 3200 crore.
  • It will reduce the distance between Manali and Leh by 46 kilometres and save four hours of travel time.
Manali: The construction of the Manali-Leh tunnel, called the Atal Tunnel, has been completed in 10 years, four years more than the original estimated time of six years. Prime Minister Narendra is likely to inaugurate the tunnel in the coming days.
"The induction and de-induction of resources was a difficult task while it was under construction. We did face a lot of challenges but together we were able to complete its construction,” chief engineer KP Purushothaman said.
Constructed by the Border Roads Organisation (BRO), India's strategic infrastructure development agency, the foundation stone for the access road to Douth Portal of the tunnel was laid on May 26, 2002. The decision to build the ambitious tunnel was taken on June 3, 2000, when Atal Bihari Vajpayee was the prime minister of India.

Below are some features of the Atal Tunnel:
  1. Built under the Rohtang Pass on the Leh-Manali Highway, the Atal Tunnel will provide all-weather connectivity from Himachal Pradesh to remote border areas of Ladakh.
  2. It is the world’s longest highway tunnel above 10,000 feet.

  3. It will reduce the distance between Manali and Leh by 46 kilometres and save four hours of travel time.
  4. The 8.8 km-long tunnel is built at a cost of Rs 3,200 crore.

  5. There are around 300 CCTV cameras at every 60 metres inside the tunnel.
  6. The tunnel has emergency exit tunnels at every 500 metres.
  7. Fire hydrants have also been installed inside the tunnel in case of any fire incident.
  8. The tunnel is 10.5 metres wide, including 1-metre wide footpaths on both sides.


Colonel Parikshit Mehra, Director, Atal Tunnel project said that many experts working within the team were of the opinion to change the alignment of the tunnel.

"We have had this dream to connect Leh and this was the first step to the connectivity ladder. This tunnel was a challenging project because we were working only from two ends. The other end was in North, across the Rohtang Pass which was accessible only for around five months in a year," he added.


World’s longest highway tunnel ready: Atal Tunnel to reduce Manali to Leh distance by 46 km
 

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Atal Tunnel in Himalayas set to open, an alternative, all-weather route to Ladakh from HP
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•Sep 16, 2020


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#AtalTunnel #BorderRoadsOrganisation
Built under the Rohtang Pass in the eastern Pir Panjal range of the Himalayas on the Leh-Manali Highway, the Atal Tunnel will end up saving four hours of travel time. Named after the former Indian Prime Minister Atal Bihari Vajpayee, it was previously known as Rohtang Tunnel and is being built by the Border Roads Organisation (BRO).
 
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