Badrinath, Uttarakhand, India

Really? In nov'17 when I visited they didn't ask for anything ...I drove till Badrinath itself

Nitish Kumar @Nkumar_
It is better to have registration during Summer Vacations.
They try to keep record.
As public is more in numbers these days.
They may not ask for it but they can ask for the registration for token line, Parking etc.
If case of some mishappening, they can ask for it or it will help them identifying the persons.
It will help them to count the number of people visiting 4 Dham and arrange facilities accordingly.
Govt and Administration are on alert these days.

At Kedarnath Ji they (Police) asked for registration to move ahead from Son Prayag and at exit they scanned the registration card.

At Badrinath Ji, there was no token on first day, so not shown anything.
For parking also they are strict and can ask you for registration. They are not allowing any vehicle at side of road lying idle. Parking is not allowed at any point on Roads of Kedarnath Ji or Badrinath Ji. Place is limited. They have to arrange it accordingly.

After summer vacations, they are more in relax mood and there is not much rush to handle.
A friend who went to Badrinath ji
and returned few days ago:

A couple of days ago I was at Badrinath ji.
There was shortage of diesel and petrol in that area that time.
Fuels were given with max cap.

This resulted in people queuing up at petrol pumps resulting in massive jams. For some a journey of 2 hours became an overnight journey.

Hotels were packed up totally.

2 vehicles also slipped off the hills in this all mess.

Thank god that panic situation didn't arise.....

Be careful to have enough fuel and eatables in your car and to check the route before planning.

Even if you queue up at 3am in Morning, you can't be sure to have darshans before 8-9 am.

Start going in September and continue in October..
No crowd at all.....
Last edited:

sat kmr

Active Member
Today I have darshan of Badrinath ji. Took me around 2 hours. Yesterday there were jams at various places. Started at 6 AM from Rishikesh and reached at Badrinath after 11 pm. Now diesel is available at places. Yesterday I saw few tankers of diesel going towards the problematic area.

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It means weekdays have less rush than weekends.
Specially Long weekends are worst with jam.
Earlier their capacity was not more than their regular consumption or expected consumption.
May be they have done more frequent service of fuel and cash etc.
I hope this year onwards there will be good and more traffic with better roads to Char Dham.
The administration has to work more on the facilities extension too.
2013 is past now.
Hope for the best.
Char Dham kapat closing dates
2019 :

Shri Badrinath ji 17 November

Shri Kedarnath ji on October 29 at 8.30 am Bhaiyyuduj festival.

Sri Gangotri 28 October Annakoot festival.

Shri Yamunotri 29th October Bhaiyuduj festival.

Shri Madmaheshwar ji on 21 November at 11 am

Shri Tungnath ji on November 6 at 11.30 am

Shri Rudranath ji on 18th October

Shri Hemkund Sahib 10 October morning

चार धाम कपाट बंद होने की तिथियां 2019 :

श्री बदरीनाथ जी 17 नवंबर शायं 5 बजकर 13 मिनट
श्री केदारनाथ जी 29 अक्टूबर प्रात: 8.30 बजे भैयादूज पर्व।
श्री गंगोत्री 28 अक्टूबर अन्नकूट पर्व।
श्री यमुनोत्री 29 अक्टूबर भैयादूज पर्व।
श्री मद्महेश्वर जी 21 नवंबर प्रात:11 बजे
श्री तुंगनाथ जी 6 नवंबर प्रात: 11.30 बजे
श्री रूद्रनाथ जी 18 अक्टूबर प्रात:

श्री हेमकुंड साहिब 10 अक्टूबर प्रातः

( प्रेषक मीडिया प्रभारी बी.के.टी.सी)
उत्तराखंडः केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी, इलाके में बढ़ी ठंड

उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ में अक्टूबर के महीने में जबरदस्त बर्फबारी शुरू होने से पूरे इलाके में ठंड बढ़ गई है. केदारनाथ और बद्रीनाथ में पहाड़ बर्फबारी से सफेद हो गए हैं.

फाइल फोटो

फाइल फोटो
देहरादून, 21 अक्टूबर 2019, अपडेटेड 06:41 IST

उत्तराखंड में अक्टूबर में ही बर्फबारी ने दस्तक दे दी है. केदारनाथ और बद्रीनाथ में जबरदस्त बर्फबारी देखने को मिली है. अक्टूबर के महीने में जबरदस्त बर्फबारी शुरू होने से पूरे इलाके में ठंड बढ़ गई है. इस ताजा बर्फबारी से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. केदारनाथ और बद्रीनाथ में पहाड़ बर्फबारी से सफेद हो गए हैं.
इस साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला था. इस साल मई महीने में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण और अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे. बद्रीनाथ को भगवान विष्णु का धाम माना जाता है, जबकि केदारनाथ को भगवान शिव का धाम माना जाता है.
बताया जा रहा है कि इस महीने के आखिरी तक केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट बंद हो जाएंगे. ठंड बढ़ने के चलते कपाट को बंद किया जाता है. हर साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के धाम के कपाट अक्टूबर-नवंबर में बंद किए जाते हैं और 6 महीने तक बंद रहते हैं. इसके बाद अप्रैल-मई में इन धामों के कपाट फिर खोल दिए जाते हैं. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में काफी संख्या में श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं.

उत्तराखंडः केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी, इलाके में बढ़ी ठंड
Stick Tour Of Juna Arena Left From Badrinath

बद्रीनाथ से रवाना हुई जूना अखाड़े की छड़ी यात्रा

Updated Thu, 24 Oct 2019 12:19 AM IST

जूूना अखाड़े की छड़ी यात्रा बदरीनाथ धाम से रवाना हो गई है। छड़ी यात्रा कर्णप्रयाग के रास्ते कुमाऊं मंडल में प्रवेश करेगी। इस क्षेत्र में यह यात्रा अनेक मंदिरों का भ्रमण करते हुए दस दिन तक रहेगी। बाद में हरिद्वार वापस लौट आएगी।

बदरीनाथ धाम में दो दिन तक पूजा अर्चना के बाद बुधवार को सवेरे यह यात्रा बागेश्वर के लिए रवाना हुई। याद रहे कि 1100 वर्ष पूर्व इस यात्रा का शुभारंभ बागेश्वर से होता था। तब यह यात्रा चार धामों का सफर पैदल पूरा करती थी। यात्रा पूरा होने में तीन महीनों का समय लगा करता था। करीब डेढ़ सौ वर्ष यह यात्रा अज्ञात कारणों से बंद कर दी गई। इस वर्ष पुन: पहली यात्रा बागेश्वर से हरिद्वार होते हुए प्रारंभ की गई है। नागा संन्यासियों का सबसे बड़ा जूना अखाड़ा ऐसी ही यात्रा प्रतिवर्ष श्रीनगर से अमरनाथ के लिए लेकर चलता है। वह यात्रा पैदल होती है। चार धाम की छड़ी यात्रा इस बार वाहनों से रवाना हुई। जूना अखाड़े के संरक्षण श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि यह यात्रा बदरीनाथ से कर्णप्रयाग, बागेश्वर, जागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पूर्णागिरी आदि होते हुए एक बार फिर से बागेश्वर आएगी। बुधवार की रात यह यात्रा कौसानी पहुंच गई है। गुरुवार का विश्राम बागेश्वर में होगा।

बद्रीनाथ से रवाना हुई जूना अखाड़े की छड़ी यात्रा