Delhi Pollution

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Delhi weather / Pollution :

Q: RT Sir, is there a thunderstorm or rains expected in Delhi NCR in coming days, to clear the air ?



A by RT: Air won’t clear so soon. Some light shower expected on Sunday like it rained in Gurgaon and no rain in Delhi, something like that. On Thursday with the WD again some hope but in both cases the systems are not so big to have widespread rainfall. Just some isolated rain or showers. Now it all depends if there is a shower in Noida and leaking tap in Dwarka...,


The Westerly winds also bring the stubble burning smoke from Pak. And they will burn more this year to screw us and choke us to try to kill us.....
 

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Air Pollution Level On Dangerous After AQI Reach 482 In Baghpat District Of Uttar Pradesh
खतरनाक स्तर पर पहुंचा एक्यूआई, खराब हवा से बढ़ने लगी बीमारियां, सांस लेने में दिक्कत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Updated Sun, 03 Nov 2019 12:16 AM IST

शहर में फैली धुंध

शहर में फैली धुंध - फोटो : अमर उजाला


बागपत जिले में एक्यूआई 482 पर पहुंच गया है। हवा की गुणवत्ता खराब होने से आंख और सांस की बीमारियां बढ़ने लगी हैं। लोग आंखों में जलन की शिकायत लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञों के यहां पहुंच रहे हैं। सांस के रोगियों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन प्रदूषण से राहत नहीं मिली।

शनिवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 482 रहा। हवा की गुणवत्ता खराब होने से लोगों की परेशानियां बढ़ रही है। निजी चिकित्सकों के अलावा सरकारी अस्पतालों में नेत्र रोगियों की संख्या बढ़ गई है। अस्थमा से पीड़ित लोग बेहद परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सुबह और शाम की हवा घर से बाहर निकलने लायक नहीं है। स्मॉग के कारण लोगों को बीमारियां घेर सकती हैं।

डॉक्टरों का यह भी कहना है कि चश्मा और मास्क ही खराब हवा से बचा सकता है। ऐसे में जब भी घर से निकले तो मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन प्रदूषण से राहत नहीं मिली।

यह भी पढ़ें: नाक, कान और गला खराब होने की वजह बना प्रदूषण, रिपोर्ट में हुआ खुलासा, अब रहें सावधान
हर रोज 18 सिगरेट पीने जितना प्रदूषण गटक रहे लोग
दिल्ली के मौसम विज्ञान केंद्र के स्कॉलर अग्रिम तोमर कहते हैं कि हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है। दिवाली के बाद से प्रदूषण का स्तर बेहद खराब हो गया है। लोगों को सांस लेना तो दूभर हो ही गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पिछले पांच साल की रिपोर्ट की मानें तो यह क्षेत्र सबसे प्रदूषित 10 क्षेत्र में शामिल है। स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से या निर्माण कार्य बंद करने से गवर्नमेंट, जनता को प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव से कुछ हद तक तो बचा पाई हैं परंतु अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई। वातावरण प्रदूषण के कई रूप हैं, जिसमें से वायु प्रदूषण सबसे जटिल और गंभीर है।

वायु प्रदूषण सर्दियों में ज्यादा दिखाई देता हैं क्योंकि ठंड होने के कारण वायु स्थिर हो जाती है और सतह के पास बैठ जाती है। पटाखों, भट्टों और पराली को जलाने इत्यादि के कारण उत्पन्न हुआ हैं। जिले में प्रदूषण भट्टों और पटाखों से निकलने वाले धुएं एवं हरियाणा और पंजाब में जलने वाली पराली से होता है। इससे सांस लेने में समस्या होती है, खांसी रहती है, शरीर का रक्तचाप बढ़ जाता है और पक्षाघात का खतरा भी बढ़ जाता है। अग्रिम का कहना है कि शहर में इतना वायु प्रदूषण है जैसे कोई व्यक्ति रोजाना 18 सिगरेट पी रहा है।


खतरनाक स्तर पर पहुंचा एक्यूआई, खराब हवा से बढ़ने लगी बीमारियां, सांस लेने में दिक्कत
 

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Shashi Tharoor Take On Delhi Ncr Pollution Winning Internet

प्रदूषण पर शशि थरूर की चुटकी, 'कब तक काटोगे जिंदगी सिगरेट-सिगार में..कुछ दिन गुजारो Delhi-NCR में'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली, Updated Sat, 02 Nov 2019 12:08 PM IST


शशि थरूर ने प्रदूषण पर किया ट्वीट

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शशि थरूर ने प्रदूषण पर किया ट्वीट - फोटो : ट्विटर

राजधानी में प्रदूषण की स्थिति बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी, गैर सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पांच नवंबर तक अवकाश घोषित कर दिया है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर जो अपने मजेदार ट्वीट्स के लिए जाने जाते हैं उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर एक जबरदस्त तंज भरा ट्वीट किया है। जिसे उनके फॉलोअर हाथोंहाथ ले रहे हैं। अगली स्लाइड में पढ़िए थरूर ने क्या ट्वीट किया है और सोशल मीडिया उस पर कैसा रिएक्शन दे रहा है...


शशि थरूर की ट्वीट की हुई फोटो

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शशि थरूर की ट्वीट की हुई फोटो- फोटो : ट्विटर

शशि थरूर ने एक फोटो ट्वीट की है जिस पर सिगरेट का पैकेट बना है और उसमें सिगरेट के साथ ही कुतुब मीनार निकलता भी देखा जा सकता है। इसी तस्वीर पर ऊपर की ओर लिखा है कब तक जिंदगी काटोगे सिगरेट, बीड़ी और सिगार में.. कुछ दिन तो गुजारो Delhi-NCR में..- दिल्ली टूरिज्म। उसी तस्वीर में नीचे लिखा है डेल्ही इज इंजरियस टू हेल्थ यानी दिल्ली स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।



न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली, Updated Sat, 02 Nov 2019 12:08 PM IST

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- फोटो : पीटीआई

शशि थरूर के ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा, आज बहुत दिनों बाद उससे बात हुई, उसने पूछा: "कैसे हो?" मैंने कहा: "आंखों में चुभन, दिल में जलन, सांसें भी हैं कुछ थमी-थमी सी, है हर तरफ धुआं-धुआं" उसने कहा: "अभी तक मेरे इश्क में हो?" मैंने कहा: "नहीं, DELHI में हूं"

Jitendra [email protected]


आज बहुत दिनों बाद उससे बात हुई,
उसने पूछा: "कैसे हो?"

मैने कहा: "आँखों में चुभन, दिल में जलन, साँसें भी हैं कुछ थमी थमी सी, है सब तरफ धुआँ धुआँ"

उसने कहा: "अभी तक मेरे इश्क में हो ?"
मैने कहा: "नहीं, DELHI में हूँ"



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9:18 AM - Nov 2, 2019
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- फोटो : पीटीआई

एक अन्य यूजर ने लिखा, 'सब राजनीतिक दल मिलकर प्रदूषण को कम करने का प्रयास कीजिए। आज दिल्ली में है कल किसी और जगह पर ये हो सकता है।'




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- फोटो : ani

गौरतलब है कि ईपीसीए से प्रदूषण के खतरनाक स्तर के संबंध में अलर्ट मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी स्कूलों में 2 से 5 नवंबर तक अवकाश की घोषणा की। उन्होंने इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कहा। उल्लेखनीय है कि इन स्कूलों में दिल्ली के सभी सरकारी स्कूल, निजी स्कूल और सहायता प्राप्त स्कूल शामिल होंगे।

वर्तमान में दिल्ली में 13 जिले हैं जिनमें 29 जोन हैं। इन सभी जोन में 1023 सरकारी स्कूल हैं और 2761 निजी स्कूल हैं। सरकारी स्कूलों में करीब 16 लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं, जबकि अन्य स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी लाखों में हैं। फिलहाल इन स्कूलों को 6 नवंबर को खोलने के लिए निर्देश दिए हैं।



 
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Haryana Farmers Said On Burning Parali And Delhi Air Pollution, Government Should Give Facility
हरियाणा के किसान बोले- पराली नहीं जलाने पर होता है सात हजार का खर्चा, सरकरा करे मदद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 02 Nov 2019 07:31 PM IST

फाइल फोटो

फाइल फोटो


दिल्ली एनसीआर में दम घोंटू माहौल खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। प्रदूषण की वजह से दिल्ली में स्वास्थ्य आपातकाल (हेल्थ इमरजेंसी) तक घोषित करनी पड़ी। पराली के धुएं व धूल के महीन कणों से दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली हो गई है। सांस लेना भी दूभर हो गया है। पर्यावरण को नुकसान व आम लोगों को इससे होने वाली परेशानियों को लेकर अमर उजाला ने किसानों से बात की।

अंबाला के रहने वाले किसान परमजीत ने कहा, पराली को न जलाया जाए तो काफी नुकसान होता है। एक किल्ला तैयार करने पर पराली को दबाने में किसान का खर्चा छह से सात हजार रुपये हो जाता है। भले ही हमारी फसल बिक रही है, लेकिन किसान मजबूर है।

किसानों को पता है कि पराली जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। पराली का धुआं जानलेवा है। लेकिन वह मजबूरी में ही ऐसा करते हैं। यदि सरकार रोकथाम चाहती है तो सरकार इसके लिए हमें मशीनरी दे या कोई अन्य सुविधा दे।

अंबाला के ही दूसरे किसान राजकुमार ने कहा, पहले तो हर घर में गृहिणी चूल्हा जलाती थी। तब कोई बीमार नहीं हुआ करता था। उस समय तो सबसे ज्यादा धुआं होता था। पराली को दोष नहीं दिया जा सकता। प्रदूषण के अन्य कारण हैं। किसान मजबूरी में ऐसा काम करते हैं। ऐसा न करने पर 30 लीटर तेल खर्च करने के बाद भी खेत तैयार नहीं होता। हमारा तो ऐसा मन करता है कि फसल ही पैदा न करें।

अंबाला के अनिल ने कहा कि आग न लगाएं तो खेत तैयार करने में 6-7 हजार रुपये प्रति किल्ला खर्च आता है। आग न लगाएं तो खेत कैसे तैयार करें... यह कोई क्यों नहीं समझ रहा। भले ही फसल के पूरे पैसे मिल रहे, लेकिन सरकार किसानों को मशीनें मुहैया कराए।

रोहतक के रहने वाले किसान रुपराम ने कहा, सरकार सहारा नहीं दे रही है। किसान को रेट कम मिल रहे हैं। मजदूरी भी नहीं निकल रही। किसान तो बर्बादी के कगार पर है। ऐसे में वो मजबूरी में पराली जला देता है।

रोहतक के बोहर गांव के पंकज ने कहा, किसानों की मजबूरी है। सरकार उपकरण दे। किसान पराली जलाकर खुश नहीं है। मंडी में भाव कम है और बेचने में समय लग रहा है। इसलिए किसान पराली जला देता है। उसी गांव के सुरील ने कहा, सरकार उचित रेट पर धान ले और पराली खरीदे। फिर किसान पराली नहीं जलाएगा।

जींद के रहने वाले रामपाल ने कहा, भले ही कहीं पराली बिक रही हो लेकिन मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। पराली निकालने के लिए मजदूर तैयार नहीं होते और तैयार होते भी हैं तो छह हजार रुपये से कम में नहीं आते। ऐसे में तो किसान पराली को मजबूरी में जला देता है। यदि ऐसा नहीं करेगा तो खेत तैयार नहीं होगा और गेहूं की बिजाई नहीं हो पाएगी। सरकार हर गांव में एक मशीन उपलब्ध कराए और खरीद की व्यवस्था करे।


फतेहाबाद के इंद्राज ने कहा, किसान के पास साधन नहीं है। पराली दबाने का खर्चा बहुत अधिक आता है। बड़े किसान ही ऐसा कर सकते हैं। अबकी बार कोई बचत नहीं हुई है और भाव भी अच्छे नहीं मिल रहे। फुल्लां गांव के सतबीर ने कहा, खर्चा बहुत आता है। हां पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, लेकिन किसान परेशान और मजबूर है। सरकार छोटे किसानों को विकल्प उपलब्ध कराए।


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हरियाणा के किसान बोले- पराली नहीं जलाने पर होता है सात हजार का खर्चा, सरकरा करे मदद
 
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