First Time CHANDIGARH

Pardeep Dhounchak

जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है
"चंडीगढ़", ये जगह तब फाइनल हुई जब ऑफिस से आधे दिन की भी छुट्टी नहीं मिली .

कुछ विचार विमर्श के बाद रेणुका जी, हिमाचल प्रदेश जाने की तैयारी शुरू हो चुकी थी. लेकिन एक सबसे बड़ा काम बाकी था "छुट्टी" के लिए आवेदन और ऑफिस में बॉस ने बड़ी ही सरलता से छुट्टी देने से मना कर दिया. सारा प्लान धराशाई हो गया. लेकिन अब तो मन बन चुका था तो सोचा आसपास ही एकदिवसीय टूर निकाला जाये तब चंडीगढ़ जाना तय हुआ. 30 दिसंबर 2017 को शनिवार था. ऑफिस से आधे दिन की छुट्टी लेकर अगले दिन यानि कि रविवार को चंडीगढ़ घूमकर शाम तक घर वापसी. पानीपत से चंडीगढ़ की दूरी गूगल बाबा के हिसाब से 161 किलोमीटर है. पानीपत से काफी बस और ट्रेन चंडीगढ़ तक जाती हैं. हमने शाम 5:55 बजे पानीपत से अम्बाला तक की MEMU पैसेंजर ट्रेन पकड़ी. हालाँकि दिल्ली से आने वाली 303 कालका पैसेंजर(6:05 बजे पानीपत) सीधी चंडीगढ़ होते हुए जाती है लेकिन वो काफी पिटती हुई चंडीगढ़ पहुंचती है इसीलिए हमने सोचा कि अम्बाला पहुँच कर खाना वगेरा खा लेंगे ताकि चंडीगढ़ में रात को खाने के लिए न भटकना पड़े और फिर अम्बाला से कालका पैसेंजर में सवार हो लेंगे. अब रात को चंडीगढ़ पहुंचना था तो वहां पर रात को रुकने के लिए भी इंतज़ाम करना था एक मित्र ने बताया कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के आसपास ही रुकने लायक जगह आसानी से मिल जाएगी. लेकिन करनाल तक पहुंचते-पहुंचते ठण्ड से हमारी जाडी बजने लगी. कुरुक्षेत्र तक ट्रेन लगभग खाली हो चुकी थी और हम ठण्ड से कंपकंपा रहे थे. अब दिमाग की घंटी बजने लगी कि अभी ये हाल है तो रात को चंडीगढ़ पहुँच कर क्या होगा. और वो भी तब जब हमें चंडीगढ़ पहुँच कर रात को रुकने के लिए जगह भी ढूंढनी थी. प्लान एकदम से बदल गया. मैंने तुरंत अम्बाला में रहने वाले अपने एक मित्र को फ़ोन लगाया और उससे अम्बाला में रात को रुकने के लिए होटल के बारे में जानकारी ली . उसने एक होटल वाले का नंबर दिया. मैंने उस नंबर पे कॉल किया मित्र का रिफरेन्स दे कर एक कमरा बुक कर लिया. होटल बसस्टैंड के बिल्कुल बगल में था. 400 रुपए में गीजर सहित कमरा तैयार था. लगभग 9 बजे ट्रेन अम्बाला पहुंची. अम्बाला में बसस्टैंड और रेलवे स्टेशन आमने सामने हैं . इसीलिए हम 5 मिनट में ही होटल पहुँच गए. अपना सामान कमरे में रख कर हम बाहर आये और एक ढाबे पर खाना खा कर वापिस होटल पहुँच गए.
पानीपत से ट्रेन में
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अम्बाला रेलवे स्टेशन पर
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अम्बाला में ढाबे में खाने का इंतज़ार
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Pardeep Dhounchak

जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है
हमने सुबह 3:50 बजे अलार्म लगाया और सो गए. सुबह उठकर गरमागरम पानी में नहा कर हम बसस्टैंड के सामने पहुँच गए लगभग 15 मिनट तक कोई बस नहीं मिली. फिर एक स्विफ्ट गाडी आयी और चंडीगढ़-चंडीगढ़ की आवाज सुनाई दी. हम झट से गाड़ी में सवार हो लिए साथ ही एक सरदार जी भी आ गए और गाडी चल पड़ी चंडीगढ़ की ओर.

सड़क पर धुंध बहुत ज्यादा थी. धीरे-धीरे चलते हुए हम लगभग 5 बजे चंडीगढ़ पहुँच गए. गाडी वाले ने हमे सेक्टर 32 के चौक पर उतार दिया. सुबह-सुबह सड़कें बिल्कुल सुनसान पड़ी थी.
सेक्टर 32 चौंक, चंडीगढ़
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हम पहली बार चंडीगढ़ गए थे इसीलिए रास्तों का कुछ अतापता नहीं था. ऐसे समय में गूगल बाबा ने रेस्क्यू किया. सेक्टर 32 से सुखना लेक लगभग 5 किलोमीटर था. हम पैदल ही गूगल बाबा के बताये हुए रस्ते पर चल पड़े. भयानक सर्दी थी. कुछ देर बाद एक बैटरी रिक्शा वाला दिखाई दिया. उसने सुखना लेक तक के 150 रूपये मांगे तो हमने पैदल चलना ही बेहतर समझा. आधे घंटे में हम सुखना लेक पहुँच गए.

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सुखना झील Boating टिकट काउंटर
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सुखना झील पर सूर्योदय (सभी फोटो मोबाइल कैमरे से लिए गए हैं )
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वहां सुखना झील पर इक्का-दुक्का ही लोग सैर कर रहे थे. हम झील के किनारे पर एक चबूतरे पर बैठ गए. बैठे-बैठे ठण्ड भी ज्यादा लग रही थी तो हमने भी टहलना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे झील के किनारे सैर करने वालों में इजाफा होने लगा. सुखना झील से हम पैदल ही रॉक टेम्पल पहुंचे लेकिन वहां जाकर पता चला कि रॉक टेम्पल 9 बजे खुलेगा.

रॉक टेम्पल का बाहरी दृश्य
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रॉक टेम्पल से हम पैदल चलते हुए Rose गार्डन पहुँच गए. सुबह के समय Rose गार्डन के हरे-हरे मैदान में ओस छाई हुई थी. लोग-बाग सैर करने में व्यस्त थे. कुछ स्कूली बच्चों की टोलियां भी घूमने को आयी हुई थी

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और ये Rose गार्डन में लिया गया मेरा पसंदीदा फोटो
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गुलाबों की बहार
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Pardeep Dhounchak

जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है
Rose गार्डन में घूमते हुए हम दूसरी तरफ से बाहर की तरफ निकल गए. Rose गार्डन से बाहर आकर हम एक बस में चढ़ गए. बसकंडक्टर से चंडीगढ़ में घूमने लायक जगहों की जानकारी लेनी चाही तो उसने बोला कि आप लोग 40 रूपये वाला पास बनवा लो फिर किसी भी लाल हरी बस में चढ़ जाना और जहाँ मर्जी घूमना. ये आईडिया हमे भी अच्छा लगा

हम सीधे सेक्टर 17 के बसअड्डे पर पहुंचे. बसअड्डे के सामने ही एक संडे बाजार लगा हुआ था हम भी संडे बाजार में घुस लिए. उस समय तक बाजार सजने की तैयारी हो रही थी. काफी देर तक पैदल घुमते हुए हमे भूख भी ज़ोरों से लग रही थी. घुमते-फिरते हुए हम एक छोटे से पार्क के पास पहुंचे. वहां पर एक व्यक्ति अपनी साइकिल से एक स्टूल और एक बड़ा सा बैग उतार रहा था. हमने उससे पुछा कि भाई साब यहाँ आसपास कुछ खाने को मिलेगा क्या तो उसने बोला कि बस अभी 10 मिनट रुक जाओ आप को गरमा गरम पराठें खिलाता हूँ. हम पार्क के अंदर जाकर एक बेंच पर बैठ गए. 10 मिनट के बाद हम उसके पास गए तो देखा कि वो स्टूल पर स्टोव रख कर परांठे बना रहा था जल्दी ही उसने हमे गरमा गर्म परांठे आचार और दही के साथ परोस दिए. जब तक हमने एक-एक परांठा ख़त्म किया तब तक उसके परांठे खाने के लिए काफी लोग एकत्रित हो चुके थे. ऐसे लाजवाब परांठे और दाम सिर्फ 15 रूपये का एक.
परांठे वाले भाईसाब
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परांठे खाने के बाद हम काफी देर तक बाजार में घूमे-फिरे और फिर सेक्टर 17 बसअड्डे से बस पकड़ कर Elante Mall पहुँच गए. Elante Mall की चकाचौंद में पता ही नहीं चला कि कब 1 घंटा गुजर गया.
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वहां से हम दोबारा रॉक टेम्पल पहुंचे. रॉक टेम्पल के टिकट काउंटर पर लम्बी लाइन लगी हुई थी. समय भी 2:30 का हो चुका था. हम भी थोड़ी देर तो टिकट लेने के लिए लाइन में खड़े हुए लेकिन जब लाइन थोड़ी सी भी आगे नहीं सरकी तो हमने अंदर जाने का इरादा त्याग दिया. क्योंकि हमे वापिस पानीपत भी पहुंचना था और टिकट लेने में ही शाम हो जाती. रॉक टेम्पल से हम फिर से सुखना झील गए. वहां पर भी बहुत भीड़ थी. सुखना झील से सेक्टर 17 के बसअड्डे पर गए और वहां से हरियाणा रोडवेज की बस पकड़ कर हम शाम 7:30 बजे पानीपत पहुँच गए और इस तरह हमारी एकदिवसीय यात्रा का समापन हुआ
चंडीगढ़ घूमने के लिए मुझे दो तरीके सबसे बेहतर लगे
1. सुखना झील के पास से साइकिल किराये पर लो और पूरा शहर घूमो
2. चंडीगढ़ सिटी बस का पास बनवाओ और चंडीगढ़ में कहीं से भी बस में चढ़ लो कहीं भी उतर लो


रॉक टेम्पल के टिकट काउंटर पे भीड़
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सुखना झील
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