Jokes (Only clean jokes here, please!)

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार अगले 2-3 दिन में भारी चक्रवर्ती तुफान आ सकता है इसलिए यथासंभव घर पर ही रहें सुरक्षित रहै
यदि जरूरी हो तो घरवाली को छत पर खड़ा कर दे

क्योंकि तूफान से तूफान ही
लड़ सकता है
आपके बस की बात नहीं


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Suneesh Sharma

Love my Iron Beast
*Hierarchy of courts in ascending order*

1. District Court
2. Sessions Court
3. Appellate Court
3. High Court
4. Supreme Court
5. International Court of Justice
6. God
7. Arnab Goswami
8. Mother in law
9. Wife

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Suneesh Sharma

Love my Iron Beast
Active voice v/s Passive voice
Wife: Sone ki chain kab doge?
Husband: Chain se sone kab dogi?

#wordplay

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explorer
गंभीर मजाक

एक सज्जन सरकारी अस्पताल में अपने टेस्ट करवाने गए-
फुरसत मिलने पर उधर मौजूद कैंन्टीन से बर्गर और जूस खरीदा और मज़े से वहीं खड़े खड़े खाना पीना शुरू कर दिया-

ऐन उसी वक़्त मेरी नज़र कुर्सी पर बैठे एक छोटे बच्चे पर पड़ी जो *बड़ी हसरत से मुझे ही देख रहा था*- मैंने इंसानी हमदर्दी में जल्दी से उस बच्चे के लिए भी बर्गर और जूस खरीदे जो बच्चे ने बिना ना किये ले लिए और जल्दी जल्दी खाने लगा।

बेचारा पता नहीं कब से भूखा होगा- ये सोचकर उन्होनें ऊपर वाले का शुक्र अदा किया जिसने उन्हे एक भूखे को खाना खिलाने का मौका दिया।

इतनी देर में उस बच्चे की मां, जो उसकी पर्ची बनवाने के लिए खिड़की पर खड़ी थी, वापस आई और बच्चे को बर्गर का आखिरी टुकड़ा खाते देखा!!!

फिर अचानक पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो दोनों हाथ उठा कर, जोर जोर से चिल्लाने लगी जिसने उसके बच्चे को ये चीज़ें दी उसे गालियां देने लगी ।

कह तो वो बहुत कुछ रही थी, मगर उन्होंने वहां से फरार होते हुए जो चंद बातें सुनीं वो ये थीं:-

कौन है वो "कमीना" जिसने मेरे बच्चे को बर्गर खिला दिया, मैं 25 किलोमीटर दूर से किराया लगा कर उसके खाली पेट टेस्ट करवाने लाई थी"


be careful while doing charity
 
"लखनऊ में मरीज हैं बहुत ज्यादा और मर्द बहुत कम"
चुनाव के दिनों में काफी मनोरंजन हुआ करता था चौक और नख्खास में। कारपोरेटर के इलेक्शन में नख्खास के नामी हकीम शमशुद्दीन खड़े हुये। चौक से लोगों ने मशहूर तवायफ दिलरुबा जानम को खड़ा कर दिया। लोगों का हुजूम दिलरुबा के साथ आने लगा। कुछ दूसरी तवायफें भी प्रचार में आ गईं। हकीम साहब को अपनी हार का अंदेशा होने लगा। रातों रात मुहल्ले की दीवारों पे नारा लिखवा दिया।
"दिल तो दीजे दिलरुबा को वोट शमशुद्दीन को"
वोटिंग के दिन माहौल बदल गया और हकीम साहब को जीत हासिल हुई।
उधर दिलरुबा जानम बहुत उदास हुई। उसनें भी दीवारों पर ये लिखवाया।
"लखनऊ में मरीज हैं बहुत ज्यादा, मर्द हैं कम"

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