Jokes (Only clean jokes here, please!)

Suneesh Sharma

Love my Iron Beast
बेटी की विदाई के समय पिता ने अपने दामाद से कहा :
'
"बेटा आपका Whatsapp मैसेज मिला था, आपकी

demand तो बड़ी अजीब सी थी, लेकिन हमने पूरी कर दी है।
'
ये लीजिए अपनी पसंद के *लाल रंग के चार कच्छे (Four underwear in red colour).*


दामाद (मन ही मन में बड़बड़ाता हुआ) - साला ऐसी की तैसी इस auto spell-correction की,
.
..
.
"
मैंने तो *Ford Endeavour in Red Color* माँगी थी।

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adsatinder

explorer
Big Joke Series:


निर्वाचन आयोग को सलाह देना चाहता हूँ कि ...
अगर अखबार और टी वी में इतना प्रचार करने के बाद भी मतदान प्रतिशत नहीं बढ़ रहा है तो...
क्यों न एक बार पोलिंग बूथ पर भंडारा लगाकर देख लिया जाए..
एक्सपर्ट की राय के अनुसार भंडारों का खर्चा विज्ञापन के खर्चो से आधा ही रहेगा..

*उँगली दिखाओ खाना खाओ*

शाकाहरियों के लिये पूरी, सब्जी, हलवा और खीर।

मांसाहारियों के लिये चिकन बिरयानी, रायता और आइसक्रीम।

इसका खर्च चुनाव आयोग उठाये।

वोट देने के बाद EVM से ही एक पर्ची निकले और वोट देने वाला वह पर्ची लेकर भंडारे में जाकर अपनी ऊंगली पर लगी स्याही दिखाकर जितना चाहे खा ले।

यह प्रयोग वांछित है।

नोट - *दो चार पैग की भी व्यवस्था हो जाये तो फिर बात ही क्या है*..
 

Suneesh Sharma

Love my Iron Beast
गर्मी की छुट्टी में कही कोई *समर कैंप* नहीं होते थे,
पुरानी चादर से छत के कोने पर ही टेंट बना लेते थे ,
क्या ज़माना था जब ऊंगली से लकीर खींच बंटवारा हो जाता था,
लोटा पानी खेल कर ही घर परिवार की परिभाषा सीख लेते थे।
*मामा , मासी , बुआ, चाचा के बच्चे सब सगे भाई लगते थे, कज़िन क्या बला होती है कुछ पता नही था।*
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

*कंचे, गोटियों, इमली के चियो से खजाने भरे जाते थे,*
कान की गर्मी से वज़ीर , चोर पकड़ लाते थे,
*सांप सीढ़ी गिरना और संभलना सिखलाता था*,
*कैरम घर की रानी की अहमियत बतलाता था,*
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

*पुरानी पोलिश की डिब्बी तराजू बन जाती थी ,*
नीम की निंबोली आम बनकर बिकती थी ,
बिना किसी ज़द्दोज़हद के नाप तोल सीख लेते थे ,
साथ साथ छोटों को भी हिसाब -किताब सिखा देते थे ,
*माचिस की डिब्बी से सोफा सेट बनाया जाता था ,*
पुराने बल्ब में मनीप्लान्ट भी सजाया जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

*कापी के खाली पन्नों से रफ बुक बनाई जाती थी,*
*बची हुई कतरन से गुडिया सजाई जाती थी ,*
*रात में दादी-नानी से भूत की कहानी सुनते थे ,* फिर
*डर भगाने के लिये हनुमान चालीसा पढते थे,*
स्लो मोशन सीन करने की कोशिश करते थे ,
सरकस के जोकर की भी नकल उतारते थे ,
*सीक्रेट कोड ताली और सीटी से बनाया जाता था ,*
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

कोयल की आवाज निकाल कर उसे चिढ़ाते थे,
घोंसले में अंडे देखने पेड पर चढ जाते थे ,
गरमी की छुट्टी में हम बड़ा मजा करते थे ,
बिना होलिडे होमवर्क के भी काफी कुछ सीख लेते थे ,
शाम को साथ बैठ कर *हमलोग* देखा जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था......

जैसा भी था मेरा - तेरा बचपन बहुत हसीन था।

*यादे कल की .... !!*
*बीते पल की .... !!*

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