Jokes (Only clean jokes here, please!)

jammbuster

A Rebel, in pursuit of a memorable life ...
*बीबी का ख़ौफ़*

बेचारा मर्द हमेशा कितना सहमा रहता है....

बीवी ने 50 रुपये के
दो नोट दिए कहा...

50 ₹ का मटर और
50 ₹ के आलू लेते आओ...

पति कुछ देर बाद घर वापस आया
और बोला..

.

.

*मटर वाला नोट कौन सा है...????*


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HAHAHHAHAHAHA
 
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The Ghost Who Walks
एक पंजाबी बच्चे से मेहमान ने पूछ लिया : बेटा कौन सा चैनल देखना पसंद करते हो

बच्चा : CNBC

मेहमान : बेटा, मुझे लगता है कि शेयर मार्केट चैनल की समझ के हिसाब मे तुम्हारी उम्र छोटी है।

बच्चे की माँ : जी वो CN मतलब कार्टून नेटवर्क बता रहा है बाकि तो पंजाबियों का तकिया कलाम है


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IJS

The Ghost Who Walks
संता, डॉक्टर से:
जब मैं सोता हूँ तो सपने में बन्दर फुटबॉल खेलते हैं ।



डॉक्टर:
कोई दिक्कत नहीं, ये गोली रात को सोने से पहले खा लेना ।

संता:
कल से खाऊंगा, आज तो फाइनल हैं

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shivharebetul

Active Member
*पति की आवश्यकता क्यों...?*
एक महिला
एक मनोचिकित्सक के पास जाती है और शिकायत करती है -- “मैं शादी नहीं करना चाहती। मैं शिक्षित, स्वतंत्र और आत्म निर्भर हूं। मुझे पति की जरूरत नहीं है। लेकिन मेरे माता पिता मुझसे शादी करने के लिए कह रहे हैं। *मैं क्या करूं...?"*
*मनोचिकित्सक ने उत्तर दिया*
-- तुम, निस्संदेह जीवन में बहुत कुछ हासिल करोगी । लेकिन किसी दिन अनिवार्य रूप से, जिस तरह से आप चाहती हैं, वैसे नहीं हो पायेगा। कुछ कुछ गलत हो जाएगा। कभी कभी आप असफल होंगी। कभी कभी आपकी योजनाएं काम नहीं करेंगी। *कभी कभी आपकी इच्छाएं पूरी नहीं होंगी। फिर किसे दोष दोगी...? क्या आप खुद को दोषी मानोगी...?*
महिला -- *नहीं...!*
*मनोचिकित्सक -- हाँ ! इसलिए आपको एक पति की आवश्यकता है, ताकि सारा दोष उन्हें दे सके...!!*

लेखक अज्ञात

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adsatinder

explorer
*कबीर जी की पगड़ी*

*एक प्रसिद्ध किवंदती हैं। एक बार संत कबीर ने बड़ी कुशलता से पगड़ी बनाई। झीना- झीना कपडा बुना और उसे गोलाई में लपेटा। हो गई पगड़ी तैयार। वह पगड़ी जिसे हर कोई बड़ी शान से अपने सिर सजाता हैं। यह नई नवेली पगड़ी लेकर संत कबीर दुनिया की हाट में जा बैठे। ऊँची- ऊँची पुकार उठाई- 'शानदार पगड़ी! जानदार पगड़ी! दो टके की भाई! दो टके की भाई!'*

*एक खरीददार निकट आया। उसने घुमा- घुमाकर पगड़ी का निरीक्षण किया। फिर कबीर जी से प्रश्न किया- 'क्यों महाशय एक टके में दोगे क्या?' कबीर जी ने अस्वीकार कर दिया- 'न भाई! दो टके की है। दो टके में ही सौदा होना चाहिए।' खरीददार भी नट गया। पगड़ी छोड़कर आगे बढ़ गया। यही प्रतिक्रिया हर खरीददार की रही।*

*सुबह से शाम हो गई। कबीर जी अपनी पगड़ी बगल में दबाकर खाली जेब वापिस लौट आए। थके- माँदे कदमों से घर- आँगन में प्रवेश करने ही वाले थे कि तभी... एक पड़ोसी से भेंट हो गई। उसकी दृष्टि पगड़ी पर पड गई। 'क्या हुआ संत जी, इसकी बिक्री नहीं हुई?'- पड़ोसी ने जिज्ञासा की। कबीर जी ने दिन भर का क्रम कह सुनाया। पड़ोसी ने कबीर जी से पगड़ी ले ली- 'आप इसे बेचने की सेवा मुझे दे दीजिए। मैं कल प्रातः ही बाजार चला जाऊँगा।'*

*अगली सुबह... कबीर जी के पड़ोसी ने ऊँची- ऊँची बोली लगाई- 'शानदार पगड़ी! जानदार पगड़ी! आठ टके की भाई! आठ टके की भाई!' पहला खरीददार निकट आया, बोला- 'बड़ी महंगी पगड़ी हैं! दिखाना जरा!'*

*पडोसी- पगड़ी भी तो शानदार है। ऐसी और कही नहीं मिलेगी।*

*खरीददार- ठीक दाम लगा लो, भईया।*

*पड़ोसी- चलो, आपके लिए- सात टका लगा देते हैं।*

*खरीददार - ये लो छः टका। पगड़ी दे दो।*

*एक घंटे के भीतर- भीतर पड़ोसी पगड़ी बेचकर वापस लौट आया। कबीर जी के चरणों में छः टके अर्पित किए। पैसे देखकर कबीर जी के मुख से अनायास ही निकल पड़ा-*

*सत्य गया पाताल में,*
*झूठ रहा जग छाए।*
*दो टके की पगड़ी,*
*छः टके में जाए।।*

*यही इस जगत का व्यावहारिक सत्य है। सत्य के पारखी इस जगत में बहुत कम होते हैं। संसार में अक्सर सत्य का सही मूल्य नहीं मिलता, लेकिन असत्य बहुत ज्यादा कीमत पर बिकता हैं। इसलिए कबीर जी ने कहा-*

*'सच्चे का कोई ग्राहक नाही, झूठा जगत पतीजै जी।*

 
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