Kedarnath, Uttarakhand, India

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Snowfall In Kedarnath And Badrinath After Rainfall First Time In Season

केदारनाथ-बदरीनाथ की पहाड़ियों पर सीजन की पहली बर्फबारी, रुक-रुककर हो रही बारिश से बढ़ी ठंड

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग/बदरीनाथ Updated Sun, 29 Sep 2019 10:03 AM IST


बदरीनाथ में बर्फबारी के बाद छाया कोहरा


बदरीनाथ में बर्फबारी के बाद छाया कोहरा - फोटो : अमर उजाला


समुद्रतल से 11750 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ और बदरीनाथ के ऊपरी इलाकों में शनिवार को सीजन का पहला हिमपात हुआ। इससे निचले इलाकों में भी हल्की ठंड शुरू हो गई है।

दिनभर रुक-रुककर होती बारिश के बीच केदारनाथ धाम के ऊपर की तरफ हिमालय की मेरू-सुमेरू पर्वत श्रृंखलाओं समेत चोराबाड़ी और वासुकीताल में हिमपात हुआ है। यहां की ऊपरी चोटियां केदारपुरी से सफेद नजर आ रही हैं।

केदारनाथ में दिनभर रुक-रुककर होती बारिश के चलते ठंड बढ़ गई है। जबकि, बदरीनाथ धाम में दोपहर बाद से शाम तक लगातार बारिश होती रही। इससे धाम में ठंड में इजाफा हो गया। ठंड को देखते हुए तीर्थयात्री अपने कमरों मेें दुबके रहे। केदारनाथ में शाम 6 बजे अधिकतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


केदारनाथ में हेलीकॉप्टर सेवा बाधित
केदारनाथ पहुंचे जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि बीते अन्य दिनों की अपेक्षा शनिवार को केदारनाथ में ठंड अधिक महसूस की गई। बताया कि धाम के ऊपरी क्षेत्रों में हिमपात हुआ है।

जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक शनिवार तड़के से दिनभर रुक-रुककर हल्की बारिश होती रही। इस दौरान केदारनाथ यात्रा सुचारु रही, लेकिन हेलीकॉप्टर सेवा दिन में कई बार बाधित होने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

शुक्रवार देर रात्रि से मौसम का मिजाज बिगड़ने लगा था। बादलों की तेज गर्जना के साथ रात को कुछ देर हल्की बारिश हुई, लेकिन शनिवार तड़के से सुबह 7 बजे तक बारिश तेज रही। इसके बाद दिनभर रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। उधर, केदारनाथ में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा।




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Nine Lakh Pilgrims Reached Kedarnath Dham Broke Record Before Yatra Season End

केदारनाथ धाम में टूटे यात्रा के पिछले सारे रिकॉर्ड, पहली बार पहुंचे नौ लाख से ज्यादा तीर्थयात्री

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Fri, 27 Sep 2019 10:12 AM IST

Nine Lakh Pilgrims reached kedarnath dham broke record before yatra season end

- फोटो : अमर उजाला

भगवान आशुतोष के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में दर्शनार्थिंयों की संख्या नौ लाख को पार कर गई है। साथ ही यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय भी जुड़ गया है। यात्रा को अभी एक माह का समय बचा हुआ है। ऐसे में श्रद्धालुओं का आंकड़ा 10 लाख से अधिक पहुंचने की उम्मीद है।




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- फोटो : अमर उजाला


बुधवार तक के आंकड़ाें पर गौर करें तो, केदारनाथ धाम में सुहावने मौसम के बीच सुबह से मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दोपहर 11 बजे तक छह सौ श्रद्धालुओं के दर्शन किए। इसके साथ ही इस सीजन में दर्शनार्थियों की संख्या नौ लाख पार हो गई।


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- फोटो : अमर उजाला


इससे पहले कभी भी केदारनाथ धाम में इतनी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंचे हैं। शाम 5 बजे तक तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए थे। बीते 9 मई से शुरू हुई बाबा के दर्शनों को आस्था और भक्ति का जो सैलाब उमड़ा है, उसने यात्रा को नया आयाम दिया है। तमाम मुश्किलों के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा।


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- फोटो : अमर उजाला

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जून माह में चार लाख से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंचे हैं। 7 जून को तो 36 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो एक दिन में सबसे अधिक दर्शनार्थियों का नया रिकार्ड है। यहीं नहीं, केदारनाथ यात्रा ने शुरूआती 45 दिनों में ही बीते वर्ष पहुंचे 7 लाख 32 हजार से अधिक यात्रियों का रिकार्ड भी तोड़ दिया था।


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- फोटो : अमर उजाला

बरसात के दौरान जुलाई-अगस्त में यात्रा की रफ्तार थमी रही। लेकिन सितंबर माह में धाम में रौनक बनी हुई है। बीकेटीसी के कार्यधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि यात्रा की यही रफ्तार रही तो कपाट बंद होने तक श्रद्धालुओं की संख्या 10 लाख पार हो जाएगी। यात्रा से रोजगार बढ़ने के साथ कारोबार को भी नई दिशा मिली है।


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Nine Lakh Pilgrims Reached Kedarnath Dham Broke Record Before Yatra Season End

केदारनाथ धाम में टूटे यात्रा के पिछले सारे रिकॉर्ड, पहली बार पहुंचे नौ लाख से ज्यादा तीर्थयात्री

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Fri, 27 Sep 2019 10:12 AM IST

Nine Lakh Pilgrims reached kedarnath dham broke record before yatra season end

- फोटो : अमर उजाला

भगवान आशुतोष के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में दर्शनार्थिंयों की संख्या नौ लाख को पार कर गई है। साथ ही यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय भी जुड़ गया है। यात्रा को अभी एक माह का समय बचा हुआ है। ऐसे में श्रद्धालुओं का आंकड़ा 10 लाख से अधिक पहुंचने की उम्मीद है।




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- फोटो : अमर उजाला


बुधवार तक के आंकड़ाें पर गौर करें तो, केदारनाथ धाम में सुहावने मौसम के बीच सुबह से मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। दोपहर 11 बजे तक छह सौ श्रद्धालुओं के दर्शन किए। इसके साथ ही इस सीजन में दर्शनार्थियों की संख्या नौ लाख पार हो गई।


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- फोटो : अमर उजाला


इससे पहले कभी भी केदारनाथ धाम में इतनी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंचे हैं। शाम 5 बजे तक तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए थे। बीते 9 मई से शुरू हुई बाबा के दर्शनों को आस्था और भक्ति का जो सैलाब उमड़ा है, उसने यात्रा को नया आयाम दिया है। तमाम मुश्किलों के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा।


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- फोटो : अमर उजाला

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जून माह में चार लाख से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंचे हैं। 7 जून को तो 36 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो एक दिन में सबसे अधिक दर्शनार्थियों का नया रिकार्ड है। यहीं नहीं, केदारनाथ यात्रा ने शुरूआती 45 दिनों में ही बीते वर्ष पहुंचे 7 लाख 32 हजार से अधिक यात्रियों का रिकार्ड भी तोड़ दिया था।


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- फोटो : अमर उजाला

बरसात के दौरान जुलाई-अगस्त में यात्रा की रफ्तार थमी रही। लेकिन सितंबर माह में धाम में रौनक बनी हुई है। बीकेटीसी के कार्यधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि यात्रा की यही रफ्तार रही तो कपाट बंद होने तक श्रद्धालुओं की संख्या 10 लाख पार हो जाएगी। यात्रा से रोजगार बढ़ने के साथ कारोबार को भी नई दिशा मिली है।


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Char Dham kapat closing dates
2019 :

Shri Badrinath ji 17 November

Shri Kedarnath ji on October 29 at 8.30 am Bhaiyyuduj festival.

Sri Gangotri 28 October Annakoot festival.

Shri Yamunotri 29th October Bhaiyuduj festival.

Shri Madmaheshwar ji on 21 November at 11 am

Shri Tungnath ji on November 6 at 11.30 am

Shri Rudranath ji on 18th October

Shri Hemkund Sahib 10 October morning



चार धाम कपाट बंद होने की तिथियां 2019 :

श्री बदरीनाथ जी 17 नवंबर शायं 5 बजकर 13 मिनट
श्री केदारनाथ जी 29 अक्टूबर प्रात: 8.30 बजे भैयादूज पर्व।
श्री गंगोत्री 28 अक्टूबर अन्नकूट पर्व।
श्री यमुनोत्री 29 अक्टूबर भैयादूज पर्व।
श्री मद्महेश्वर जी 21 नवंबर प्रात:11 बजे
श्री तुंगनाथ जी 6 नवंबर प्रात: 11.30 बजे
श्री रूद्रनाथ जी 18 अक्टूबर प्रात:

श्री हेमकुंड साहिब 10 अक्टूबर प्रातः

( प्रेषक मीडिया प्रभारी बी.के.टी.सी)
 

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उत्तराखंडः केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी, इलाके में बढ़ी ठंड

उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ में अक्टूबर के महीने में जबरदस्त बर्फबारी शुरू होने से पूरे इलाके में ठंड बढ़ गई है. केदारनाथ और बद्रीनाथ में पहाड़ बर्फबारी से सफेद हो गए हैं.


फाइल फोटो


फाइल फोटो


aajtak.in
देहरादून, 21 अक्टूबर 2019, अपडेटेड 06:41 IST

उत्तराखंड में अक्टूबर में ही बर्फबारी ने दस्तक दे दी है. केदारनाथ और बद्रीनाथ में जबरदस्त बर्फबारी देखने को मिली है. अक्टूबर के महीने में जबरदस्त बर्फबारी शुरू होने से पूरे इलाके में ठंड बढ़ गई है. इस ताजा बर्फबारी से यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. केदारनाथ और बद्रीनाथ में पहाड़ बर्फबारी से सफेद हो गए हैं.
इस साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला था. इस साल मई महीने में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण और अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे. बद्रीनाथ को भगवान विष्णु का धाम माना जाता है, जबकि केदारनाथ को भगवान शिव का धाम माना जाता है.
बताया जा रहा है कि इस महीने के आखिरी तक केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट बंद हो जाएंगे. ठंड बढ़ने के चलते कपाट को बंद किया जाता है. हर साल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के धाम के कपाट अक्टूबर-नवंबर में बंद किए जाते हैं और 6 महीने तक बंद रहते हैं. इसके बाद अप्रैल-मई में इन धामों के कपाट फिर खोल दिए जाते हैं. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में काफी संख्या में श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं.


उत्तराखंडः केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी, इलाके में बढ़ी ठंड
 

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Dehradun › Chardham Yatra 2019: Bumper Business In Kedarnath Yatra

चारधाम यात्रा 2019: केदारनाथ यात्राकाल में इस बार हुआ चार अरब का व्यवसाय, पहुंचे रिकॉर्ड श्रद्धालु

विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Wed, 30 Oct 2019 08:52 AM IST


Chardham Yatra 2019: bumper business in Kedarnath Yatra

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- फोटो : एएनआई फाइल फोटो

इस वर्ष केदारनाथ यात्रा कारोबार और रोजगार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रही है। यात्राकाल में 4 अरब से ज्यादा का कारोबार हुआ। साथ ही केदारघाटी के बाजारों से लेकर पैदल मार्ग और धाम में हजारों लोगों को रोजगार मिला।




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9 मई से 29 अक्तूबर तक संचालित बाबा केदार की यात्रा में इस वर्ष उमड़े आस्था के सैलाब ने कारोबार को पंख लगाने में अहम भूमिका निभाई। पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन से करीब 55 करोड़ का करोबार हुआ है, जिससे प्रशासन को भी 5 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।



विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Wed, 30 Oct 2019 08:52 AM IST


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दंडी, कंडी और पालकी से भी 20 लाख से अधिक का कारोबार हुआ। इसके अलावा केदारनाथ यात्रा में इस वर्ष 9 हेली कंपनियों द्वारा 76 करोड़ का व्यवसाय किया गया। वहीं, श्रीबदरीनाथ-मंदिर समिति को भी 19 करोड़ और गढ़वाल मंडल विकास निगम ने 7 करोड़ की आय अर्जित की है।



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रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक संचालित करीब एक हजार से अधिक होटल, लॉज, धर्मशाला ने इस यात्राकाल में 125 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है, जबकि ढाबा व छोटे दुकानदारों द्वारा 4 लाख से 25 लाख तक आय अर्जित की गई है। सोनप्रयाग में पहाड़ी किचन ने यात्राकाल में एक करोड़ की आय अर्जित की।





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- फोटो : अमर उजाला

केदारनाथ धाम की यात्रा में इस वर्ष रिकॉर्ड 9 लाख 97 हजार 585 श्रद्धालुओंं ने बाबा के दर्शन किए। यात्रा 9 मई को शुरू हुई थी, इस दौरान 6680 श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने थे। वर्ष 2012 से पूर्व तो कभी भी एक माह तो दूर, एक सीजन में भी इतने यात्री धाम नहीं पहुंचे थे। यहीं नहीं इस वर्ष यात्रा के 41वें दिन (21 जून) में ही बीते वर्ष पहुंचे 732240 श्रद्धालुओं का रिकार्ड टूट गया था।




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केदारनाथ यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं को प्रकृति से रूबरू होने का भरपूर मौका मिला है। 9 मई से 29 अक्तूबर तक श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर हिमखंडों के दर्शन हुए। इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक केदारनाथ में रिकार्ड बर्फबारी हुई थी। सर्दियों में कुल 60 फीट तक बर्फ गिरी, जिसके चलते धाम से लेकर गौरीकुंड तक पैदल मार्ग भी कई दिनों तक बर्फ से ढका रहा।



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- फोटो : अमर उजाला

गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर चिरबासा से जंगलचट्टी के बीच 10 महिला समूहों द्वारा पहाड़ी भोजन व स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाए गए थे। यात्राकाल में करीब 20 लाख रुपये की आय हुई है। साथ ही 142 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1612 महिलाओं द्वार यात्रा के लिए स्थानीय उत्पादों से प्रसाद तैयार करने का काम भी किया गया, जिससे एक करोड़ 22 लाख से अधिक की आय हुई है।



 

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Char Dham Yatra 2019 Kedarnath Dham Door Close Today Photos

केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, तस्वीरें देख बनें पवित्र पल के साक्षी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Wed, 30 Oct 2019 08:46 AM IST


char dham yatra 2019 kedarnath dham Door close today photos

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- फोटो : अमर उजाला

देवों के देव महादेव के विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ मंदिर के कपाट आज शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।




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- फोटो : अमर उजाला

आज सुबह 8.30 बजे भगवान केदारनाथ धाम के कपाट विधिविधान से बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के अवसर पर करीब 1200 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।




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- फोटो : अमर उजाला

31 अक्तूबर को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में छह माह की पूजा-अर्चना के लिए भगवान श्रीकेदार विराजमान होंगे।



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- फोटो : अमर उजाला

पंचमुख भोगमूर्ति चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान होकर केदार बाबा शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए रवाना हो गए हैं। आज दोपहर बाद बाबा की डोली पहले पड़ाव रामपुर में पहुंचेगी।




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- फोटो : अमर उजाला

ऊखीमठ प्रशासन व श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारियों की मौजूदगी में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए और ताले को सील करते हुए चाबी उपजिलाधिकारी वरुण अग्रवाल को सौंप दी गई है।



केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, तस्वीरें देख बनें पवित्र पल के साक्षी
 

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Big Change In Chorabari Tal After Six Years Of Kedarnath Disaster 2013

जिस ताल की वजह से केदारनाथ धाम में आई थी जलप्रलय, वहां छह साल बाद हो रहा बड़ा बदलाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Wed, 19 Jun 2019 10:08 AM IST


चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल - फोटो : अमर उजाला

साल 2013 में केदारनाथ आपदा में व्यापक तबाही मचाने वाले चोराबाड़ी ताल में छह वर्ष बाद बड़ा बदलाव हो रहा है। यह ताल अब छह साल बाद फिर से पुनर्जीवित हो रहा है। चोराबाड़ी ताल अब फिर से पानी से लबालब भर गया है।



चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

ताल के चारों तरफ ग्लेशियर फैला हुआ है, जो टुकड़ों में टूट रहा है। यहां भूस्खलन हो रहा है, लेकिन, इससे केदारनाथ क्षेत्र को कोई खतरा नहीं है। भू-वैज्ञानिकों जल्द ही क्षेत्र का जायजा लेंगे, साथ ही जिला आपदा प्रबंधन की टीम भी चोराबाड़ी पहुंचकर वहां के हालातों का निरीक्षण कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।



चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

16/17 जून 2013 को केदारनाथ में व्यापक तबाही मचाने वाले चोराबाड़ी ताल के खुले मैदान जैसे हिस्से में इस वर्ष भरपूर पानी जमा हो रखा है। यहां चारों तरफ कई फीट मोटी बर्फ की चादर है। बीते 15 जून को सिक्स सिग्मा के सीईओ डा. प्रदीप भारद्धाज के नेतृत्व में केदारनाथ से चोराबाड़ी पहुंची उनकी टीम ने पूरे क्षेत्र का जायजा लिया।



चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

डा. भारद्वाज ने बताया कि चोराबाड़ी में जगह-जगह पर भूस्खलन हो रहा है। साथ ही ग्लेशियर भी तेजी से चटक रहा है। आपदा में ताल का मुहाना (स्रोत) फूटने से जो मैदान बना था, वह इन दिनों पानी से लबालब भरा हुआ है। जमा पानी की गहराई करीब चार मीटर तक है। इसके आसपास बड़े बोल्डर और कई जगहों पर जमीन दरकने से पानी का बहाव भी कम है, जिससे निचले हिस्से को खतरा नहीं है।


चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

चोराबाड़ी ताल से केदारपुरी व मंदिर क्षेत्र को आने वाले कई पांच दशकों तक किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई संभावना नहीं है, लेकिन फोटो में जिस तरह से ताल के खुले हिस्से में पानी जमा दिख रहा है, उसका स्थलीय निरीक्षण व भूगर्भीय अध्ययन जरूरी है। जल्द यहां पहुंचकर इस पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण कर हालातों का जायजा लेंगे। भावी संभावनाओं को लेकर भी चोराबाड़ी ताल व ग्लेशियर का अध्ययन किया जाएगा।
-डॉ. डीपी डोभाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान देहरादून


चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

चोराबाड़ी ताल व पूरे क्षेत्र का भू-वैज्ञानिकों के माध्यम से अध्ययन किया जाएगा। इस बारे में वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों से बातचीत हो रही है। साथ ही सिक्स सिग्मा के लोगों से भी वहां के बारे में पूरी जानकारी ली गई है।
-मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग


 

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Exclusive: जिस झील को बताया जा रहा है तबाही का कारण, उसकी असली सच्चाई ये है

News State Bureau | Updated On : June 28, 2019 06:13:03 PM

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प्रतीकात्मक फोटो। (Photo Credit : )

ख़ास बातें

2013 में केदार घाटी में आई थी भारी तबही

ग्लेशियर को लेकर अफवाह यह थी कि इससे तबाही मचेगी

विशेषज्ञों ने कहा कि तबाही के हालात नहीं हैं

देहरादून:

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल्स में केदारनाथ धाम के ऊपर चोराबारी ग्लेशियर में एक नई झील के होने की खबरें चलाई जा रही हैं. यह तक कहा जा रहा है कि झील भविष्य में 2013 की प्राकृतिक आपदा की तरह ही मुसीबत का कारण बन सकती है. न्यूज़ स्टेट की टीम ने 14000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर बनी झील पर पहुंचकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट तैयार की है.

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16 जून 2013 में केदारघाटी में प्राकृतिक आपदा आई. जिस आपदा में हजारों लोग मारे गए और सैकड़ों बेघर हो गए. इसलिए जब भी इस आपदा का नाम जुबान पर आता है तो हर किसी का डर से सहम जाना लाजमी है. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और तमाम न्यूज़ चैनल्स में इसी केदार केदारनाथ धाम से ऊपर 6 किलोमीटर की दूरी और 14000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर एक नई झील के निर्माण होने की खबरें चल रही है और दावा यहां पर किया जा रहा है कि झील टूटी तो साल 2013 की तरह भयंकर तबाही लेकर आएगी.

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दरअसल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मेडिकल सेवाएं प्रदान करने वाली सिक्स सिगमा के टीम में सबसे पहले इन नई झीलों की तस्वीरें और वीडियो वायरल किए. जिसके बाद हर कोई इन्हें देखकर यही सोच रहा है कि क्या 2013 की तरह एक बार फिर से कोई बड़ी आपदा आ सकती है. ऐसे में न्यूज़ नेशन के टीम ने जनता को हर हकीकत बताने के लिए इस क्षेत्र में पहुंचने की शुरुआत की.

चोराबारी ग्लेशियर मैं ही इन नई झीलों के बनने की बात कही जा रही है. इन झीलों की हकीकत जानने के लिए वाडिया भूगर्भ संस्थान देहरादून के ग्लेशियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ डीपी डोभाल भी मॉनिटरिंग के लिए पहुंचे थे. क्योंकि लोगों में जिस तरह का भय बन चुका था उसे दूर करना जरूरी था और ग्लेशियर विशेषज्ञ ही यह बता सकते हैं कि आखिरकार यह झील कितनी खतरनाक है.

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स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी एसडीआरएफ और वाडिया भूगर्भ संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम के साथ अब हम केदारनाथ से चौराबाड़ी ग्लेशियर की ओर अपना सफर शुरू कर चुके थे. चोराबारी ग्लेशियर में जहां हमें पहुंचना था वह क्षेत्र करीब 6 किलोमीटर दूर और 14000 फीट से ज्यादा ऊंचाई वाला हाय एल्टीट्यूड क्षेत्र था.

हमें ग्लेशियर की और गाइड करने के लिए और पूरे रास्ते की जानकारी देने के लिए एसडीआरएफ के 2 टीम मेंबर लक्ष्मण सिंह बिष्ट और विनीत रावत भी हमारे साथ थे जिनसे हमने पूछा कि आखिरकार यह क्षेत्र कितनी चुनौतियां और मुश्किलों भरा है. इसी बीच वाडिया भूगर्भ संस्थान के ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉक्टर डीपी डोभाल भी पहुंच चुके थे जिन्होंने बताया की शुरुआत के वीडियो और फोटो देखकर नहीं लगता कि कोई खतरे वाली बात है यह रूटीन ग्लेशियल लेक नजर आ रही हैं लेकिन फिर भी जिस तरह से प्रशासन और जनता चिंता कर रही है तो वह रिसर्च के लिए और मॉनिटरिंग के लिए ग्लेशियर की ओर जा रहे हैं.

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उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जब आप ग्लेशियर वाले क्षेत्रों में जाते हैं तो कई बार हजारों के झुंड में भेड़ बकरियां नजर आती हैं जो बहुत खास इसलिए हैं क्योंकि यहां इनके चरवाहे इन्हें 6 महीनों के लिए लाते हैं और 6 महीने बाद जब बर्फ ज्यादा हो जाती है तो वह निचले स्थानों पर इन्हें लेकर चले जाते हैं.

चोराबारी ग्लेशियर में केदारनाथ धाम मंदिर से 3 किलोमीटर की ऊंचाई पर चोरा बड़ी झील यानी गांधी सरोवर झील है जिसके टूटने से 2013 में केदार घाटी की प्राकृतिक आपदा आई थी. अपने इस सफर में नई झीलों के साथ हम आपको 2013 की आपदा का कारण बनी गांधी सरोवर झील भी दिखाएंगे कि आखिरकार कैसे 2013 में यह पूरी तबाही मची थी.

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चोराबारी ग्लेशियर को जाने का रास्ता बहुत संकरा है अधिक ऊंचाई होने के साथ-साथ आपको हर कदम बड़ी होशियारी और सूझबूझ के साथ रखना होता है क्योंकि आपका एक गलत कदम आपको सैकड़ों फीट गहरी खाई में धकेल सकता है या फिर आप ग्लेशियर में बनी दरारों में फंस सकते हैं.

हिमालई क्षेत्रों में मौसम में हो रहे बदलाव ग्लेशियर के मूवमेंट और तापमान मैं कमी और बदलाव पर नजर रखने के लिए वाडिया भूगर्व संस्थान ने चौराबाड़ी ग्लेशियर में दो हाईटेक वेदर स्टेशन बनाए हैं. अपने सफ़र में हम वाडिया भूगर्व संस्थान के मौसम स्टेशन के पास पहुंचे.

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इस दौरान हमें डाक्टर डीपी डोभाल से पूछा कि आखिरकार यह वैसे स्टेशन कैसे काम करता है और क्या-क्या जानकारियां यहां से कलेक्ट होती है. डॉ डोभाल ने जानकारी दी कि इस वेदर स्टेशन से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जानकारियां जुटाई जाती हैं.

छोटी झील से करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करने के बाद अब हम बड़ी झील की ओर अपना सफर तय कर रहे थे. हमें उस झील की तलाश थी जिससे भविष्य में आपदा आने का खतरा बताया जा रहा है. थोड़ी ही देर में हम उस झील के पास भी पहुंच गए.

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यहां वाडिया भूगर्भ संस्थान के वैज्ञानिक डॉ डीपी डोभाल अपनी टीम के साथ झील और ग्लेशियर्स की मांटिरिंग कर रहे थे. झील की गहराई नापने के लिए वो मेन्युवल और क्षेत्र की टोपो ग्राफी के लिए जीपीएस से पोजीशनिंग पता कर रहे थे.

मीडिया में इन दिनों इस झील को लेकर काफी सनसनीखेज खबरें चलाई जा रही हैं. लेकिन न्यूज़ नेशन जनता को सही और विश्वसनीय खबर दिखाने के लिए इस दुर्गम रास्ते में समुद्र तल से करीब 14000 फीट की हाइट पर हाई एल्टीट्यूड क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने पहुंचा था.

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डॉक्टर डोभाल ने जानकारी देते हुए बताया कि झील के किनारे जो ग्लेशियर हैं वह जमीन से 30 मीटर गहराई तक है और करीब आठ से 10 मीटर चौड़ा है. जिस झील की हम बात कर रहे हैं उसे सुप्रा ग्लेशियर लेक कहा जाता है. यह एक नॉर्मल प्रोसेस है जो ग्लेशियर की स्टडी में अक्सर दिखाई देती.

ऐसी झीलें 1 से 2 सालों में सूख जाती हैं. जिन लोगों ने इस तरह के वीडियो भविष्य में आपदा का कारण बताते हुए रिलीज किए हैं उन्हें ग्लेशियर साइंस की जानकारी नहीं है. झील के किनारे जो ग्लेशियर है वह काफी मोटा और उसकी दीवार काफी मजबूत है जिससे पानी को तोड़ना असंभव है.

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केदारनाथ मंदिर से इसकी दूरी करीब 6 किलोमीटर है जिसके चलते इससे पानी की निकासी होने के बाद भी किसी तरह का कोई खतरा नहीं है. करीब 1 से 2 साल बाद ग्लेशियर पिघलने पर यह झील भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी. डॉक्टर डोभाल ने यह भी कहा कि वाडिया भूगर्भ संस्थान की टीम इस झील को लगातार मॉनिटर भी करती रहेगी और प्रशासन से भी कहा जाएगा कि इस पर नजर रखें.

जिस झील को लेकर अफरातफरी का माहौल बनाया जा रहा है. जिसे आपदा का कारण बताया जा रहा है. ऐसी झील को ग्लेशियर एक्सपर्ट किसी तरह का खतरा नहीं बता रहे हैं उनका कहना है कि ऐसी झील किसी तरह का खतरा नहीं है और यह ग्लेशियर की रूटीन प्रोसेस है.

First Published: Jun 28, 2019 06:11:47 PM

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Warnings from space: Is Kedarnath staring at another disaster?

New satellite images of the frozen Chorabari lake, about two kilometres upstream of Kedarnath, indicate that the number of water bodies in it is increasing. India Today's Data Intelligence Unit (DIU) has spotted four significant water body formations in the Chorabari lake.



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Dipu Rai New DelhiJune 28, 2019UPDATED: June 28, 2019 09:28 IST

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(Photo: Getty Images)

HIGHLIGHTS

Latest satellite images show that the number of water bodies is surging in Chorabari Lake

Some 8 billion tonnes of ice are being lost every year from Himalayan glaciers

Melting of glaciers has doubled since the turn of the century, a recent study has revealed

Remember the devastating floods in Kedarnath in June 2013? Experts had then blamed early monsoon and glacier melting for the catastrophe that killed over 5,000 people, displaced thousands and damaged property worth crores. And in what might be a cause of worry, latest satellite images show telltale signs of a similar disaster impending.

New satellite images of the frozen Chorabari lake, about two kilometres upstream of Kedarnath, indicate that the number of water bodies in it is increasing. India Today's Data Intelligence Unit (DIU) has spotted four significant water body formations in the Chorabari lake.

These images, taken by the Landsat 8 and Sentinel-2B satellites on June 26, 2019, show that the number of water bodies has increased from two to four in the last one month. Official sources say the Uttarakhand government has started precautionary measures.

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(Photo: Sentinel-2B L2A via EO Browser)

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(Photo: Sentinel-2B L2A via EO Browser)

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(Photo: Sentinel-2B L2A via EO Browser)

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(Photo: Sentinel-2B L2A via EO Browser)

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If we zoom in on the satellite image of June 11, a few water bodies formations can be seen emerging, but they are not too big at the moment.

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(Photo: Sentinel-2B L2A via EO Browser)

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In the above image from June 11, the area marked in pink is the Chorabari glacier. The blue spots within the yellow area are glacial lakes.

Experts are taking these signs seriously. Kedarnath valley being ecologically sensitive and fragile, experts opine that authorities should not overlook any such sign as water bodies formation in an area like Chorabari.

Environmentalist and JNU professor AP Dimri, who has researched extensively on this issue, told India Today, "The Kedarnath valley is seismically and ecologically very sensitive and fragile. In 2013, early monsoon and melting of ice were the main reasons for the devastating flood. If such water bodies are emerging, then it could be a matter of concern."

Chorabari is one of the 14 lakes spread over Mandakini river basin, at a height of 3,960 metres above sea level. Chorabari lake is almost two kilometres upstream of Kedarnath.

In June 2013, similar water bodies were behind the collapse of the banks of Chorabari lake and that led to devastating floods in the temple town. Experts say the new emerging water bodies do not look like a significant threat as of now, but they could be if heavy torrential rains accumulate in the area.

What happened in 2013?

Some 8 billion tonnes of ice are being lost every year from Himalayan glaciers. Melting of glaciers has doubled since the turn of the century, a recent study has revealed.

On June 16, torrential rains flooded the Saraswati river and Doodh Ganga catchment area, resulting in excessive flow across all the channels. The meteorological stations near Chorabari glacier recorded 325 mm rainfall at the base of the glaciers in two days on June 15 and 16.

On June 17, overflow and collapse of the moraine-dammed Chorabari lake released a large volume of water that caused another flash flood in Kedarnath town, leading to massive devastation downstream (Gaurikund, Sonprayag, Phata, etc.). The dam breached, releasing massive floodwaters, causing enormous destruction in the Kedarnath valley area.




 
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