Renukaji Lake की अधूरी यात्रा या किसी अनहोनी से बच गए

Discussion in 'Travelogues from North India' started by Pardeep Dhounchak, Dec 31, 2018.

  1. Pardeep Dhounchak

    Pardeep Dhounchak जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है

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    9 दिसम्बर 2018 को मैं और मेरा एक मित्र सुमित रेणुका जी लेक जाने के शाम को पानीपत से चले। प्राइवेट जॉब में छुट्टियों की बड़ी तंगी रहती है। 29 दिसंबर को शनिवार था तो हमने सोचा कि शनिवार शाम को निकलेंगे पानीपत से और रविवार रात तक पानीपत वापिस पहुंच जाएंगे। हालाँकि हमारा प्लान काफी खतरनाक था क्योंकि हमारे प्लान के हिसाब से हम पानीपत से रात को 9 बजे निकलते और आराम से बाइक चलाते हुए रविवार सुबह 5 बजे तक पहुंच जाते। पानीपत से रेणुका जी लेक, हिमाचल की दूरी लगभग 210 किलोमीटर है।
    सर्दी से बचाव के लिए:
    पानीपत से हम बिल्कुल टिप टॉप होकर चले मतलब कि दोनों हेलमेट पहने हुए, गले में शाल लपेटे हुए ताकि हेलमेट में हवा ना घुसे, जैकेट ऐसी कि बाइक पे 100 की रफ्तार में भी ठंड ना लगे, हाथों में गरम दस्ताने, एक गर्म पायजामी, उसके ऊपर जीन्स और जीन्स के ऊपर गरम ट्रैक पेन्ट पहने हुए।
    साथ में एक सिगरेट लाइटर(हम धुम्रपान नहीं करते) और एक डब्बी कपूर की गोलियाँ भी ले ली ताकि अगर कहीं आग जलानी पड़ जाए तो दिक्कत ना हो
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    अब है मुद्दे की बात:
    पानीपत से निकलते ही एक Essar के पेट्रोल पंप पर बाइक की टंकी को फुल करवा लिया, जैसे ही पेट्रोल पंप से आगे बढ़े तो कुछ ऐसा हुआ कि अचानक से जैसे मैंने कुछ सुना हो कि वापिस जाओ। इसके बाद एकदम से दिमाग पे नकारात्मकता छा गई। मेरा मन एकदम से बदल सा गया। मैंने सुमित से पूछा कि वापिस चलें तो सुमित बोला कि मर्जी है आपकी लेकिन अब चल दिये हैं तो आगे ही चलते हैं। करनाल से निकलने के बाद तो मेरे हाथों ने जैसे काम करना ही बंद कर दिया। कंधे एकदम से दुखने लगे। अगर ठंड लगती तो समझ में आता कि शायद ठंड की वजह से दुख रहे हों लेकिन मेरी जैकेट के अंदर तो हवा भी नहीं घुस रही थी तो ठंड लगने का सवाल ही नही।
    नीलोखेड़ी से थोड़ा पहले मैंने सड़क के किनारे बाइक रोक दी। लगभग रात 9:45 का समय हो रहा था
    थोड़ी देर दिमाग को शांत रखने की कोशिश की।
    सुमित को मैंने पूछा कि क्या करें, आगे चले या वापिस। मैंने सुमित को ये नहीं बताया था कि मुझे क्या सुनाई दिया था पैट्रोल पंप से चलते ही। सुमित बोला कि जैसा आप चाहो।
    हम नीलोखेड़ी पहुंचे तो मैंने बाइक को पुल के ऊपर से ले जाने की बजाय नीचे की तरफ ले लिया।
    जैसे ही हम पुल के नीचे यू टर्न के पास पहुंचे तो फिर से दिमाग झन्नाया कि वापिस जाओ
    बाइक को पुल के नीचे रोक लिया। कुछ देर बाद आगे चलने के लिए बाइक को सेल्फ स्टार्ट करना चाहा तो स्टार्ट नही हुई। किक लगाई तो स्टार्ट हो गई। लेकिन फिर से बंद हो गई। चाबी घुमाई लेकिन स्पीडोमीटर में कोई लाइट नही आई। मैंने सुमित को बोला कि वापिस चलते हैं और जब दुबारा से सेल्फ स्टार्ट की तो बाइक आराम से स्टार्ट हो गई। 1 घंटे में पानीपत वापिस पहुंच गए। सुमित को उसके रूम पे छोड़ कर मैं घर चला गया।
    घर वापिस पहुँच कर ऐसा लगा कि बच गए
     
  2. NeerajVayu

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    Good decision
     
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  3. Big Daddy

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    It happens to me a lot of times, but when it happens to me, I say let's take things one hour at a time and then I complete most of the things. All difficult things require such an approach to see them through completion.
     
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  4. Vishal Shukla

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    Mitr, jata to kay hota nahi gaya to kay hua if every thing is good after you took a desicion and you are happy about it than your desicion is correct. Some times listing to your inner voice is good.

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  5. Pardeep Dhounchak

    Pardeep Dhounchak जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है

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    Ya, agree with you but sometime Conscience feel good factor
     
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  6. Pardeep Dhounchak

    Pardeep Dhounchak जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है

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    Ya, I was very happy with my desicion
     
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  7. adsatinder

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    Now when are you going again ?
     
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  8. Pardeep Dhounchak

    Pardeep Dhounchak जाट देवता ने कहा है : घुमक्कड़ी किस्मत से मिलती है

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    Target is in March or April, Sir ji
     
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  9. adsatinder

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    Weather will be good then.
    You can easily to it without much preparation.
     
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  10. karun0035

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    I always believe in 1 quote (author is unknown):
    Your sixth sense will always save you ... it was your good decision. It was a difficult decision but correct decision!!
     

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