Road conditions - Uttarakhand

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Heavy rainfall on way, toll 38 in Uttarakhand

At the time when several Indian states are facing flood fury, heavy rainfalls have lashed out in the hilly state of Uttarakhand. Alaknanda River is already flowing 30 feet above its normal level.

Dilip Singh Rathore
Dehradun
August 18, 2019
UPDATED: August 18, 2019 03:36 IST

As the death toll in Uttarakhand reached 38, the Meteorological Department has forecasted'very heavy rainfall in Garhwal and Kumaon regions in the coming days. A travel advisory has been issued asking travellers to stay away till the situation normalises.
At the time when several Indian states are facing flood fury, heavy rainfalls have lashed out in the hilly state of Uttarakhand. Alaknanda River is already flowing 30 feet above its normal level.
The weather department has issued an orange warning which means heavy to very heavy rain in the region.
Areas like Pauri Garhwal, Chamoli, Uttarkashi and Rudraprayag, and the districts of Kumaun region like Pithoragarh, Champawat, Bageshwar and Nainital will remain most affected.
According to Director of Uttarakhand Weather department Bikram Singh, the warning of heavy rain will be continued till August 19.
Singh added that the local residents and the pilgrims should avoid travelling in the rain as there are so many patches which are highly sensitive zone.
The monsoon rains have caused maximum destruction in Chamoli, where the death toll has reached 15.
During team Aaj Tak's ground report of Rudraprayag, it was found that all the ghats were submerged under floodwater. Alaknanda River is already flowing around the danger mark and more rains would make the situation grim.
While going from Joshimath to Badrinath, most of the pilgrims were facing problem at Lambagar which is prone to landslides.
Local administration is making all the arrangements for the travellers. To ensure the safety of the pilgrims a new route has been made functional.
District Magistrate of Chamoli Swati S Bhadoria, while speaking to Aaj Tak, said, "We are making alternate arrangements and routes for travellers. There is a patch of 300 meters which is prone to landslides, so we have deployed a team which can immediately initiate action in case of any calamity.


 

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उत्तराखंडः पहाड़ पर बारिश का कहर, जोशीमठ में नाले में आया उफान, छह ढाबे हुए जमींदोज

UK : Heavy Rain on Saturday and Sunday.
Highway affected due to rain, landslides etc.

Updated Sat, 17 Aug 2019 04:39 PM IST


बरसाली नाला आया उफान पर - फोटो : अमर उजाला
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के नौ जिलों में शनिवार और रविवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं पहाड़ के विभिन्न हिस्सों में शनिवार को भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान कई जगह नदी नालों में उफान आ गया। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे पर खनोटी नाले में उफान आने से चार ढाबे पानी के सैलाब में समा गए, जबकि दो ढाबों को भारी नुकसान पहुंचा है। बदरीनाथ हाईवे भी लगभग दस मीटर क्षतिग्रस्त हो गया है।

गदेरे (नाले) में आए मलबे के कारण हाईवे करीब सात घंटे तक अवरुद्ध रहा। गदेरे के कटाव से स्थानीय ग्रामीणों की कई हेक्टेयर भूमि भी बह गई है। उत्तरकाशी जिले में भूस्खलन के कारण शनिवार को यमुनोत्री हाईवे सहित करीब एक दर्जन मोटर मार्ग घंटों तक बाधित रहे। हर्षिल के निकट गदेरे में पानी बढ़ने और मलबा आने के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया। हाईवे के दोनों ओर दर्जनों लोग घंटों फंसे रहे, जिन्हें बीआरओ कर्मचारियों ने दोपहर बाद सुरक्षित निकाल लिया।
जामू नर्सरी के समीप दो घंटे बंद रहा हाईवे
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग जामू नर्सरी के पास करीब दो घंटे बंद रहा। एनएच द्वारा मलबा साफ कर प्रात: 8 बजे हाईवे पर यातायात सुचारु कर दिया गया। इधर, बांसवाड़ा में हाईवे की स्थिति अति संवेदनशील बनी हुई है। यहां पर रुक-रुककर पत्थर व मलबा गिर रहा है। इसके साथ ही जनपद में आठ संपर्क मोटर मार्ग बंद पड़े हैं, जिस कारण ग्रामीणों को यातायात में खासी दिक्कतें हो रही हैं। दूसरी तरफ जखोली ब्लॉक के पालाकुराली व दरमोला गांव में दो आवासीय भवन पुश्ता धंसने से खतरे की जद में आ गए हैं। पीड़ित परिवारों द्वारा राजस्व विभाग को अवगत करा दिया गया है।
जोशीमठ क्षेत्र में शुक्रवार शाम सात बजे से भारी बारिश शुरू हो गई थी, जो रातभर जारी रही। रात करीब एक बजे पैनी मोड़ के पास खनोटी नाला उफान पर आ गया, जिससे यहां स्थित चार ढाबे पानी में समा गए। पैनी (जोशीमठ) निवासी दीपक बिष्ट, अरविंद बिष्ट, भरत सिंह और सेलंग के सुभाष भंडारी निवासी यह ढाबे संचालित कर रहे थे। जबकि सेलंग निवासी कल्पेश्वर भंडारी व राजेंद्र नेगी के ढाबों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
बदरीनाथ हाईवे पर भी भारी मलबा आ गया। शनिवार को सुबह पांच बजे जैसे ही यात्रा वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो खनोटी नाले के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। यहां करीब दस मीटर तक हाईवे क्षतिग्रस्त हुआ है। सूचना मिलने पर सुबह छह बजे बीआरओ के अधिकारी जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे का निस्तारण कर सुबह आठ बजे यहां वाहनों की आवाजाही शुरू हुई।
जोशीमठ के एसडीएम अनिल चन्याल ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। दिनभर यहां मलबे में यात्रा वाहन फंसते रहे। खनोटी नाले से सेलंग और पैनी गांव के ग्रामीणों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी बह गई है। वहीं, भारी बारिश से सलूड़-डुंग्रा मोटर मार्ग भी जगह-जगह मलबा आने से बाधित हो गया है। सलूड़ गांव के आशीष सिंह के आवासीय भवन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। एसडीएम अनिल चन्याल ने कहा कि क्षेत्र में अवरुद्ध पड़े मोटर मार्गों को जेसीबी के जरिए खोला जा रहा है। बार-बार मौसम खराब होने के कारण सड़कों को सुचारु करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तरकाशी शुक्रवार देर रात से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। भूस्खलन के कारण शनिवार को यमुनोत्री हाईवे सहित करीब एक दर्जन मोटर मार्ग घंटों तक बाधित रहे। वहीं हर्षिल के निकट गदेरे में पानी बढ़ने और मलबा आने के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाधित हो गया है। हाईवे के दोनों ओर दर्जनों लोग घंटों फंसे रहे। जिन्हें बीआरओ कर्मचारियों ने दोपहर बाद सुरक्षित निकाल लिया। हाईवे को सुचारू करने का प्रयास किया जा रहा है।
शुक्रवार शाम से ही जनपद के तमाम क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही है। जिससे विभिन्न क्षेत्रों में भूस्खलन, भूधंसाव व गाड गदेरों में जल स्तर बढ़ने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में हर्षिल क्षेत्र स्थित नाले का जलस्तर बढ़ने व भारी मलबा आने के कारण गंगोत्री हाईवे का करीब 100 मीटर हिस्सा शनिवार सुबह आठ बजे बाधित हो गया। जिसके चलते दर्जनों तीर्थयात्री व स्थानीय ग्रामीण हाईवे के दोनों ओर फंस गए। मौके पर मौजूद बीआरओ कर्मियों ने कुछ ही घंटों में सभी लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित निकाल लिया।
बीआरओ कर्मचारी हाईवे खोलने में जुट गए हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव और मलबा अधिक होने के कारण समाचार लिखे जाने तक गंगोत्री हाईवे पर यातायात सुचारु नहीं हो सका है। उधर, ओजरी-डबरकोट में भारी भूस्खलन के कारण यमुनोत्री हाईवे भी देर रात से बाधित रहा। जिसे सुबह करीब आठ बजे सुचारु किया गया था। इसके अतिरिक्त हुल्डीयाणा, इंद्रा-टिपरी, छैजुला-कवाटा, नौगांव-राजगढ़ी, थौलधार-बयाली, टिकोची-सिरतोली, चिंवा-मोंडा, गमरी-मैंजणी, मोरी-सांकरी, ज्ञानसू-साल्ड तथा पलार मोटर मार्ग भी भूस्खलन के कारण घंटों तक बाधित रहे। उक्त सभी मोटर मार्गों पर दोपहर बाद तक यातायात बहाल कर लिया गया।
देवाल के फल्दिया गांव में दस दिन पूर्व प्राकृतिक आपदा के दौरान बही पुष्पा देवी का शव शनिवार को कल्याड़ी झूलापुल के पास पिंडर नदी के किनारे मिला है, जबकि उसकी बेटी ज्योति का अभी भी पता नहीं चल पाया है। राजस्व निरीक्षक एसएस नेगी ने बताया कि शनिवार की सुबह एक मछुवारे ने पिंडर नदी किनारे एक महिला का शव होने की सूचना दी। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर महिला के शव को नदी से निकाला।
महिला के शव की शिनाख्त फल्दिया गांव की पुष्पा देवी के रूप में उसके पति रमेश राम ने की। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को मौके पर ही पुष्पा देवी के शव का पोस्टमार्टम किया गया। उसके बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में पुष्पा देवी का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान एसडीएम केएस नेगी, तहसीलदार एसएस रांगण, राजस्व निरीक्षक एसएस नेगी, एसएचओ सुभाष जखमोला, चौकी प्रभारी जगमोहन पडियार, पटवारी विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।
विकासनगर में त्यूनी तहसील क्षेत्र के बानपुर और कास्टा गांव को जेपीआरआर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाला अस्थाई पुलिया शुक्रवार रात उफनाए कास्टा खड्ड की चपेट में आकर बह गई है। जिससे 150 परिवारों का संपर्क मुख्य सड़क से कट गया है। अब लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के नौ किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्रों को हो रही है। पुलिया निर्माण की मांग के लिए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि तीन साल पूर्व भी उफनाए खड्ड की चपेट में आकर स्थाई पुलिया बह गई थी। तब ग्रामीणों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लकड़ी की अस्थाई पुलिया का निर्माण किया था। लेकिन शुुक्रवार रात वह भी बह गई। जिससे ग्रामीणों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह से कट गया है। खड्ड में अब भी पानी तेज वेग के साथ आ रहा है। जिस कारण उसे पैदल भी पार नहीं किया जा सकता। कहा कि इन दिनों क्षेत्र में इन दिनों काश्तकारों की नकदी फसलें सेब, आलू, टमाटर, गोभी, आदि निकाली जा रही है। ऐसे में पुलिया के बहने के कारण अब काश्तकारों को इन फसलों को मंडी तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दूरी और अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है। शिकायत करने वालों में सुनील रावत, कमाल, त्रिलोक सिंह, यशवंत, कमाल सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।
तेज बारिश के बीच ग्राम पंचायत सुजऊ के बानुवा खेड़ा में एक मकान भरभरा कर ढह गया जबकि, इसी ग्राम पंचायत के टटाई खेड़ा में एक मकान को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। मकान के ढहने से पीड़ित परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत के बानुवा खेड़ा में गीताराम जोशी का मकान है। शुक्रवार सुबह चार बजे परिवार के सभी लोग घर में सो रहे थे। तभी गीताराम की भाभी ने कुछ गिरने की आवाज सुनी। उन्होंने बाहर जाकर देखा तो बांई तरफ की दीवार के पत्थर गिर रहे थे।
आनन फानन में उन्होंने सभी को घर से बाहर निकाला, जिसके बाद पूरा मकान ढह गया। मकान के नीचे दब कर रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं कपड़े, अनाज, बर्तन सब कुछ दब कर बर्बाद हो गया। इससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। वहीं, टटाई खेड़ा गांव निवासी दौलत राम जोशी के मकान की एक तरफ की दीवार गिर गई। जिस समय दीवार गिरी उस समय घर में कोई नहीं था, जिस कारण बड़ा हादसा होने से बच गया। पीड़ित परिवारों ने तहसील प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है। उधर, संपर्क करने पर तहसीलदार केएस नेगी ने बताया कि अभी फिलहाल मामला संज्ञान में नहीं है। पटवारी से रिपोर्ट मांगकर कार्रवाई की जाएगी।
मलबे में दबने से गर्भवती की मौत
तेज बारिश में बागेश्वर जिले की कांडा तहसील के अंतर्गत ढोलगांव में बृहस्पतिवार तड़के साढ़े तीन बजे एक मकान भरभराकर ढह गया। मलबे में गृहस्वामी देव सिंह की बहू प्रेमा देवी (22), बेटा नीरज सिंह नगरकोटी दब गए। दूसरे कमरे में सोए देव सिंह और उनकी पत्नी कौशल्या देवी ने शोर मचाया तो पड़ोस में रहने वाले पूरन सिंह ने मलबे में दबे नीरज को बाहर निकाल लिया। सूचना पर पहुंची आपदा प्रबंधन की टीम और ग्रामीणों ने प्रेमा देवी को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नीरज की कमर में हल्की चोट है। उसे सीएचसी कांडा में भर्ती कराया गया है। प्रेमा तीन माह की गर्भवती थी। उधर, पहाड़ी दरकने से पिथौरागढ़-टनकपुर एनएच पांच घंटे बंद रहा जबकि गणाईगंगोली-बनकोट सड़क 15 घंटे तक बंद रही।
भारी बोल्डर और मलबा आने से कैलाश मानसरोवर मार्ग तवाघाट के पास बंद हो गया। सड़क बंद होने से धारचूला से बूंदी जा रहे 17वें दल के यात्रियों को पांगला में रोका गया है। दल को रविवार को बूंदी के लिए रवाना किया जाएगा। मलबा आने से जिले की 10 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें हैं।
उधर, मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग पर दरकोट के पास चट्टान में दरार आने के कारण बीआरओ ने एहतियातन 21 अगस्त तक सड़क को बंद कर दिया है। वहीं, शनिवार को चंपावत-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग अलग अलग स्थानों आठ बार बंद हो गया। इधर स्वांला में सीएमओ के वाहन में पीछे की तरफ एक पत्थर लगा। इससे वे बाल-बाल बच गए। वहीं स्वांला से आगे आने पर आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के वाहन के शीशे में भी एक पत्थर लगा जिससे शीशे में दरार आ गई। उन्होंने भी वाहन को तुरंत उस जोन से बाहर निकाला।
बागेश्वर जिले के कांडा तहसील के अंतर्गत ढोल गांव के आपदा पीड़ित परिवार को प्रशासन ने गांव के पंचायत घर में शिफ्ट कर दिया है। ढोलगांव में देव सिंह नगरकोटी का मकान गुरुवार तड़के साढ़े तीन बजे भरभराकर ढह गया। मलबे में दबने से उनकी बहू प्रेमा देवी की मौत हो गई थी।

 

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11 दिन बाद जम्मू और लेह के लिए पत्रों, पार्सलों की बुकिंग शुरु

Parcel, Letters booking started now for Jammu and Leh.
Srinagar still it is blocked.

UK Post Office, Roorkee

Updated Sun, 18 Aug 2019 05:30 AM IST

डाकघरों से जम्मू और कश्मीर में भेजे जाने वाले पत्रों और पार्सलों की बुकिंग अब 11 दिन बाद फिर से शुरू हो गई है। इस पर बीती पांच अगस्त को रोक दी गई थी।

पांच अगस्त को सुबह 11 बजे राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह की ओर से जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए हटाने की घोषणा के एक घंटे बाद डाक निदेशालय, नई दिल्ली की ओर से जम्मू कश्मीर क्षेत्र के लिए भेजे जाने वाले पत्रों और पार्सलों की बुकिंग पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए थे।
इस आदेश पर कार्रवाई करते हुए डाकघर में उसी दिन दोपहर एक बजे से पत्रों और पार्सलों की बुकिंग पर रोक लगा दी गई थी। जम्मू में हालत सामान्य होने पर डाक निदेशालय की ओर से जम्मू संभाग और लेह के लिए जाने वाले पत्रों और पार्सलों की बुकिंग पर शुक्रवार से प्रतिबंध हटा लिया गया है। अभी श्रीनगर में प्रतिबंध जारी है। बताया जाता है कि अग्रिम आदेशों पर श्रीनगर संभाग में भी पत्रों और पार्सलों की बुकिंग पर से प्रतिबंध हटा लिया जाएगा।
डाक निदेशालय के आदेश पर जम्मू संभाग और लेह क्षेत्र को भेजे जाने वाले पत्रों और पार्सलों की बुकिंग 16 अगस्त से शुरु कर दी गई है।
- आरडी रतूड़ी, मुख्य पोस्टमास्टर, डाकघर रुड़की

 

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Uttarakhand में Rain का कहर, नदिया बनीं सैलाब, हर तरफ तबाही का मंजर
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Amar Ujala

Published on Aug 18, 2019


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#CloudBust #UttarakhandFlood #HeavyRain
बारिश से Uttarakhand में तबाही का आलम है।
बारिश की वजह से सड़कें टूट चुकी हैं।
पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। कई पहाड़ दरक गए हैं।
मकान के अंदर घुसकर पानी ने तबाही मचाई है।
 

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Cloud Burst And Flood Disaster In Uttarakhand Rivers Overflow Danger For Public

उत्तराखंड: विकराल हुई नदियां, त्यूनी और उत्तरकाशी में आपदा जैसे हालात, तस्वीरों में देखिए मंजर...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून, Updated Sun, 18 Aug 2019 06:12 PM IST

उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड में रविवार को लगातार हो रही बारिश से कई जगह नदियां उफान पर हैं। त्यूनी में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। वहीं उत्तरकाशी में मोरी प्रखंड में आराकोट बंगाण क्षेत्र में अतिवृष्टि के कारण भारी तबाही भी हुई है। दोनों ही जगह आपदा जैसे हालात से प्रशासन की टीम राहत कार्य में जुटी है। उत्तरकाशी में दो लोगों की मौत हो गई। चतर सिंह का मकान भूस्खलन के मलबे में दफन हो गया। इस घर में परिवार के पांच सदस्य मौजूद थे जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला


पहाड़ों की रानी मसूरी में भी कैंपटी-यमुनोत्री मार्ग भारी भूस्खलन के बाद बंद हो गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन जेसीबी के माध्यम से सड़क पर आए मलबे को हटाने में जुटा है। वहीं इसके कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई है।


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

नई टिहरी और आसपास के क्षेत्रों में भी रातभर से बारिश का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे ओजरी डबरकोट में भी बंद हो गया है। यमुना नदी के साथ-साथ सहायक नदी -नाले भी उफान पर हैं। चमोली जिले में भी भारी बारिश के चलते बदरीनाथ नेशनल हाईवे लामबगड़ और पीपलकोटी से टंगणी मे अवरुद्ध हो गया है।


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

भारी बारिश के बाद से अब अलकनंदा, पिण्डर, धोली,नंदाकनी, बालखिला नदियां उफान पर हैं। वहीं, सडकों पर मलबा आने से चमोली में 19 सडकें भी बंद हैं। उत्तरकाशी में भी जिले के अधिकांश हिस्सो में सुबह से बारिश का सिलसिला जारी है। गंगोत्री राजमार्ग चुंगी-बड़ेथी के पास मलबा और पत्थर आने से बंद हो गया है।


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच भूस्खलन का खतरा देखते हुए यात्रियों को पड़ावों पर रोका गया है। सुबह 8 बजे तक गौरीकुंड से 230 श्रद्धालुओं ने धाम के लिए प्रस्थान किया था।


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

बारिश के चलते रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पर बना पुराना झूला पुल टूटा गया है। त्यूनी में भी टोंस नदी के उफान पर पर आने से कई घर खतरे की जद में आ गए हैं। तहसील प्रशासन ने 35 परिवारों के घरों को खाली कराकर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

प्रदेश के नौ जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट के अनुसार देहरादून के साथ नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पौड़ी जिलों में बहुत भारी बारिश हो सकती है।


उत्तराखंड में बारिश का कहर

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उत्तराखंड में बारिश का कहर- फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार, टिहरी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि देहरादून और आसपास के इलाकों में दो से तीन दौर की तेज बारिश हो सकती है। इस दौरान चमक और गरज के साथ तेज बौछारें पड़ सकती है।


उत्तराखंड: विकराल हुई नदियां, त्यूनी और उत्तरकाशी में आपदा जैसे हालात, तस्वीरों में देखिए मंजर...
 

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3 killed, 22 go missing as heavy rain lashes Uttarakhand

Posted at: Aug 18, 2019, 6:32 PM
Last updated: Aug 18, 2019, 10:55 PM (IST)

Dehradun, August 18

Three people were killed and 22 went missing as heavy rain lashed Uttarakhand on Sunday, razing houses to ground and uprooting trees in the state.

Cloudbursts in Mori block of Uttarkashi district late on Saturday night flooded the tributaries of the Yamuna river which wreaked havoc in Arakot, Sanel, Makudi and Tikochi villages, flattening a number of houses.

One woman was killed in Makudi village of the district, while seven went missing as a dozen houses were flattened in the hamlet.

Another body was recovered in Sanel, where five people went missing. Ten more persons were reported missing in Arakot village, according to the state Emergency Operation Centre (SEOC) here.

The third death was reported from Rakhwan village of Tehri district, where a tree fell on a woman killing her on the spot, it said.

Efforts were made to reach the rain-affected areas by helicopters but it could not be possible due to bad weather with heavy rains lashing the region, State Disaster Managementr Secretary S Murugesan said.

Uttarkashi District Magistrate Ashish Chauhan said he has sought the help of the district magistrates of Dehradun and Shimla, the capital of neighbouring Himachal Pradesh, in rescue operations.

Police, ITBP, SDRF and Red Cross teams have been rushed to the rain-affected areas but rescue operations are being hampered by incessant rains, Chauhan said.

In view of the MeT department’s prediction of heavy rains, he has announced closure of schools and Anganwadi centres on Monday.

Dehradun District Magistrate C Ravishankar has also declared a holiday in schools on Monday in apprehension of heavy showers.

Chauhan has asked officials to be on the alert and keep satellites and disaster equipment ready to deal with any emergency.

Chief Minister Trivendra Singh Rawat has also asked officials to evacuate people trapped in Uttarkashi and make relief material available to them.

Chardham yatra routes are also blocked by the debris of landslides at various points affecting the yatra partially, the SEOC said.

The Rishikesh-Badrinath National Highway was blocked at Lambagad and Tangri, Kedarnath highway at Banswada and Jamu Nursery, Gangotri NH at Harshil, Badeti and Helgugad and Yamunotri highway at Dabarkot, it said.

Landslide on Kailash-Mansarovar route has also affected the pilgrimage with devotees being moved to safe places, it added.

A heavy boulder fell on the landslide prone Dhapa village of Munsiyari sub-division of Pithoragarh district that received 93 mm of rain in 12 hours, prompting the administration to shift 10 families residing in the village to safe places.

According to the district disaster management office, the road to Munsiyari from Jauljibi is closed due to rains for the last 12 hours.

“Munsiyari town is not affected, Thal route to the town is open”, SDM Bhagat Singh said. — PTI



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Cloud Burst In Chamoli Increases Danger Of Damage In Uttarakhand

उत्तराखंड: चमोली में बादल फटने से तबाही, नदी का कटाव भी बढ़ा, नालियां और कृषि भूमि बही

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 09 Sep 2019 08:41 AM IST


चामोली में बादल फटने से बढ़ी परेशानी


चामोली में बादल फटने से बढ़ी परेशानी - फोटो : अमर उजाला



उत्तराखंड के चमोली जिले में बरसात का कहर जारी है। शनिवार रात को घाट क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के दौरान धुर्मा गांव के बीचोंबीच बह रहे बरसाती नाले में बादल फटने से दो आवासीय मकान पानी के सैलाब में समा गए, जबकि तीन मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी बह गई है। उफनाए बरसाती गदेरे के मोक्ष नदी में मिलने से गांव को खतरा उत्पन्न हो गया है।


घाट क्षेत्र में हर रोज रात को भारी बारिश हो रही है, जिससे ग्रामीण सहमे हुए हैं। शनिवार रात को भी भारी बारिश ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी। देर रात तीन बजे धुर्मा गांव के बीचों बीच बह रहे बरसाती गदेरे के शीर्ष भाग में बादल फटने से मलबा गदेरा गांव को तहस-नहस कर मोक्ष नदी तक पहुंच गया।

गदेरे के कटाव से जयवीर सिंह और विक्रम सिंह रावत के आवासीय मकान भी मलबे में समा गए। जबकि महावीर सिंह, जय सिंह बिष्ट और वीरेंद्र सिंह के आवासीय मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

ग्रामीणों की कई हेक्टेयर भूमि भी बह गई है। राजकीय इंटर कॉलेज मोख धुर्मा की सुरक्षा दीवार बहने से विद्यालय भवन को खतरा उत्पन्न हो गया है। घाट-धुर्मा-सेरा मोटर मार्ग भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


सात आवासीय मकानों को खाली करवाया
घटना की सूचना मिलने पर रविवार को घाट तहसील की टीम मौके पर पहुंची। धुर्मा गांव के राजस्व उपनिरीक्षक मोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि बारिश को देखते हुए प्रशासन ने गदेरे के दोनों ओर सात आवासीय मकानों को खाली करवा दिया है।

प्रभावित ग्रामीणों को गांव में ही अन्य सुरक्षित स्थानों में रहने की सलाह दी गई है। घाट के निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख कर्ण सिंह ने जिला प्रशासन से धुर्मा गांव के बीचों बीच गदेरे के दोनों ओर शीघ्र बाढ़ सुरक्षा कार्य करवाने की मांग उठाई है। तहसील की टीम ने प्रभावित ग्रामीणों को राहत सामग्री भी वितरित की।

घाट ब्लाक के धुर्मा गांव के बरसाती नाले में रविवार को तड़के बादल फटने से हुई क्षति का आकलन करने के लिए घाट तहसील की टीम को तत्काल मौके पर भेज दिया गया है। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री भी प्रशासन की ओर से वितरित की गई है। ग्रामीणों को गदेरे के इर्द-गिर्द निवास न करने की सलाह दी गई है।
-स्वाति एस भदौरिया, डीएम, चमोली


1000 यात्रियों को बदरीनाथ जाने से रोका
गोविंदघाट में बादल फटने से अवरुद्ध हुए बदरीनाथ हाईवे पर रविवार को दूसरे दिन भी वाहनों की आवाजाही सुचारु नहीं हो पाई है। लोक निर्माण विभाग व सीमा सड़क संगठन के मजदूर और जेसीबी मशीनें हाईवे को सुचारु करने में जुटी हैं।

प्रशासन की ओर से बदरीनाथ धाम जाने वाले लगभग 1000 तीर्थयात्रियों को जोशीमठ, गोविंदघाट और पांडुकेश्वर में रोक दिया गया है, जबकि 300 तीर्थयात्रियों को बदरीनाथ धाम में रोका गया है। जिला प्रशासन ने सोमवार तक हाईवे पर आवाजाही सुचारु कर लिए जाने का दावा किया है।

शनिवार सुबह पांच बजे गोविंदघाट में बादल फटने से गुरुद्वारे के समीप वाहन पार्किंग स्थल में कई वाहन मलबे में दब गए थे, जबकि बदरीनाथ हाईवे तीन जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया था। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता हीरा सिंह नेगी ने बताया कि शनिवार को ही हेमकुंड साहिब के पैदल रास्ते को खोलने का काम शुरू कर दिया गया था।

रविवार को हेमकुंड से आ रहे 80 तीर्थयात्रियों को पैदल उनके गंतव्य को भेजा गया। वहीं, बदरीनाथ हाईवे पर बह चुके 30 मीटर हाईवे को सुचारु करने का काम रविवार को भी जारी रहा। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि बदरीनाथ हाईवे को सुचारु करने का काम तेजी से चल रहा है। रात को भी ऑस्कर लाइट के रोशनी में हाईवे को सुचारु करने का काम किया जाएगा।


पैदल रास्ते भी क्षतिग्रस्त
सोमवार को बदरीनाथ धाम में फंसे तीर्थयात्रियों और उनके वाहनों को निकाल दिया जाएगा। साथ ही तीर्थयात्रा भी सुचारु हो जाएगी। इधर, लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता प्रदीप बिष्ट ने बताया कि गोविंदघाट में बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब के पैदल रास्ते को तीर्थयात्रियों के आने-जाने के लिए सुचारु कर दिया गया है। कई जगहों पर बोल्डरों को तोड़कर रास्ता बनाया जा रहा है।

आपदा प्रभावित बांजबगड़ क्षेत्र में पैदल रास्ते भी तहस-नहस पड़े हुए हैं। पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को पीने के पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। बीते माह 12 अगस्त को बांजबगड़ क्षेत्र में बादल फटने के बाद मलबे में दबने से मां-बेटी समेत छह लोगों की मौत हो गई थी।

सरपाणी गांव के पूर्व प्रधान देवेंद्र नेगी, देवेश्वरी देवी और संध्या देवराड़ी ने मांग की है कि क्षेत्र में शीघ्र मनरेगा और आपदा के तहत पैदल रास्तों का निर्माण कार्य शुरू किया जाए, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। उन्होंने भूस्खलन से तहस-नहस पड़े घाट-रामणी, घाट-नंदप्रयाग और अन्य संपर्क मार्गों की स्थिति सुधारने की मांग की है।


पिंडर के कटाव से चार मकान क्षतिग्रस्त
पिंडर नदी के कटाव से रविवार को ओडर गांव में चार आवासीय मकान व दो गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। मेलखेत के बमणीगाड़ गदेरे में बनी सीसी पुलिया भी मलबे की चपेट में आ गई है। ग्रामीणों ने आवाजाही के लिए गदेरे में डंडे डालकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है, लेकिन इस पर आवाजाही खतरनाक बनी है।

ब्लॉक का ओडर गांव पिंडर नदी से करीब तीन सौ मीटर ऊपर स्थित है। यहां पिछले साल से पिंडर नदी के कटाव से भूस्खलन हो रहा है। ग्रामीण दिवानी राम ने बताया कि रविवार को तेज बारिश के दौरान पिंडर नदी के कटाव से महेशी देवी, जसपाल राम, प्रदीप राम, खीम राम के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और शंकर राम व लीला राम के मकानों में दरारें पड़ गई हैं।

प्रदीप व जसपाल राम की गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। तहसीलदार एसएस रागंड़ ने बताया कि सभी प्रभावित परिवार शनिवार रात को ही सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। लोगों ने रात को ही अपने घरों को खाली कर दिया था। उन्होंने बताया कि सभी प्रभावितों को शीघ्र आर्थिक सहायता दी जाएगी।

मेलखेत के बमणीगाड़ गदेरे पर बनी सीसी पुलिया के बहने से मेलखेत, बमणीगाड़, कालीमुनि व मौनीगाड़ बस्ती का संपर्क कट गया। रविवार को ग्रामीणों ने लकड़ी के डंडे डालकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है। गांव के निर्वतमान बीडीसी सदस्य पुष्पा जोशी ने एसडीएम को ज्ञापन भेजकर यहां पुलिया बनाने की मांग की है।


https://www.amarujala.com/dehradun/cloud-burst-in-chamoli-increases-danger-of-damage-in-uttarakhand
 

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6 / 11 / 16 October 2019 Panchayat Elections in Uttarakhand's Villages.





Uttarakhand Panchayat Election 2019 Will Held From For 6th October In Three Phases

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: उत्तराखंड में छह अक्टूबर से तीन चरणों में होंगे चुनाव, अधिसूचना जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 14 Sep 2019 01:19 PM IST

पंचायत चुनाव

पंचायत चुनाव - फोटो : फाइल फोटो


उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का शुक्रवार को एलान हो गया। हरिद्वार जिले को छोड़कर बाकी 12 जिलों में तीन चरणों में चुनाव कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान छह, दूसरे का 11 और तीसरे का मतदान 16 अक्टूबर को होगा। नामांकन प्रक्रिया 20 सितंबर से शुरू हो जाएगी। 21 अक्टूबर को मतगणना शुरू होगी। वहीं, मतदान ईवीएम से कराया जाएगा।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी करते ही हरिद्वार जिले और नगरीय क्षेत्र को छोड़कर 12 जिलों के बाकी इलाकों में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले सप्ताह ही प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम सरकार को भेज दिया था। सूत्रों के अनुसार, आयोग के प्रस्ताव पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को ही अनुमोदन दे दिया था।

चुनाव कार्यक्रम पर शासन ने शुक्रवार को मुहर लगाते हुए अधिसूचना जारी कर दी। शाम को राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर भी अधिसूचना जारी हो गई। त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत के 65 हजार से ज्यादा पदों के लिए 43 लाख 11 हजार 423 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।



ये है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का कार्यक्रम
नामांकन : पहले, दूसरे और तीसरे चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया 20 सितंबर 2019 से शुरू होकर 24 सितंबर 2019 तक चलेगी। इस बीच 22 सितंबर 2019 को नामांकन नहीं होंगे। नामांकन सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक कराए जा सकेंगे।

नामांकन पत्रों की जांच : नामांकन पत्रों की जांच का कार्य 25 सितंबर 2019 से 27 सितंबर 2019 तक चलेगा। इसका समय सुबह आठ बजे से कार्य समाप्ति तक रहेगा।

नाम वापसी : नामांकन पत्र वापस लेने की तारीख 28 सितंबर 2019 तय की गई है। सुबह आठ बजे से अपराहृन तीन बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।

सिंबल आवंटन : पहले चरण के चुनाव के लिए उम्मीदवारों को सिंबल का आवंटन 29 सितंबर 2019 को होगा। दूसरे चरण के लिए सिंबल आवंटन चार अक्टूबर 2019 को होगा, जबकि तीसरे चरण के लिए यह कार्य नौ अक्टूबर 2019 को होगा। सिंबल आवंटन का कार्य सुबह आठ बजे से शुरू होकर कार्य समाप्ति तक चलेगा।

मतदान : पहले चरण के लिए मतदान छह अक्टूबर, दूसरे चरण के लिए 11 अक्टूबर और तीसरे और आखिरी चरण का मतदान 16 अक्टूबर 2019 को कराया जाएगा। मतदान सुबह आठ बजे से शुरू होकर शाम पांच बजे तक चलेगा।

मतगणना/परिणाम : मतगणना 21 अक्टूबर 2019 को सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगी। इसके बाद कार्य समाप्ति तक मतणगना जारी रहेगी।


पहली बार दो बच्चों और शैक्षिक योग्यता का नियम
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार पहली बार दो खास नियम शामिल रहेंगे। दो से ज्यादा बच्चों वाले दावेदारों को चुनाव से बाहर रहना होगा। सिर्फ दो या एक बच्चे वाले दावेदार ही चुनाव लड़ पाएंगे। इसके अलावा, विभिन्न पदों के लिए पहली बार उम्मीदवारों के लिए शैक्षिक योग्यता भी निर्धारित कर दी गई है। कुछ पदों के लिए आठवीं तो कुछ के लिए दसवीं पास होना अनिवार्य होगा।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही हरिद्वार जिले और नगरीय क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी 12 जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव आचार संहिता मतगणना खत्म होने तक जारी रहेगी।
-चंद्रशेखर भट्ट, राज्य निर्वाचन आयुक्त, उत्तराखंड।

तीन बार टली थी आरक्षण प्रक्रिया
तीन बार टलने के बाद हरिद्वार को छोड़कर 12 जिलों में 31 अगस्त को त्रिस्तरीय पंचायतों का आरक्षण तय हो पाया। जिलों के स्तर पर तय किए आरक्षण का अंतिम प्रकाशन कर दिया है। तय कार्यक्रम के हिसाब से प्रदेश में ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों में आरक्षण की सूची का अनंतिम प्रकाशन 17 अगस्त को किया जाना था।

ऐन वक्त पर तय किया गया कि सूची का प्रकाशन 20 अगस्त को किया जाएगा। 20 अगस्त को भी सूची का प्रकाशन नहीं हो पाया और शासन ने 22 अगस्त को सूची के प्रकाशन का फैसला किया। इसके बाद चौथी बार 31 अगस्त को यह जारी किया गया। वहीं मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा तो सरकार ने हाईकोर्ट को 30 नवंबर, 2019 तक हर चुनाव करा लेने का भरोसा दिलाया था।


16 से शुरू हो जाएगी नामांकन पत्रों की बिक्री
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की बिक्री का काम 16 सितंबर से शुरू हो जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर की गई अधिसूचना के अनुसार, ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के लिए ब्लाक मुख्यालय और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए जिला पंचायत मुख्यालय में नामांकन पत्रों की बिक्री होगी। नामांकन पत्रों की बिक्री 16 से 23 सितंबर तक कार्यालय समय में होगी। 24 सितंबर को अपराहृन तीन बजे तक नामांकन पत्रों की बिक्री होगी।

तीसरे चरण में सबसे कम ब्लाकों में होगा मतदान

राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव का जो कार्यक्रम जारी किया है, उसमें तीसरे चरण में सबसे कम 28 ब्लाकों में मतदान होगा। सबसे ज्यादा 31 ब्लाकों में दूसरे चरण का मतदान रखा गया है, जबकि पहले चरण में 30 ब्लाकों को कवर किया गया है।

निर्वाचन आयोग ने पहले चरण में चंपावत और ऊखीमठ ब्लाक के सिर्फ एक-एक ब्लाक को लिया है, जबकि सबसे ज्यादा अल्मोड़ा जिले में चार ब्लाकों में मतदान होगा। दूसरे चरण में बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जिले के एक एक ब्लाक में मतदान होगा। चंपावत, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जिले में आखिरी चरण में एक एक ब्लाक में मतदान रखा गया है।


त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: उत्तराखंड में छह अक्टूबर से तीन चरणों में होंगे चुनाव, अधिसूचना जारी
 

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Uttarakhand Weather Badrinath, Pithoragarh Tawaghat, Thal Munsyari Highway Block
उत्तराखंडः बदरीनाथ हाईवे बंद, पिथौरागढ़ में सड़क बही, चट्टान की चपेट में आने से बच्चे की मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 14 Sep 2019 01:09 PM IST


यहीं दबकर हुई बच्चे की मौत


यहीं दबकर हुई बच्चे की मौत - फोटो : अमर उजाला


उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन की खबरें सामने आ रही हैं। बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में भूस्खलन होने से फिर बंद हो गया है। थल मुनस्यारी मार्ग पर दरारें पड़ गई हैं। वहीं पिथौरागढ़ तवाघाट हाईवे कालिका के पास बह गया है।

अल्मोड़ा जिले में जौरासी के सोगड़ा गांव में चट्टान से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई। बताया गया कि बच्चा अपनी मां के साथ ननिहाल आया था। वहां सड़क निर्माण का काम चल रहा है।




बदरीनाथ हाईवे बंद

आज सुबह भूस्खलन होने से लामबगड़ में बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया है। लामबगड़ के स्थाई ट्रीटमेंट को लेकर बदरीनाथ धाम में व्यापारी प्रदर्शन कर रहे हैं। भारी बारिश से पिथौरागढ़ तवाघाट हाईवे कालिका के पास बह गया है।

लोगों ने एक मरीज को अपनी जान जोखिम में डालकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया। बागेश्वर जिले के कपकोट में भूस्खलन से 15 सड़कों पर यातायात रुका हुआ है। पिथौरागढ़ जिले के थल-मुनस्यारी मार्ग पर लंबी दरारें पड़ चुकी हैं। मार्ग दूसरे दिन भी यातायात के लिए बंद रहा।



कई इलाकों में आज भी बारिश की संभावना

राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के कई इलाकों में आज भी बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार ज्यादातर क्षेत्रों में बादल छाये रह सकते हैं। कुछ इलाकों में गरज और चमक के साथ बौछारें भी पड़ सकती हैं।

उत्तराखंडः बदरीनाथ हाईवे बंद, पिथौरागढ़ में सड़क बही, चट्टान की चपेट में आने से बच्चे की मौत
 
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