Road conditions - Uttarakhand

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Hi...

Can anyone suggest best route from Roorkee to Chandigarh ? GMaps shows 2 routes...via Saharanpur & other through Bilaspur-Shahzadpur which looks like SH / non-SH/NH road.

Thanks...
I would prefer the usual roorke-ambala-chandigarh.
But one can also go via shazadpur all the way to Chandigarh/Panchkula. Butter smooth roads and 4 lane all the way except few diversions

Bilaspur-shazadpur section, hope this helps :
Checked with a regular there. Road is 2 lane without divider and road condition is good.
Traffic is also less.

A Local @BCMTian replied.
 
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1 Leopard shot dead, Hunters are after other 1 in Pauri Garhwal.....


आतंक का पर्याय बना आदमखोर गुलदार हुआ ढेर, एक और की हो रही खोज

Publish Date:Tue, 29 Oct 2019 06:08 PM (IST)


आतंक का पर्याय बना आदमखोर गुलदार हुआ ढेर, एक और की हो रही खोज


खंडाह बछेली क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने आदमखोर गुलदार को शिकारी जॉय हुकिल ने ढेर कर दिया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली।

श्रीनगर(गढ़वाल), जेएनएन। पौड़ी जिले के खंडाह बछेली क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने आदमखोर गुलदार को शिकारी जॉय हुकिल ने ढेर कर दिया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इलाके में एक और गुलदार देखे जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। फिलहाल, उसकी खोजबीन की जा रही है।
बता दें कि मारे गए गुलदार को वन विभाग ने दो दिन पहले ही नरभक्षी घोषित किया था। शिकारी जॉय हुकिल बछेली में कैंप लगाकर आदमखोर गुलदार की तलाश में थे। सोमवार रात करीब 11 बजे बछेली के जंगल में शिकारी ने गुलदार पर निशाना साधा। गोली लगने से वह लुढ़कर नीचे सड़क पर गिर गया और कुछ देर में उसने दम तोड़ दिया।
वन क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार भट्ट ने बताया कि क्षेत्र में दो गुलदारों के देखे जाने के बाद से यहां दो पिंजरे भी लगाए गए हैं। शिकारी की गोली का निशाना बना गुलदार नर था, उसकी उम्र छह से सात साल थी। जिस दूसरे गुलदार की तलाश की जा रही है, वह मादा है। वन रेंजर का कहना है कि नर गुलदार के मारे जाने से मादा गुलदार ज्यादा आक्रामक हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की टीम यहां निगरानी रखेगी।
उल्लेखनीय है कि श्रीनगर शहर और आसपास के क्षेत्रों में आए दिन गुलदार की धमक बनी रहती है। इसी साल जुलाई में श्रीनगर मेडिकल कालेज की इमारत में भी गुलदार घुस आया था। दो दिन बाद इसे शिकारियों की टीम ढेर कर पाई थी।


आतंक का पर्याय बना आदमखोर गुलदार हुआ ढेर, एक और की हो रही खोज
 

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Uttarakhand Weather Update: Rainfall And Cold Waves Increase After Seven November
उत्तराखंड: सात नवंबर से बदलेगा मौसम का मिजाज, बारिश से बढ़ेगी ठंड और कोहरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Thu, 31 Oct 2019 11:40 PM IST

Uttarakhand Weather Update: Rainfall and Cold Waves increase after Seven November

- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर


सात नवंबर से उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। कुमाऊं में हल्की से मध्यम बारिश होगी जबकि 10 नवंबर से प्रदेश में ठंड बढ़ेगी। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र ने ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में सुबह हल्का कोहरा पड़ने की संभावना जताई है।

बृहस्पतिवार को हल्द्वानी का अधिकतम तापमान 28.8 और न्यूनतम तापमान 17.0 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस कम और न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान 20.2 और न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस रहा। यहां अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस अधिक और न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। नैनीताल का अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहा।

राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा। पांच और छह को तापमान में बढ़ोतरी होगी। सात और आठ को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। दस नवंबर से मौसम बदलेगा और तापमान में गिरावट आने के साथ ही ठंड बढ़ेगी।

पंतनगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि अरब सागर से आए चक्रवात के प्रभाव के चलते बादल और हवा के कारण नमी बन रही है। उत्तर पश्चिम दिशा से आ रही नम हवाओं के कारण हल्की धुंध छाई है जबकि पटाखों से हुए प्रदूषण के कारण भी धुंध की एक परत बनी हुई है। दो दिन में मौसम साफ होने की संभावना है।

नैनताल में धूप खिली, पहाड़ों में कोहरा
लगातार तीन दिन तक शहर और आसपास के क्षेत्रों में कोहरा छाने के बाद बृहस्पतिवार को सरोवर नगरी में दिन भर धूप खिली रही। मौसम साफ होने के कारण सैलानियों ने भी नगर और आसपास के पिकनिक स्पॉटों में जमकर मस्ती की। वहीं, सिल्टोना, दडमाड़ी, मल्ला डोबा, गजार गांव में बृहस्पतिवार सुबह से ही कोहरा छाया रहा, इससे दिन भर ठंड रही। सुबह आठ बजे तक कोहरे के नहीं हटने से वाहन चालकों को लाइट जलाकर सफर करना पड़ा। दोपहर बाद धूप खिलने के साथ ही कोहरा भी धीरे-धीरे छंटने लगा।


 

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Kedarnath Doly Will Stay In Omkareshwar Temple Till Six Months
शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर में विराजे भगवान केदारनाथ, अगले छह महीने यहीं होगी पूजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऊखीमठ Updated Thu, 31 Oct 2019 05:51 PM IST

बाबा केदार की डोली

बाबा केदार की डोली - फोटो : अमर उजाला


भगवान आशुतोष के ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग बाबा केदारनाथ की भोगमूर्तियों को शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। इस अवसर पर केदारघाटी सहित अन्य जगहों से भारी संख्या में पहुंचे शिव भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा। अब, छह माह तक बाबा केदार की पूजा यहीं पर होगी।

स्थानीय वाद्य यंत्रों और 10-जेकेलाई के बैंड धुनों और भक्तों के जयकारों के बीच पूर्वान्ह 11.30 बजे भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली पंचकेदार शीतकालीन गद़्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में पहुंची। यहां पर भक्तों ने आराध्य का फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया। मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद उपरांत ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारी शिव शंकर लिंग ने भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली की आरती उतारी।

इस मौके पर रावल भीमाशंकर लिंग ने भोगमूर्तियों को डोली से उतारा। आचार्य विश्वमोहन जमलोकी, यशोधर मैठाणी, स्वयंबर सेमवाल ने वेद मंत्रों के साथ बाबा केदार के आह्वान के साथ केदारनाथ के पुजारी केदार लिंग ने भोगमूति को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया। इस दौरान सभी धार्मिक औपचारिकताओं का निर्वहन किया गया। रावल द्वारा शिव भक्तों को केदारनाथ से लाया गया उदक जल और भष्म को प्रसाद रूप में वितरित किया गया। इससे पूर्व सुबह 8.30 बजे बाबा केदार की चल विग्रह डोली ने काशी-विश्वनाथ मंदिर से प्रस्थान किया। विद्यापीठ होते हुए डोली सुबह 10 बजे जयवीरी पहुंची।

यहां पर ग्रामीणों ने आराध्य का स्वागत करते हुए सामूहिक अध्र्य लगाया। कुछ देर विश्राम के बाद बाबा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान करते हुए 10.30 बजे देवदर्शनी पहुंची। यहां पर भक्तों ने पुष्प-अक्षत के साथ आराध्य का स्वागत किया। इसके बाद भक्तों के जयकारों के साथ बाबा की डोली ने पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में प्रवेश किया। इस मौके पर बीकेटीसी के उपाध्यक्ष अशोक खत्री, पूर्व विधायक शैलारानी रावत, कार्यधिकारी एनपी जमलोकी, प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, मंदिर सुपरवाइजर युद्धवीर पुष्पवाण, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, आचार्य हर्ष जमलोकी, बबलू जंगली, नपं अध्यक्ष विजय राणा, ग्राम प्रधान संदीप पुष्पवाण, सभासद रवींद्र रावत, प्रदीप धरम्वाण, रीता पुष्पवाण समेत अन्य मौजूद थे।


शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर में विराजे भगवान केदारनाथ, अगले छह महीने यहीं होगी पूजा
 

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Gangotri National Park Will Open Till 30th November This Year For Trekking
इस बार 30 नवंबर तक खुला रहेगा गंगोत्री नेशनल पार्क, कर सकेंगे दुर्लभ जीवों का दीदार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Fri, 01 Nov 2019 01:20 AM IST

गंगोत्री नेशनल पार्क

गंगोत्री नेशनल पार्क


खास बातें
  • ट्रेकिंग एवं माउंटेनियरिंग कारोबारियों की मांग पर वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने दिए निर्देश

गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट इस वर्ष 30 नवंबर को बंद किए जाएंगे। ट्रेकिंग एवं माउंटेनियरिंग कारोबारियों की मांग पर वन विभाग ने पार्क के गेट बंद करने की तिथि को आगे बढ़ाया है।

गंगोत्री नेशनल पार्क हर साल 15 अप्रैल से 15 नवंबर तक खुला रहता है। इस दौरान देश विदेश के सैकड़ों पर्यटक यहां आकर मां गंगा के उद्गम गोमुख के साथ ही स्नो लेपर्ड, भरल, भूरा भालू, लाल लोमड़ी आदि दुर्लभ वन्य जीवों का दीदार करते हैं, जबकि रोमांच के शौकीन लोग यहां मौजूद हिम शिखरों पर आरोहण और उच्च हिमालयी ट्रेकिंग के लिए आते हैं।

हालांकि मानसून सीजन में गाड़ गदेरों के उफान में आने व भूस्खलन के जोखिम के चलते एक-दो माह तक पार्क क्षेत्र में अधिकांश पर्यटन गतिविधियां प्रभावित रहती हैं। इस समस्या को देखते हुए कारोबारियों ने वन विभाग से पार्क को अधिक समय के लिए खोलने की मांग की थी, जिसका संज्ञान लेते हुए वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट खोलने व बंद करने की तिथियों में संशोधन कर दिया है।

जिसके तहत अब पार्क के गेट 30 नवंबर को बंद होंगे, जबकि अगले वर्ष इन्हें एक अप्रैल को पुन: खोला जाएगा। पार्क प्रशासन के इस निर्णय से पर्यटकों को गंगोत्री नेशनल पार्क में भ्रमण करने के लिए करीब एक माह का अतिरिक्त समय मिल गया है।

एसोसिएशन ने पार्क प्रशासन से गंगोत्री नेशनल पार्क को 15 मार्च से 30 नवंबर तक खोलने की मांग की थी, जिस पर यह निर्णय हुआ है। इससे निश्चित ही जिले में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के अधिक अवसर तैयार होंगे।
-जयेंद्र राणा, अध्यक्ष, ट्रेकिंग एवं माउंटेनियरिंग एसोसिएशन, उत्तरकाशी।

वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने पार्क को एक अप्रैल से तीस नवंबर तक खोलने का निर्णय लिया है। अब सर्दियों में बर्फबारी एवं अन्य विपरीत स्थितियों को देखते हुए सिर्फ पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से ही रोमांच के शौकीन पर्यटकों को पार्क क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
-नंदबल्लभ शर्मा, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क।


 

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Farmers Protest At Meerut Commissionary For Land Compensation Of Meerut Express Way

मुआवजे पर घमासान: किसानों ने किया आर-पार की लड़ाई का एलान, ये हैं 10 बड़ी मांगें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ, Updated Sun, 03 Nov 2019 01:05 AM IST


कमिश्नरी पर तैनात पुलिस

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कमिश्नरी पर तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर किसानों ने आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान कर दिया है। एक समान मुआवजा न मिलने का कई माह से विरोध कर रहे किसानों ने पदयात्रा का एलान किया था। चार दिनों तक 50 किलोमीटर का सफर पूरा कर पदयात्रा शनिवार को मेरठ कमिश्नरी पहुंची। यहां सैकड़ों की संख्या में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया और सरकार को किसान विरोधी बताया।

किसान कल्याण समिति के बैनर तले हो रहे इस धरने में 19 गांवों के किसान शामिल हैं। सभी किसान एनएचएआई द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीन के मामले में नाखुश हैं। उनका कहना है कि गांवों के लिए अलग-अलग रेट का मुआवजा तय किया गया है। जबकि हाल ही में बनाए गए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे में एकसमान मुआवजा दिया गया था। डासना से 30 अक्तूबर को सुबह 11 बजे शुरू हुई पदयात्रा ने कलछीना, मुरादाबाद, भूडबराल में रात्रि विश्राम किया। पदयात्रा का समापन शनिवार शाम 4:30 बजे कमिश्नरी पार्क में हुआ।




कमिश्नरी पार्क में सभा के लिए लगाया गया पंडाल

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कमिश्नरी पार्क में सभा के लिए लगाया गया पंडाल - फोटो : अमर उजाला

ये गांव हो रहे प्रभावित
भटजन, पलौता, मुरादाबाद, फजलगढ़, भोजपुर, शकूरपुर, किल्हौड़ा आदि गांव शामिल हैं।

...प्रतिकर अलग क्यों
किसानों का कहना है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट में एक ही गांवों में प्रतिकर रेट अलग-अलग थे। उन्होंने गांववार सूची बनाकर ज्ञापन तैयार किया। वर्ष 2010 में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के नोटिफिकेशन में 3500 और 4400 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से प्रतिकर दिया गया। जबकि साल 2014 के ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में 2102 और 2732 की दर से प्रतिकर दिया गया।

हाईवे पर लगा भीषण जाम
किसानों की पदयात्रा मोदीनगर से परतापुर में पहुंचने के बाद शनिवार को परतापुर तिराहे के समीप पंचायत के बाद कमिश्नरी के लिए पदयात्रा शुरू की गई। पदयात्रा में मौजूद सैकड़ों किसान जैसे ही हाईवे पर पहुंचे तो जाम लगने लगा। किसानों के हाईवे पर पहुंचते ही परतापुर से लेकर मोहिद्दीनपुर तक भीषण जाम की स्थिति बन गई। जाम में एंबुलेंस सहित स्कूली बसें भी फंसी रहीं। काफी मशक्कत के बाद ट्रैफिक पुलिस ने जाम पर काबू पाया।




मौके पर मौजूद पुलिस

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मौके पर मौजूद पुलिस- फोटो : अमर उजाला

प्रशासन से वार्ता विफल, आज महापंचायत
कमिश्नरी पार्क में डेरा डालने से पहले पहले किसान कल्याण समिति के पदाधिकारी, सपा नेता, अतुल प्रधान, रालोद क्षेत्रीय अध्यक्ष यशवीर सिंह आदि ने प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार पांडे के कार्यालय में हुई वार्ता में समिति ने मांगें रखीं। लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। वार्ता में एडीएम सिटी अजय तिवारी, एसपी सिटी एएन सिंह, सहायक कमिश्नर मौजूद रहे। रालोद नेता यशवीर सिंह ने बताया कि हमने अपना मांग पत्र प्रशासन को दे दिया। कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं हम कमिश्नरी पार्क से नहीं उठेंगे। इसके अलावा रविवार को महापंचायत कर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इस वार्ता में किसान कल्याण समिति से बबली गुर्जर, बबली कसाना, बाबूराम, टीकम नागर, अमरजीत, सतीश राठी, अमरपाल आदि मौजूद रहे।

महिलाएं भी कमिश्नरी पार्क पहुंची
पदयात्रा में किसान परिवार की काफी संख्या में महिलाएं भी कमिश्नरी पार्क में पहुंची। उन्होंने भी किसान विरोधी सरकार के नारे लगाकर अपनी आवाज बुलंद की। कहा कि अगर इस बार बात नहीं मानी गई तो हम एक्सप्रेस वे पर काम नहीं करने देंगे। सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पुरुषों से आगे अब महिलाएं रहेंगी, तभी हमारी समस्या खत्म हो सकती है।



कमिश्नरी पर तैनात पुलिस का वज्र वाहन

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कमिश्नरी पर तैनात पुलिस का वज्र वाहन- फोटो : अमर उजाला

पदयात्रा में बजे देशभक्ति के तराने
डासना से मेरठ तक चली इस पदयात्रा में देशभक्ति के तराने बजे। देशभक्ति के गानों पर किसान, युवा वर्ग झूमते नजर आए। किसान कहते सुने गए कि सरकार को इस बार होश में आकर हमें नियम के साथ मुआवजा देना होगा, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू हो सके।

यह बोले किसान
- हमें मुआवजे की राशि अन्य गांवों से कम दी गई है। मेरी साढ़े 16 बीघा जमीन एक्सप्रेस-वे में गई है। - सुलेमान, कुशालिया गांव
- तीन बीघा जमीन लेकर हमारे साथ धोखा किया है। अब इसके बाद कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। - जाकिर, सौलाना गांव
- एक्सप्रेस-वे में गरीबों के साथ धोखा किया है। पता ही नहीं चला कि किसको किस आधार पर मुआवजा दिया। मेरी भी ढाई बीघा जमीन थी। - महबूब, सौलाना गांव
- हमारी भूमि का कोई हिसाब नहीं दिया गया। मुआवजा भी अलग-अलग दिया गया है। जिससे हम काम नहीं होने देंगे। मेरी चार बीघा जमीन थी। - जुनैद, कांशी गांव
- मेरी 14 बीघा जमीन थी। लेकिन मेरी चार बीघा जमीन का मुआवजा दूसरे को दे दिया। - इस्लाम, कुशालिया, गांव




पदयात्रा में शामिले किसान

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पदयात्रा में शामिले किसान- फोटो : अमर उजाला

ये हैं मांगें
1. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एक प्रोजेक्ट के लिए एक समान मुआवजा दिया जाए।
2. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर एकसमान मुआवजा दिया जाए।
3. डासना से मेरठ तक किसानों के आवागमन के लिए सर्विस रोड का निर्माण।
4. टेंडर में वर्णित अंडरपास की ऊंचाई 5.5 मीटर हो। इसे छोटा कर दिया गया है। जिससे ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों का अंडरपास से गुजरना संभव नहीं है।
5. प्राप्त मुआवजे की रकम से कृषि भूमि खरीदने पर स्टांप शुल्क मुफ्त कर दें। आयकर के अवांछित नोटिस बंद करें।
6. हाईवे की साइड में किसानों के आवागमन को रोकने वाली दीवार को हटाया जाए।
7. रेलवे कॉरीडोरके लिए अधिग्रहीत भूमि की तर्ज पर प्रभावित प्रत्येक खाताधारक को साढ़े पांच लाख रुपये दिए जाएं।
8. किसानों को हाईवे के इस्तेमाल पर टोल टैक्स फ्री किए जाएं। क्षेत्रीय प्रभावित किसानों के नौजवानों को रोजगार दिए जाएं।
9. सदर तहसील के गांव कांशी, सौलाना, अच्छरौंडा, भूडबराल, परतापुर सहित अन्य गांवों की आर्बिटेशन की सुनवाई नहीं हुई।
10. मुआवजे में बड़े स्तर पर अनियमितता, घोटाला, फर्जीवाड़े की शिकायतें आने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।



https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/meerut/farmers-protest-at-meerut-commissionary-for-land-compensation-of-meerut-express-way
 

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Big Change In Chorabari Tal After Six Years Of Kedarnath Disaster 2013

जिस ताल की वजह से केदारनाथ धाम में आई थी जलप्रलय, वहां छह साल बाद हो रहा बड़ा बदलाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Wed, 19 Jun 2019 10:08 AM IST


चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल - फोटो : अमर उजाला

साल 2013 में केदारनाथ आपदा में व्यापक तबाही मचाने वाले चोराबाड़ी ताल में छह वर्ष बाद बड़ा बदलाव हो रहा है। यह ताल अब छह साल बाद फिर से पुनर्जीवित हो रहा है। चोराबाड़ी ताल अब फिर से पानी से लबालब भर गया है।



चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

ताल के चारों तरफ ग्लेशियर फैला हुआ है, जो टुकड़ों में टूट रहा है। यहां भूस्खलन हो रहा है, लेकिन, इससे केदारनाथ क्षेत्र को कोई खतरा नहीं है। भू-वैज्ञानिकों जल्द ही क्षेत्र का जायजा लेंगे, साथ ही जिला आपदा प्रबंधन की टीम भी चोराबाड़ी पहुंचकर वहां के हालातों का निरीक्षण कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।



चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

16/17 जून 2013 को केदारनाथ में व्यापक तबाही मचाने वाले चोराबाड़ी ताल के खुले मैदान जैसे हिस्से में इस वर्ष भरपूर पानी जमा हो रखा है। यहां चारों तरफ कई फीट मोटी बर्फ की चादर है। बीते 15 जून को सिक्स सिग्मा के सीईओ डा. प्रदीप भारद्धाज के नेतृत्व में केदारनाथ से चोराबाड़ी पहुंची उनकी टीम ने पूरे क्षेत्र का जायजा लिया।



चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

डा. भारद्वाज ने बताया कि चोराबाड़ी में जगह-जगह पर भूस्खलन हो रहा है। साथ ही ग्लेशियर भी तेजी से चटक रहा है। आपदा में ताल का मुहाना (स्रोत) फूटने से जो मैदान बना था, वह इन दिनों पानी से लबालब भरा हुआ है। जमा पानी की गहराई करीब चार मीटर तक है। इसके आसपास बड़े बोल्डर और कई जगहों पर जमीन दरकने से पानी का बहाव भी कम है, जिससे निचले हिस्से को खतरा नहीं है।


चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

चोराबाड़ी ताल से केदारपुरी व मंदिर क्षेत्र को आने वाले कई पांच दशकों तक किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई संभावना नहीं है, लेकिन फोटो में जिस तरह से ताल के खुले हिस्से में पानी जमा दिख रहा है, उसका स्थलीय निरीक्षण व भूगर्भीय अध्ययन जरूरी है। जल्द यहां पहुंचकर इस पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण कर हालातों का जायजा लेंगे। भावी संभावनाओं को लेकर भी चोराबाड़ी ताल व ग्लेशियर का अध्ययन किया जाएगा।
-डॉ. डीपी डोभाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान देहरादून


चोराबाड़ी ताल

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चोराबाड़ी ताल- फोटो : अमर उजाला

चोराबाड़ी ताल व पूरे क्षेत्र का भू-वैज्ञानिकों के माध्यम से अध्ययन किया जाएगा। इस बारे में वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों से बातचीत हो रही है। साथ ही सिक्स सिग्मा के लोगों से भी वहां के बारे में पूरी जानकारी ली गई है।
-मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग


जिस ताल की वजह से केदारनाथ धाम में आई थी जलप्रलय, वहां छह साल बाद हो रहा बड़ा बदलाव
 

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Don't Roam in Hills alone.
Any Animal can attack and you can be in trouble.
Haridwar / Rishikesh is similarly Dangrous.




Leopard Killed Salon Owner In Haridwar

नदी किनारे गए सैलून संचालक को खींचकर जंगल में ले गया गुलदार, बुरी हालत में मिला शव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Mon, 28 Oct 2019 11:43 AM IST

Leopard Killed Salon owner In haridwar



भेल के सेक्टर चार के पास एक युवक को गुलदार ने मार डाला। भेल से सटे जंगल से युवक का शव बरामद हो गया है। शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। सुभाष नगर निवासी राजेंद्र ठाकुर भेल सेक्टर 4 में नदी के किनारे सैलून चलाते हैं।

शनिवार शाम चार बजे राजेंद्र लघुशंका के लिए नदी के किनारे गए थे। इसी बीच वहां पहुंचे गुलदार ने उनपर हमला बोल दिया और उन्हें खींचकर जंगल में ले गया। इस घटना की किसी को भी जानकारी नहीं लग सकी।

काफी देर तक जब राजेंद्र नहीं लौटे तो सैलून पर बैठे लोगों ने आसपास के लोगों से उनके बारे में पूछाए लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई। इस पर लोग उन्हें ढूंढते हुए नदी किनारे पहुंचे तो खून पड़ा दिखा।

इस पर अनहोनी की आशंका हुई तो उन्होंने पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। नदी किनारे शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन जंगल तक पहुंच गयाए रेस्क्यू टीम उनकी तलाश में घंटों जुटी रही।

इसी दौरान रात करीब 10 बजे घने जंगल में झाड़ियों के बीच खून से लथपथ राजेंद्र का शव बरामद हो गया। मौका.मुआयना करने के बाद रेस्क्यू टीम ने बताया कि जो स्थिति है उसके मुताबिक राजेंद्र को गुलदार ने ही अपना शिकार बनाया है। कोतवाली रानीपुर प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।


 

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Pilgrims Crowd Broke Gangotri And Yamunotri Dham Yatra Record Of Past Many Years
आपदा के साये से उभर रही चारधाम यात्रा, गंगोत्री-यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी , Updated Mon, 07 Oct 2019 08:37 AM IST
गंगोत्री धाम/यमुनोत्री धाम

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गंगोत्री धाम/यमुनोत्री धाम - फोटो : अमर उजाला


अब कह सकते हैं कि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा आपदा के साये से पूरी तरह उभर चुकी है। इस वर्ष यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। रविवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन ने भी परिवार के साथ गंगोत्री धाम पहुंचकर दर्शन किए।


28 अक्टूबर को गंगोत्री और 29 को यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए होंगे बंद
 
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