Road conditions - Uttarakhand

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Wild Elephant Attacked On Bus Killed One Passenger
उत्तराखंडः जंगली हाथी ने यात्रियों से भरी बस पर किया हमला, यात्री को पटक कर मारा, तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल), Updated Sat, 30 Nov 2019 07:24 PM IST


Wild elephant attacked on bus killed one passenger

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- फोटो : अमर उजाला

रामनगर से बागेश्वर जा रही केमू की बस पर चिमटाखाल से करीब तीन किमी दूर बिसनापानी के पास हाथी ने हमला कर दिया। इस दौरान मची भगदड़ के बीच हाथी के हमले में इंटर कॉलेज के प्रवक्ता की मौत हो गई।


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- फोटो : अमर उजाला

शनिवार की सुबह करीब 5:30 बजे रामनगर से बागेश्वर जा रही केमू की बस (यूके04 पीए 0249) पर चिमटाखाल के पास हाथी ने सामने से हमला कर दिया। जिससे बस का आगे का शीशा टूट गया। हाथी के हमले के बाद बस में सवार यात्रियों में भगदड़ मच गई।



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- फोटो : अमर उजाला

इसके बाद सभी यात्री भागने लगे। इस दौरान गिरीश चंद पांडे (52) पर हाथी ने हमला कर दिया। उन्हें रामनगर अस्पताल ले जाया गया यहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गिरीश चंद्र पांडे इंटर कालेज नैवलगांव में दो वर्षों से संस्कृत के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत थे।


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- फोटो : अमर उजाला

वह सुबह पंपापुरी रामनगर स्थित अपने निवास से स्कूल को निकले थे। घटनास्थल के पास मोबाइल नेटवर्क की समस्या होने के कारण स्थानीय प्रशासन को भी सूचना देरी से मिली।



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- फोटो : अमर उजाला

सूचना मिलने के बाद एसडीएम राहुल शाह के अलावा राजस्व पुलिस कर्मचारी और वन कर्मी मौके पर पहुंचे। बाद में यात्रियों को दूसरी बस से बागेश्वर भेजा गया।


 

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Badrinath Highway Closed From Three Days Electricity-Communication Service Barred In Kedarnath

तीन दिन से बंद पड़ा बदरीनाथ हाईवे, केदारनाथ में दो दिन से बिजली-संचार सेवा ठप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 30 Nov 2019 07:44 PM IST


Badrinath highway closed from three days electricity-communication service barred in Kedarnath

- फोटो : अमर उजाला


बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग लामबगड़ में चट्टान से भारी मात्रा में हुए भूस्खलन के कारण तीन दिनों से बंद है। वहीं केदारनाथ में दो दिन से बिजली सप्लाई ठप होने से संचार सेवा भी बंद हो गई है।

बदरीनाथ हाईवे बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ ही सीमा सड़क संगठन और सीमा क्षेत्र में मुस्तैद सेना व आईटीबीपी के जवानों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों हुई बर्फबारी से लामबगड़ में भूस्खलन फिर से सक्रिय हो गया था। एनएच की ओर से यहां हाईवे सुचारु करने के लिए जेसीबी लगाई गई है। शीतकाल में भी बदरीनाथ हाईवे का लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बना है




केदारनाथ में बिजली-संचार सेवा ठप
शनिवार को केदारनाथ समेत जिले में दिनभर चटक धूप खिली रही, जिससे लोगों को ठंड से राहत मिली। वहीं धाम में अब भी लगभग चार फीट तक बर्फ है। शनिवार सुबह से आसमान साफ होने के कारण मौसम सुहावना रहा। सोनप्रयाग में तैनात वुड स्टोन कंपनी के सीनियर टीम लीडर मनोज सेमवाल ने बताया कि धाम में अब भी चार फीट तक बर्फ है।

धाम में बीते शुक्रवार दोपहर बाद से बिजली सप्लाई ठप पड़ी है, जिस कारण संचार सेवा भी बंद हो गई है। बताया कि धाम में लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में ऊर्जा निगम को भी अवगत कराया जा चुका है। इधर, जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग समेत जनपद के अन्य क्षेत्रों में दिनभर मौसम सुहावना रहा और चटक धूप खिली रही।





तीन दिन से बंद पड़ा बदरीनाथ हाईवे, केदारनाथ में दो दिन से बिजली-संचार सेवा ठप
 

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Uttarakhand: Govt decides to set up Char Dham shrine board, Kedarnath MLA opposes
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•Nov 28, 2019



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The Times of India

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The Uttarakhand government has decided to set up a Char Dham shrine board to run the affairs of the four Himalayan shrines including 51 famous temples located in the state. ‘Once formed, Chief Minister of the state would head the board as its chairperson. Three MPs, six MLAs, several secretaries and priests of the char dhams will also be included as members in the board,’ Uttarakhand Urban Development Minister Madan Kaushik said. The proposed law to oversee temples would provide for a Hindu cabinet minister to be the chairperson of the board in case a Muslim becomes the chief minister. However, Kedarnath MLA Manoj Rawat said that the government is doing this because they are eyeing the temple's donation.
 

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Well last couple of seasons were kinda hard for travelling uttarakhand, but i would suggest to check out Gwaldam if anyone goin for Roop Kund Treking.
Such an amazing place.
Thinking for years going to Gwaldam but the dilapidated TRC pictures and frequent newspaper (Amar Ujala) reports of very very bad road dash the plans. Any good private hotels with generator there?
 

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Utttarkashi - Gnagotri Highway is closed due to 3-4 feet snowfall.
Dhanolti, Nainital, Pitauragarh also having good snowfall.
Badrinath Ji also having good snowfall.
Kedarnath Ji also have similar situation.
 

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Auli News !

Heavy Snow !

Tourist Vehicle Covered With Heavy Snow And Stuck In Auli Photos
बर्फबारी से आफत: औली मार्ग पर तीन दिन से फंसे वाहन, बरातियों ने भी भूखे-प्यासे बिताई रात, तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चमोली, Updated Mon, 16 Dec 2019 07:54 AM IST
Tourist vehicle Covered with heavy snow And stuck in Auli Photos

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- फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड में बर्फबारी से जहां पर्यटकों के चेहरे खिले हुए हैं वहीं उनके लिए बर्फबारी ही आफत बनी हुई है। हाल ये है कि औली मार्ग पर 13 दिसंबर से वाहन फंसे हुए हैं, लेकिन लगातार बर्फबारी के कारण प्रशासन की टीम रास्ता खोलने में असमर्थ नजर आ रही है। वहीं कई जगह तो बरातियों और अन्य लोगों ने भूखे प्यासे ही रात गुजारी।



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- फोटो : अमर उजाला

बता दें कि जोशमठ बाजार में 30 साल बाद दिसंबर में अब बर्फबारी हुई। जिसके बाद वहां करीब पांच इंच तक बर्फ जम गई। ऐसे में वहां जोशीमठ-औली सड़क बंद हो गई। कई वाहन तो आगे निकल गए लेकिन खतरा देखते हुए कई वाहनों को प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया। वहीं पर्यटकों को जोशीमठ में रोका गया।



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- फोटो : अमर उजाला

आलम ये रहा कि लगातार बर्फबारी से वाहन पूरी तरह से बर्फ में दब गए हैं। जानकारी के अनुसर, प्रशासन की टीम बर्फ हटाने की कोशिश में लगी है। लेकिन बर्फ इतनी है कि इसे हटाने में कम से कम एक से दो दिन लग सकते हैं।



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- फोटो : अमर उजाला

उधर, धुमाकोट और बीरोंखाल की पहाड़ियों पर हुई भारी बर्फबारी से काशीपुर-बुआखाल हाईवे दो दिन से अवरुद्ध था। जिससे बैजरों और धुमाकोट के बीच एक बरात की बस सहित सैकड़ों वाहन फंसे रहे। ऐसे में सवारियों ने शुक्रवार की पूरी बर्फीली रात भूखे-प्यासे वाहनों में ही बिताई।



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- फोटो : अमर उजाला

भारी बर्फ होने के कारण सड़क शनिवार शाम तक भी यातायात के लिए नहीं खुल पाई है। कुछ लोगों ने पास के गांवों में शरण ली हुई है। थलीसैण में शुक्रवार शाम को देहरादून से एक बरात थलीसैंण ब्लाक के पोखरी गांव लौट रही थी। भारी बर्फबारी के चलते बरातियों के वाहन घनियाखाल व वेदीखाल के बीच फंस गए।


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- फोटो : अमर उजाला

इस दौरान किसी बराती ने पंजाब स्थित अपने परिजन को मोबाइल फोन पर बर्फ में फंसे होने की सूचना दी। शनिवार सुबह करीब 11 बजे राजमार्ग से बर्फ व गिरे पेड़ों को हटाया गया, जिसके बाद आवाजाही शुरू हो पाई।


बर्फबारी से आफत: औली मार्ग पर तीन दिन से फंसे वाहन, बरातियों ने भी भूखे-प्यासे बिताई रात, तस्वीरें
 

citylife

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Even after 72 years of freedom, Govt. has not been able to provide facilities running water and electricity during winter in any hill state. This much snow should have been a boom period for tourism had roads, water and electricity were flowing. In evening of my life i often wonder if British would have done better compared to our politician ruling us!
 

Alpha

Going to Neverland
Even after 72 years of freedom, Govt. has not been able to provide facilities running water and electricity during winter in any hill state. This much snow should have been a boom period for tourism had roads, water and electricity were flowing. In evening of my life i often wonder if British would have done better compared to our politician ruling us!
thousands of villages in plains still wait for running water..what to say about difficult hilly villages !!

Britishers would have done a better job of managing our country as long as they would have stand to gain from it.. but we may compare with South Africa where they left pretty late and even thereafter the whites ruled
 
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