Road conditions - Uttarakhand

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Uttarakhand Summer Capital: Cm Order To Constitute Expert Committee For Development
गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी: विकास का रोडमैप तैयार करेगी एक्सपर्ट कमेटी, सीएम ने दिए आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Mar 2020 01:30 AM IST


त्रिवेंद्र सिंह रावत

त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो


सार
  • सीएम ने कमेटी के गठन का दिया आदेश, आसपास के क्षेत्रों का भी होगा विकास

विस्तार
उत्तराखंड में गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी का रोडमैप अब एक्सपर्ट कमेटी तैयार करेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कमेटी के गठन का आदेश जारी कर दिया है। विधानसभा में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री ने एक्सपर्ट कमेटी के गठन करने की जानकारी दी।

यह कमेटी राजधानी के विकास की तमाम संभावनाओं को टटोलकर एक रोडमैप सरकार के सामने प्रस्तुत करेगी। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कमेटी में विभिन्न शोध एवं अनुसंधान संस्थाओं के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।

ये एक्सपर्ट बताएंगे की गैरसैंण को राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए कौन सी चुनौतियां सामने आएंगी और इन चुनौतियों से कैसे पार पाया जाएगा। मदन कौशिक के मुताबिक गैरसैंण के ग्रीष्मकालीन राजधानी के विकास का प्रस्ताव अभी कैबिनेट में भी आएगा।
गैरसैंण तो एक प्रतीक है
इस पर सभी मंत्रियों की भी राय ली जाएगी। मंत्रालय स्तर से भी विकास का खाका तैयार होगा। इसके साथ ही राजधानी क्षेत्र की अधिसूचना भी सरकार को जारी करनी होगी।

गैरसैंण तो एक प्रतीक है। हम चाहते हैं कि सिर्फ गैरसैंण का नहीं, उसके आसपास के क्षेत्रों का भी विकास हो। भविष्य में यह क्षेत्र बेस्ट डेस्टीनेशन बनें। प्रदेश सरकार ने एक साल पहले ही झील के निर्माण की घोषणा की थी। यह काम भी तेजी से जारी है।
-त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री


गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी: विकास का रोडमैप तैयार करेगी एक्सपर्ट कमेटी, सीएम ने दिए आदेश
 

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Uttarakhand Summer Capital : Many Challenges Will Have To Be Overcome In Gairsain
उत्तराखंड ग्रीष्मकालीन राजधानी: कई चुनौतियों से पाना होगा पार, 1500 हेक्टेयर भूमि की होगी जरूरत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Mar 2020 11:00 AM IST


Uttarakhand Summer capital : Many challenges will have to be overcome in gairsain



सार
  • 1500 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी गैरसैंण में समर कैपिटल के लिए
  • राजधानी चयन आयोग की रिपोर्ट में किया गया था जिक्र

विस्तार
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा के बाद अब उसके भावी स्वरूप को लेकर सपने गढ़े जाने लगे हैं। सियासी आलोचनाओं और आशंकाओं के बीच ग्रीष्मकालीन राजधानी को लेकर तमाम तरह के सवाल भी सामने आ रहे हैं।

माना जा रहा है कि जनाकांक्षाओं के प्रतीक गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करना एक बात है और उस घोषणा को धरातल पर उतारना उससे एकदम अलग बात है। यानी ग्रीष्मकालीन राजधानी को अस्तित्व में आने के लिए कई चुनौतियों से पार पाना होगा। अमर उजाला ने उन चुनौतियों की पड़ताल करने का प्रयास किया है। पेश है ये रिपोर्ट:-

मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा करके एक साहसिक निर्णय लिया है। उन्होंने पार्टी के चुनावी दृष्टि पत्र की अहम घोषणा को पूरा किया है।
- डॉ.देवेंद्र भसीन, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा

पीने का पानी सबसे बड़ी चुनौती

उत्तरप्रदेश के जमाने में टिहरी बांध बनाने के लिए नई टिहरी शहर का जन्म हुआ। लेकिन गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जारी बजट सत्र में मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों व कर्मचारियों को पानी का संकट लगातार गहराता रहा।

सरकार को इस संकट की गंभीरता का शायद इल्म है। तभी तो मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा करने के अगले दिन सीधे चौरड़ा झील का रुख किया जहां से जल संकट के समाधान की राह खोजी जा रही है। दूसरा विकल्प 40 किमी दूर अलकनंदा से पानी लाना होगा। वर्ष 2008 में राजधानी चयन आयोग ने अलकनंदा से पानी लाने पर 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था।

राजधानी के लिए भूमि जुटाना टेडी खीर

गैरसैंण में 76 प्रतिशत भूमि पर जंगल है। एक प्रतिशत भूमि पर लोग रह रहे हैं व खेती बाड़ी कर रहे हैं। 23 प्रतिशत भूमि पर ओपन फारेस्ट है। यानी राजधानी का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए जमीन जुटाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

पर्यावरणीय सरोकारों के दबाव के बीच उसे भवनों का निर्माण करना होगा। राजधानी चयन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गैरसैंण में राजधानी बनाने के लिए 1500 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी।

यह भी सच्चाई है कि राज्य गठन के बाद से अब तक सत्तारूढ़ रही कोई भी सरकार प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में एक भी नया शहर नहीं बसा सकी है। गैरसैंण उसके सामने एक अवसर है जिसे वह एक ग्रीष्मकालीन राजधानी के बहाने विकसित कर सकती है।

इकोलॉजी की संवेदनशीलता

भराड़ीसैंण में सरकार ने विधानसभा का भव्य भवन बनाया है। मंत्रियों, विधायकों और अधिकारी-कर्मचारियों के लिए आवासीय कॉलोनी भी तैयार की है। लेकिन जानकारों का मानना है कि करीब 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित भराड़ीसैंण की पहाड़ियां कच्ची हैं। यानी वहां की इकोलॉजी संवेदनशील है। इसलिए उसकी संवेदनशीलता को देखते हुए बुुनियादी ढांचा तैयार करना आसान नहीं होगा।

सरकार ने अभी मिनी सचिवालय के लिए भूमि खोजी है और उसके लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया है। लेकिन राजधानी में हर विभाग का मिनी निदेशालय स्थापित करना होगा। सचिवालय, विधानसभा, पुलिस मुख्यालय, निदेशालयों के अधिकारी कर्मचारी और अन्य स्टाफ के लिए आवासीय सुविधाएं जुटानी होंगी। इसके लिए बड़े पैमाने पर आवासीय निर्माण करने होंगे।
भूगोल तय करना भी आसान नहीं
गैरसैंण का भौगोलिक स्वरूप तय करने में भी नीति नियंताओं के पसीने छूटेंगे। वर्तमान गैरसैंण की भौगोलिक सीमाएं तीन जनपदों चमोली, अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल को छूती हैं। इन तीनों जिलों की गैरसैंण से सटी आबादी का बाजार गैरसैंण भी है।

हालांकि चमोली जिले के गैरसैंण और अल्मोड़ा के चौखुटिया को मिलाकर सरकार ने गैरसैंण विकास परिषद का गठन किया है और उसके तहत विकास कार्यों को अंजाम भी दिया गया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए सरकार को अलग जिले की घोषणा करनी पड़ेगी। राजनीतिक लिहाज से ये इतना आसान नहीं होगा क्योंकि प्रदेश में जिलों के गठन की पहेली पहले ही काफी उलझी हुई है।

शिमला और गैरसैंण में अंतर
- आबादी - क्षेत्रफल - ऊंचाई
गैरसैंण (भराड़ीसैंण) - 7,138 - 7.53 - 5,741 (8000 भराड़ीसैंण)
शिमला (हिप्र) - 1.71 लाख - 35.34 - 7,238
नोट : क्षेत्रफल वर्ग किमी और ऊंचाई फिट में।

कई वर्षों से अटका है बांध निर्माण का कार्य

भराड़ीसैंण और गैरसैंण में पेयजल संकट के हल को सरकार रामगंगा नदी के डोबालिया घाट पर 20 मीटर ऊंचा दो लाख घन मीटर का छोटा बांध बनाने की तैयारी में है। बांध बनाने के लिए जमीन खोज ली गई है, लेकिन प्रस्तावित बांध निर्माण क्षेत्र में वन भूमि होने की वजह से पिछले कई वर्षों से यह कार्य आगे नहीं बढ़ सका है। गर्मियों में पेयजल संकट गहराने पर लोग पीने के पानी के लिए हैंडपंपों और प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।

आसपास के क्षेत्रों का भी करना होगा विकास

भराड़ीसैंण में बने विधानसभा भवन की दूरी गैरसैंण से करीब 20 किमी है। भराड़ीसैंण की जलवायु समशीतोष्ण है। प्रचुर मात्रा में भूमि नहीं होने से गैरसैंण के अलावा चौखुटिया, पांडुवाखाल, मेहलचौंरी, बछुवाबांण, नागचूलाखाल व दिवालीखाल क्षेत्र को विकसित करना होगा। हालांकि ये सभी कस्बे सड़क से जुड़े हैं।

पैराग्लाइडिंग और तीर्थाटन की हैं अपार संभावनाएं

गैरसैंण प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर कस्बा है। कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के बीच में स्थित होने की वजह से गैरसैंण का महत्व राज्य निर्माण के बाद काफी बढ़ गया है। आदिबदरी सहित कुमाऊं क्षेत्र के धार्मिक स्थलों को विकसित कर यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है।

पैंसर और दूधातोली की पहाड़ियां गैरसैंण के लिए वरदान सबित हो सकती हैं। इन पहाड़ियों पर पैराग्लाइडिंग के जरिये रोजगार के साधन जुटाकर राज्य और गैरसैंण क्षेत्र को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाया जा सकता है।

ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद गैरसैंण क्षेत्र का चहुमुखी विकास होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सरकार पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं पर गंभीरता से काम कर रही है। गैरसैंण के ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने से अब पूरे क्षेत्र का तेजी से विकास होगा।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, विधायक कर्णप्रयाग

अभी राह आसान नहीं, भविष्य में होगा लाभ
नगर पंचायत अध्यक्ष पुष्कर सिंह रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा भराड़ीसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है, लेकिन राह इतनी आसान नहीं है। बजट की व्यवस्था के साथ ही सचिवालय और अधिकारी-कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था भी सरकार को करनी है। भविष्य में अच्छे विद्यालय, अस्पताल और सड़कों का निर्माण होने से जनता को लाभ होगा।

भूमि की बिक्री पर रोक हटाना गलत

पूर्व दायित्वधारी सुरेश कुमार बिष्ट का कहना है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा से पूर्व गैरसैंण क्षेत्र की भूमि की बिक्री पर लगी रोक को हटाकर सरकार ने स्थानीय लोगों के मालिकाना हक को खत्म करने की कोशिश की है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की खातिर पूर्व सरकार ने रोडमैप तैयार कर आवश्यक निर्माण करवाए थे। कुछ कार्यों के लिए धन भी अवमुक्त करा दिया गया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया।

समूचे पहाड़ का होगा संतुलित विकास
कर्णप्रयाग के पूर्व विधायक अनिल नौटियाल का कहना है कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर उत्तराखंड के शहीदों और आम जनमानस की भावनाओं के अनुरूप कार्य किया है।

भराड़ीसैंण उत्तराखंड में एक रमणीक स्थान है। राज्य के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के मध्य में स्थित होने से इसका महत्व राजधानी के क्षेत्र में अतुलनीय है। इससे समूचे पर्वतीय क्षेत्र का संतुलित विकास होगा। आज यह ग्रीष्मकालीन राजधानी है। समय के साथ-साथ राजधानी का विकास भी होना सुनिश्चित है।

विधान भवन में साउंड की समस्या का समाधान एनबीसी करेगी

भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन में साउंड की समस्या को भवन का निर्माण करने वाली कंपनी के विशेषज्ञ दूर करेंगे। विशेषज्ञों का दल भराड़ीसैंण पहुंच भी गया है। इस बार तीन मार्च से शुरू हुए सत्र में सरकार को विधान भवन के साउंड सिस्टम की वजह से खासी किरकिरी का सामना करना पड़ा था।

नेटवर्क की समस्या भी होगी दूर

विधानसभा के सामने एक समस्या भराड़ीसैंण और आसपास के क्षेत्रों में नेटवर्क का न होना है। यहां नेटवर्क बीएसएनएल के टावर से दिया जा रहा है। यहां नेटवर्क के लिए अब रिलायंस से बात की जा रही है। रिलायंस की ओएफसी केबल भराड़ीसैंण से करीब 19 किलोमीटर दूर है। रिलायंस ने केबल लाकर भराड़ीसैंण में टावर लगाने के लिए जमीन और तीन माह का समय मांगा है।

 

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Gairsain : Summer Capital of Uttarakhand is declared now.



Gairsain
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Languages
Population
(2011)[1]
Area
[1]
Gairsain
Town
Gairsain is located in Uttarakhand
Gairsain

Gairsain
Location in Uttarakhand, India
Show map of UttarakhandShow map of IndiaShow all
Coordinates:
30.0725°N 79.2856°ECoordinates:
30.0725°N 79.2856°E
Country
India
StateUttarakhand
DistrictChamoli
• Total7.53 km2 (2.91 sq mi)
Elevation1,650 m (5,410 ft)
• Total7,138
• Density950/km2 (2,500/sq mi)
• OfficialHindi
Time zoneUTC+5:30 (IST)
PIN246428
Telephone code01363
Vehicle registration2A-6A
Sex ratio1000 / 926 ♂/♀
Literacy75%
ClimateCold and Cloudly (Köppen)
Websiteuk.gov.in


Gairsain [ɡɛːrˈsɛːɳ] is a town and Nagar Panchayat in Chamoli district of the Indian state of Uttarakhand. Gairsain is the summer capital of the state[2][3][4].Gairsain is situated at the eastern edge of the vast Dudhatoli mountain range, located almost at the centre of the state, at a distance of approximately 250 kilometres from Dehradun.[5] It is easily accessible from both the Garhwal and the Kumaon divisions, and in a way, acts as the bridge between the two regions. It is being considered as the future Permanent capital of Uttarakhand.[5][4]
Gairsain was envisaged as the state capital during the statehood agitation.[6] However, after the formation of the state on 9 November 2000, Dehradun was made the temporary capital of the state.[6] The Government of Uttarakhand had constituted the Dixit Commission for the search of a permanent capital; but the commission in its report had noted that "the interim capital, Dehradun, is a more suitable place as the permanent capital owing to the factors like its distance from national capital, centralised population and safety from natural calamities".[7] A three-day-long assembly session of Uttarakhand Legislative Assembly was held at Gairsain from 9 to 12 June 2014. With this event, hopes are high that its stature might be raised to that of the permanent capital of the state, in the near future.[6][8][9]

Gairsain - Wikipedia
 

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Uttarakhand Weather Today: Rain And Fresh Snowfall In Char Dham
उत्तराखंडः लगातार दूसरे दिन मौसम खराब, बर्फ से ढके चारों धाम, यमुनोत्री हाईवे बंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Mar 2020 01:01 PM IST


ताजा बर्फबारी का नजारा

ताजा बर्फबारी का नजारा - फोटो : अमर उजाला


उत्तराखंड में आज गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मौसम खराब बना हुआ है। आज सुबह देहरादून में बादलों की तेज गर्जना के साथ मूसलाधार बारिश हुई। वहीं आज तड़के चारों धामों में बर्फबारी हुई है। चमोली जिले में भी आज मौसम खराब बना हुआ है। तीन धारा में सुबह छह बजे से पहाड़ी से मलबा आने की वजह से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया था। जिसे सुबह साढ़े दस बजे खोल दिया गया।

बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, घांघरिया, रुद्रनाथ, लाल माटी, नीति और माणा घाटियों के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम में ठंडक लौट आई है।

श्रीनगर और नई टिहरी रात से लगातार बारिश हो रही है। टिहरी जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है। ऋषिकेश-गंगोत्री, चंबा-मसूरी मोटर मार्ग पर यातायात सामान्य रूप से चल रहा है। उत्तरकाशी जिले में कल देर रात से बारिश का सिलसिला जारी है।

यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में बुधवार रात से झमाझम बारिश हो रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के साथ ही आसपास बर्फबारी हुई है। जिससे यमुनोत्री हाईवे हनुमानचट्टी से बाधित है। ऋषिकेश में भी रात से ही बारिश जारी है। बागेश्वर, रानीखेत, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, मुक्तेश्वर में सुबह बारिश हुई। काशीपुर और भीमताल में बादल छाए हुए हैं। पिथौरागढ़, लोहाघाट और रुद्रपुर में हल्की धूप खिली है।

भारी बारिश के कारण गुरुवार को मसूरी धनोल्टी मार्ग पर बाटाघाट के पास सड़क के नीचे भारी भूस्खलन हो गया। पूर्व में भी सड़क का एक बड़ा भाग भूस्खलन से धस गया था। जिसकी चपेट में आने से एक बच्चे की मौत भी हो गई थी।
आज चलेगी 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा
प्रदेश के कई मैदानी इलाकों में मौसम केंद्र ने आज (गुरुवार) 45 से 55 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवा चलने का अनुमान जताया है। इसके अलावा कई इलाकों में हल्की बारिश की भी संभावना जताई है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार ज्यादातर क्षेत्रों में हल्के बादल छाए रह सकते हैं।

कुछ हिस्सों में तेज गरज और चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। तीन हजार मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ गिर सकती है। हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में कई जगह 45 से 55 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवा चलने और बादलों के गरजने व चमकने के आसार हैं।

मुनस्यारी की ऊंची चोटियों पर हिमपात

दो दिन धूप खिली रहने के बाद बुधवार को फिर बादल छाने के बाद दोपहर में उच्च हिमलयी क्षेत्र पंचाचूली, राजरंभा, हंसलिंग, खलिया और मिलम क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि निचले इलाकों में हल्की बारिश हुई। बारिश के कारण बुधवार को मुनस्यारी का न्यूनतम तापमान 1 डिग्री और अधिकतम 9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। पिथौरागढ़ शहर में दिन भर मौसम सामान्य रहा।
चारों धामों में बर्फबारी से बढ़ी दिक्कतें
तीन दिनों तक चटक धूप के साथ खुशगवार रहे मौसम ने बुधवार को फिर करवट ली। चारों धामों सहित ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश से ठंड लौट आई है। रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चंद्रशिला सहित ऊंची पहाड़ियों में बर्फबारी हुई। हिमपात होने से केदारनाथ पैदल मार्ग से बर्फ हटा रही टीम को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रुद्रप्रयाग मुख्यालय सहित अगस्त्यमुनि, जखोली, मयाली, ऊखीमठ, गुप्तकाशी आदि स्थानों में बारिश हुई। उत्तरकाशी जिले में दोपहर बाद जिला मुख्यालय समेत निचली घाटियों में रुक-रुक कर रिमझिम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो गया। यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम समेत समुद्र सतह से तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही है।

ताजा बारिश बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट आ गई है। जिला मुख्यालय का अधिकतम तापमान 14 डिग्री और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि गंगोत्री-यमुनोत्री धाम समेत बर्फबारी वाले इलाकों में पारा शून्य से माइनस चार डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अभी आने वाले तीन-चार दिनों तक बारिश बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है, जिसे देखते हुए सड़क, विद्युत आदि संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। चमोली जिले में तड़के ही बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, घांघरिया, रुद्रनाथ, लाल माटी, नंदा घुंघटी में बर्फबारी हुई और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई, जिससे ठंड में इजाफा हो गया है।


उत्तराखंडः मौसम खराब, बर्फ से ढके चारों धाम, बर्फबारी से गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे अवरुद्ध
 

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उत्तराखंडः मौसम खराब, बर्फ से ढके चारों धाम, बर्फबारी से गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Mar 2020 11:45 PM IST




ताजा बर्फबारी का नजारा - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मौसम खराब बना रहा। आज सुबह देहरादून में बादलों की तेज गर्जना के साथ मूसलाधार बारिश हुई। वहीं चारों धामों में दूसरे दिन भी बर्फबारी हुई।उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे समेत कई मोटर मार्गों में यातायात प्रभावित रहा।

उत्तरकाशी जिले में बृहस्पतिवार तड़के तक जिला मुख्यालय समेत तमाम निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश हुई। गंगोत्री, यमुनोत्री धाम, मुखबा, हर्षिल, धराली, सुक्की, जानकीचट्टी, खरसाली आदि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई, जिससे यमुनोत्री हाईवे पर हनुमानचट्टी से आगे व गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध हो गया। बारिश से हुए भूस्खलन से आराकोट-चींवा, सिलक्यारा-बनगांव, अदनी-रौंतल मोटर मार्गों पर भी आवाजाही ठप है। बीआरओ कर्मियों ने गंगोत्री हाईवे को सुक्कीटॉप से लेकर धराली गांव तक खोल दिया, लेकिन धराली के पास हिमखंड खिसकने के कारण इससे आगे गंगोत्री हाईवे अवरुद्ध हो गया है

चमोली जिले में बदरीनाथ-केदारनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, गौरसों, औली के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। रुद्रप्रयाग जिले में मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चंद्रशिला सहित अन्य ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। जिला मुख्यालय सहित तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, जखोली, मयाली, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, जखोली, फाटा, चोपता, चोपड़ा आदि स्थानों में बारिश होने से ठंड बढ़ गई है।

बाटाघाट के पास क्षतिग्रस्त हुआ मसूरी धनोल्टी मार्ग

कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मसूरी-धनोल्टी मार्ग बाटाघाट के पास क्षतिग्रस्त हो गया है। यहां पर भूस्खलन होने से सड़क में बड़ी दरार हो गई है। इससे हादसे की आशंका बनी हुई है। हालांकि, बृहस्पतिवार दोपहर से ही यहां पर लोक निर्माण विभाग की टीम मरम्मत के लिए पहुंच गई थी।

बताया जा रहा है कि मार्ग को दो दिन के भीतर ठीक कर दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार यह मार्ग पहले भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसकी वजह से एक बच्चे की मौत हो गई थी। सड़क के नीचे स्थित मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग जिस गति से मरम्मत कार्य कर रहा है उसमें काफी देर हो जाएगी। इससे कई और मकान और दुकान भी चपेट में आ सकते हैं। इसके अलग सड़क से लगातार गुजर रहे वाहनों को भी खतरा बना हुआ है।

कांडी लक्ष्मणझूला मार्ग मलबा आने से से फिर हुआ बंद
यमकेश्वर में भारी बारिश से कांडी-लक्ष्मणझूला मोटर मार्ग बिथ्याणी के समीप मलबा आने से बंद हो गया, जिससे लोगों को ऋषिकेश, देहरादून आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

बुधवार रात को एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ गया और रात आठ बजे से तेज बारिश शुरू हो गई। रातभर तेज हवाओं के साथ बारिश होती रही। कांडी-लक्ष्मणझूला मार्ग पर बिथ्याणी के समीप बिथ्याणी-ढुंगा-बंचूरी मार्ग को जोड़ने के लिए कटिंग की गई थी। बारिश में मार्ग का मलबा कांडी-लक्ष्मणझूला मोटर मार्ग और बिथ्याणी-यमकेश्वर मोटर मार्ग पर आ रहा है, जिससे लोगों को आवाजाही करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्राम बघेलगांव निवासी भगत सिंह ने बताया कि मोटर मार्ग पर मलबा और पत्थर आने से मार्ग अवरुद्ध हो गया है। दोपहर डेढ़ बजे तक भी मार्ग से मलबा नहीं हटाया जा सका था। लोनिवि दुगड्डा के सहायक अभियंता सत्यप्रकाश ने बताया कि मोटर मार्ग पर पड़े मलबे को हटाने के लिए लक्ष्मणझूला से जेसीबी मशीन को भेज दिया गया है। जल्द ही मोटर मार्ग की सफाई कर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।

चकराता में झमाझम बारिश के बीच ऊंची चोटियों ने ओढ़ी बर्फीली चादर

फाल्गुनी बयार के बीच मौसम की बदली करवट के चलते गुरुवार को भी चकराता में झमाझम बारिश हुई। ऊंची चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली। इससे पूरा क्षेत्र कड़ाके की ठंड की चपेट में है। ऊंची चोटियों पर हुई बर्फबारी के चलते चकराता छावनी बाजार क्षेत्र में बृहस्पतिवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। जगह-जगह लोग ठंड से बचने के लिए अलाव और हीटर तापते नजर आए। ऊंची चोटियों पर सीजन का यह 13वां हिमपात है। बुधवार देर रात से ही क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हा गया।

चकराता समेत लोखंडी, लोहारी, खंडबा, देववन, व्यास शिखर, मोयला टॉप, मुंडाली समेत आसपास की ऊंची चोटियों पर करीब आधे घंटे तक हिमपात हुआ। इससे सड़क और पहाड़ों पर चार इंच तक बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। चकराता छावनी बाजार क्षेत्र में भी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। पछवादून क्षेत्र में भी मौसम दिनभर रंगत बदलता रहा।

कभी बारिश तो कभी बादलों की ओंट और कभी चटक धूप खिली नजर आई। विकासनगर, बरोटीवाला, बाबूगढ़, मेहूंवाला आदि क्षेत्र में भी हल्की ओलावृष्टि हुई। बृहस्पतिवार को चकराता का अधिकतम तापमान 10 डिग्री और न्यूनतम तापमान 02 डिग्री रहा, जबकि विकासनगर का अधिकतम तापमान 23 और न्यूतनम 13 डिग्री रहा।

सुरक्षा दीवार ढही
बारिश के बीच बेहमू गांव में भूस्खलन होने से गांव निवासी अर्जुन सिंह के मकान को खतरा खड़ा हो गया है। देर रात को क्षेत्र में हुई बारिश के बीच अर्जुन सिंह के मकान के नीचे बनी सुरक्षा दीवार ढह गई, जिससे पूरा मकान खतरे की जद में है। अर्जुन ने परिवार समेत पड़ोसी के यहां शरण ली हुई है।





 

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Uttarakhand also closed for Tourists . Ban is on stay for Tourists - Domestic & International both.


Corona Virus : Uttarakhand Monitoring Of 413 People At Homes, 474 Isolation Beds Arrangement

कोरोना वायरस : उत्तराखंड में भी लगी बाहरी सैलानियों के रुकने पर रोक, बढ़ाया जाएगा विदेशी पर्यटकों का वीजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 20 Mar 2020 09:49 PM IST


Corona virus : uttarakhand monitoring of 413 people at homes, 474 Isolation beds arrangement

- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो


सार
  • 15 अप्रैल तक बढ़ाया जाएगा विदेशी पर्यटकों का वीजा

विस्तार
कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए सरकार ने उत्तराखंड में विदेशी व घरेलू पर्यटकों के रुकने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अग्रिम आदेशों तक प्रदेश में सभी तरह के पर्यटकों को होटल-गेस्ट हाउस आदि में बुकिंग नहीं दी जाएगी।

शुक्रवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अनुमति मिलने के बाद शासन ने उत्तराखंड एपिडेमिक डिजीज कोविड-19 रेगुलेशन 2020 के तहत प्रदेश में विदेशी और भारतीय पर्यटकों के रुकने पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। तीर्थ नगरी हरिद्वार, योग नगरी ऋषिकेश समेत प्रदेश के अन्य तीर्थ व पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों की होटल, गेस्ट हाउस आदि में बुकिंग नहीं की जाएगी।

हालांकि पर्यटकों के वाहनों के प्रदेश में प्रवेश और प्रदेश से होकर गुजरने में कोई अड़चन नहीं आएगी, केवल प्रदेश में उनके रुकने पर रोक लगाई गई है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को भी आदेश जारी कर दिए हैं। बता दें कि कोरोना वायरस के कारण में उत्तराखंड में पर्यटन कारोबार को लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
चारधाम यात्रा पर पड़ेगा असर
अप्रैल में प्रदेश में चारधाम यात्रा शुरू होनी है। 26 अप्रैल को गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज होता है। कोरोना वायरस संक्रमण थमा नहीं तो इस साल यात्रा पर इसका असर पड़ेगा। जिससे पर्यटन कारोबारियों को आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगेगा।

पिछले साल आए यात्री
तीर्थ स्थल संख्या(लाख में)
गंगोत्री 05.30
यमुनोत्री 04.65
केदारनाथ 10.00
बदरीनाथ 12.45
हेमकुंड साहिब 02.40
पिरान कलियर 07.75

कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार के आदेश का स्वागत करते हैं। मार्च तक पर्यटन कारोबार को करीब 500 करोड़ का नुकसान हो चुका है। हमने सरकार को पत्र लिखा है कि कर्मचारियों का तीन माह के वेतन में 50 प्रतिशत सरकार की ओर से दिया जाए। इससे होटल में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी बनी रही। वहीं, टैक्स, बैंक ऋण जमा करने में भी छूट की मांगे की गई है।
-संदीप साहनी, अध्यक्ष, उत्तराखंड होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन

यह होगी व्यवस्था

1. प्रदेश के किसी भी बॉर्डर चेक पोस्ट पर किसी भी वाहन को प्रवेश से रोका नहीं जाएगा।
2. चेक पोस्टों पर पर्यटकों के आधार कार्ड या अन्य दस्तावेजों की जांच नहीं की जाएगी।
3. होटल-गेस्ट हाउसों में केवल प्रदेश के लोगों की पहचान पत्रों के आधार पर बुकिंग होगी।
4. सैलानियों को चेक पोस्टों पर उत्तराखंड में ठहरने पर रोक लगने की जानकारी दी जाएगी।

प्रदेश में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के ठहरने पर रोक लगा दी गई है। ये आदेश अन्य राज्यों से आने वाले लोगों पर भी लागू होगा। वहीं, प्रदेश में प्रवेश करने पर रोक नहीं है। साथ ही वाहनों की चेकिंग या लोगों के दस्तावेजों की जांच भी नहीं की जाएगी।
- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव


15 अप्रैल तक बढ़ाया जाएगा विदेशी पर्यटकों का वीजा

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में पर्यटकों के ठहरने पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना वायरस के संबंध में बैठक ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जनता कर्फ्यू को सफल बनाने में अपना योगदान देने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में एडीएम रैंक के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाएं। नोडल अधिकारी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यवस्था कराएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में वर्तमान में मौजूद ऐसे विदेशी पर्यटक जिनका वीजा समाप्त हो रहा है, केंद्र से उनका वीजा 15 अप्रैल 2020 तक बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार के असमंजस को दूर करने के लिए 0135-2609500 पर संपर्क किया जाए। पैरामेडिकल से सम्पर्क करते हुए उनकी सहायता लेने के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे, इसके लिए स्थानीय व्यापार मंडलों, मंडी परिषदों आदि से संपर्क करते हुए व्यवस्थाएं बनाई जाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि आमजन में अफरातफरी का माहौल न बने। अफवाहें फैलाने वालों के साथ सख्त कार्यवाही की जाए।

प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग
इससे पूर्व मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय अधिकारियों ने कोरोना वायरस को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों को व्यापारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लगातार संपर्क बनाने को कहा।

कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए सरकार हर संभव आवश्यक कदम उठा रही है। इसी दिशा में प्रदेश में विदेशी व घरेलू पर्यटकों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया है। जिससे प्रदेश में वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके।
-नितेश कुमार झा, सचिव स्वास्थ्य

कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार के आदेश का स्वागत करते हैं। मार्च तक पर्यटन कारोबार को करीब 500 करोड़ का नुकसान हो चुका है। हमने सरकार को पत्र लिखा है कि कर्मचारियों का तीन माह के वेतन में 50 प्रतिशत सरकार की ओर से दिया जाए। इससे होटल में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी बनी रही। वहीं, टैक्स, बैंक ऋण जमा करने में भी छूट की मांगे की गई है।
-संदीप साहनी, अध्यक्ष, उत्तराखंड होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन


कोरोना वायरस : उत्तराखंड में भी लगी बाहरी सैलानियों के रुकने पर रोक, बढ़ाया जाएगा विदेशी पर्यटकों का वीजा
 

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Dehradun › Coronavirus In India: Bus Service Stop From Nepal To Dehradun, Youth Isolated In Uttarkashi

कोरोना: नेपाल से दून आने वाली बसों का संचालन भी बंद, स्पेन से युवक को आइसोलेशन में रखा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 19 Mar 2020 07:05 PM IST



Coronavirus in India: Bus Service Stop from Nepal To dehradun, Youth Isolated In uttarkashi


- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर



सार
  • उत्तराखंड रोडवेज ने पहले ही दून से जाने वाली बसों के संचालन पर लगा दी थी रोक
  • केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बार्डर से होकर गुजरने वाली सभी बसों को रोका
  • हरिद्वार से रुपैड़िया जाने वाले बसों को भी रोका गया

विस्तार
कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए रोडवेज की ओर से नेपाल के महेंद्र नगर जाने वाली बस का संचालन बंद करने के बाद अब नेपाल सरकार ने भी देहरादून आने वाली बस के संचालन पर रोक लगा दी है। संक्रमण से यात्रियों को बचाने के लिए अधिकारियों ने हरिद्वार से रुपैड़िया नेपाल बॉर्डर पर जाने वाली बसों के संचालन पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

रोडवेज महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि नेपाल के महेंद्र नगर से देहरादून आने वाली बस के संचालन पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में नेपाल सरकार से अनुरोध किया गया था। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने तमाम राज्य सरकार को आदेश जारी किया है कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से गुजरने वाली बसों को किसी भी सूरत में देश की सीमाओं में न दाखिल होने दिया जाए।

महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि हरिद्वार से रुपैड़िया नेपाल जाने वाली बसों के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है। यात्रियों में कोरोना वायरस का संक्रमण न हो इसके मद्देनजर फिलहाल कुछ बसों के संचालन पर रोक लगाने का फैसला किया गया है लेकिन आने वाले समय में यदि स्थिति बिगड़ती है तो और बसों के संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।

सहायक महाप्रबंधकों को हिदायत दी गई है कि वे यात्रियों की संख्या के अनुसार ही बसाें के शेड्यूल में बदलाव कर सकते हैं। यदि स्थिति सामान्य होती है और यात्रियाें की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो नए सिरे से बसों को संचालित किए जाने पर विचार विमर्श किया जा सकता है।


स्पेन से दुगड्डा पहुंचा युवक, स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल पहुंचाया
नौकरी की तलाश में स्पेन गया कोटद्वार का युवक अपने घर दुगड्डा लौटा है। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने उसे घर से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। उसे अब एक सप्ताह के लिए आइसोलेट किया है। हालांकि अभी तक युवक में कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं मिले हैं।

एक डाक्टर के अलावा 10 स्वास्थ्य कर्मियों की टीम युवक की जांच कर रही है। दुगड्डा का एक युवक एक माह पहले नौकरी की तलाश में स्पेन गया था। वहां पर कारोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए वह भारत लौट आया। उसका दिल्ली एयरपोर्ट पर मेडिकल चेकअप किया गया, जहां उसका स्वास्थ्य सामान्य मिला।

वह 17 मार्च को दुगड्डा पहुंच गया। बृहस्पतिवार को किसी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुगड्डा को युवक के स्पेन से लौटने की सूचना दी बताया कि वह दुगड्डा में दुकान चला रहा है। सूचना पर स्वास्थ्य कर्मियों की टीम उसके घर पहुंचे और उसे अस्पताल ले आई।

चिकित्साधिकारी डा. नाजिम अली ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। फिलहाल युवक में कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं लेकिन एहतियात के तौर पर उसे आइसोलेट किया जा रहा है।


कोरोना: नेपाल से दून आने वाली बसों का संचालन भी बंद, स्पेन से युवक को आइसोलेशन में रखा
 

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Police stripping Car / vehicles of tourists at Uttarakhand Borders.
No stay options available for Tourists of India or abroad.
Stay at Hotels / Guest Houses is banned by UK Govt.
 
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