Road conditions - Uttarakhand

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Kedarnath Dham Snow Cleaning Work Continue, See Beautiful Visuals

सफेद चादर से ढका बाबा केदार का धाम, आस्था पथ से ऐसे साफ की जा रही बर्फ, तस्वीरें...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग, Updated Mon, 13 Apr 2020 07:01 PM IST

5 - फोटो : अमर उजाला

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अप्रैल के महीने में भी केदारनाथ धाम बर्फ की सफेद चादर से ढका है। यहां मंदिर के आस्था पथ से लेकर परिसर तक करीब पांच से छह फीट बर्फ जमी हुई है। वुड स्टोन कंपनी के 50 मजदूरों की टीम केदारपुरी में बर्फ की सफाई में जुटी है।





- फोटो : अमर उजाला

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टीम का कहना है कि एक सप्ताह में यहां बर्फ को साफ कर आवाजाही के लिए सभी रास्ते खोल दिए जाएंगे। साथ ही परिसर को भी पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा। पैदल मार्ग पर छानी कैंप से रुद्रा प्वाइंट तक मजदूरों की टीम बर्फ साफ कर रही है।





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बीते चार दिन से कार्यदायी संस्था के मजदूर केदारनाथ मंदिर मार्ग व परिसर के आसपास की बर्फ को साफ करने का कार्य कर रहे हैं। यहां चरणबद्ध तरीके से काम करते हुए पहले चरण में मंदिर मार्ग व परिसर को साफ किया जाएगा। इसके बाद आवासीय भवनों को जाने वाले रास्तों और तीसरे चरण में पुनर्निर्माण कार्य स्थलों में जमा बर्फ को साफ किया जाना है।




- फोटो : अमर उजाला

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कार्यदायी संस्था के टीम प्रभारी मनोज सेमवाल ने बताया कि 130 मजदूरों को तीन टीमों में बांटा गया है। पहली टीम में 50 लोग हैं, जो केदारनाथ में बर्फ सफाई का कार्य कर रहे हैं। दूसरी टीम में 35 मजदूर हैं, जो रुद्रा प्वाइंट से छानी कैंप के बीच काम कर रहे हैं। जबकि 45 मजदूर भीमबली में मौजूद हैं, जो रामबाड़ा से छानी कैंप के बीच मौजूद हिमखंडों को हटा रहे हैं।





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टीम का कहना है कि मौसम ने साथ दिया तो 20 अप्रैल तक पैदल मार्ग को केदारनाथ तक घोड़ा-खच्चरों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि पैदल मार्ग से आवाजाही शुरू होते ही धाम में बिजली, पानी और संचार सेवा को प्राथमिकता से बहाल कर दिया जाएगा। साथ ही 25 अप्रैल तक यात्राकाल के पहले 15 दिन का राशन व अन्य सामग्री धाम पहुंचा दी जाएगी।



सफेद चादर से ढका बाबा केदार का धाम, आस्था पथ से ऐसे साफ की जा रही बर्फ, तस्वीरें...
 

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Coronavirus Chardham Yatra 2020 Update, COVID 19 News; Kedarnath Dham Rawal Standard In Maharashtra


उत्तराखंड / केदारनाथ के रावल महाराष्ट्र में फंसे हैं, बाबा केदारनाथ का स्वर्ण मुकुट उन्हीं के पास, कपाट खुलते वक्त उनका रहना जरूरी


29 अप्रैल को सुबह 6 बजे केदारनाथ के कपाट खुलने हैं। केदारनाथ के रावल खुद पूजा नहीं करते, लेकिन इन्हीं के निर्देश पर पुजारी मंदिर में पूजा करते हैं।


29 अप्रैल को सुबह 6 बजे केदारनाथ के कपाट खुलने हैं। केदारनाथ के रावल खुद पूजा नहीं करते, लेकिन इन्हीं के निर्देश पर पुजारी मंदिर में पूजा करते हैं।
  • केदारनाथ के रावल यानी गुरु हर साल महाराष्ट्र से आते हैं, उनके अलावा भगवान की प्रतिमा कोई नहीं छू सकता
  • 29 अप्रैल को सुबह 6 बजे मंदिर के कपाट खुलेंगे, इस बार दर्शन ऑनलाइन करने पर विचार और विवाद
  • केदारनाथ मंदिर पहुंचने के लिए 130 कर्मचारी बर्फ हटाने का काम कर रहे, अगले 5 दिन में मंदिर का रास्ता खुलेगा

दैनिक भास्कर
Apr 17, 2020, 05:07 PM IST

देहरादून. केदारनाथ मंदिर के मुख्य रावल महाराष्ट्र के नांदेड में फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कपाट खुलने से पहले केदारनाथ पहुंचने की अनुमति मांगी है। रावल भीमाशंकर ने इसके लिए प्रधानमंत्री को चिट्‌ठी लिखी है। उन्होंने सड़क मार्ग से उत्तराखंड जाने की इजाजत मांगी है। हालांकि, उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
इस बीच, उत्तराखंड सरकार उन्हें एयरलिफ्ट करने पर विचार कर रही है। उनके साथ मंदिर ट्रस्ट के चार और लोग भी हैं। केदारनाथ को पहनाया जाने वाला सोने का मुकुट भी उन्हीं के पास है। लॉकडाउन के चलते टिहरी राजघराने के सदस्यों का पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है, परंपरा के मुताबिक कपाट खुलते वक्त उनका होना भी जरूरी है।




मंदिर के नजदीक 7 फीट गहराई तक बर्फ जमी है। किसी भी तरह की मशीनें यहां आ नहीं सकतीं, इसलिए गेंती-फावड़े से ही धीरे-धीरे बर्फ हटाई जा रही है।


केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल से खुलेंगे
29 अप्रैल को सुबह 6 बजे से केदारनाथ के कपाट खुलने हैं, जबकि इससे पहले 26 अप्रैल को यमनोत्री गंगोत्री के कपाट खुलेंगे। हालांकि, सरकार ने इस बार चारधाम मंदिरों के दर्शन ऑनलाइन करवाने का फैसला लिया है। इस पर स्थानीय लोगों और पुजारियों ने आपत्ति जताई है।


परंपरा के मुताबिक रावल ही मूर्ति छू सकते हैं
केदारनाथ के रावल (गुरु) महाराष्ट्र या कर्नाटक और बद्रीनाथ के केरल से होते हैं। ये लोग यहीं से हर साल यात्रा के लिए आते हैं। परंपरा के मुताबिक, केदारनाथ के रावल खुद पूजा नहीं करते, लेकिन इन्हीं के निर्देश पर पुजारी मंदिर में पूजा करते हैं। वहीं, बद्रीनाथ के रावल के अलावा कोई और बद्रीनाथ की मूर्ति नहीं छू सकता।


आदि शंकराचार्य के वक्त से चली आ रही परंपरा के मुताबिक, कपाट खुलते वक्त मुख्य पुजारी का वहां मौजूद रहना जरूरी है। केदारनाथ का स्वर्ण मुकुट इनके पास ही रहता है और पारंपरिक कार्यक्रमों में ये उसे पहनते भी हैं, जिसे कपाट खुलने पर केदारनाथ को पहनाया जाता है।


आदि शंकराचार्य के वक्त से चली आ रही परंपरा के मुताबिक, कपाट खुलते वक्त रावल का वहां मौजूद रहना जरूरी है। केदारनाथ का स्वर्ण मुकुट इनके पास ही रहता है और पारंपरिक कार्यक्रमों में ये उसे पहनते भी हैं, जिसे कपाट खुलने पर केदारनाथ को पहनाया जाता है।


टिहरी महाराज की जन्म कुंडली देखकर कपाट खुलने की तारीख तय होती है
टिहरी दरबार नरेंद्र नगर में ही टिहरी महाराज की जन्म कुंडली देखकर मंदिर के कपाट खुलने की तारीख तय होती है। टिहरी राजघराने के लोग, जिन्हें बोलंदा बद्री भी कहते हैं, उनका बद्रीनाथ के कपाट खुलने के वक्त मंदिर में रहना जरूरी है और उनके राज पुरोहित ही पूजा करते हैं। बद्रीनाथ की गारू घड़ा की परंपरा भी राज परिवार की महारानी और महिलाएं पूरी करती हैं।


केदारनाथ मंदिर के रास्ते से बर्फ हटाए जाने में बस 1 किमी की दूरी बाकी
केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में बर्फ जमी हुई थी। अब केवल एक किलोमीटर का हिस्सा बाकी रह गया है। अगले 5 दिन में इस एक किमी में जमी बर्फ की सफाई का काम भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद मंदिर तक का रास्ता आने-जाने के लिए खुल जाएगा।



1 मार्च से केदारनाथ मंदिर के रास्ते की सफाई का काम शुरू हुआ था। केदारनाथ में इन दिनों रात का टेम्प्रेचर माइनस 3 डिग्री और दिन में 12 से 15 डिग्री है। बीच-बीच में बर्फबारी भी हो रही है।


1 मार्च से केदारनाथ मंदिर के रास्ते की सफाई का काम शुरू हुआ था। केदारनाथ में इन दिनों रात का टेम्प्रेचर माइनस 3 डिग्री और दिन में 12 से 15 डिग्री है। बीच-बीच में बर्फबारी भी हो रही है।
इस बीच, यात्रा मार्ग पर खच्चरों का संचालन भी लिनचोली तक शुरू हो गया है। रास्ते मे बड़े-बड़े हिम शिखर होने के कारण खच्चरों का संचालन अभी मंदिर तक नहीं हो पा रहा है। केदारनाथ में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण सफाई के काम में रुकावट आ रही है। वुडस्टोन कंपनी के 130 कर्मचारी इस काम को कर रहे हैं।


केदारनाथ के रावल महाराष्ट्र में फंसे हैं, बाबा केदारनाथ का स्वर्ण मुकुट उन्हीं के पास, कपाट खुलते वक्त उनका रहना जरूरी
 

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Char Dham Yatra 2020: Kedarnath Dham Rawal Appoint Main Pujari

Chardham Yatra 2020 : केदारनाथ धाम के लिए मुख्य पुजारी अधिकृत करते हैं रावल, उन्हीं के निर्देशन में होंगी सभी पूजा-परंपराएं

विनोद नौटियाल, अमर उजाला, ऊखीमठ Updated Wed, 22 Apr 2020 03:18 PM IST


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केदारनाथ - फोटो : ANI

केदारनाथ के रावल ही धाम में छह माह की पूजा-अर्चना के लिए पुजारी को अधिकृत करते हैं। वे, सर्वोपरि हैं, उनके दिशा-निर्देशन में पूजा परंपराओं का निर्वहन होता है। रावल, धाम समेत करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सम्मान है।
यह, बात वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती ने कही है। बताया कि श्रीबदरीनाथ और श्रीकेदारनाथ धाम की पूजा पद्धति में बहुत अंतर है। एक तरफ जहां बदरीनाथ में रावल स्वयं मंदिर में भगवान नारायण की पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, केदारनाथ में रावल पुजारी को अधिकृत करते हैं।

कपाटोद्घाटन से लेकर कपाट बंद होने के दौरान, जब भी उनकी इच्छा हो, वे केदारनाथ जा सकते हैं। पोस्ती का कहना है कि केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर रावल की मौजूदगी में पंचाग गणना पर तय होती है।
तिथि में बदलाव करना इतना आसान नहीं
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि में बदलाव करना इतना आसान नहीं है। कोरोना संक्रमण के बीच शासन स्तर पर कपाट खुलने की तिथि में बदलाव की बात कही गई थी, जिस पर सभी जरूरी लोगों की मौजूदगी के बाद तय तिथि पर ही कपाटोद्घाटन का निर्णय लिया गया, जिसका रावल ने भी परंपरा का सम्मान बताते हुए स्वागत किया।

इधर, पंचगाई एवं दूस्तूदार पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट का कहना है कि यदि किन्हीं परिस्थितियों में केदारनाथ के रावल कपाटोद्घाटन में उपलब्ध नहीं होते हैं, तब भी परंपरानुसार धाम के लिए नियुक्त शिष्य (मुख्य पुजारी) ही कपाटोद्घाटन करते हैं।

उन्होंने कहा कि शासन द्वारा बिना विचार-विमर्श के कपाट खोलने की तिथि में बदलाव की जो बात कही गई थी, वह उचित नहीं था। यह, सदियों से चली आ रही परंपराओं के विरूद्ध है।
परंपरा के साथ छेड़छाड़ किसी भी स्थिति में उचित नहीं
इधर, केदारनाथ धाम के कपाट तय तिथि 29 अप्रैल को ही खोले जाने का तीर्थ पुरोहित समाज एवं हक-हकूकधारियों ने स्वागत किया है। केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, आनंद सेमवाल, राजकुमार तिवारी, प्रदीप बगवाड़ी समेत अन्य लोगों ने कहा कि तय तिथि पर केदारनाथ के कपाट खोलना, स्वागत योग्य निर्णय है।

परिस्थितियों के नाम पर परंपरा के साथ छेड़छाड़ किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। अन्यथा, पावन पर्वों व धार्मिक अनुष्ठानों के लिए निर्धारित किए जाने वाले दिनों और भक्तों की आस्था का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।

केदारनाथ धाम के कपाट तय तिथि पर खोले जाएंगे, इस संबंध में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है। परंपरा के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। मैं, स्वस्थ्य हूं और सैंपल भी लिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद शासन-प्रशासन के जो भी निर्देश होंगे, उसी के हिसाब से बाबा केदार की डोली के धाम प्रस्थान व अन्य धार्मिक परंपराओं के संपादन में प्रतिभाग कर पाऊंगा।
- भीमाशंकर लिंग, रावल केदारनाथ धाम

 

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UP seer demands opening of Badrinath shrine on April 30

The portals of the Badrinath temple in the Garhwal Himalayas were scheduled to open on April 30, but the date has been postponed to May 15 due the coronavirus pandemic.

INDIA Updated: Apr 25, 2020 15:41 IST
Press Trust of India

Press Trust of India
Mathura

“Every effort should be made to please the deity,” the seer said.


“Every effort should be made to please the deity,” the seer said.(Rajeev Kala/HT)



A seer in Uttar Pradesh’s Mathura city on Saturday demanded that the Uttarakhand government revoke its decision of postponing the opening of the Badrinath shrine and said “changing the auspicious date means inviting wrath of the deity”.
The portals of the Badrinath temple in the Garhwal Himalayas were scheduled to open on April 30, but the date has been postponed to May 15 due the coronavirus pandemic.
“At a time when the country is facing Covid-19 crisis, every effort should be made to please the deity,” Dwarka Sharda Peethadheeshwar Jagatguru Shankaracharya Swaroopanand Saraswati said.
“Change in opening date of Badrinath shrine virtually means inviting wrath of the deity,” he added.


UP seer demands opening of Badrinath shrine on April 30
 

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Doors opening on 26 on occasion of Akshay Tritiya
Yamunotri & Gangotri Dham



Chardham Yatra 2020: Gangotri And Yamunotri Dham Door Open Today

Chardham Yatra 2020: आज से शुरू होगी विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा, हरिद्वार में सन्नाटा

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 26 Apr 2020 10:42 AM IST


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- फोटो : अमर उजाला

सार
लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी यात्रियों की आने की उम्मीद नहीं


विस्तार
उत्तराखंड के दो धामों गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट आज रविवार को दोपहर को खुल जाएंगे। इसके बाद विश्व प्रसिद्ध हरिद्वार में सन्नाटा पसरा हुआ है। दिनरात जाने वाली हरकी पैड़ी के गंगा घाटों पर दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा है।
तीर्थ यात्रियों से गुलजार रहने वाले पुरोहितों की गद्दियां भी लॉक हैं। कोरोना संक्रमण लंबा चलने और यात्रियों के नहीं आने की आशंका से धर्मनगरी का हर वर्ग का व्यापारी परेशान है। हर साल चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले हरिद्वार में चहल पहल शुरू हो जाती थी। बड़ी संख्या में यहां यात्री डेरा डाल देते थे। एक महीने पहले से ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से बुकिंग हो जाती थी। होटल, धर्मशाला, लॉज और गेस्ट हाउस मालिक भी तैयारी कर लेते थे। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने से ठीक एक दिन पहले कई वाहनों से यात्रियों को यहां से रवाना किया जाता था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। सारे प्रतिष्ठान बंद और सड़कों पर सन्नाटा पसरा है।
क्या कहते हैं कारोबारी
ट्रेवल्स एजेंसियों पर फरवरी से ही चारधाम यात्रा की बुकिंग शुरू हो गई थी। इस बार भी बेहतर कारोबार को लेकर सभी उम्मीद लगाए बैठे थे। कोरोना की वजह से पूरा कारोबार ठप हो गया है। दस हजार से अधिक बुकिंग निरस्त हो गई हैं।
- उमेश पालीवाल, अध्यक्ष टूर एंड ट्रेवल्स एसोसिएशन

वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद कोरोना की मौजूदा परिस्थिति और भी ज्यादा भयावह है। होटल संचालकों को भारी नुकसान पहुंचा है, 12 हजार से भी ज्यादा बुकिंग निरस्त हो गई हैं।
- आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन

बहुत से लोग चारधाम यात्रा पर आने के लिए कई महीने पहले से ही संपर्क करने लगे थे, लेकिन इस बार सबकुछ उल्टा हो गया। इस बार यात्रा चलने की उम्मीद नहीं है।
- महेश गौड़, अध्यक्ष राष्ट्रीय धर्मशाला सुरक्षा समिति हरिद्वार


Chardham Yatra 2020: आज से शुरू होगी विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा, हरिद्वार में सन्नाटा
 
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Yamunotri & Gangotri Dham
Doors opened on 26 April 2020

CM - Uttarakhand
Trivendra Singh Rawat
April 26 at 12:32 PM ·
अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही आज से चारधाम के कपाट खुलने की शुरुआत हो चुकी है। सभी श्रद्धालुओं और भक्तजनों को अनेक शुभकामनाएं, कोरोना महामारी के इस वैश्विक संकट में बेहद जरूरी हो जाता है कि हम भगवान की आराधना घर में रहकर ही करें, सोशल डिस्टेंसिंग का अवश्य अनुपालन करें,घर में रहें, सुरक्षित रहें।

#IndiaFightsCorona



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कोरोना वायरस व लॉक डाउन के चलते समस्त नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए गंगोत्री धाम के कपाट गंगा पूजन,गंगा सहस्त्रनाम पाठ एवं विशेष पूजा अर्चना के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ रोहिणी अमृत योग की शुभ बेला पर आज दोपहर 12:35 बजे कपाट खोल दिए गए है। कपाटोद्घाटन के दौरान सोशल डिस्टेंस का पूर्ण रूप से अनुपालन किया गया तथा सभी के द्वारा मास्क अनिवार्य रूप से पहने गये।
उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल को माँ गंगा जी की डोली उनके मायके व शीतकालीन प्रवास मुखबा से भैरोंघाटी के लिए रवाना हुई थी। भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद मां गंगा की डोली आज प्रातः 7 बजे गंगोत्री के लिए रवाना हुई। जहां गंगा पूजन,गंगा सहस्त्रनाम पाठ एवं विशेष पूजा अर्चना के बाद विधि विधान के साथ गंगा जी की भोग मूर्ति को मंदिर के भीतर विराजमान किया गया। पहली पूजा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम से हुई। उनके द्वारा तृतीया महापर्व की शुभ बेला पर मंदिर समिति गंगोत्री को भेंट राशि दी गई है।
 
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