Road conditions - Uttarakhand

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Char Dham Yatra 2020: Kedarnath Dham Doors Open Today In Lockdown

चारधाम यात्रा: आज शुभ मुहूर्त में खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, पूजा में शामिल होंगे पुजारी समेत केवल 16 लोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Wed, 29 Apr 2020 12:45 AM IST


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केदारनाथ - फोटो : अमर उजाला

आज सुबह 6.10 बजे मेष लग्न में भगवान केदारनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद अगले छह महीने तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना धाम में ही होगी। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय पूजा में सिर्फ पुजारी समेत 16 लोग ही शामिल होंगे। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा जाएगा।
तड़के तीन बजे से मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग द्वारा बाबा की समाधि पूजा के साथ अन्य सभी धार्मिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद तय समय पर सुबह 6.10 बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। देवस्थानम बोर्ड के कार्यधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि संगम से मंदिर परिसर तक बर्फ को काटकर चार फीट से अधिक चौड़ा रास्ता बनाया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के कारण इस बार आम श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी नहीं बन पाएंगे।


ऋषिकेश के सतीश ने सजाया है केदारनाथ मंदिर
केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को खुल जाएंगे। धाम को सुंदर फूलों से सजाया गया है। इस काम को अंजाम दिया है तीर्थनगरी के सतीश कालड़ा ने। सतीश ने बताया कि मंदिर को 10 क्विंटल फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया है। प्रतिवर्ष वह बदरीनाथ मंदिर को भी सजाने का कार्य करते हैं।

केदारनाथ मंदिर को सजाने का सौभाग्य उन्हें पहली बार मिला है। इधर, उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड ने बताया कि भगवान की पंचमुखी डोली केदारनाथ पहुंच गई है। कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सीमित संख्या में बोर्ड कर्मियों, हकूकधारी तीर्थ पुरोहितों एवं प्रशासन के लोगों को केदारनाथ धाम जाने की अनुमति दी गई है।
डाक से भेजा जाएगा भक्तों को प्रसाद
देवस्थानम बोर्ड को केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के लिए कोरोना संक्रमण से पूर्व दस लाख की ऑनलाइन बुकिंग मिल चुकी थी। ये सभी बुकिंग महाभिषेक पूजा व रुद्राभिषेक पूजा की थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण श्रद्धालु धाम नहीं जा पाएंगे। बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि ऑनलाइन जितनी बुकिंग मिली है, उनकी पूजा कर प्रसाद डाक से भेजा जाएगा।

केदारघाटी में होता वर्ष का नया दिन
वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि बाबा केदार धाम के कपाट खुलने का दिन केदारघाटीवासियों के लिए वर्ष का नया दिन जैसा होता है। इसी दिन से वे लोग अपनी वर्षभर की आजीविका का लेखाजोखा भी शुरू करते हैं। यात्रा से घाटी के 80 से अधिक गांवों के हजारों परिवार जुड़े हैं, जो स्थानीय बाजारों से लेकर पैदल मार्ग व धाम में व्यवसाय करते हैं। तीर्थ पुरोहित शीतकाल में देश के अलग-अलग राज्यों/शहरों में जाकर अपने यजमानों को यात्राकाल में बाबा के दर्शनों के लिए केदारनाथ आने का न्योता देते हैं।

केदारनाथ में सन्नाटा
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन ने इस वर्ष केदारनाथ यात्रा को परंपराओं तक समेटकर रख दिया है। रुद्रप्रयाग से लेकर केदारघाटी के बाजारों और धाम में सन्नाटा पसरा हुआ है। कारोबार पूरी तरह से चौपट हो चुका है। यात्रा में फूल, पूजा-सामग्री, चाय की दुकान, ढाबा, होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला/लॉज, भोजनालय, पानी/जूस, पार्किंग, पंचर, प्रसाद आदि से लाखों-करोड़ों का कारोबार होता आया है, लेकिन इस बार केदारनाथ धाम में प्रशासन, पुलिस और देवस्थानम बोर्ड के 35 लोग मौजूद हैं।



चारधाम यात्रा: आज शुभ मुहूर्त में खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, पूजा में शामिल होंगे पुजारी समेत केवल 16 लोग
 

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Char Dham Yatra 2020: Kedarnath Dham Doors Open Today In Lockdown


Chardham Yatra 2020: विधिविधान के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खुले केदारनाथ धाम के कपाट, पूजा में शामिल हुए 16 लोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Wed, 29 Apr 2020 10:48 AM IST


चारधाम यात्रा 2020
आज सुबह मेष लग्न में भगवान केदारनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। इसके बाद अगले छह महीने तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना धाम में ही होगी। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय पूजा में पुजारी समेत सिर्फ 16 लोग ही शामिल हुए। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया।
तड़के तीन बजे से मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग द्वारा बाबा की समाधि पूजा के साथ अन्य सभी धार्मिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद तय समय पर सुबह 6.10 बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए।
बाबा केदार हम सभी पर अपनी कृपा बनाकर रखें

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भगवान केदारनाथ के कपाट खोले जाने पर सभी श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए कहा कि बाबा केदार हम सभी पर अपनी कृपा बनाकर रखें। बाबा केदार के आशीर्वाद से हम कोरोना की इस वैश्विक महामारी को हराने में अवश्य कामयाब होंगे। कोरोना के कारण इस बार आम जन दर्शन के लिये नहीं आ सके। हम सभी के मन में बाबा केदार के लिए अपार श्रद्धा है। बाबा केदार, अपने भक्तों पर स्नेह बनाये रखें, यही कामना है।
बेहद सादगी पूर्वक खुले मंदिर के कपाट
धाम के कपाट खुलने के दौरान पिछले वर्षों की भांति सेना का बैंड शामिल नहीं हुआ। बेहद सादगी पूर्वक मंदिर के कपाट खुले।

बताया कि केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ऊखीमठ में चौदह दिनों की क्वारंटीन में हैं। उनके प्रतिनिधि के तौर पर पुजारी शिवशंकर लिंग ने कपाट खुलने की संपूर्ण प्रक्रियाओं का निर्वहन किया।

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड के चार में से तीन धामों के कपाट खुल गये हैं। गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर 26 अप्रैल को खुल चुके हैं। जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 15 मई को खुलेंगे।
ऋषिकेश के सतीश ने सजाया है केदारनाथ मंदिर
देवस्थानम बोर्ड के कार्यधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि संगम से मंदिर परिसर तक बर्फ को काटकर चार फीट से अधिक चौड़ा रास्ता बनाया गया है।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन के कारण इस बार आम श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी नहीं बन पाएंगे।

केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को खुल गए हैं। धाम को सुंदर फूलों से सजाया गया है। इस काम को अंजाम दिया है तीर्थनगरी के सतीश कालड़ा ने।

सतीश ने बताया कि मंदिर को 10 क्विंटल फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया है। प्रतिवर्ष वह बदरीनाथ मंदिर को भी सजाने का कार्य करते हैं।
डाक से भेजा जाएगा भक्तों को प्रसाद
केदारनाथ मंदिर को सजाने का सौभाग्य उन्हें पहली बार मिला है। इधर, उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सीमित संख्या में बोर्ड कर्मियों, हकूकधारी तीर्थ पुरोहितों एवं प्रशासन के लोगों को केदारनाथ धाम जाने की अनुमति दी गई है।

देवस्थानम बोर्ड को केदारनाथ धाम के कपाटोद्घाटन के लिए कोरोना संक्रमण से पूर्व दस लाख की ऑनलाइन बुकिंग मिल चुकी थी। ये सभी बुकिंग महाभिषेक पूजा व रुद्राभिषेक पूजा की थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण श्रद्धालु धाम नहीं जा पाएंगे। बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि ऑनलाइन जितनी बुकिंग मिली है, उनकी पूजा कर प्रसाद डाक से भेजा जाएगा।

केदारनाथ में सन्नाटा
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी लॉकडाउन ने इस वर्ष केदारनाथ यात्रा को परंपराओं तक समेटकर रख दिया है। रुद्रप्रयाग से लेकर केदारघाटी के बाजारों और धाम में सन्नाटा पसरा हुआ है। कारोबार पूरी तरह से चौपट हो चुका है।

यात्रा में फूल, पूजा-सामग्री, चाय की दुकान, ढाबा, होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला/लॉज, भोजनालय, पानी/जूस, पार्किंग, पंचर, प्रसाद आदि से लाखों-करोड़ों का कारोबार होता आया है, लेकिन इस बार केदारनाथ धाम में प्रशासन, पुलिस और देवस्थानम बोर्ड के 35 लोग मौजूद हैं।
केदारघाटी में होता वर्ष का नया दिन
वयोवृद्ध तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि बाबा केदार धाम के कपाट खुलने का दिन केदारघाटीवासियों के लिए वर्ष का नया दिन जैसा होता है। इसी दिन से वे लोग अपनी वर्षभर की आजीविका का लेखाजोखा भी शुरू करते हैं।

यात्रा से घाटी के 80 से अधिक गांवों के हजारों परिवार जुड़े हैं, जो स्थानीय बाजारों से लेकर पैदल मार्ग व धाम में व्यवसाय करते हैं। तीर्थ पुरोहित शीतकाल में देश के अलग-अलग राज्यों/शहरों में जाकर अपने यजमानों को यात्राकाल में बाबा के दर्शनों के लिए केदारनाथ आने का न्योता देते हैं।



Chardham Yatra 2020: विधिविधान के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खुले केदारनाथ धाम के कपाट, पूजा में शामिल हुए 16 लोग
 

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Kedarnath Yatra 2020 : Lockdown के बीच खुले Kedarnath Temple के कपाट लेकिन भक्त नहीं कर पाएंगे दर्शन
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•Apr 28, 2020


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Amar Ujala

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Corona काल और Lockdown के बीच Kedarnath Temple के कपाट खुल गए। कपाट खुलने के समय पूजा में पुजारी समेत सिर्फ 16 लोग ही शामिल हुए। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया।

#KedarnathTemple #केदारनाथ #ExtendTheLockdown
 

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Mansarovar Yatra Route is made with lots of effort after losing life and machinery etc.
Road is made to shorten the Yatra time for 90 km
Cost is too much but finally it is made.

Uttarakhand › Dehradun ›
Indo China Road News In Hindi: Nine People Died During Road Construction In 10 Years

21 साल में भारत से चीन सीमा तक पहुंची सड़क, इंजीनियर समेत नौ लोगों को गंवानी पड़ी थी जान, तस्वीरें...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़, Updated Fri, 08 May 2020 09:14 PM IST

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- फोटो : अमर उजाला

भारत से चीन सीमा पर सड़क पहुंचाना बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के लिए किसी जंग से कम नहीं था। आज रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए चीन सीमा के लिए बनी घट्टाबगढ़-लिपुलेख सड़क का ऑनलाइन उद्घाटन किया। लेकिन हम आपको बताते हैं कि किन कठिनाइयों के साथ मजदूरों ने इस जंग में मुकाम हासिल किया।




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चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख के लिए 1999 से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। तवाघाट से लिपुलेख तक कुल 95 किमी सड़क की कटिंग का काम पूरा हो गया है। तवाघाट से गर्बाधार तक 2008 में ही सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया था।



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2014 के बाद सड़क निर्माण में काफी तेजी आई। तवाघाट से गुंजी तक कठिन चट्टानें होने के कारण सड़क निर्माण में काफी कठिनाइयां आईं। लखनपुर और नजंग की पहाड़ियों को काटना बेहद कठिन था। काटने में पिछले दस सालों में ग्रिफ के एक जूनियर इंजीनियर, दो ऑपरेटरों और छह स्थानीय मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।


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करोड़ों की मशीनें भी इन्हीं चट्टानों में दफन हो गईं थीं। ग्रिफ के अधिकारियों के अनुसार सड़क निर्माण के दौरान 65 लाख की लागत का डोजर, 2.5 करोड़ रुपये की डीसी 400 ड्रिलिंग मशीन, 40 लाख रुपये की वैगन ड्रिल मशीन सहित कई मशीनें नष्ट हो गई थीं।



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चीन सीमा तक बनी घट्टाबगढ़-लिपुलेख सड़क पर करीब 408 करोड़ की राशि खर्च हो चुकी है। सड़क कटिंग का काम 2008 से पहले ग्रिफ की 65 आरसीसी ने किया। जून 2008 से 67 आरसीसी ग्रिफ सड़क का काम कर रही है। ग्रिफ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने बताया कि सड़क की कटिंग का काम पूरा हो गया है। अगले दो-तीन वर्षों में सड़क को पक्का कर लिया जाएगा।





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बीआरओ ने गुंजी तक भारी मशीनें पहुंचाई थी। इन सभी मशीनों और टनों भार वाले अन्य उपकरणों को हेलीकॉप्टरों से पहुंचाया गया था। कई भारी मशीनों के पार्ट्स अलग-अलग कर हेलीकाप्टरों से गुंजी पहुंचाए गए, जिन्हें ग्रिफ के अभियंताओं ने जोड़ा।




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कैलाश यात्रा पर जाने वाले लोगों के साथ ही स्थानीय लोगों, सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों को भी इस सड़क के बनने की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। चीन सीमा तक सड़क बनने से प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा अब सुगम हो जाएगी। इस यात्रा में अब महज एक सप्ताह का समय लगेगा। अब तक इसमें 21 दिन का समय लगता था।


 

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Kailash Mansarovar Yatra Route Link Road To Kailash Mansarovar Yatra Defence Minister Rajnath Singh Border Roads Organisation Dharchula To Lipulekh India China Border Cds General Bipin Rawat

अब आप लिंक रोड के जरिए कैलाश मानसरोवर तक जा सकते हैं, पहला जत्था रवाना, सरहद पर आसानी से पहुंचेगी सेना

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 May 2020 05:30 PM IST

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Rajnath Singh inaugrates Kailash Mansarovar via Link Road - फोटो : Social Media


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सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिंक रोड का उद्घाटन किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाने भी मौजूद थे।

विस्तार
राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, "मानसरोवर यात्रा के लिए लिंक रोड का आज उद्घाटन करने पर प्रसन्नता हो रही है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने धारचूला से लिपुलेख (चीन सीमा) तक सड़क संपर्क स्थापित कर लिया है। इसे कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग के तौर पर भी जाना जाता है।"

राजनाथ सिंह ने पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के काफिले को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस बीच, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उत्तराखंड में बीआरओ ने कैलाश मानसरोवर मार्ग को लिपुलेख दर्रे से जोड़ दिया है, जो सीमावर्ती गांवों और सुरक्षा बलों को संपर्क स्थापित करने में मदद करेगा।

मंत्रालय ने ट्वीट किया, "सीमा सड़क संगठन ने कैलाश मानसरोवर रूट को चीन बॉर्डर से जोड़ दिया है। Covid-19 महामारी का मुकाबला करते हुए, उत्तराखंड में बीआरओ ने कैलाश मानसरोवर मार्ग को 17,060 फीट की ऊंचाई पर लिपुलेख दर्रा से जोड़ा है। इस प्रकार सीमावर्ती गांवों और सुरक्षा बलों को संपर्क प्रदान किया है।"
सरहद पर आसानी से पहुंचेगी सेना
चीन सीमा को जोड़ने वाली इस सड़क के निर्माण से सरहद पर मुस्तैद सेना और अर्धसैनिक बलों को आने जाने में सहूलियत होगी। इसके साथ ही सेना, आईटीबीपी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान अग्रिम चौकियों तक वाहनों से पहुंच सकेंगे।
सड़क बनने में लगे 12 साल
गौरतलब है कि लिपुलेख सड़क के निर्माण का जिम्मा 2008 में बीआरओ को सौंपा गया था। विषम भोगौलिक परिस्थितियों के चलते बीआरओ को सड़क की कटान में 12 साल का वक्त लगा। अब तवाघाट से लिपुलेख सीमा तक 95 किलोमीटर सड़क की कटिंग हो चुकी है।


अब आप लिंक रोड के जरिए कैलाश मानसरोवर तक जा सकते हैं, पहला जत्था रवाना, सरहद पर आसानी से पहुंचेगी सेना
 

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Raksha Mantri Shri
@rajnathsingh
today inaugurated the Link Road from Dharchula to Lipulekh (China Border) famously known as Kailash-Mansarovar Yatra Route. RM congratulated BRO for achieving the connectivity. 1/4

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2:01 PM · May 8, 2020·Twitter for iPhone
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रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India
@DefenceMinIndia

·
11h

Replying to
@DefenceMinIndia
The Darchula – Lipulekh road is an extension of Pithoragarh-Tawaghat-Ghatiabagarh road. It originates from Ghatiabagarh and terminates at Lipulekh Pass, the gateway to Kailash Mansarovar. In this 80 Km road, the altitude rises from 6000 feet to 17,060 feet.


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रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India
@DefenceMinIndia

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With the completion of this project, the arduous trek through treacherous high-altitude terrain can now be avoided by the Pilgrims of Kailash Mansarovar Yatra and the period of journey will be reduced by many days.


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रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India
@DefenceMinIndia

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At present, the travel to Kailash Mansarovar takes around two to three weeks through Sikkim or Nepal routes. Lipulekh route had a trek of 90 Km through high altitude terrain and the elderly yartris faced lot of difficulties. Now, this yatra will get completed by vehicles.


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रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India
@DefenceMinIndia

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The Darchula – Lipulekh road is an extension of Pithoragarh-Tawaghat-Ghatiabagarh road. It originates from Ghatiabagarh and terminates at Lipulekh Pass, the gateway to Kailash Mansarovar. In this 80 Km road, the altitude rises from 6000 feet to 17,060 feet. 4/4


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रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India
@DefenceMinIndia

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With the completion of this project, the arduous trek through treacherous high-altitude terrain can now be avoided by the Pilgrims of Kailash Mansarovar Yatra and the period of journey will be reduced by many days.


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rouniyar krisna
@RouniyarKrisna

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@DefenceMinIndia
and
@rajnathsingh
How can India built road in Nepal's land ? Lipulekh is Nepal's property don't make any issues on it be crystal clear... We don't want any type of issues with our neighbours but if our land is attached by neighbour we won't left any one.






@kpsharmaoli

@narendramodi



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नेपाली केटो

@Himansh30935252

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Replying to
@DefenceMinIndia
and
@rajnathsingh
#StopConstructionOnDisputedLand



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Chetanath Neupane

@chetanath_n

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Replying to
@DefenceMinIndia
and
@rajnathsingh
This is our land, land of Nepal



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Lokendra Acharya
@LokendraAchary5

·
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Replying to
@DefenceMinIndia

@KanakManiDixit
and
@rajnathsingh
By the way Lipulekh is a part of Nepal.










At present, the travel to Kailash Mansarovar takes around two to three weeks through Sikkim or Nepal routes. Lipulekh route had a trek of 90 Km through high altitude terrain and the elderly yartris faced lot of difficulties. Now, this yatra will carried out using vehicles.







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Dehradun › Kailash Mansarovar Yatra Will Complete In Just One Week Instead 21 Days

अब केवल एक हफ्ते में पूरी कर सकेंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा, दुर्गम रास्तों का भी नहीं करना पड़ेगा सफर
शालू दताल, अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)

Updated Sat, 09 May 2020 01:30 AM IST


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- फोटो : अमर उजाला

चीन सीमा तक सड़क बनने से प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा अब सुगम हो जाएगी। इस यात्रा में अब महज एक सप्ताह का समय लगेगा। अब तक इसमें 21 दिन का समय लगता था। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अब तक यात्रियों को आधार शिविर धारचूला से लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा पैदल ही तय करनी पड़ती थी।


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- फोटो : अमर उजाला

कठिन और दुर्गम स्थलों से होकर गुजरने वाली यात्रा बेहद जोखिम भरी थी। यात्रियों को पहली शाम आधार शिविर में बितानी पड़ती थी। इसके बाद मांगती, गाला, बूंदी, गुंजी और नाभीढांग के पड़ावों में रुकना पड़ता था।


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सीमांत तक सड़क बनने से अब कैलाश यात्री दिल्ली से सीधे लिपुलेख पहुंच सकेंगे। इस सड़क के बनने से अब तक कठिन मानी जाने वाली यात्रा सुगम हो जाएगी। इसके अलावा छोटा कैलाश की यात्रा भी सुगम होगी।


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छोटा कैलाश के यात्री गुंजी, कुटी और जौलिंगकांग तक वाहन से पहुंच सकेंगे। इसके लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीआरओ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह अद्भुत और प्रशंसनीय है कि सीमा सड़क संगठन ने इस कठिन कार्य को पूरा किया।



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घट्टाबगढ़-लिपुलेख सड़क के ऑनलाइन उद्घाटन के अवसर पर मौजूद रहे अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद अजय टम्टा ने चीन सीमा के लिए मुनस्यारी से बन रही धापा-बोगड्यार-मिलम मार्ग का मामला भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उठाया। इस पर उन्होंने कहा कि 2021 मार्च तक इस मार्ग का भी निर्माण पूर्ण हो जाएगा।

अब केवल एक हफ्ते में पूरी कर सकेंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा, दुर्गम रास्तों का भी नहीं करना पड़ेगा सफर
 

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Rajnath Singh inaugurates new road to Kailash Mansarovar


Dinakar Peri


NEW DELHI, MAY 08, 2020 13:49 IST

UPDATED: MAY 08, 2020 13:49 IST



Except for a 5-km trek on the Chinese side across Lipulekh Pass, the complete travel will now be on vehicles. | File


Except for a 5-km trek on the Chinese side across Lipulekh Pass, the complete travel will now be on vehicles. | File | Photo Credit: PTI


Travel time for yatris set to come down significantly
Defence Minister Rajnath Singh on Friday dedicated to the nation a new 80-km road in Uttarakhand which connects close to the Line of Actual Control (LAC) and opens a new route for Kailash Mansarovar yatra via Lipulekh Pass, significantly reducing the travel time for yatris.

“Delighted to inaugurate the Link Road to Mansarovar Yatra today. The Border Roads Organisation (BRO) achieved road connectivity from Dharchula to Lipulekh (China Border) known as Kailash-Mansarovar Yatra Route. Also flagged off a convoy of vehicles from Pithoragarh to Gunji through video conferencing,” Mr. Singh said in a tweet.

Talking of the advantages, a defence source said, “The biggest advantage of the new route over the earlier ones is that it is the shortest and cheapest route with just one-fifth distance of road travel as compared to others. There is no air travel involved and majority of the travel, 84%, is in India and only 16% in China compared to other routes where 80% road travel is in China.”

Also, except for a 5-km trek on the Chinese side across Lipulekh Pass, the complete travel will now be on vehicles. “So, a five-day trek will reduce to two days of road travel. To and fro, six days are likely to be saved,” the source stated. This means that yatris can travel up to 5 km from the border on vehicles and make the first night halt at Gunji for Stage-I acclimatisation and second halt near Lipulekh Pass for Stage-II acclimatisation.

Earlier, after reaching Ghatiabgarh via Pitharogarh, it was 79 km or five days of foot trek to Lipulekh Pass. Pitharogarh is 490 km from Delhi. Lipulekh pass at 17,000 feet is close to the tri-junction of India, China and Nepal.
The new 80 km-long greenfield road from Ghatiabgarh to Lipulekh was made under directions of the China Study Group (CSG) and is funded by Indo-China Border Road (ICBR) and is scheduled to be completed by December 2022. This road was approved by the Cabinet Committee on Security (CCS) in 2005 at a cost of ₹80.76 crore and in 2018 the cost was revised to ₹439.40 crore.
The road was completed up to 5 km short of Lipulekh pass on April 17, 2020. The last bit could not be finished due to a temporary ban placed on last-mile connectivity in 2016 by the Director General Military Operations, which is yet to be lifted. “If approved, work on last-mile connectivity to Lipulekh Pass will commence by mid-May (post snow clearance) and will be completed this year,” the source added.


Rajnath Singh inaugurates new road to Kailash Mansarovar
 
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