Road conditions - Uttarakhand

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'नेपाली बहू' की वजह से हुई भारत-नेपाल सीमा पर गोलीबारी !




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Prabhat Khabar
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'नेपाली बहू' की वजह से हुई भारत-नेपाल सीमा पर गोलीबारी!
बिहार के सीतामढ़ी जिला से लगती भारत नेपाल सीमा पर गोलीबारी की घटना हुई. गोलीबारी के कारणों का खुलासा हो गया है. वजह हैरान करने वाली है. जांच में पता चला है कि ये पूरा वाकया एक भारतीय नागरिक की नेपाली बहू की वजह से हुआ.. लेकिन कैसे, चलिये आपको पूरा मामला समझाते हैं.


12 जून को सीतामढ़ी जिले से सटे भारत नेपाल की सीमा पर नेपाली सशस्त्र बल के जवानों ने गोली चलाई. इसमें 1 भारतीय नागरिक की मौत हो गयी. मरने वाले नागरिक का नाम विकेश यादव था. उसकी उम्र 22 साल थी. घटना में 24 साल का उदय ठाकुर और 18 साल का रमेश राम घायल हो गया. इन दोनों को बिहार की राजधानी पटना से 85 किमी दूर सीतामढ़ी के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
 

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नेपाल फायरिंग की Inside story: भारतीय नागरिक और नेपाली बहू पर शुरू हुआ बवाल

अधिकारियों ने बताया कि 45 वर्षीय भारतीय नागरिक लगन यादव को नेपाल सीमा पुलिस ने हिरासत में लिया है.


नेपाल फायरिंग की Inside story: भारतीय नागरिक और नेपाली बहू पर शुरू हुआ बवाल

(फाइल फोटो)

Written By:



ज़ी न्यूज़ डेस्क


Updated:
Jun 12, 2020, 04:54 PM IST


नई दिल्ली: बिहार (Bihar) के सीतामढ़ी जिले से लगी नेपाल की सीमा पर शुक्रवार को नेपाल सीमा पुलिस के जवानों की कथित गोलीबारी में एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए. अधिकारियों ने बताया कि 45 वर्षीय भारतीय नागरिक लगन यादव को नेपाल सीमा पुलिस ने हिरासत में लिया है. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्र ने बताया कि घटना सुबह करीब आठ बजकर 40 मिनट पर नेपाली सीमा के भीतर हुई.


चंद्रा ने बताया कि स्थिति अभी सामान्य है और हमारे स्थानीय कमांडर ने तत्काल नेपाली समकक्ष एपीएफ से संपर्क किया. एसएसबी के महानिरीक्षक (आईजी) पटना फ्रंटियर संजय कुमार ने बताया कि घटना स्थानीय लोगों और नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के बीच हुई.


आईजी ने बताया कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है जबकि अन्य दो लोग घायल हुए हैं. उन्होंने बताया कि 22 वर्षीय विकेश यादव को पेट में गोली लगी थी जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई जबकि उदय ठाकुर (24) और उमेश राम (18) घायल हुए हैं और उन्हें बिहार की राजधानी पटना से 85 किलोमीटर दूर सीतामढ़ी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
कुमार ने बताया कि स्थानीय लोगों से मिली प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक एपीएफ के जवानों ने लगन यादव की पुत्रवधू की इलाके में उपस्थिति पर तब आपत्ति जताई जब उसे उन्होंने भारत में मौजूद कुछ लोगों से बातचीत करते हुए देखा.


उन्होंने बताया कि लगन यादव की पुत्रवधू नेपाल की है. अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय लोगों की सीमा के दोनों ओर रिश्तेदारी है और कोई बाड़ नहीं होने की वजह से लोग सीमा के दोनों ओर रिश्तेदारों से मिलने आते- जाते रहते हैं.
उन्होंने बताया कि एपीएफ कर्मियों ने इस मुलाकात पर आपत्ति जताई जिसके बाद नेपाल पुलिस के कर्मियों और स्थानीय लोगों के बीच बहस हुई और घटनास्थल पर भारत की ओर से 75 से 80 लोग जमा हो गए.
अधिकारियों ने बताया कि एपीएफ का दावा है कि उसने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले हवा में गोली चलाई, लेकिन बाद में हथियार छीने जाने के भय से उन्होंने लोगों पर निशाना साधकर गोली चलाई जो तीन लोगों को लगी.

उन्होंने बताया कि यह घटना सीतामढ़ी जिले के जानकीनगर और नेपाल के सरलाही के बीच हुई. अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासन और एसएसबी के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं.
उल्लेखनीय है कि इस इलाके की सुरक्षा एसएसबी की 51वीं बटालियन के जिम्मे है और यह इलाका खंभा संख्या 319 के अंतर्गत आता है. भारत-नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी की है.


नेपाल फायरिंग की Inside story: भारतीय नागरिक और नेपाली बहू पर शुरू हुआ बवाल
 

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नेपाल ने भारत को दिया एक और झटका, अब 7 साल बाद भारतीय बहुओं को देगा नागरिकता


Nepali citizenship Act: देश का विवादित नया नक्शा (Nepal Political Map) पास कराने के बाद नेपाली सरकार ने भारत को एक और बड़ा झटका दिया है। नेपाली की ओली सरकार ने नागरिकता कानून में बड़ा बदलाव का फैसला कर भारतीय बेटियों पर निशाना साधा है। अब बहू बनकर नेपाल जाने वाली भारतीय बेटियों को वहां की नागरिकता के लिए सात साल इंतजार करना होगा।

Edited By Priyesh Mishra | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: 21 Jun 2020, 12:22:00 PM IST

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली
हाइलाइट्स
  • देश के विवादित नक्शे के बाद नेपाली सरकार ने भारत को दिया एक और झटका, नागरिकता कानून में बदलाव की तैयारी
  • अब भारतीय बेटियों को शादी के बाद नेपाली नागरिकता के लिए करना होगा 7 साल का इंतजार
  • नेपाल के गृहमंत्री राम बहादुर थापा ने भारत में ऐसा ही कानून होने का किया दावा, पर सच्चाई कुछ और

काठमांडू
देश का विवादित नया नक्शा पास कराने के बाद नेपाली सरकार ने भारत को एक और बड़ा झटका दिया है। नेपाली की ओली सरकार ने नागरिकता कानून में बड़ा बदलाव का फैसला कर भारतीय बेटियों पर निशाना साधा है। अब बहू बनकर नेपाल जाने वाली भारतीय बेटियों को वहां की नागरिकता के लिए सात साल इंतजार करना होगा।



नेपाल के गृहमंत्री ने किया ऐलान
नेपाल के गृहमंत्री राम बहादुर थापा ने ऐलान किया कि नागरिकता कानून में बदलाव का प्रस्ताव भारत को ध्यान में रखकर है। बदलाव के तहत जब कोई भारतीय लड़की नेपाली युवक से शादी करेगी तो उसे उसके साथ 7 साल लगातार रहने के बाद ही नेपाल की नागरिकता मिलेगी।

विवाद बढ़ने पर भारत का दिया हवाला
विवाद बढ़ने पर राम बहादुर थापा ने कहा कि इस नियम में कुछ अलग नहीं किया है। भारत भी विदेशी लड़कियों को किसी भारतीय से शादी के सात साल बाद ही नागरिकता देता है। हमारा प्रस्ताव भी इसी आधार पर है।

नेपाली मंत्री को भारतीय कानून की जानकारी नहीं
नेपाली गृहमंत्री राम बहादुर थापा ने दावा तो कर दिया कि भारत में नेपाल से बहू बनकर आने वाली बेटियों को 7 साल बाद नागरिकता दी जाती है। लेकिन हकीकत इसके एकदम विपरीत है। 7 साल बाद नागरिकता देने का नियम नेपाल से भारत आने वाली बहू पर लागू नहीं होता है।

भारत की आपत्ति के बावजूद पारित किया नया नक्शा
नेपाल ने तीन दिन पहले ही भारत की आपत्ति को दरकिनार करते हुए विवादित नक्शे को कानूनी अमलीजामा पहनाया था। नेपाली संसद के उच्च सदन से संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने हस्ताक्षर कर इसे संविधान का हिस्सा घोषित कर दिया। बता दें कि इस नए नक्शे में नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया है।

नेपाल में सत्‍ता में वामपंथी, चीन से बढ़ाई नजदीकी
नेपाल में इन दिनों राजनीति में वामपंथियों का दबदबा है। वर्तमान प्रधानमंत्री केपी शर्मा भी वामपंथी हैं और नेपाल में संविधान को अपनाए जाने के बाद वर्ष 2015 में पहले प्रधानमंत्री बने थे। उन्‍हें नेपाल के वामपंथी दलों का समर्थन हासिल था। केपी शर्मा अपनी भारत विरोधी भावनाओं के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2015 में भारत के नाकेबंदी के बाद भी उन्‍होंने नेपाली संविधान में बदलाव नहीं किया और भारत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए केपी शर्मा चीन की गोद में चले गए। नेपाल सरकार चीन के साथ एक डील कर ली। इसके तहत चीन ने अपने पोर्ट को इस्तेमाल करने की इजाज़त नेपाल को दे दी।


माओवादियों ने भारत का विरोध कर जीता चुनाव
भारतीय अधिकारी ने बताया कि नेपाल की सियासत पर इन दिनों माओवादी दलों का कब्‍जा है। वहां पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस नेपथ्‍य में चली गई है और वाम दल पहाड़ी लोगों में भारत के खिलाफ दुष्‍प्रचार करने में लगे हुए हैं। पीएम केपी शर्मा ओली ने भी पिछले चुनाव में भारत के खिलाफ जमकर बयानबाजी की थी। उन्‍होंने भारत का डर दिखाकर पहाड़‍ियों और अल्‍पसंख्‍यकों को एकजुट किया और सत्‍ता हास‍िल कर ली।

नेपाल ने भारत को दिया एक और झटका, अब 7 साल बाद भारतीय बहुओं को देगा नागरिकता
 

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Nepal Vs India: सरहद पर पहुंचा Zee News, चीनी तम्बुओं में बैठे नेपाली सैनिक | Ground Report | Border
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•Jun 16, 2020





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Nepal Vs India: सरहद पर पहुंचा Zee News, चीनी तम्बुओं में बैठे नेपाली सैनिक | Ground Report | Border
 

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Char Dham Yatra was opened for Locals only in June 2020.
Now from 1 July 2020, it is starting for UK State Population only.
No outsiders allowed from other states or UK-Based people.
 

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People of Uttarakhand will be able to visit Chardham from 1st July


Chardham Yatra 2020: उत्‍तराखंड के लोग एक जुलाई से कर सकेंगे चारधाम यात्रा

Publish Date:Sat, 27 Jun 2020 09:35 PM (IST)


Chardham Yatra 2020: उत्‍तराखंड के लोग एक जुलाई से कर सकेंगे चारधाम यात्रा


चारधाम यात्रा को लेकर ऊहापोह अब खत्म हो गया है। एक जुलाई से यात्रा शुरू होगी लेकिन इसके लिए केवल राज्य के लोगों को ही अनुमति दी जाएगी।



देहरादून, राज्य ब्यूरो।

चारधाम यात्रा को लेकर ऊहापोह अब खत्म हो गया है। एक जुलाई से यात्रा शुरू होगी, लेकिन इसके लिए केवल राज्य के लोगों को ही अनुमति दी जाएगी। कंटेनमेंट जोन के अलावा क्वारंटाइन किए गए लोगों को यात्रा की इजाजत नहीं होगी। बाहरी राज्यों के लोगों को फिलहाल यात्रा की अनुमति नहीं होगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन के मध्य शनिवार देर शाम हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। बोर्ड के सीईओ के मुताबिक सोमवार को चारधाम यात्रा के मद्देनजर मानक परिचालन कार्यविधि (एसओपी) जारी की जाएगी।
केंद्र सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों को खोलने की छूट दिए जाने के बाद प्रदेश सरकार ने चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा के संबंध में निर्णय लेने का जिम्मा चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को सौंपा था। बोर्ड ने चारधाम के तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों से सलाह-मशविरे के बाद नौ जून को तीन जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी के लोगों को अपने-अपने जिले के धामों में जाने की अनुमति दे दी थी। यह व्यवस्था 30 जून तक के लिए नियत की गई। साथ ही ये तय हुआ था कि इसके बाद परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।



इस बीच कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही वर्षाकाल शुरू होने के मद्देनजर चारधाम यात्रा को लेकर ऊहापोह बना हुआ था। हालांकि, सरकार की ओर से कहा जा रहा था कि सभी पहलुओं पर अध्ययन के बाद ही यात्रा के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। अब चारधाम यात्रा को लेकर संशय की स्थिति समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार देर शाम को चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ के साथ बैठक कर पूरी स्थिति की जानकारी ली।



बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन के अनुसार चारधाम के तीर्थ पुरोहितों के साथ ही हक-हकूकधारियों से यात्रा के संबंध में मिले फीडबैक से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। इस बात पर सहमति बनी कि एक जुलाई से राज्य के लोगों को चारधाम यात्रा के लिए अनुमति दी जाएगी। इसके लिए कोरोना से बचाव के दृष्टिगत मुख्य सचिव की ओर से आठ जून को जारी किए गए आदेश का अनुपालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कोरोना के दृष्टिकोण से बनाए गए कंटेनमेंट जोन के अलावा क्वारंटाइन किए गए लोगों को किसी भी दशा में यात्रा की इजाजत नहीं दी जाएगी। बाहरी राज्यों के लिए फिलहाल चारधाम यात्रा की अनुमति नहीं होगी।



यह होंगे मानक
  • चारधाम यात्रा के लिए सिर्फ राज्य के लोग ही करा सकेंगे पंजीकरण
  • राज्यवासियों को राज्य में निवासरत होने का देना होगा प्रमाण
  • यात्रा के लिए जिला व स्थानीय प्रशासन जारी करेंगे अनुमति
  • सुरक्षित शारीरिक दूरी के मानक, मास्क आदि का करना होगा पालन

श्रद्धालुओं की दैनिक संख्या
धाम-----------संख्या (अधिकतम)


बदरीनाथ--------1200
केदारनाथ---------800
गंगोत्री-------------600
यमुनोत्री----------400


श्रद्धालुओं की कम ही रहेगी आमद
चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों के लोगों को पूर्व में बदरीनाथ और केदारनाथ में जाने की अनुमति दिए जाने के बावजूद इनकी संख्या बेहद कम रही। चारधाम देवस्थानम बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक नौ जून से अब तक बदरीनाथ में 213 और केदारनाथ में 57 लोगों ने ही दर्शन किए। ऐसे में माना जा रहा कि राज्य के लोगों को अनुमति देने पर भी श्रद्धालुओं की आमद कम ही रहेगी।


Posted By: Sunil Negi



Chardham Yatra 2020: उत्‍तराखंड के लोग एक जुलाई से कर सकेंगे चारधाम यात्रा
 

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Snow Covered Hemkund Sahib Till Now, Lake Also Freeze, Suspense On Yatra

हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने पर संशय बरकरार, जमी है पांच फीट तक बर्फ, हिम सरोवर भी जमा



न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ, Updated Mon, 22 Jun 2020 05:38 PM IST




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- फोटो : अमर उजाला

इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने पर अभी भी संशय बना हुआ है। हेमकुंड साहिब में अभी भी पांच फीट तक बर्फ जमी है। क्षेत्र का जायजा लेने गए हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के दल ने यह जानकारी दी है।



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माना जा रहा है कि अगर जुलाई के अंत तक कपाट नहीं खुले तो अगस्त में सप्तश्रृंग पर्वत पर लगाए गए निशान साहिब को बदला जाएगा। बता दें कि निशान बदलने की यह परंपरा हर साल होती है।





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कोरोना महामारी के चलते अन्य धामों के कपाट देर से ही सही लेकिन खुल गए हैं, हालांकि अभी तक यात्रियों को वहां तक जाने की इजाजत नहीं मिली है। लेकिन सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट अभी तक नहीं खुल पाए हैं।





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हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के प्रबंधक सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड में पवित्र हिमसरोवर अभी भी पूरी तरह से जमा हुआ है। अटलाकोटी में 20 फीट ऊंचा हिमखंड अभी आस्था पथ पर है।



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जब तक बर्फ नहीं हटती है तब तक यात्रा शुरू करना संभव भी नहीं है। कहा कि कपाट खोले जाने को लेकर सरकार की गाइडलाइन आने के बाद ही ट्रस्ट की ओर से कपाट खोलने की नई तिथि घोषित की जाएगी।



 

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#BRO #BaileyBridge #ITBP

भारतीय सेना की मेहनत का जवाब नहीं, 22 जून को टूटे Bailey Bridge को 6 दिन में बनाया !



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Published on 27-Jun-2020

भारत चीन सीमा के लिए अहम माना जाने वाला पुल जो टूटकर गिर गया था..BRO ने 70 मजदूरों और एक मशीन की मदद से इस पुल को मात्र 6 दिन में बनाकर शुरु कर दिया….BRO ने इस पुल की गंभीरता को समझते हुए दिन रात काम किया और रिकॉर्ड टाइम में इसे शुरु किया…

#BRO, #BaileyBridge, #ITBP, #ChinaIndiaConflict, #6DaysBRO Producer Nivedita Editor Neha Kumari
 

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U'khand okays forest land transfer for 3 roads near China border
Source: PTI - Edited By: Hemant Waje
June 30, 2020 19:55 IST

Amid the continuing tension with China along the Line of Actual Control in Ladakh, the Uttarakhand State Wildlife Advisory Board has approved proposals for transfer of 73.36 hectares of forest land within the protected Gangotri National Park for construction of three strategically important roads near the India-China border.



IMAGE: An army convoy moves along the Srinagar-Leh National highway, in Ganderbal district of Central Kashmir. Photograph: S. Irfan/PTI Photo


The roads will reduce the distance to the border considerably and make easier the movement of Indo-Tibetan Border Police personnel, who at present have walk up to 25 kms to reach there, officials said.
The proposals were approved on Monday during the 15th meeting of the board chaired by Uttarakhand chief minister Trivendra Singh Rawat, Principal Secretary (Forest) Anand Vardhan told PTI on Tuesday.
A recommendation for a final clearance will now be sent to the National Board for Wildlife within a week, Vardhan said.

The three stretches include the 17.60-km Mandi-Sangchola road, the 11.85-km Sumla-Thangla road and the 6.21-km Tripadi-Rangmachgaad road.
The roads are to be developed by the Central Public Works Department in the protected Gangotri National Park area in Uttarkashi district.
Around 73.36 hectares of forest land at different sites within the Gangotri National Park are to be transferred for construction of the roads, Vardhan said.

The board unanimously agreed that proposals for the construction of roads which are important from the point of view of national security should be sent to the National Board for Wildlife for final clearance, the officer said.
The panel also decided to send a recommendation to the National Board for Wildlife for transferring forest land for the expansion of Dehradun's Jollygrant Airport, he said.
 

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Kanwar Yatra 2020: Kanwariya Entry Ban In Haridwar, Police Will Strict

कांवड़ यात्रा 2020: हरिद्वार में कांवड़ियों की एंट्री बैन, लॉकडाउन का उल्लंघन कर गंगाजल लेने आए तो रहना पड़ेगा 14 दिन क्वारंटीन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 01 Jul 2020 08:17 PM IST



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- फोटो : फाइल फोटो


सार
शिवभक्तों को उठाना होगा रहने और खाने का खर्चा, सरकार पहले ले चुकी यात्रा स्थगित करने का निर्णय
श्रद्धालुओं को रोकने के लिए उत्तराखंड, यूपी और हरियाणा के अधिकारियों ने किया मंथन

विस्तार
कोरोना के संक्रमण को देखते हुए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से छह जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। इसके बाद अब तीन प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को रोकने के लिए योजना बना ली है। उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के पुलिस अधिकारियों की बैठक में तय किया गया कि श्रद्धालुओं को अपने अपने क्षेत्र में सख्ती के साथ रोका जाएगा।

इसके बाद भी यदि कोई श्रद्धालु हरिद्वार आता है तो उसे 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाएगा। क्वारंटीन के दौरान का रहने और खाने का खर्चा उसे ही उठाना होगा। इसके अलावा तीनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने बॉर्डर पर सघन चेकिंग अभियान चलाएगी।

बुधवार को रोशनाबाद स्थित कलक्ट्रेट में उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और हरियाणा के यमुनानगर, करनाल आदि के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की समन्वय बैठक हुई। हरिद्वार के जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में कांवड़ यात्रा को लेकर नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरी बताते हुए यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध पर सहमति जताई गई।

बैठक में अधिकारियों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि सघन चेकिंग के दौरान किसी भी जनपद से श्रद्धालुओं के समूह या दल को हरिद्वार नहीं आने दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक यादव ने सुझाव दिया कि यात्रा के दौरान अपने-अपने जनपदों के बॉर्डर पर चेकिंग को तेज किया जाएगा। आम लोगों को यात्रा स्थगित करने की सूचना देने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कोई श्रद्धालु लॉकडाउन का उल्लंघन करता तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सादे कपड़े में जल भरने पर नहीं होगी पाबंदी
कांवड़ यात्रा को पूरी तरह से स्थगित कर दिया है, लेकिन स्थानीय निवासी या कोई भी बाहरी यात्री सादे कपड़े में हरिद्वार आ जाएगा तो उसे जल भरने से नहीं रोका जाएगा और न ही कोई कार्रवाई होगी। एडीएम प्रशासन बीके मिश्रा ने बताया कि कांवड़ियों की पहचान उसके गेरू कपड़े या समूह के रूप में आने से होती है, लेकिन स्थानीय व्यक्ति बिना कांवड़ के और या कांवड़ियों के वेष में आता है तो उस पर पाबंदी रहेगी।

भंडारे लगाने की नहीं मिलेगी अनुमति
सभी पुलिस अधीक्षकों ने इस बार यात्रा मार्गों में किसी भी प्रकार के राहत शिविर, भंडारों के आयोजन को प्रतिबंधित करने की बात कही। बैठक में तय किया गया कि किसी भी संस्था को शिविर और भंडारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह से कहीं पर भी कांवड़ बाजार नहीं सजेंगे और यदि कोई कांवड़ बेचते हुए पाया जाता है कार्रवाई की जाएगी।


कांवड़ यात्रा 2020: हरिद्वार में कांवड़ियों की एंट्री बैन, लॉकडाउन का उल्लंघन कर गंगाजल लेने आए तो रहना पड़ेगा 14 दिन क्वारंटीन




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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 29 Jun 2020 11:11 AM IST



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