Road conditions - Uttarakhand

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When Car Was Washed Away In Overflowing Stream | ABP Special | ABP News
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•Jul 30, 2020



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ABP NEWS



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A car was washed away in Andhra Pradesh's Anantapur and now the incident's video is going viral. The car passengers were trying to cross the overflowing stream by following a bus that was able to cross within seconds. But the efforts failed as the current of water was very strong and it took away the car with its flow.Fortunately, there were no casualties.
 

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RAMNAGAR

Ramnagar | Corbett National Park | Garjiya Devi Temple
6,796 views
•Jun 15, 2019



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Alka Manral
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Ramnagar is a small town and municipal board in the Nainital district of Uttarakhand, India. It is located approximately 65 kilometres (40 mi) from Nainital, the headquarters of the district.

Ramnagar is the gateway to the Corbett National Park, the oldest national park and a famous tourist destination of India. Garjiya Devi Temple and Sitabani temple, Sitabani Wildlife Reserve located nearby also attract many visitors.It has an average elevation of 345 metres (1,132 feet). Ramnagar is located at the foothills of the Himalayas on the bank of river Kosi. The town is visited by many tourists due to its geographical location near Corbett National Park. Its proximity to Nainital which is a famous hill station of Northern India makes it even more popular. There is a Kosi Barrage in Ramnagar where many migratory birds arrive in winter.

The town is named after British commissioner H. Ramsay who established it in 1856–1884 During the British rule in India[1] During the British Rule tea gardens were developed in Ramnagar and nearby villages in Uttarakhand. But these tea gardens have been closed since a long time. Ramnagar is most visited for Corbett National Park named after the hunter turned conservationist Jim Corbett who played a key role in its establishment. It is the oldest national park in India which was established in 1936. And ancient Hindu Temples like Garjia Devi Temple and Maa Sita Bani temple. Both of them carry a lot of myths and legends behind them, which attracts a huge number of visitors every year.

Corbett National Park- eCorbett Ver 2.0...Offical Webportal of Corbett Tiger Reserve, Ramnagar
(official sites)

Corbett National Park is 10 km from Ramnagar. It is spread across 86 km north of Ramnagar. Established in 1936 as the Hailey National Park, Corbett National Park is the oldest and one of the most sought after national parks in India. It is India's first sanctuary to come under Project Tiger. The park was named after the hunter-naturalist turned author and photographer, Jim Corbett who lived in the region and contributed in setting up this park. Visitors can move about in vehicles (only local jypsies with the permit) inside the park area after making entries at the respective gates. Tourists now cannot drive their own cars inside Corbett. They have to hire jypsies with permits from Ramnagar. Permits are necessary for entering Corbett Tiger Reserve. Permits are issued at the CTR Reception Office at Ramnagar. Other places worth visiting in the region are the Crocodile Pool, Dhikala Machaan, Getheryo Library (Dhikala), Corbett Museum(Dhangadi gate), Corbett falls.
Garjiya Devi Temple
Garjiya Devi Temple is located in the Garjiya village near Ramnagar, Uttarakhand, India. It is a sacred Shakti shrine where Garjiya Devi is the presiding deity. The temple is situated over a large rock in the Kosi River and is one of the most famous temples of the Nainital district visited by thousands of devotees during Kartik Poornima, a Hindu holy day celebrated on the fifteenth lunar day of Kartik (November – December). It is also known as the festival of lights of the gods.[1] The Kartik Purnima festival also coincides with the Sikh festival of Guru Nanak Jayanti.
 

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उत्तराखंड

मिल गया है रामनगर के धनगड़ी नाले की आफ़त का समाधान



शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

loksahita@gmail.com'


लोकसंहिता



उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है और हर साल मानसून में यहाँ कई जगहों पर आफ़ते दस्तक देती हैं। ऐसी ही एक जगह है रामनगर की धनगडी का नाला जहाँ हर साल मानसून के कारण बाढ़ की स्थिति बन जाती है और लोगों को पानी के तेज बहाव में अपनी जान को हथेली पर रखकर वहाँ से गुजरना पड़ता है। लेकिन अभी-अभी मिली जानकारी के अनुसार, धनगढ़ी नाले पर पुल के निर्माण हेतु स्वीकृती दे दी गई है। यह जानकारी उत्तराखंड से सांसद अनील बलूनी ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि –
मित्रों आपके साथ एक खुशखबरी साझा करना चाहता हूं। राष्ट्रीय राजमार्ग के माननीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने पत्र द्वारा सूचित किया है कि रामनगर के निकट धनगढ़ी नाले पर पुल के निर्माण हेतु स्वीकृति दे दी गई है और उसकी टेंडर प्रक्रिया भी जारी हो गई है। मैंने गत वर्ष 4 सितंबर को माननीय मंत्री जी से इस नाले हेतु अनुरोध किया था।

पूर्व में भी अनेक महानुभावों व जनप्रतिनिधियों ने इस हेतु प्रयास किए थे क्योंकि धनगढ़ी नाला बरसात के समय विकराल रूप ले लेता है जिसमें प्रतिवर्ष अनेक वाहनों के बहने व नागरिकों के हताहत होने की दुखद समाचार मिलते रहे हैं।

राजमार्ग संख्या 309 पर रामनगर को गढ़वाल तथा कुमाऊं से जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग अब भविष्य में निर्बाध आवागमन हेतु जारी रहेगा। माननीय मंत्री जी का आभार।।




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This is News of 2017
Viral in Social Media even now.
LOL !



Great News....

रोमांच के शौकीनों के लिए उत्तराखंड से अच्छी खबर आई है। दुनिया के खतरनाक माने जाने वाले रास्तों में शुमार गर्तांगली 45 साल के लंबे इंतजार के बाद पर्यटन के नक्शे पर आने जा रही है। गंगोत्री नेशनल पार्क में मौजूद होने के कारण इसे विकसित किए जाने में तमाम औपचारिकताएं बाधा बन रहीं थीं। अब वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस की बाधा दूर हो गई है।

कभी भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहे मार्ग पर पड़ने वाले पहाड़ पर उकेरा गया यह पुराना मार्ग पर्यटकों को रोमांच का अनुभव कराएगा। उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने इस सिलसिले में लोक निर्माण विभाग को शुक्रवार को एनओसी जारी कर दी। गर्तांगली का निर्माण पेशावर से आए पठानों ने पहाड़ी चट्टान को किनारे से काटकर किया था। वर्ष 1975 तक सेना भी इसका उपयोग करती रही, मगर बाद में इसे बंद कर दिया गया था। अब इसके दुरुस्त होने पर इसे ट्रैकिंग और पर्यटन के लिहाज से खोला जाएगा।

गंगोत्री नेशनल पार्क चीन सीमा से सटे उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मौजूद है। इसके अंतर्गत भैरवघाटी से नेलांग को जोडऩे वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में गर्तांगली मौजूद है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले तक इसी मार्ग से भारत-तिब्बत के बीच व्यापार होता था, जिसके बीच गर्तांगली है। इस व्यापारिक मार्ग पर पेशावर के पठानों ने 11 हजार फीट की ऊंचाई पर खड़ी चट्टान को काटकर यह सीढ़ीनुमा मार्ग बनाया था। करीब 300 मीटर लंबे इस गलीनुमा मार्ग को नाम दिया गया गर्तांगली।

वर्ष 1962 के युद्ध के बाद गर्तांगली को आमजन के लिए बंद कर दिया गया, मगर सेना वर्ष 1975 तक इसका उपयोग करती रही। इसके बाद से गर्तांगली पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। नतीजतन देखरेख के अभाव में इसकी सीढ़यिां और किनारे लगाई गई लकड़ी की सुरक्षा बाड़ जर्जर होती चली गई। हालांकि रोमांच के शौकीन लगातार गर्तांगली की मरम्मत कराकर इसे खुलवाने की मांग करते रहे।

वर्ष 2018 में पर्यटन विभाग ने इसके लिए 26 लाख की राशि जारी की और गंगोत्री नेशनल पार्क ने कुछ कार्य भी कराया, मगर कोशिशें फलीभूत नहीं हो पाई। बाद में सरकार ने गर्तांगली को पर्यटन और ट्रैकिंग के लिहाज से विकसित करने के मद्देनजर यह कार्य लोनिवि को सौंपने का निर्णय लिया। मगर वन कानून आड़े आ गए। बीती 29 जून को हुई उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में गर्तांगली का मसला उठा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसकी राह में आने वाली अड़चनों को दूर करने के साथ ही गर्तांगली की मौलिकता को बरकरार रखते हुए इसका पुनरुद्धार करने के निर्देश दिए। अब गर्तांगली को लेकर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग के अनुसार गर्तांगली के जीर्णोद्धार के लिए लोक निर्माण विभाग को वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस के मद्देनजर अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया गया है। मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत लोनिवि को 75 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं।

अब गर्तांगली की सीढ़ियों और किनारे लगी सुरक्षा बाढ़ को दुरुस्त किया जाएगा। यह कार्य पूरा होने के बाद चट्टान पर बनी गर्तांगली से रोमांच के शौकीनों को गुजरने की अनुमति मिल सकेगी।
 
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भारत-चीन युद्ध के बाद से बंद गर्तांगली 55 साल बाद खुला, भ्रमण के लिए देश के 50 पर्यटकों का दल रवाना
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Wed, 27 Sep 2017 10:09 PM IST


विश्व पर्यटन दिवस पर देश के कुछ चुनिंदा पर्यटकों को गर्तांगली के भ्रमण का सुनहरा मौका मिला है। वर्ष 1962 भारत चीन युद्ध के बाद ये पहला मौका होगा, जब पर्यटक इस अद्भुत स्थान पर जा सकेंगे।
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दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान करीब 50 पर्यटकों का यह दल गर्तांगली के अलावा नेलांग वैली का भी भ्रमण करेगा। टूर का सबसे खास हिस्सा पहाड़ पर बना लकड़ी का पुल होगा, जिसे कभी व्यापार मार्ग के तौर पर प्रयोग किया जाता था।
बुधवार को डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव व अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डा. स्वराज विद्वान ने संयुक्त रूप से पर्यटक दल को नेलांग घाटी के लिए रवाना किया। दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से आए पर्यटकों का यह दल दो दिन तक नेलांग घाटी में रहेगा, जिसके पहले दिन वो गर्तांगली व दूसरे दिन नेलांग का भ्रमण करेंगे।

डीएम ने कहा कि टूर के दौरान पर्यटक नेलांग घाटी के नैसर्गिक सौंदर्य का लुत्फ उठाने के साथ ही, अनोखे गर्तांगली मार्ग को भी देखेंगे। पेशवार के पठानों की ओर से बनाया गया यह लकड़ी का पुल, किसी दौर में भारत तिब्बत व्यापार का मुख्य मार्ग हुआ करता था।

युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया था। जिला प्रशासन की ओर से वाइल्ड लाइफ बोर्ड से विशेष अनुमति लेकर एक दिन के लिए यह मार्ग खोला गया है, जिसका उद्देश्य नेलांग घाटी में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देना है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मार्ग का मरम्मतीकरण का कार्य भी किया गया है। भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट आने व राज्य वाइड लाइफ बोर्ड की स्वीकृति के बाद यह मार्ग आम जन के लिए भी खोल दिया जाएगा। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सुखविंदर सिंह, जिला पर्यटन अधिकारी भगवती प्रसाद टम्टा आदि मौजूद थे।




 

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Permission not required after guideline released ?????




Reaction :

I went day before yesterday .. Haldwani is my hometown. Still they asked me for epass. I told them abt unlock 3 central guidelines but they said nothng from state till now so u need epass to enter.


If u have covid negative report not prior 72 hrs then in that case No pass required.


Also, only 1500 entry pases per day but till already booked till 7th Aug. Not sure 8th onwards.
 
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Two Hours Of Traffic On The Rudraprayag-gaurikund Highway -

UK people do not like other state people to be there.


Rudraprayag › Two Hours Of Traffic On The Rudraprayag-Gaurikund Highway
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर दो घंटे चक्काजाम

देहरादून ब्यूरो Updated Tue, 04 Aug 2020 10:21 PM IST

प्रदेश सरकार की ओर से बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा की अनुमति देने के विरोध में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो घंटे चक्काजाम किया। इस दौरान जाम लगने से वाहनों की लाइनें लग गईं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तीन दिन में निर्णय वापस नहीं लिया गया तो सामूहिक इस्तीफे और आमरण अनशन किया जाएगा। उन्होंने मांग को लेकर सीएम को ज्ञापन भेजा। मौके पर पहुंचे प्रशासन व पुलिस से लंबी वार्ता के बाद दोपहर बाद सवा 12 बजे चक्काजाम समाप्त किया गया।

मंगलवार को ग्राम प्रधान संगठन के नेतृत्व में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि सुबह सवा दस बजे गौरीकुंड हाईवे पहुंचे और कुंड में चक्काजाम कर दिया। इससे हाईवे पर जाम लग गया। प्रदर्शनकारियाें ने कहा कि देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। इन हालातों में प्रदेश सरकार बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा की अनुमति दे रही है। इससे पहाड़ में संक्रमण बढ़ जाएगा। उन्होंने सरकार से बढ़ते कोरोना संक्रमण व पहाड़ के हालातों को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय वापस लेने की मांग की। मौके पर पहुंचे उप जिलाधिकारी वरुण अग्रवाल, थानाध्यक्ष जहांगीर अली ने प्रदर्शनकारियों ने वार्ता कर चक्काजाम समाप्त करने को कहा। काफी देर तक चली वार्ता के बाद दोपहर बाद सवा 12 बजे चक्काजाम खत्म किया गया और जाम खुला। प्रदर्शनकारियों में ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सुभाष रावत, संदीप पुष्पवाण, योगेंद्र सिंह नेगी, विजयपाल नेगी, हर्षवर्द्धन सेमवाल, जिपं सदस्य विनोद राणा, गणेश तिवारी, बबीता सजवाण, कनिष्ठ प्रमुख शैलेंद्र कोटवाल, ज्येष्ठ प्रमुख कविता नौटियाल, नपं सभासद प्रदीप धरम्वाण, रवींद्र रावत, प्रधान नवीन रावत, त्रिलोक सिंह रावत, मुलायम सिंह तिंदोरी आदि मौजूद थे।



रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर दो घंटे चक्काजाम
 
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No entry in Temple !

शुरू हुई Kedarnath धाम यात्रा पर श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने की इजाजत नहीं
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•Jul 19, 2020



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उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने राज्य में तीर्थयात्रियों को केदारनाथ धाम जाने की अनुमति तो दे दी है लेकिन श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. इस वजह से सभी श्रद्धालु निराश और नाराज हैं. केदारनाथ (Kedarnath) के दर्शन के लिए उत्तराखंड के तीर्थयात्री, सरकार द्वारा जारी ई-पास (E-Pass) से अनुमति लेकर 18 किमी की कठिन यात्रा कर और मौसम की मार झेल कर केदारनाथ पहुंचते हैं और जब उन्हें पता चलता है कि वो मंदिर के अंदर नहीं जा सकते हैं. इस वजह से सभी श्रद्धालु बेहद नाराज हैं और सवाल खड़े कर रहे हैं.
 

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KEDARNATH TEMPLE
सावन में केदारनाथ, पूरे देश के लिए खुल गई चारधाम यात्रा: बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री
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•Jul 25, 2020



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