Road conditions - Uttarakhand

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Shri Hemkund Sahib 2020 First Glimpse Yatra 3,4 september, इस साल यात्रा 4 सितबर से 10 अकटूबर तक
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•Sep 6, 2020



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Swarup Singh Jethmalani



SATSHRI AKAAL sangton, Jaisa ki aap sabko pata h k Har saal ki Tarah Es saal 2020 mein Yatra 25 May se shuru nahi ho paayi.
Covid - 19 ke chalte es saal Yatra shri Hemkund sahib ke Darshan ke liye 4 September se shuru hokar 10 October tak chalegi. YATRA ko lekar Uttrakhand sarkar ke kuch Guidelines h. To agar aap es Saal Hemkund Sahib ki Yatra ka plan bana rahe h to Uttrakhand sarakar ke Covid-19 Guidelines ka palan karein aur 96 Hours ke andar andar Covid19 ka Test jarur karwa le.
Yatra marg mein aur Gurudwara Parisar mein anawashyak kisi sthan ko na chuyein.
Mask, Blanket aur jarurat ki har cheez apne sath hi lekar aayein.
Ummid karta hu aapko meri Ye video pasand aayi hogi.
Es video mein aapko Gurudwara shri Hemkund Sahib ke Darshan karwane ki Koshish es Daas ne ki.
Video pasand aaye to Like, share aur Comment jarur karein.
Jo bh loki aane wale saalan wich Yatra te jaan di planning kar rahe hun, ohna waste
*Hemkund sahib Yatra 2018 full Route detail with expenses*
 

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A Traveller came today back from Uttarakhand.

His experience :

Valley of Flowers
is as beautiful as always sir, Flowers are less now.
4-5 types mostly.
wo bhi trek pe jaha diversion hai Hemkund Sahib or VoF ka,
wahan se Bridge tak.....

As for covid checking, four wheelers are checked before Roorkee, Rishikesh, before Srinagar and strict checking at Gauchar if you are going towards badrinath
But we were on bike so our test report was checked at Gauchar only.

Yes..
VOF
We were warned by the official doing the entry but couldn't skip as we're there already..
Why skip then



What about hotel pre bookings?

Nothing required.


We took local cab from govind Ghat Bridge to pulna village which turned out to be a good decision coz return me landslide ho gyi thi or kuch Gaadi upar hi reh gyi


We stayed at Auli D Hotel in Joshimath.
Near petrol pump on main highway

Gurudwara at Ghanghria is also open, plus 2-3 hotels


Gmvn too was opened last month and open now also.

One small dhaba at jungle chatti, one in the next village one km ahead, medical camp at Bhyundar,
Only one dhaba enroute Hemkunt Sahib,
before glacier point.


Valley Of Flowers
Hemkunt Sahib

September 2020.
 

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मुख्यमंत्री बोले, उत्तराखंड आने वालों का स्वागत, चार दिन वालों का नहीं होगा अब कोविड टेस्ट

अधिकारी व्यवस्था को बनाएं सरल, जनता न हो परेशान....



 

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उत्तराखंड: तीन-चार दिन के आने पर कोविड टेस्ट जरूरी नहीं, पर्यटकों को मिलेगा कूपन योजना का लाभ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Sep 2020 09:05 PM IST



उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बार फिर साफ किया कि तीन, चार दिन तक के लिए यदि कोई उत्तराखंड आ रहा है तो उसे कोविड टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बेरोक टोक उत्तराखंड में प्रवेश कर सकते हैं।

उत्तराखंड की सीमा पर प्रवेश के लिए कोविड टेस्ट की अनिवार्यता को मुख्यमंत्री पहले ही खारिज कर चुके हैं। शुक्रवार को एक बार फिर उन्होंने कहा है कि जो लोग तीन, चार दिन के लिए आ रहे हैं, उनके लिए कोविड टेस्ट की कोई जरूरत नहीं है। बताया कि उन्होंने इस बारे में अधिकारियों को आदेश दे रखे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की आवाजाही को सरल बनाना चाहिए। लेकिन बीच में संक्रमित रोगियों की संख्या बढ़ी है।


जनता का भी सरकार और अधिकारियों पर दबाव बना। जिसके चलते लगा कि लोगों को नियंत्रित करना चाहिए। लेकिन अधिकारियों को साफ कर दिया गया है कि जो लोग उत्तराखंड आना चाहते हैं तो उन्हें आने दें, उनका स्वागत करें।

बता दें कि केंद्र सरकार की गाइड लाइन में साफ है कि कोविड हाईलोडेड क्षेत्रों को छोड़कर बाकी स्थानों से आने वाले लोग यदि पांच दिन तक के लिए आ रहे हैं तो उन्हें कोविड टेस्ट की जरूरत नहीं है।



पर्यटकों को मिलेगा कूपन योजना का लाभ : महाराज

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए सरकार ने पर्यटक प्रोत्साहन कूपन योजना शुरू की है। कोविड महामारी के कारण प्रभावित पर्यटन सेक्टर को पटरी पर लाने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड संस्कृति और पर्यावरण का खजाना है।

शुक्रवार को री-कनेक्ट व री स्टार्ट टूरिज्म पर आयोजित वर्चुअल ट्रेवल ट्रेड में पर्यटन मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के कारण पर्यटन सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है। उन्होंने दोहराया कि कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट लाकर बाहरी राज्यों के पर्यटकों को उत्तराखंड में घूमने में कोई प्रतिबंध नहीं है। बताया कि पर्यटन क्षेत्र में रोजगार की समस्या के समाधान के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार और होमस्टे योजना में ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा की गई है।

महाराज ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अपार अवसर हैं। प्रदेश में रामायण सर्किट, सीता सर्किट और महाभारत सर्किट पर काम शुरू हो गया है। एक बार यह नया सर्किट पूरा होने के बाद राज्य में धार्मिक पर्यटन के नए रास्ते खुलेंगे।

 

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Haridwar Kumbh 2021: तय समय पर ही होगा हरिद्वार कुंभ, कोरोनाकाल में जानें कैसे मिलेगी एंट्री

Publish Date:Fri, 18 Sep 2020 10:50 PM (IST)


Haridwar Kumbh 2021: तय समय पर ही होगा हरिद्वार कुंभ, कोरोनाकाल में जानें कैसे मिलेगी एंट्री


Haridwar Kumbh 2021 कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए इसबार श्रद्धालुओं को कुंभ में पास के आधार ही आने की अनुमति दी जाएगी।

देहरादून, राज्य ब्यूरो। Haridwar Kumbh 2021 कोराना संकट का असर अगले साल हरिद्वार में होने वाले कुंभ पर भी नजर आएगा। कुंभ में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने पर सरकार का फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने शुक्रवार को पत्रकारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बातचीत के दौरान साफ किया कि कुंभ का आयोजन परंपरानुसार शुभ लग्न में ही होगा, लेेकिन कोविड की परिस्थितियों को देखते हुए संख्यात्मक लिहाज से यह नियंत्रित रहेगा। कुंभ के लिए सरकार पास जारी करेगी। पास के आधार पर ही श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पास की व्यवस्था को कैसे धरातल पर उतारना है, इस संबंध में संत-महात्माओं से बातचीत कर निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि कुंभ के आयोजन के लिए सरकार इन दिनों तैयारियों में जुटी है। हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में होने वाले स्थायी व अस्थायी प्रकृति के कार्यों को पूरा करने के लिए दिसंबर तक की डेडलाइन तय की गई है। हाल में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कोविड को ध्यान में रखते हुए कदम बढ़ाने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए उठ रही लॉकडाउन की मांग के संबंध में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन की कोई योजना नहीं है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कोविड पर नियंत्रण को प्रभावी कदम उठाए गए हैं। परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लिए जा रहे हैं। सॢवलांस, सैंपलिंग, टेस्टिंग पर फोकस है। यदि किसी क्षेत्र में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं तो वहां सरकार कंटेनमेंट जोन बना सकती है। उन्होंने बताया कि राज्य में कोविड से निबटने को पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं।

पांच सरकारी और विभिन्न प्राईवेट लैब में सैंपल की जांच की जा रही है। वर्तमान में 481 आईसीयू बेड, 543 वेंटिलेटर, 1846 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 30500 आईसोलेशन बेड उपलब्ध हैं। सरकार के पास 200 वेंटिलेटर अतिरिक्त हैं, जिन्हें निजी अस्पतालों को दिया जाएगा। कोविड केयर सेंटरों में भी ऑक्सीजन सपोर्ट बेड की संख्या बढ़ाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त करने के मद्देनजर रुद्रपुर, हरिद्वार व पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं।

ऑल वेदर रोड का चौड़ीकरण जरूरी
मुख्यमंत्री ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में चारधाम ऑलवेदर रोड का चौड़ीकरण जरूरी है। महज साढ़े पांच मीटर चौड़ी सड़क से काम नहीं चलेगा। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे इस सीमांत क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए यह सड़क साढ़े सात मीटर चौड़ी होनी आवश्यक है। इस सिलसिले में सरकार की ओर से जल्द ही केंद्र के समक्ष सभी तथ्यों के साथ पक्ष रखा जाएगा। गौरतलब है कि चारधाम को जोड़ने वाली केंद्र पोषित इस सड़क परियोजना की चौड़ाई साढ़े पांच मीटर रखने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे।



Haridwar Kumbh 2021: तय समय पर ही होगा हरिद्वार कुंभ, कोरोनाकाल में जानें कैसे मिलेगी एंट्री
 
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Haridwar Maha Kumbh 2021: Cm Trivendra Singh Rawat Told, Pass Will Issue To Pilgrims For Kumbh

हरिद्वार कुंभ 2021: तय समय पर सीमित श्रद्धालुओं के साथ होगा कुंभ, केवल पास पर ही मिलेगा प्रवेश


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Sep 2020 08:49 PM IST



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- फोटो : फाइल फोटो

सार

सीएम ने कहा, परंपरागत होगा स्वरूप, लेकिन नियंत्रित होगी संख्या

विस्तार


कोविड-19 महामारी के संकट को देखते हुए हरिद्वार कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को पास पर प्रवेश मिलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले के स्वरूप और आयोजन को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के संतों के साथ लगातार विचार-विमर्श हो रहा है। मेले का स्वरूप पारंपरिक होगा और वह अपने लगन राशि के अनुरूप आयोजित होगा।

मुख्यमंत्री वर्चुअल प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। इस दौरान जब उनसे कुंभ मेले के आयोजन के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कोविड से उपजे हालातों को देखते हुए संख्यात्मक दृष्टि से इसे नियंत्रित करना होगा। तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार इसके लिए पास जारी होंगे।

बता दें कि कोविड 19 महामारी का असर कुंभ मेले की तैयारियों पर भी पड़ा है। सरकार अभी तक यह उम्मीद कर रही थी कि कुंभ के आयोजन से पहले तक कोरोना को नियंत्रित करने वाली दवा आ जाएगी, लेकिन अभी इसके आसार नहीं है।

यही वजह है कि अब सरकार ने कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर अपनी कार्ययोजना में स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया है। पुलिस की भीड़ नियंत्रण कार्ययोजना की बैठक में भी पास पर प्रवेश का सुझाव आ चुका है।


ऑलवेदर रोड : साढ़े पांच मीटर से काम नहीं चलेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम ऑलवेदर रोड सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सेना की जरूरत के हिसाब से रोड की साढ़े पांच मीटर करने से काम नहीं चलेगा। इसका चौड़ीकरण जरूरी है। हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह सड़क चौड़ीकरण को लेकर निर्णय ले।

कैबिनेट विस्तार के बारे में बता दूंगा
कोविड के दौर में कैबिनेट के विस्तार की संभावना पर मुख्यमंत्री ने यह कहकर चुटकी ली कि जब होगा तो सबसे पहले आपको बता दूंगा।

सरकार की लॉकडाउन की योजना नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लॉकडाउन की कोई योजना नहीं है। कोरोना के बढ़ते मामलों से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सरकार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के हिसाब से काम करती है। जहां कोरोना के मामले बढ़ेंगे, उसे कंटेनमेंट जोन में बना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी तैयारी है।

सोच समझकर बनाया देवस्थानम बोर्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन सरकार ने सोच विचार कर किया है। इसमें सभी के हितों की चिंता की गई है। कुछ राजनीतिक लोग इसका विरोध कर रहे हैं। कुछेक का निजी स्वार्थ के कारण विरोध है। आम पंडा पुरोहित समाज बोर्ड के समर्थन में है।

 
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क्या कभी देखा है किसी घाटी को रंग बदलते, नहीं तो यहां जरूर आएं और जानें वजह


Publish Date:Fri, 18 Sep 2020 10:53 PM (IST)

क्या कभी देखा है किसी घाटी को रंग बदलते, नहीं तो यहां जरूर आएं और जानें वजह


Valley of flowers आज हम आपको एक ऐसी खूबसूरत घाटी के बारे में बताने वाले हैं जो हर पंद्रह दिन में रंग बदलती है। इतना ही नहीं बल्कि इस घाटी में आप सिर्फ दिन का सफर कर सकते हैं।

देहरादून, जेएनएन। Valley of flowers देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम के साथ ही कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो पर्यटकों को अपनी और खींच लाते हैं। यहां कदम-कदम पर प्रकृति ने अपनी नेमतें बिखेरी हुई हैं। यहां की हसीन वादियां सुकून का एहसास कराती हैं। आज हम आपको उत्तराखंड की एक ऐसी खूबसूरत घाटी के बारे में बताने वाले हैं, जो हर पंद्रह दिन में रंग बदलती है। इतना ही नहीं, बल्कि इस घाटी में आप सिर्फ दिन का सफर कर सकते हैं। यहां रात में रुकने की अनुमति नहीं होती। ये सुनकर आप जरूर चौंक गए होंगे। पर हैरान मत होइए और जानिए इसके पीछे क्या वजह है।
विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी (Valley Of Flower) उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से 3962 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये घाटी बेहद ही खूबसूरत है और यहां फूलों का मनमोहक संसार बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। आप फूलों के साथ ही नदी, झरने, दुर्लभ प्रजाति वन्यजीव, परिंद और औषधीय वनस्पतियों का दीदार भी कर सकते हैं।




87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली इस घाटी का जिक्र रामायण में भी हुआ है। मान्यता है कि रामायण काल में हनुमान संजीवनी बूटी की खोज में इसी घाटी में पहुंचे थे। वहीं, घाटी हर साल एक जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खोली जाती है, जिसके बाद बड़ी संख्या में यहां देश-विदेश से टूरिस्ट सुकून की तलाश में पहुंचते हैं, लेकिन इसबार कोरोना संक्रमण के चलते घाटी को अगस्त के महीने खोला गया है। यहां के दीदार के लिए पर्यटकों को उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करने से 72 घंटे पहले कराए गए कोरोना टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी, तभी उन्हें प्रवेश की अनुमति मिलेगी।






यहां रात को रुकने की अनुमति नहीं
फूलों की घाटी का सौंदर्य अद्भुत है। इसे लेकर एक खात बात भी है कि आप यहां सिर्फ दिन का ही सफर कर सकते हैं। रात को रुकने की अनुमति नहीं है। दरअसल, इस घाटी में फूलों की ऐसी कई प्रजातियां हैं, जिनकी महक आपको बेहोश कर सकती है। इसके साथ ही पर्यटकों के यहां रुकने से फूलों की घाटी की जैवविविधता पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि यहां रात को रुकने की मनाही है।





15 दिन में बदल जाता है घाटी का रंग
वैली ऑफ फ्लावर्स को लेकर एक और रोचक बात है। कहा जाता है कि ये घाटी हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है। इसके पीछे भी एक खास वजह है। दरअसल, फूलों की घाटी में करीब पांच सौ प्रजातियों के फूल मौजूद हैं और हर प्रजाति दस से पंद्रह दिन के अंतराल में खिलती है। ऐसे में फूलों के बदलते रंगों से ऐसा लगता है मानो ये घाटी अपना रंग बदल रही हो।





वैली ऑफ फ्लावर्स है विश्व धरोहर
उत्तराखंड हिमालय में स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित हैं। फूलों की घाटी को वर्ष 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था।





बीते दस वर्षों में फूलों की घाटी पहुंचे पर्यटक
वर्ष, पर्यटक, पर्यटकों से हुई आय

2020 353 53175(11 सितंबर तक)
2019 17742 28 लाख
2018 14000 23 लाख (30 सितंबर तक)
2017 13752 2225750
2016 6503 1154775
2015 181 29400
2014 484 87875
2013 8799 1291723
2012 6855 1138604
2011 5118 924316
2010 8577 678675
2009 6784 567600



क्या कभी देखा है किसी घाटी को रंग बदलते, नहीं तो यहां जरूर आएं और जानें वजह
 
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