Road conditions - Uttarakhand

mayank_811

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Update:

Went to Rishikesh last week and here are the route updates:

Delhi to Rishikesh:
If you cross Modinagar BEFORE 6.30 AM, take old NH 58 else mega jams will b there. Onwards Roorkee.... from about KAnkhal till Rishikesh, almost whole highway is under construction so the route is a real pain ATM. Took 2+ hours to cover Kankhal-Rishikesh.
Total time : 6.5 hrs

Coming back..
Decided to avoid NH 58 completely. We took the following route:

Rishikesh- Pithuwala : Good road..passes thru Rajaji NP.
Pithuwala- Saharanpur bypass : 90% awesome
Saharanpur bypass- Mzfrngr thru SH 59 : 100% awesome
Mzfrngr to Meerut thru old NH 58 ... Took NH 334 towards Hapur instead of bypass.
NH 334 Meerut Cantt to Hapur bypass (Meerut- Bulandshr Xway) & then NH 9 to Delhi - 100% Awesome.

Longer route..ofcourse but took us 6 hours..without breaking back & No jams at all. You'll enjoy driving this route.

Thx
 

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Decided to avoid NH 58 completely. We took the following route:

Rishikesh- Pithuwala : Good road..passes thru Rajaji NP.
Pithuwala- Saharanpur bypass : 90% awesome
Saharanpur bypass- Mzfrngr thru SH 59 : 100% awesome
Mzfrngr to Meerut thru old NH 58 ... Took NH 334 towards Hapur instead of bypass.
NH 334 Meerut Cantt to Hapur bypass (Meerut- Bulandshr Xway) & then NH 9 to Delhi - 100% Awesome.

Longer route..ofcourse but took us 6 hours..without breaking back & No jams at all. You'll enjoy driving this route.

This is the Map of your Route:
Rishikesh to Isbt Kashmiri Gate
 

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Winter Trek in Uttarakhand

मध्य हिमालय में लद्दाख की तर्ज पर विकसित होगा विंटर ट्रैक, स्थानीय युवाओं की रोमांचक खोज



मध्य हिमालय में लद्दाख की तर्ज पर विकसित होगा विंटर ट्रैक, स्थानीय युवाओं की रोमांचक खोज

Publish Date:
Sat, 14 Nov 2020 05:44 PM (IST)
Author: Skand Shukla

दो नदियों की घाटियों का फैलाव रमणीय पंचाचूली दुर्लभ पक्षियों का दीदार और उच्च हिमालयी कस्तूरा मृग को देखना है तो मुनस्यारी के खलिया टॉप आया जा सकता है। यह ट्रैक विंटर ट्रैक बनता जा रहा है। जिसकी खोज स्थानीय युवाओं ने की है।

पिथौरागढ़, जेएनएन :
दो नदियों की घाटियों का फैलाव, रमणीय पंचाचूली, दुर्लभ पक्षियों का दीदार और उच्च हिमालयी कस्तूरा मृग को देखना है तो मुनस्यारी के खलिया टॉप आया जा सकता है। यह ट्रैक विंटर ट्रैक बनता जा रहा है। जिसकी खोज स्थानीय युवाओं ने की है। यहां मध्य हिमालय में लद्दाख की तर्ज पर ट्रैक बन रहा है।

ट्रैक की खोज करने वाले युवाओं का कहना है कि मुन्स्यारी से मेसर कुंड होते हुए खलिया टॉप के टाटी तक के 30 किलोमीटर के इस ट्रैक में रोमांच और खूबसूरती का अद्भुत संगम है। मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार, मनोज झिक्वान और भूपेंद्र खड़ायत ने इसकी खोज की है। सुरेंद्र ने बताया कि मुनस्यारी से मेसर कुंड, मर्तोलीथौड़, रुढ़खान होते हुए खलिया टॉप के टॉटी तक और यहां से फिर वापस मुनस्यारी आया जा सकता है । 3900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुढ़खान से रामगंगा और गोरी नदी घाटी का बेहद आकर्षक नजारा दिखता है।


तीन-चार दिन में पूरी होगी ट्रैक
यह पूरा ट्रैक करीब 30 किमी लंबा है। कठिन होने के बावजूद इसे तीन-चार दिन में पूरा किया जा सकता है। इस ट्रैक से बर्फ से ढकी हुई पंचाचूली चोटी भी दिखाई देती है। युवाओं ने बताया कि कि ट्रैकिंग के दौरान कस्तूरी मृग के भी दीदार होते हैं। इस रूट की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहा बर्ड वॉचिंग का भी आनंद उठा सकते हैं। मर्तोलीथौड़ (2780 मीटर की ऊंचाई) में हिमपात के बाद कोई नहीं जाता है।

लद्दाख में पसंद किया जाता है विंटर ट्रैक
मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पवार बताते हैं कि लद्दाख में विंटर ट्रैक काफी पसंद किया जाता है। यदि सरकार सुविधाएं मुहैया कराए तो मुनस्यारी के मध्य हिमालयी क्षेत्र का यह ट्रेक देश-विदेश के ट्रेकरों की पहली पसंद बन सकता है। इस ट्रैक के बनने से मुनस्यारी के पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलेगी।


मध्य हिमालय में लद्दाख की तर्ज पर विकसित होगा विंटर ट्रैक, स्थानीय युवाओं की रोमांचक खोज
 

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Bageshwar may become Paragliding Adventure Sports Hub


बागेश्‍वर की पहाड़ियों पर ले सकेंगे पैराग्लाइडिंग का लुत्‍फ, तलाशी जा रहीं संभावनाएं




बागेश्‍वर की पहाड़ियों पर ले सकेंगे पैराग्लाइडिंग का लुत्‍फ, तलाशी जा रहीं संभावनाएं

Publish Date:
Sat, 14 Nov 2020 05:26 PM (IST)
Author: Skand Shukla

साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए जिला पर्यटन विभाग ने संभावनाएं तलाशी हैं। इसके तहत पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षक प्रसिद्ध पायलट जगदीश जोशी द्वारा पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्‍त स्‍थल की तलाश की गई। जिला मुख्यालय के नैल गांव की पहाड़ी से पैराग्लाइडिंग उड़ान का ट्रायल किया गया जो सफल रहा।

बागेश्वर, घनश्याम जोशी :
साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए जिला पर्यटन विभाग ने संभावनाएं तलाशी हैं। इसके तहत पैराग्लाइडिंग के प्रशिक्षक प्रसिद्ध पायलट जगदीश जोशी द्वारा पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्‍त स्‍थल की तलाश की गई। पिछले दिनों जिला मुख्यालय के नैल गांव की पहाड़ी से पैराग्लाइडिंग उड़ान का ट्रायल किया गया, जो सफल रहा। ऐसे में पर्यटन विभाग अनलाक में साहसिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए इस स्‍थल को विकसित करने की प्‍लानिंग पर काम कर रहा है। इससे बागेश्‍वर के पिंडर घाटी व कौसानी आदि जगहों पर आने वाले पर्यटक यहां आंकर पैराग्‍ला‍इडिंग का लुत्‍फ भी उठा सकेंगे।

लाकडाउन से साहसिक खेल पूरी तरह बंद थे। अनलाक में साहसिक खेलों से जुड़े लोग आगे आने लगे हैं। नैल की पहाड़ी पर उड़ान भी सफल हो गई है। यहां से पैराग्लाइडर सीधे द्यांगण गांव के खेतों में उतर सकेंगे। 17 कुमाऊं से सेवानिवृत्त फौजी और शिक्षक जगदीश जोशी और उनकी टीम साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए काफी बेहतर काम कर रही है। इन लोगों को प्रोत्साहन देकर पैराग्लाइंडिंग को ऊंचा मुकाम दिलाया जा सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। पायलट जगदीश जोशी ने बताया कि इससे पहले जिले में जालेख, दुलम, मालता की पैराग्लाइडिंग होती रही है। नवंबर में पैराग्लाइडिंग का बेसिक प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए देशभर से प्रशिक्षु पहुंचेंगे। इसके लिए नई साइटों का चयन किया जा रहा है।


बारेश्वर में पिछले चार साल से पैराग्लाइडिंग की गतिविधियों का संचालन कर रहे रिटायर्ड फौजी जगदीश जोशी ने बताया कि जून और जुलाई को छोड़कर सालभर पैराग्लाइडिंग होती थी। एक माह में करीब 15-20 उड़ानें होती थीं। सैलानी भी इससे जुड़े थे लेकिन इस बार एक भी व्यावसायिक उड़ान नहीं हुई। यानी कि कोरोना की मार इस साहसिक खेल पर भी पड़ी।

कीर्ती चंद्र आर्य, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर ने बताया कि अनलाॅक में सहासिक खेलों को लेकर पैराग्लाइडिंग के क्षेत्र में ट्रायल किए जा रहे हैं। गत दिनों नैल की पहाड़ी पर ट्रायल सफल रहा है। दीपावली के बाद पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण आदि भी कराए जाने की अनुमति ली जा रही है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में जिले को नई पहचान मिलेगी।


बागेश्‍वर की पहाड़ियों पर ले सकेंगे पैराग्लाइडिंग का लुत्‍फ, तलाशी जा रहीं संभावनाएं
 

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Haridwar Ganga Aarti Live - Diwali Special | गंगा आरती - हरिद्वार | Har ki Pauri | Jai Maa Gange
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#GangaAartiHaridwar #Diwali2020 #HarKiPauri

Ganga Aarti is performed at Har Ki Pauri Ghat in Haridwar. Ganga Aarti in Haridwar is one of the most famous in Haridwar. Visit to Haridwar is not complete if you have not seen its Ganga Aarti.

Meaning & Importance of Ganga Aarti:
Ganga Aarti means prayer for River Ganga. Prayers are dedicated to gods and goddesses. River Ganga is not just a river in India, It is Divine Mother. River Ganga gives life in the form of water. The same water also removes sins when you take a dip in its holy water. River Ganga also gives liberation to souls. Its not just a river but whole culture itself. Historically millions of people are living on the bank of the river ganga. For agriculture her water is still precious for India. River Ganga is considered goddess which was originally living in heaven. Saint Bhagirath made a long meditation to give liberation to his ancestors (reduced to ashes due to curse of sage Kapil). He was blessed with Ganga by gods. Lord Shiva held her to reduce her mighty flow. When Ganga flow on the remains of ancestors of Bhagirath they got Moksha (Liberation from the cycle of death and rebirth). Following the same tradition still Hindu people offer remains of their dead relatives (after burning the body) to the river Ganga and expect the moksha for them. In the name of the saint Bhagirath river ganga is known as Bhagirathi at the source and gets name Ganga when it is meeting Alaknanda River at Devprayag. Since hundreds of years people are considering river ganga as holy river and it became part of their life where they come to get moksha for their relatives which passed away and to remove their sins. The Ganga Aarti is kind of thanks giving to River Ganga.

History of Ganga Aarti:
It is very difficult to say when the tradition of Ganga Aarti started. However the Ganga Aarti at Har Ki Pauri was started by Pundit Madan Mohan Malviya in 1910s. Recently he was awarded as "Bharat Ratna" highest civilian award by Indian Govt. The small island in front of Har Ki Pauri Ghat is named after him.

Ganga Aarti Timings:
Ganga Aarti is organized two times in a day, morning (at sunrise) and evening (sunset). Starting time will depend on sunrise and sunset timing at Haridwar. Morning Ganga Aarti is not as famous as evening one.

Ganga Aarti Location:
Ganga Aarti is organized at Har Ki Pauri Ghat. Average 3000 to 30000 or even more people come to experience evening ganga aarti. The crowd will depend on season (May June is highest season while July and august is low season) as well as weekend - non weekend and also the festivals. On Long weekends and all big Indian festivals more people will join the Ganga Aarti. Har Ki Pauri is most famous ghat to take holy dip in the ganga. Har Ki Pauri is located on the main highway.

Who performs the Ganga Aarti:
Ganga Aarti is done by the pundits (priests) selected by Ganga Sabha. Ganga Sabha is NGO which is managing Ganga Aarti since it is started. Ganga Sabha is also manages the ghat along with help of govt.

What happens during Ganga Aarti:
Initially people start coming early to get good spot. Later they carried out the idol of River Ganga from the small temple located close to the ghat. Idol is normally carried out in "palkhi" by pundits and other people which they put on the platform of ghat near river ganga. Some people also go to the idol of Ganga and take blessing. A few minutes later pundits come and starts the ceremony. Initially they are chanting Sanskrit mantras along with offering such as cotton, colors, milk, honey, sugar, curd, ghee and some other things. These are symbolic offerings so there is not large quantity but just small amount. The chanting's are done by pundits live which you can hear on loud speakers. After the offering are completed they starts singing Ganga Lahari - A Sanskrit Poem written by Pundit Jagannath. Pundit Jagannath was Sanskrit scholar and poet born in 1590. For complete Ganga Lahari Stotram in Sanskrit with English translation Click here. After the Ganga Lahari the pundits takes promise from everyone to not to pollute the river ganga which people promise by raising both hands. Some time they also chant the name of ganga "Har Har Gange, Jai Ma Gange" for a while. There is little break in before the main Ganga Aarti starts. The workers of Ganga Sabha asks for the donations if people want to donate somethings. This donation is not compulsory and one can donate whatever they like. Donations will be used for the expanses of Ganga Aarti and some other religious and social welfare. Soon after this the pundits lights the Aartis and you can here the Ganga Aarti song on loudspeaker with the background music of bells. This song is just 5 mins song during which you can see three or more pundits waving aarti in front of river.
 

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Char Dham Yatra 2020 Latest News: Kedarnath Dham Doors Closed Today In Bhaiya Dooj
Chardham Yatra 2020 : बारिश व बर्फबारी के बीच शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Mon, 16 Nov 2020 04:44 PM IST


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विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए केदारनाथ धाम के कपाट - फोटो : amar ujala


बारिश व बर्फबारी के बीच बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए सुबह 8.30 बजे विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए हैं। बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली ने मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद मराठा रेजीमेंट की बैंड धुनों के साथ अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया।
इस मौके यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत डेढ़ हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे। बाबा की डोली पैदल मार्ग से गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को दर्शन देते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंची। 18 नवंबर को बाबा केदार छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हो जाएंगे।
सोमवार तड़के तीन बजे से मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग द्वारा बाबा केदार की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। भव्य श्रृंगार कर उन्हें भोग लगाते हुए आरती उतारी गई। इसके बाद स्वयंभू लिंग को समाधि रूप देकर भष्म से ढककर विधि-विधान के साथ समाधि पूजन किया गया।
बर्फबारी के बीच बाबा के भक्तों का उल्लास अपने चरम पर रहा
भगवान भैरवनाथ को साक्षी मानकर सुबह 6.30 बजे केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह के कपाट विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। इस मौके पर पंचमुखी भोगमूर्ति को गर्भगृह से मंदिर परिसर में विराजमान किया गया। लगातार होती तेज बर्फबारी के बीच बाबा के भक्तों का उल्लास अपने चरम पर रहा।

तत्पश्चात सुबह 8.30 बजे मंदिर के सभामंडप और मुख्य कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस अवसर पर बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली ने मंदिर की तीन परिक्रमा करते हुए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया।

कपाट बंद होने के समय धाम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, औद्योगिक सलाहकार डा. केएस पंवार, विशेष सचिव डा. पराग मधुकर धकाते, डीएम मनुज गोयल, एसपी नवनीत सिंह भुल्लर, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, युद्धवीर सिंह पुष्पवाण, अरविंद शुक्ला, सुभाष सेमवाल, डीडीएमओ एनएस रजवार, देवानंद गैरोला, वयोवृद्ध तीर्थपुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, एसएस बिष्ट, मनोज सेमवाल समेत लगभग डेढ़ हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे।

17 नवंबर को गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी डोली

बाबा केदार की चल उत्सव विग्रह डोली मराठा रेजीमेंट के बैंड की सुरीली धुनों के साथ पैदल मार्ग पर रुद्रा प्वाइंट, छानी कैंप, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग होते हुए पहले पड़ाव रामपुर पहुंची। जहां पर देवस्थानम बोर्ड के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी व प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल डोली की अगवानी की।

मंगलवार 17 नवंबर को बाबा केदार की डोली रात्रि प्रवास के लिए गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। जबकि 18 नवंबर को छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान हो जाएगी।


Chardham Yatra 2020 : बारिश व बर्फबारी के बीच शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट
 

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Kedarnath Yatra 2020 | Delhi to Haridwar
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•Sep 12, 2020


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Riding with Peace

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#RidingwithPeace #Kedarnathyatra
Hi My Name Is Sam, I live in South Delhi, I Love Bike Riding, Long Distance Riding, Camping, Cooking, and I do Traveling in a Simple way. No Show Off. Only Real Thing, I love to Makes Vlog on my Traveling Life also sharing my Experience through the Vlog Thank You
 

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Corona Test would be done for residents coming from new delhi western up and other states to uttarakhand capital dehradun as covid 19 surge -



 
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