Shrikhand Mahadev Trek

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News of 2017 by Amar Ujala:


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रूह कंपाने वाली श्रीखंड यात्रा शुरू, पैर फिसला तो जिंदा रहने की उम्मीद नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, आनी (कुल्लू), Updated Sun, 16 Jul 2017 12:46 PM IST

भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा 15 जुलाई से विधिवत रूप से शुरू हुई। यह 28 जुलाई तक चलेगी। 25 जुलाई तक यात्रियों का पंजीकरण होगा। अंतिम जत्था 28 जुलाई को वापस पहुंचेगा। इसके बाद कोई भी यात्री अधिकारिक तौर पर यात्रा पर नहीं जा पाएगा। यात्रा पहले बेसकैंप सिंघगाड़ से शुरू हुई। यहां पहले दिन शनिवार को 535 श्रद्धालुओं का पंजीकरण हुआ। इसमें प्रदेश और देश के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। करीब 18570 फीट ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव तक पहुंचने के लिए करीब 35 किमी पैदल सफर करना पड़ता है।


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श्रद्धालुओं को कई छोटे-बडे़ ग्लेशियरों और संकरे तथा पथरीले रास्तों से गुजरना पड़ता है। ग्लेशियरों से गुजरते हुए अगर आपका पैर फिसल गया तो आप जिंदा लौटकर आएंगे इसकी एक फीसदी भी उम्‍मीद नहीं। हजारों फीट गहरी खाई और ढांकें हैं जिनमें झांकने पर दिन में भी अंधेरा ही दिखता है।फूंक-फूंककर कदम रखना पड़ता है। बीते वर्षों में ऐसे कुछ हादसे हुए हैं जहां लोगों के शव भी बरामद नहीं हो सके। हाल ही में 6 जुलाई को चंडीगढ़ का एक युवक लापता हुआ है जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं चल पाया है। कुछ लोग यात्रा शुरू होने से पहले ही श्रीखंड जाना शुरू हो गए थे।

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श्रीखंड ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने बताया कि यात्रा के लिए चार बेसकैंप बनाए हैं। सिंघगाड में पहले बेसकैंप में श्रद्धालुओं का पंजीकरण और स्वास्थ्य चेकअप होगा। इसके अलावा थाचडू, भीमडवारी में डॉक्टर, पुलिस कर्मचारी मौजूद रहेंगे। अंतिम बेसकैंप पार्वतीबाग में होगा। यहां रेस्क्यू दल और पुलिस कर्मी श्रद्धालुओं की सुविधा को तैनात रहेंगे। क्षेत्रीय रेस्क्यू टीम को भी शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि इस बार पंजीकरण फीस बढ़ाकर सौ रुपये की गई है। यात्री पंजीकृत मेडिकल संस्थान से स्वास्थ्य फिटनेस प्रमाणपत्र ला सकते हैं। यदि कोई बिना पंजीकरण के जाता है तो वह ट्रस्ट की सुविधाओं से वंचित रहेगा। एसडीएम आनी पंकज शर्मा ने बताया कि यात्रियों को प्रशासन की तरफ से हिदायत दी गई है।


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यात्रा के दौरान क्या करें श्रद्धालु
1 सभी यात्रियों का पंजीकरण जरूरी है।
2 स्वास्थ्य जांच के बाद फिटनेस यात्री ही यात्रा पर जा सकते हैं। चिकित्सा प्रमाण पत्र यात्री सरकारी चिकित्सालय से ला सकते हैं।
3 श्रीखंड यात्रा साथियों के साथ ही करें।
4 चढ़ाई धीरे-धीरे चढ़ें, सांस फूलने पर वहीं रुक जाएं
5 छाता, बरसाती, गर्म कपड़े, टॉर्च और एक डंडा साथ लाएं
6 प्रशासन की ओर से निर्धारित रास्तों का ही प्रयोग करें।
7 किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर नजदीकी बेसकैंप में संपर्क करें।
8 सफाई का विशेष ध्यान रखें।
9 प्रकृति और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण में सहयोग करें।

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क्या न करें श्रद्धालु
1 रात को श्रीखंड यात्रा न करें।
2 बिना स्वास्थ्य जांच या बिना स्वास्थ्य प्रमाणपत्र यात्रा न करें।
3 साथियों का साथ बिल्कुल न छोडे़ं।
4 जबरदस्ती चढ़ाई चढ़ने का जोखिम न उठाएं, यह घातक हो सकता है।
5 यात्री फिसलने वाला जूता न पहनें।
6 यात्रा के दौरान शॉर्टकट रास्तों का सहारा न लें।
7 नशे का सेवन न करें।
8 खुले में गंदगी न फैलाएं
9 रास्ते में जड़ी-बूटियों से छेड़छाड़ न करें।

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35 किमी है पैदल कठिन यात्रा- कुल्लू जिले के निरमंड खंड के तहत श्रीखंड महादेव के लिए रामपुर से निरमंड 17 किमी, निरमंड से बागीपुल तक करीब 18 किमी, बागीपुल से जाओं तक नौ किमी बस योग्य सड़क है। यहां से पैदल यात्रा शुरू होती है। बेसकैंप सिंघगाड़ से आगे श्रीखंड महादेव तक 35 किमी की पैदल यात्रा होती है। यात्रा संकरी और जोखिम भरी है। कई तरह की सुगंधित वायु और ऐतिहासिक सुंदरता के दीदार कर श्रद्धालु यहां बिताए हसीन पलों को हमेशा याद रखते हैं। पार्वतीबाग और नयनसरोबर के बीच आक्सीजन की कमी से यात्रियों को परेशानी रहती है।
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भस्मासुर ने की तपस्या- जनश्रुति के अनुसार भस्मासुर राक्षस ने यहां तपस्या की और भगवान शिव से वरदान मांगा था। राक्षस के डर से पार्वती यहां रो पड़ीं, कहते हैं कि उनके अश्रुओं से यहां नयनसरोवर का निर्माण हुआ। इसकी एक-एक धार यहां से 25 किमी नीचे भगवान शिव की गुफा निरमंड के देव ढांक तक गिरती है।
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पांडवों ने भीमडवारी में काटा था कुछ समय- एक कथा के अनुसार जब पांडवो को 13 वर्ष का वनवास हुआ तो उन्होंने कुछ समय यहां बिताया। इसके साक्ष्य वहां भीम की ओर से स्थापित बडे़-बडे़ पत्थरों का काटकर रखा जाना है। उन्होंने यहां एक राक्षस को मारा था, जो यहां आने वालों को मार खाता था। राक्षस का लाल रक्त जमीन पर पड़ा तो वह जगह लाल हो गई। आज भी वहां लाल रंग मौजूद है। भीमडवार पहुंचने के बाद रात को यहां जड़ी-बूटियां चमक उठती हैं। भक्तों का दावा है कि इनमें से कई मृत संजीवनी बूटी भी मौजूद है।
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कैसे हुई श्रीखंड महादेव की रचना- दंत कथा के अनुसार प्रथम पूजन के बारे में देवताओं के मध्य झगड़ा हुआ तो यह निश्चय हुआ कि जो संपूर्ण धरती की परिक्रमा कर सबसे पहले लौटेगा, वह प्रथम पूज्य होगा। सभी देवता परिक्रमा पर निकले। गणपति ने माता पार्वती से उपाय पूछा तो माता के कहे अनुसार उन्होंने एक पत्थर पर भगवान शिव का नाम लिखा और पत्थर की परिक्रमा कर शंख ध्वनि की।
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शंख ध्वनि की आवाज पूर्ण सृष्टि में गूंज उठी। उस समय भगवान शिव आगे और स्वामी कार्तिकेय इस नयनगिर पर्वत पर चल रहे थे। शंख ध्वनि की आवाज से दोनों यहां शैल रूप में विराजमान हो गए। उन्हें तलाश करने सप्तर्षि भी आए। यहां आकर सप्तर्षि भी चोटियों के रूप में विराजमान हो गए। श्रीखंड यात्रा के दौरान सप्तऋषि की पहाड़ियां, स्वामी कार्तिकेय और भगवान श्रीखंड के दर्शन होते हैं।







रूह कंपाने वाली श्रीखंड यात्रा शुरू, पैर फिसला तो जिंदा रहने की उम्मीद नहीं- Amarujala
 

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6 मार्ग श्रीखंड महादेव पहुंचने के
6 ways to reach Shrikhand Mahadev

Tuesday, October 24, 2017




श्रीखंड महादेव कैलाश

क्या है पौराणिक महत्व : श्रीखंड महादेव की पौराणिकता मान्यता है कि भस्मासुर राक्षस ने अपनी तपस्या के बदले भगवन शिव से वरदान मांगा था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा । राक्षस प्रवृति के कारण उसने माता पार्वती से शादी करने की ठान ली । इसलिए भस्मापुर ने भगवान शिव के ऊपर हाथ रखकर उन्हें भस्म करने की योजना बनाई । निरमंड स्थित देवधांक गुफा में प्रवेश करके भगवन शिव श्रीखंड पहुंचे और श्रीखंड शिला के रूप में समाधिस्त हो गए । दूसरी तरफ भगवान विष्णु ने भस्मासुर की मंशा को नष्ट करने के लिए माता पार्वती का रूप धारण किया और फलस्वरूप उन्होंने भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य के दौरान भस्मासुर ने अपने ही सिर पर हाथ रख लिया और भस्म हो गया ।
यह स्थान आज भी भीम डुआरी में लाल रंग की धरती के रूप में देखा जा सकता है । भस्मासुर के समाप्त हो जाने के बाद भी जब भगवान शिव श्रीखंड रूपी शिला से बाहर नहीं आये तब गणेश, कार्तिकेयन और माँ पार्वती ने इसी स्थान पर घोर तपस्या की तब जाकर महादेव श्रीखंड शिवलिंग रूपी चट्टान को खंडित करके बाहर आये ।

श्रीखंड महादेव एक 72 फीट ऊँचा खंडित शिवलिंग है । प्रत्येक साल यह यात्रा सावन मास में आधिकारिक तौर पर मात्र 2 हफ़्तों के लिए खुलती है । साल 2014 से यह यात्रा प्रशासन के हाथ में चली गयी है जिसके तहत सभी यात्रियों का यात्रा पंजीकरण सिंहगाड में होता है । अभी तक पंजीकरण के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है ।
श्रीखंड महादेव पहुंचने के लिए मुख्यतः 2 ही मार्गों का इस्तेमाल किया जाता रहा है परन्तु कुछ घुमक्कड़ तीसरे रास्ते से भी अवगत होंगे । इस साल (2017) जब मैंने यह यात्रा पूरी करी तब कई प्रकार की जानकारी हाथ लगी । स्थानियों और गद्दियों से प्राप्त जानकारी के हिसाब से श्रीखंड महादेव 6 अलग-अलग रास्तों से पहुंचा जा सकता है ।




श्रीखंड पहुंचने का पहला मार्ग : निरमंड – बागीपुल - जाओं - क्या आप यकीन मानोगे कि श्रीखंड महादेव पहुंचने का यही रास्ता सबसे आसान है । जितने भी लोगों ने श्रीखंड के दर्शन इस रास्ते से किये हैं वो जानते हैं कि यह रास्ता कितना आसान है लेकिन अगर इसकी तुलना दूसरे रास्तों से करें तो यही रास्ता बचता है जो आपको सुगम महसूस होगा ।
जाओं गाँव से शुरू होती इस यात्रा की श्रीखंड महादेव तक एकतरफा दूरी लगभग 25.5 किमी. है । जाओं समुन्द्र तल से 1949 मी. पर स्थित और श्रीखंड महादेव की ऊँचाई 5140 मी. है । यात्रा के इस मार्ग से जाने पर सिंहगाड़ में प्रत्येक यात्री का ऑफलाइन पंजीकरण होता है ।
आधिकारिक तौर पर शुरू हुई यात्रा में यात्रियों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्राप्त होती हैं जैसे मेडिकल सहायता, सर्च एंड रेस्क्यू, स्थानीय पुलिस, लंगर और कई स्थानों पर रहने और खाने की निशुल्क व्यव्स्था । पगडण्डी की कम चौड़ाई और लगातार खड़ी चढ़ाई के कारण अभी तक इस मार्ग पर खच्चर व घोड़ों की सुविधा मौजूद नहीं है । पिछले कुछ सालों से बढती श्रधालुओं की संख्या ने स्थानीय लड़कों को पोर्टर व गाइड बनकर अतिरिक्त कमाई करने का अवसर प्रदान किया है ।

जाओं कैसे पहुंचे : दिल्ली से शिमला की रोड़ दूरी 350 किमी. है और शिमला से दत्तनगर की दूरी 125 किमी. है । इक्चुक यात्री दिल्ली से वॉल्वो या आर्डिनरी बस (403 रु. प्रति-व्यक्ति किराया) से लगभग 12 घंटे के सफ़र के बाद दत्तनगर पहुंच सकते हैं । दत्तनगर से हर घंटे सरकारी बस बागीपुल जाती है जिसका किराया प्रति-व्यक्ति 50-60 रु. रहता है । दत्तनगर से बागीपुल की दूरी लगभग 41 किमी. है और बागीपुल से जाओं की दूरी मात्र 7 किमी. है । सभी प्रकार की बस सेवा सिर्फ बागीपुल तक ही सीमित है । बागीपुल से आगे-जाने के लिए आपको स्थानीय गाड़ियों से लिफ्ट या टैक्सी बुक करनी होगी जिसका किराया 100-150 रु. है ।
श्रीखंड जाते समय प्राकृतिक शिव गुफा, निरमंड में सात मंदिर, जाओं में माता पार्वती सहित नौ देवियां, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, आदि स्थानों के दर्शन किये जा सकते हैं ।

यात्रा मार्ग पर कहां रुकें : पार्वती बाग़ तक प्रसाशन और स्थानियों की ओर से कई स्थानों पर यात्रियों के लिए निशुल्क रहने और खाने की सुविधा उपलब्ध है । लंगर की व्यव्स्था निरमंड, जाओं, सिंहगाड़, थाचडू, और भीम डुआरी में सुनिश्चित की गई है । निरमंड, जाओं और सिंहगाड़ में यात्रियों के लिए निशुल्क ठहरने की व्यव्स्था भी है । थाचडू और भीम डुआरी में सीमित टेंटों की वजह से ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर लंगर वाले ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं । इस यात्रा का अंतिम पढ़ाव पार्वती बाग़ है जिसे साल 2017 से आपातकालीन स्थिति के लिए बचाकर रखा गया है । यहाँ सिर्फ वृद्ध और उन यात्रियों को शरण मिलती है जिन्हें श्रीखंड महादेव से लौटते हुए देर हो जाती है । यहाँ प्राइवेट टेंट व खाना इसलिए गुज़ारिश है कि दर्शन वाले दिन अपने साथ कम-से-कम 1000 रु. नकद रखें ।

यह तो हुई प्रसाशन और लंगर वालों की बात, अब बात करते हैं प्राइवेट टेंटों की । प्राइवेट टेंट अपनी भूमिका ब्राटी नाला के बाद निभाते हैं । खुम्बा डुआर, थाटी बील, थाचडू, तनैन गई, काली टॉप, भीम तलाई, कुंशा, भीम डुआरी और पार्वती बाग़ इन सभी जगहों पर यात्रियों को प्राइवेट टेंट की सुविधा मिलती है ।


यात्रा के दौरान ठहरने के स्थान, उनकी क्षमता और किराया दर्शाती तालिका

मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता : इस दुर्गम मार्ग पर काली घाटी को छोड़कर बाकी लगभग सभी जगहों पर नेटवर्क मौजूद है । इस इलाके में बी.एस.एन.एल (BSNL), एयरटेल, और आईडिया का नेटवर्क मिलता है । फ़ोन में बैटरी हो तो जाओं, सिंहगाड़, खुम्बा डुआर, थाटी बील, थाचडू, काली टॉप से अपने परिजनों से बात होनी सम्भव है ।
काली घाटी के बाद नेटवर्क नहीं है लेकिन मजे की बात है भीम बही पर नेटवर्क उपलब्ध है । इस साल कुछ यात्रियों ने तो सकुशल दर्शन का समाचार अपने परिजनों को श्रीखंड के सामने से दिया । बिजली सिंहगाड़ से आगे कहीं नहीं है । कुछ स्थानों पर जरनेटर के द्वारा बिजली मौजूद है जैसे थाचडू, भीम डुआरी, और पार्वती बाग़ । ध्यान रखें मोबाइल का नेटवर्क खराब मौसम पर निर्भर करता है और कैमरा नहीं होने की स्थिति में मोबाइल के साथ पॉवर बैंक अवश्य रखें ।


जाओं से श्रीखंड महादेव का सैटलाइट नक्शा


जाओं से श्रीखंड महादेव का दूरी व ऊँचाई का चार्ट

श्रीखंड पहुंचने का दूसरा मार्ग : ज्यूरी - फांचा – इस साल (2017) श्रीखंड महादेव दर्शन की तैयारी मेरी इसी रास्ते से थी लेकिन बाद में ज्ञात हुआ कि इस मार्ग पर कहीं बादल फटने से परिस्थितियां सामान्य नहीं है, तो अब समस्त उम्मीद 2018 पर टिकी हैं । 5373 मी. के विशाल हाईट गेन के साथ फांचा से इस मार्ग की पैदल दूरी करीबन 18 किमी. है ।
इस घाटी के मुंहाने पर गानवी गाँव स्थित है जिसकी वजह से इस घाटी को स्थानीय भाषा में ‘गानवी वैली’ भी कहते हैं । ज्यूरी समुन्द्र तल से 1381 मी. पर स्थित है और यहीं से इस मार्ग का आरम्भ होता है । सीधी चढ़ाई और जमी बर्फ के खड़े टुकडें इसे अत्यधिक दुर्गम बनाते हैं ।
श्रीखंड पहुंचने के इस मार्ग पर गद्दियों के अलावा अन्य किसी भी प्रकार की कोई सुविधा मौजूद नहीं है जोकि इसे और मुश्किल बनाता है ।
नीचे इस मार्ग से सम्बन्धित जानकारी देने का प्रयास कर रहा हूँ, हो सकता है निम्नलिखित स्थानों के अलावा भी कुछ और स्थान हो जहां यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधा मौजूद हो ।

फांचा कैसे पहुंचे : रामपुर से ज्यूरी की मोटरएबल दूरी 25 किमी. है । ज्यूरी से फांचा तक वाहन योग्य मार्ग बना हुआ है जिसकी कुल लम्बाई लगभग 15 किमी. है । फांचा समुन्द्र तल से 2214 मी. की ऊँचाई पर स्थित है । गाँव होने के कारण यहाँ रहने और खाने की सभी सुविधाएँ मौजूद हैं । फांचा में अंग्रेजों के समय का बना फारेस्ट रेस्ट हाउस भी है जिसमें 2 रूम के साथ 4 बैड हैं ।

फांचा मार्ग की जानकारी : श्रीखंड महादेव पहुंचने का यह दूसरा मार्ग ज्यूरी से शुरू होता है जिसे मुख्यतः सराहन व ज्यूरी के स्थानीय निवासी इस्तेमाल करते हैं । आइये लेते है जानकारी इस मार्ग पर स्थित कुछ स्थानों की जहां यात्री ठहर सकते हैं ।

फांचा : ज्यूरी के बाद फांचा इस मार्ग का पहला ऐसा स्थान है जहां यात्रियों को रहने और खाने की सुविधा उपलब्ध होती है । यहाँ तक सड़क बनी हुई है और यह स्थान ज्यूरी से लगभग 15 किमी. दूर है । फांचा से श्रीखंड की पैदल दूरी 18 किमी. है ।

फांचा कंदा : फांचा के बाद अगला स्थान फांचा कंदा आता है जोकि फांचा से 3 किमी. दूर है और 2450 मी. की ऊँचाई पर स्थित है । यहाँ यात्रियों को मानसून में भीगते हिमाचली गद्दियों के कुछ डेरे दिखाई दे सकते हैं । सभी परिचित है कि गद्दी किस प्रकार बीहड़ में लोगों की रहने से लेकर खाने तक की जिम्मेवारी उठा लेते हैं ।
अगर रास्ते के बारें में किसी को कोई संदेह हो तो गद्दियों से श्रीखंड महादेव मार्ग के बारें में जानकारी ली जा सकती है, आख़िरकार यह इलाका उनका ही तो है ।
फांचा कंडा में एक पुराना शेड भी मौजूद है, जो रहने योग्य है या नहीं अभी तक मुझे इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है । फांचा कंदा से थोड़ा आगे पानी का एकमात्र स्तोत्र है, यहाँ पानी की बोतल भरना न भूलें ।

सपावा : हो सकता है इस स्थान को किसी दूसरे नाम से पुकारा जाता हो लेकिन इस लेख के लिए मैं ‘सपावा’ ही इस्तेमाल करूंगा । फांचा कंदा के बाद अगला स्टेशन सपावा आता है । यहाँ तक रास्ता आपको घने जंगलों के गलियारों में घुमाता है ।
फांचा कंदा से सपावा की दूरी 5 के आसपास है और यह स्थान 3287 मी. पर स्थित है । सीजन में कुछ गद्दी यहाँ भी अपना डेरा डालते हैं नसीब अच्छा रहा तो उनसे भेंट हो सकती है ।

मजबौन : मजबौन सपावा से करीबन 6.5 किमी. दूर है । यहाँ की ऊँचाई 4000 मी. के आसपास है और इस 6 किमी. लम्बे रास्ते पर छोटे-बड़े बोल्डर-ही-बोल्डर बिखरे पड़े है । इस स्थान को रॉक गार्डन कहना ज्यादा अच्छा होगा । यह स्थान आखिरी स्थान होगा जहां आपको गद्दी भाई मिल सकते हैं ।

भीम बही - श्रीखंड महादेव : मजबौन से चलकर यह रास्ता भीम बही में जाकर मिलता है । मजबौन से भीम बही तक डंडा धार जैसी तीखी चढ़ाई है ऊपर से यात्रियों को खड़े ग्लेशियरों का भी सामना करना पड़ता है । इस स्थान से आगे सिर्फ जमी बर्फ होने के कारण हो सकता है रास्ता ढूंढने में यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़े ।
भीम बही की ऊंचाई 4890 मी. है और मजबौन से लगभग 3 किमी. दूर है । यहाँ जूतों की अच्छी परीक्षा होती है जब हर कदम पर यात्रियों को ठोकर मार-मारकर पैर रखने के लिए ग्लेशियर पर जगह बनानी पड़ती है । इस स्थान पर डंडा आपका अच्छा साथ निभा सकता है बशर्ते आप उसे लायें हों ।


फांचा से श्रीखंड महादेव का सैटलाइट नक्शा


फांचा से श्रीखंड महादेव का दूरी व ऊँचाई का चार्ट

श्रीखंड पहुंचने का तीसरा मार्ग : बंजार - बठाहड़ – इस साल श्रीखंड से लौटते समय थाचडू में एक यात्री मिला, जिसका नाम पी. आर. मेहता है, उनसे बात करके पता चला कि वो बठाहड़ (2050 मी.) के रहने वाले हैं और बठाहड़ से ही श्रीखंड महादेव के दर्शन करें हैं ।
अब वह वापसी जाओं के रास्ते से कर रहें हैं । जहां सबकी हालत लगातार होती बारिश और लम्बे ट्रैक के बाद बेहद खराब थी वहीं यह साहब जाओं पहुंचकर आज ही बश्लेऊ जोत (3277 मी.) पार करके अपने घर बठाहड़ पहुंचेंगे, कमाल की स्प्रिट है पहाड़ी लोगों की ।

मेहता साहब की माने तो बंजार-बठाहड़ से श्रीखंड महादेव के दर्शन करना बाकी दोनों रास्तों से कहीं ज्यादा आसान है । पहाड़ी लोगों का आसान कितना आसान होता है यह हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं तो जब तक इस रास्ते पर खुद जाकर इसकी आसानी का पता न चल जाये तब तक इसे कठिन ही मानना बेहतर होगा वैसे भी जो रास्ता हिमालय में 5000 मी. से ऊपर ले जाता हो वो आसान तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता ।

यह मार्ग भी मुख्यतः स्थानियों के द्वारा ही प्रयोग किया जाता रहा है । इन्टरनेट पर इसके बारें में कहीं भी किसी भी प्रकार की कोई जानकारी मौजूद नहीं है । ध्यान रहे इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की कोई सुविधा मौजूद नहीं है इसलिए यात्रियों को टैंट, स्लीपिंग बैग, और खाने के सामान को खुद ही उठाना होगा वैसे स्थानीय भी आपकी इस मामले में मदद कर सकते हैं अगर वो उपलब्ध हो तो ।

यहाँ इस मार्ग के बारें में जितनी भी जानकारी दी जा रही है उसका समस्त श्रेय मेहता साहब को ही जाता है ।
हिमालय का यह हिस्सा ‘ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क’ का हिस्सा है और ‘फलाचन घाटी’ में स्थित है । बठाहड़ गाँव के साथ-साथ ‘फलाचन नदी’ बहती है जिसका उद्गम स्थान श्रीखंड के ग्लेशियरों को माना जाता है और वहीं कहीं स्थित है स्थानीय देवता ‘फलाच’ का मंदिर । मेहता जी कहते हैं कि स्थानीय इस मार्ग से श्रीखंड के दर्शन 3 दिन में करते हैं ।

बठाहड़ कैसे पहुंचे : शिमला से बठाहड़ पहुंचने का आसान और छोटा रास्ता NH-5/NH-305 होकर जाता है जिसकी वाहन योग्य दूरी 191 किमी. है । यह रास्ता शिमला-ठियोग-कुमारसैन-आनी-जलोड़ी पास और बंजार होकर बठाहड़ पहुंचता है ।
कुल्लू से भी बंजार पहुंचा जा सकता है, वहां से यह दूरी मात्र 40 किमी. ही है । बंजार से बठाहड़ की मोटरएबल दूरी 19 किमी. है । बंजार की ऊँचाई 1356 मी. और बठाहड़ 2050 मी. पर स्थित है । बठाहड़ इस मार्ग का बेस कैंप है जहां से रास्ता आगे पैदल शुरू होता है |

बठाहड़ मार्ग की जानकारी : बठाहड़ गाँव समुन्द्र तल से 2050 मी. की ऊँचाई पर स्थित है । यहीं से पैदल यात्रा शुरू होती है । इस यात्रा का पहला पढ़ाव फलाचन नदी के उद्गम पर आता है जहां फलाच देवता का मंदिर भी स्थित है ।
यहाँ की ऊँचाई 3670 मी. के आसपास है । पहले दिन लगभग 1650 मी. का हाईट होता है । दिन भर चलते यात्रियों को इस मार्ग पर कई जगह गद्दियों के डेरे मिलते हैं ।

दूसरा दिन यात्रा सुबह जल्दी शुरू होती है । इस दिन की शुरुआत ही तीखी चढ़ाई से होती है जिसके तहत 2-3 किमी. की दूरी तय करने में ही करीबन 650 मी. का हाईट गेन हो जाता है । मेहता साब ने बताया कि ऊपर पहुंचकर यह रास्ता 2 मार्गों की ओर घूमता है ।
पहला यहाँ से रास्ता नीचे उतरकर भीम तलाई और कुंशा में मिलता है और दूसरा ऊपर से ही भीम डुआरी पहुंचता है । दूसरे दिन का ठहराव भीम डुआरी में होता है जहां यात्री दिन भर की थकान के बाद गर्मागर्म खाना खाकर अपने आप को अच्छी नींद के हवाले करते हैं ।

तीसरा दिन श्रद्धालु भीम डुआरी से जल्दी चलकर श्रीखंड महादेव के दर्शन करते हैं । तो यह थी जानकारी श्रीखंड महादेव पहुंचने के तीसरे मार्ग की ।


बठाहड़ से श्रीखंड महादेव का सैटलाइट नक्शा


बठाहड़ से श्रीखंड महादेव का ऊंचाई चार्ट

श्रीखंड पहुंचने का चौथा मार्ग : गुशैणी – बनायाग मार्ग – श्रीखंड कैलाश पहुंचने का चौथा मार्ग गुशैणी से निकलता है । इस मार्ग की जानकारी भीम डुआरी में मिले एक गद्दी से मिली । गद्दी भाई के अनुसार रास्ता तो है वहां से लेकिन बेहद खतरनाक है ।
इस मार्ग के खतरों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह मार्ग आपको सीधा कार्तिक स्वामी पर्वत (5100 मी.) के आधार के निकट पहुंचाता है । कार्तिक स्वामी से मार्ग ‘हिम्मती यात्री’ को श्रीखंड पर्वत के पीछे से ऊपर चढ़ाता है । इस मार्ग से श्रीखंड महादेव पहुंचना यात्रा नहीं बल्कि पर्वतीय अभियान होगा ।

गुशैणी तक वाहन योग्य मार्ग बना हुआ है । बंजार से गुशैणी लगभग 10 किमी. दूर है । इस स्थान की ऊँचाई 1585 मी. है ।
गुशैणी से मार्ग ‘तीर्थन घाटी’ में बहती ‘तीर्थन नदी’ के साथ-साथ आगे बढ़ता है । मार्ग कई गांवों को पार करता हुआ वहां पहुंचता है जहां तीर्थन नदी बनायाग ग्लेशियर का रूप ले लेती है, इस स्थान का गद्दी भाई ने ‘बन्याग’ नाम बताया ।

यह मार्ग ‘ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क’ के साथ-साथ तीर्थन घाटी का भी हिस्सा है । उनके अनुसार ‘बनायाग’ से आगे ग्लेशियर पर 11 छिपी झील हैं ।
ऑनलाइन नक्शों पर ‘बनायाग ग्लेशियर’ के साथ 11 झीलों को देखा जा सकता है । यात्रा के इस अपरिचित मार्ग पर कई बार नालों को भी पार करना होगा । उन्होंने आगे बताया कि गद्दी अपने डेरे ‘बनायाग ग्लेशियर’ से पीछे ही लगाते हैं ।

जब तक कि कोई पुख्ता सबूत या जानकारी न मिल जाये तब तक गद्दी भाई द्वारा दी गई जानकारी पर ही निर्भर होना पड़ेगा ।


गुशैणी से श्रीखंड महादेव का सैटलाइट नक्शा

श्रीखंड पहुंचने का पांचवा मार्ग : झाकड़ी - श्रीखंड महादेव – निरमंड और ज्यूरी के बीच एक मार्ग और स्थित है जिसके द्वारा श्रीखंड महादेव तक पहुंचा जा सकता है । श्रीखंड महादेव पहुंचने का पांचवा मार्ग झाकड़ी से निकलता है । झाकड़ी समुन्द्र तल से 1181 मी. की ऊँचाई पर स्थित है ।

ज्यूरी बस स्टैंड पर किन्नर कैलाश जाने के लिए पोवारी की बस का इंतजार कर रहा था । मेरे साथ एक स्थानीय निवासी खड़े थे जिनसे बात करके इस मार्ग के बारे में पता चला । झाकड़ी से श्रीखंड महादेव के दर्शन उन्होंने कुछ साधुओं के साथ कई साल पहले किये थे ।
उनकी माने तो यह मार्ग फांचा वाले रास्ते से भी अत्यधिक कठिन है । हिमाचल रोडवेज चलती जानकारी के बीच ही आ गई जिस वजह से इस मार्ग के बारे में सिर्फ इतनी ही जानकारी मिल पाई है कि झाकड़ी से भी रास्ता है श्रीखंड महादेव पहुंचने का ।

इन्टरनेट पर भी मैंने कई दिन बिताएं लेकिन इस रास्ते के बारे में कोई जानकारी मौजूद नहीं है । आशा करता हूँ भविष्य में इस मार्ग से यात्रा करके श्रीखंड शिखर तक पहुँचूं ।


झाकड़ी से श्रीखंड महादेव का सैटलाइट नक्शा

श्रीखंड पहुंचने का पांचवा मार्ग : खीरगंगा – श्रीखंड मार्ग – श्रीखंड कैलाश पहुंचने का छठा मार्ग खीरगंगा से शुरू होता है । समय के साथ-साथ यह मार्ग अतीत और ग्लेशियरों के नीचे दब चुका है । यात्रा के दौरान मैंने काफी लोगों से इस मार्ग की जानकारी लेनी चाही लेकिन किसी को इस मार्ग के बारे में पता नहीं है ।
इस रास्ते के बारें में बताने वाला कोई इंसान नहीं बल्कि एक टिन का बोर्ड है जो श्रीखंड महादेव के शिखर पर लगा हुआ है ।

बोर्ड पर ये शब्द लिखे हुए हैं “ऐसी मान्यता है कि श्रीखंड से एक मार्ग खीरगंगा व मणिकर्ण को भी निकलता है परन्तु मार्ग बहुत ही कठिन व ग्लेशियरों से भरा है” । इन्टरनेट व गूगल मैप की मदद भी किसी काम न आई इस मार्ग को श्रीखंड से जोड़ने में । नीचे दिए गये सैटलाइट नक़्शे को देखकर आप खुद भी अंदाजा लगा सकते हैं इस मार्ग की पहेली का ।

अतीत में रहें होंगे सुपर क्रेजी खोजी जिन्होंने इस मार्ग को खोजा होगा । वर्तमान में इस एकमात्र बोर्ड के अलावा कहीं और कोई सबूत न प्राप्त होने के कारण प्रतीत होता है कि भविष्य में भी यह मार्ग छुपा ही रहेगा ।


खीरगंगा - श्रीखंड मार्ग का एकमात्र सबूत


खीरगंगा व श्रीखंड महादेव का सैटलाइट नक्शा

तो यह थी वह जानकारी जो इस साल (2017) में मुझे स्थानियों और गद्दियों से प्राप्त हुई । साल 2018 में ऊपर लिखे कुछ मार्गों से इस यात्रा को सम्पन्न करने की योजना है । आशा करता हूँ 2018 में कम-से-कम 3 मार्गों से तो परिचित हो ही जाऊंगा ।
उपरोक्त 6 मार्गों में से मैंने मात्र जाओं वाले रास्ते को ही देखा है । पाठकों व घुमक्कड़ों से अनुरोध है कि इस जानकारी को तब तक पुख्ता न समझें जबतक मैं या आपमें से कोई इन मार्गों का स्वयं अनुभव न कर लें ।

अगर किसी पाठक को उपरोक्त जानकारी या स्थान के नाम में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो कृपया अपनी टिप्पणी कमेन्ट बॉक्स में अवश्य दर्ज कराएँ, सही जानकारी को तुरंत लेख में शामिल किया जायेगा ।

आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि जिसके पास भी उपरोक्त मार्गों के बारे में सही जानकारी मौजूद है वो कमेंट बॉक्स में उसे लिखकर इस लेख को पूर्ण करने में योगदान दें ।

धन्यवाद यहाँ आने के लिए और आशा करता हूँ कि आपको यह लेख पसंद आया होगा ।


श्रीखंड महादेव पहुंचने के 6 मार्ग


6 ways to reach Shrikhand Mahadev


हिमालयी गर्भ: 6 मार्ग श्रीखंड महादेव पहुंचने के (6 ways to reach Shrikhand Mahadev)



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Accomodation &  Food Final.jpg


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Kheerganga Board for Shrikhand Mahadev.jpg
 
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2018

SHRIKHAND MAHADEV

SHRIKHAND MAHADEV JI KI JAI | भोले की फ़ौज करेगी मौज
Shrikhand Mahadev Yatra 2018 | श्रीखंड महादेव जी यात्रा 2018
Shrikhand Mahadev Yatra 2018

श्रीखंड महादेव जी की यात्रा हर वर्ष जुलाई के महीने मैं होती है। Shrikhand Mahadev Yatra 2018

आधिकारिक रूप से यह यात्रा सावन के पहले सोमवार से शुरू होती है और लगभग 2 सप्ताह तक यात्रा चलती रहती है।



हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी देश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं मैं से एक श्रीखंड महादेव

जी की यात्रा आधिकारिक रूप से जुलाई 2018 तक आयोजित किया जायेगा।


श्रीखंड महादेव


जुलाई महीने के पहले सप्ताह मैं श्रीखंड के रास्तों को इन रेस्क्यू टीम द्वारा जांचा जाएगा और इसकी पुख्ता जानकारी प्रशाशन को दिया जायेगा।

कुल्लू के डी सी यूनुस खान ने बताया कि यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए विशेष इंतज़ाम किये जायेंगे।

यात्रा को शुरू करने से पहले एक विशेष टीम

श्रीखंड रवाना होगी। जो पुरे मार्ग का आकलन करेगी।

Registration For Shrikhand Mahadev Yatra 2018
यात्रा मैं जाने वाले श्रदालुओ से पंजीकरण फ़ीस लिया जायेगा।

पंजीकरण फ़ीस १०० रुपए रखा है। इस बार यात्रा के लिए श्रदालुओ को किसिस भी रजिस्ट्रड मेडिकल संस्थान से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरुरी है।

बिना फिटनेस सर्टिफिकेट यात्रा मैं हिसस नहीं लेने दिया जायेगा।



Shrikhand Mahadev Yatra 2018 | श्रीखंड महादेव जी यात्रा 2018
 

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Shrikhand Mahadev Yatra in Himachal Pradesh is the Shrikhand Mahadev Mountain which resembles the Shivling.
Every year a local committee conducts a trek – this year their period of journey is from
July 15, 2018 to July 25, 2018.
Numerous Lord Shiva devotees undertake the difficult trek to the mountain during the main pilgrimage season (July – August). Atop the mountain there is a small shrine of Shiva. You can undertake the yatra in the month of August, September and October.

Devotees believe that Lord Shiva meditated at Shrikhand and the Pandvas too had trekked to the peak.



Shrikhand Mahadev Yatra is usually undertaken to coincide with the Ashada Poornima (full moon day in June or July) – as per the Hindu Vikram calendar. It continues till the Purnima of Ashwin month (full moon day of September or October).

Himachal Pradesh state government organizes a pilgrimage tour during the month of July and August. Scores of Lord Shiva devotees also accompany the Chhadi yatra – the journey carrying the holy mace – to the temple at Srikhand Mahadev.

Shrikhand Vikas Samiti
ph - 9418008549

Shrikhand Mahadev Yatra Contact Details:
Shrikhand Sewa Dal Samiti
Ph : 9216789198




Shrikhand Mahadev Yatra 2018 | Hindu Blog
 

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Hindi NewsHimachal PradeshShimlaSrikhand Mahadev Yatra 2018 From 15 To 31st July
श्रीखंड महादेव यात्रा का शेडयूल जारी, यात्रा पर जाने से पहले पढ़ लें ये बातें, कहीं पछताना न पड़े
अमर उजाला ब्यूरो, आनी (कुल्लू) Updated Wed, 13 Jun 2018 01:38 PM IST




इस साल श्रीखंड यात्रा 15 से 31 जुलाई तक होगी। हर यात्री का पंजीकरण बैस कैंप सिंघगाड़ में किया जाएगा। यहां श्रद्धालुओं का मेडिकल चेकअप किया जाएगा। यात्री को 150 रुपये पंजीकरण फीस देनी होगी। श्रीखंड यात्रा में कुनशा में विशेष बेस कैंप लगेगा, जहां पर बीमार और घायल यात्रियों का इलाज किया जाएगा।

श्रीखंड महादेव यात्रा के हर पड़ाव पर अस्थायी शौचालय बनाए जाएंगे। पीने के पानी की व्यवस्था होगी। ट्रैफिक व्यवस्था सुचारु बनाने पर भी चर्चा की गई। श्रीखंड महादेव यात्रा की तैयारियों को लेकर अगली बैठक उपायुक्त कुल्लू के साथ जल्द होगी।





पानी के स्रोत सूखे

एसडीएम चेत सिंह ने कहा कि श्रीखंड महादेव यात्रा के लिए अतिरिक्त बसों की मांग की गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारी कैलाश भारद्वाज ने बताया की थाचडू कालीघाटी यात्रा पर पीने के पानी के सभी स्रोत सूख चुके हैं। इसलिए इस बार श्रीखंड यात्रा में पीने के पानी की भारी कमी हो सकती हैं।

बैठक में यश ठाकुर, संदेव ठाकुर, कारदार पुष्पेंद्र शर्मा, प्रधान जगदीश चंद, कुलवंत कश्यप, गोबिंद प्रसाद शर्मा, देवीसिंह ठाकुर एलआर ठाकुर, अनिल कुमार सहित श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट के सभी सदस्य उपस्थित थे। श्रीखंड महादेव कैलाश यात्रा में इस बार यात्रियों का पंजीकरण जरूरी होगा पंजीकरण पर श्रीखंड स्मारिका भी दी जाएगी।





लगाए जाएंगे लंगर



श्रीखंड यात्रा पर यात्रियों के लिए हर साल की तरह लंगर लगाए जाएंगे। इसके अलावा टेंट लगाने वाले चाय, खाना, नाश्ता तय कीमत पर देंगे। श्रीखंड महादेव यात्रा में बीएसएनएल, जियो के टावर पूरा सिग्नल उपलब्ध करवाएंगे। श्रीखंड महादेव कैलाश यात्रा में सरकारी एवं निजी संस्था के मजदूर और कर्मचारी को बूरसाती, जूते, टॉर्च, सेफ्टी किट दी जाएगी।

बैठक में एसडीएम चेत सिंह, तहसीलदार, नीरजा, मनमोहन, डॉ. संजय आनंद, हरदयाल शर्मा, विनोद कुमार नेगी, सोहन लाल, राजेंद्र कुमार एसएचओ निरमंड रंजीत एसडीओ एसएल पाठक कैलाश भारद्वाज भी मौजूद रहे।

श्रीखंड यात्रा के 32 किलोमीटर लंबे पैदल कठिन रास्ते को ठीक करने के आदेश जारी किए गए जानकारी के अनुसार थाचडू कालीघाटी के साथ भूस्खलन से पैदल रास्ते खराब है। इन्हें समय रहते ठीक किया जाएगा








श्रीखंड महादेव यात्रा का शेडयूल जारी, यात्रा पर जाने से पहले पढ़ लें ये बातें, कहीं पछताना न पड़े- Amarujala
 
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Shrikhand mahadev yatra 2018 | kullu manali | Himachal Pradesh

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India Travel

Published on Jul 8, 2018


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रूह को कंपाने वाली है श्रीखंड महादेव यात्रा, अमरनाथ से भी ज्यादा कठिन Shrikhand mahadev yatra 2018 | kullu manali | Himachal Pradesh | bijli mahadev शिमला। हिमालय की गोद में विराजमान श्रीखंड महादेव के दर्शन करना आसान नहीं है। यह जिला कुल्लू के आनी में है लेकिन निरमंड से होकर ही यहां पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने के लिये पैदल ही चलना पड़ता है। दुनिया की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शामिल होने के बावजूद श्रीखंड यात्रा के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यात्रा में पहुंचते हैं। कुल्लू जिला के आनी में यह इलाका है। निरमंड से श्रीखंड यात्रा के लिए 25 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई श्रद्धालुओं के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होती है। कई बार तो इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत भी हो चुकी है। चढ़नी पड़ती है 18570 फीट की ऊंचाई आमतौर पर कैलाश मानसरोवर की यात्रा सबसे कठिन व दुर्गम धार्मिक यात्रा मानी जाती है। उसके बाद किसी का नंबर आता है तो वो है अमरनाथ यात्रा, लेकिन हिमाचल प्रदेश के श्रीखंड महादेव की यात्रा अमरनाथ यात्रा से भी ज्यादा कठिन है। अमरनाथ यात्रा में जहां लोगों को करीब 14000 फीट की चढ़ाई करनी पड़ती है तो श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए 18570 फीट की ऊचाई पर चढ़ना होता है और यहां पहुंचने का रास्ता भी बेहद खतरनाक है। अमरनाथ से भी कठिन श्री खंड महादेव की इस यात्रा में रूह कांप जाती है।

Shrikhand Mahadev- A heavenly Himalayan trek Shrikhand Mahadev, one of the toughest pilgrimages in India, is known for Lord Shiva in Hindu Mythology.
It also makes a thrilling and adventurous trek in Himachal.
It takes you amidst the lavish and beautiful setup of mighty Himalayas to the top of the Shrikhand Mahadev peak at a height of 16900 feet above the sea level.
This holy destination is situated Kullu district of Himachal Pradesh.
What you should know about the trek/pilgrimage June and July are the most ideal months to take up Shrikhand Mahadev trek.
Though it’s summer time, one should always be prepared to face untimely rain and even snow fall.
In the peak pilgrimage time, it is very easy to find food, water and sleeping bags.
Still it is advisable that you take your own sleeping bags and some of other daily need supplies with you, but at the same time try to keep your luggage very light.
Do not over-pack, but make sure you carry water bottles, glucose sachets, warm clothing, rainwear, flashlights and dry fruits.
This is a 35 km harsh track to trek and not meant for physically ill and weak hearted.
The trek ascends through the alpine meadows to a 72 feet pinnacle of rock called Shivlinga.
The yatra takes 10 days to complete and is organized by the Government of Himachal Pradesh. So, before you start your yatra, the registration becomes mandatory.

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Shrikhand Mahadev # A Trek To Heaven With GoPro HD # Himachal Pradesh # Incredible India
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Himalaya Treks

Published on Jul 18, 2016

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Shrikhand Mahadev- Heavenly Himalayan trek This holy destination is situated Kullu district of Himachal Pradesh. The tall standing pinnacles of rock At Top Symbolize The lord Shiva and his glory in the form of the "Shivling" Shrikhand Mahadev # A Trek To Heaven # Himachal Pradesh # Incredible India


 
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