Shyari old memories lane

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ओ खुशी जान
ओ खुशी जान
गुस्सा न हो मेरी जान
गुस्सा न हो मेरी जान
गुस्सा ही बताता है कि तुम मुझसे कितनी प्यार करती हो मेरी जान
ओ खुशी जान
ओ खुशी जान
गुस्सा ना हो मेरी जान
माना कि मैंने गुस्से में कुछ कह दिया मेरी जान, अब वो शब्द कभी नही कहेंगे मेरी जान ।
ओ खुशी जान
ओ खुशी जान
आप ही तो मेरी मेरी दुनिया है मेरी जान आपसे गुस्सा हो कर हम कहाँ जाएंगे खुशी जान ।
ओ खुशी जान
ओ खुशी जान
कभी कभी तो मेरी फिलिंग को समझ करो मेरी जान
आप नही समझियेगा तो कौन समझेगा मेरी जान। ओ खुशी जान
ओ खुशी जान अब हमसे गुस्सा न हो मेरी जान
 

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पिता के लिए नालायक,
और माँ के बड़े अजीज होते है,
किसी के लिए सोना, बाबू और जानू,
तो किसी के लिए बद्तमीज होते है
ये लड़के भी बड़े अजीब होते है।



┈•●◉✧✺❖❁❈❁❖✺✧◉●•┈
 

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*माना कि तुम किस्मत से मिलते हो,*

*पर सच तो ये है हम भी किस्मत वालो को ही मिलते है !!*
 

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मजबूरियां चुपचाप बोली कान में ,
जिंदगी बेचैनियों का नाम है ।
 

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सिर्फ साँस लेने का नाम जिंदगी नही ,
जीने के लिए कुछ फैसले जरूरी है ।
 

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आपके नसीब के छेद जो अपनी बनियान में पहन ले,,,

उस शख्सियत को 'पिता' कहते हैं...
 

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"मेरी जेब में जरा सा छेद क्या हो गया.....
.
सिक्कों से ज़्यादा तो रिश्ते गिर गये....."
 

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तूफ़ान भी आना ज़रूरी है ज़िन्दगी में।।तभी तो पता चलता है कौन हाथ पकड़ कर भागता है और कौन हाथ छुड़ा कर
 

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लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~

उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...

और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..

पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है

और.....

बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है

इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.

एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,

और

जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....

नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,

मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।

इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।

और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...

अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......

इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,

पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली , कोने- कोने जाना पड़ता है ।


दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?

पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।

वाह रे दुनिया और दुनिया की रीत ।


Very nice line

इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं कि उसे "जानवर" कहो तो नाराज हो जाता हैं और "शेर" कहो तो खुश हो जाता हैं।
 

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माचिस तो यूँही बदनाम है हुजूर,,

हमारे तेवर तो आज भी आग लगाते है,
 
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