Viral Shocking Messages Facts/Fake on Social Media: Whatsapp, facebook etc.

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COVID-19: Video of Pak patient in UK shared as Pak doctor who died after treating patients
Ketan
26th March 2020
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Ketan
A video widely circulating on social media shows a man in a hospital bed, with a mask covering his mouth, speaking with great difficulty. “Salaam-Alaikum, my health is better today. Hence, I thought of greeting you all and I request you all to not take the virus as a joke. This is a virus, not a joke. My health today is way better.” The man urges people to take precautions against the coronavirus pandemic. Several users have claimed that he is Dr Usama Riaz who caught the viral infection while treating patients suffering from COVID-19 and lost his life. The video is claimed to be the last message left by the doctor.
Tweets by Khadija Siddiqi and Aarif Shah alleging that he is Dr Usama Riaz have garnered a combined retweet count of over 5,000. The video is viral on Twitter and Facebook with the same narrative.
Sonam Mahajan, a prominent social media user, tweeted the video with the message, “This is Dr. Usama Riaz from Pakistan. He got infected with coronavirus while treating others. This was his last video cuz he succumbed yesterday.”

Another claim: COVID-19 patient from Bhilwara, Rajasthan
Facebook user Kajla Sunil Choudhary posted the video claiming that he a coronavirus patient from Rajasthan’s Bhilwara. His message reads, “भीलवाड़ा के कोरोना पॉजिटिव डॉ. नियाज साहब का सभी के लिए सन्देश (A message for the public by Niyaz Sahab, a COVID-19 positive patient from Bhilwara.)” The post has been shared more than 1,700 times.

Fact-check
Firstly, it is true that a 26-year-old doctor died in Pakistan due to contracting coronavirus while treating patients. His name was indeed Riaz. He was treating people in POK’s Gilgit-Baltistan region who had returned from Iraq and Iran.
But the second and most important fact is that the man in the video is not the same doctor. He is doctor Mubashir Ahmad, who is from Pakistan and has been living in the United Kingdom for some time. He did contract the virus. His relative Nimra informed that he (Ahmad) is her uncle and his name is not Usama Riaz. She further stated that her uncle is fine and recuperating.
We found Ahmad’s Facebook profile and subsequently a post where he clarifies that he is not Dr Usama Riaz. While thanking God, Ahmad said that he is feeling much better but he is in the hospital at the moment. Posted below is the screenshot of his Facebook post. In the post, he talks about his video circulating with different people’s names which shouldn’t have happened and is wrong.

He also posted a live video clarification where he referred to himself as Dr Mubashir Ahmad.
The video viral on social media with false claims is a Facebook live which was posted by Ahmad on March 22, 2020.

Alt News could ascertain that a video of Dr Mubashir Ahmad was shared on social media with the claim that he is doctor Usama Riaz who died after contracting the coronavirus. In the comparison posted below, Ahmad is on the left while Usama is on the rights.



Note: The number of positive cases of the novel coronavirus in India has exceeded 600. This has caused the government to impose a complete restriction on movement apart from essential services. Globally, more than 4 lakh confirmed cases and close to 21,000 deaths have been reported. There is a growing sense of panic among citizens, causing them to fall for a variety of online misinformation – misleading images and videos rousing fear or medical misinformation promoting pseudoscience and invalid treatments. While your intentions may be pure, misinformation, spread especially during a global pandemic, can take lives. We request our readers to practice caution and not forward unverified messages on WhatsApp and other social media platforms.



COVID-19: Video of Pak patient in UK shared as Pak doctor who died after treating patients - Alt News
 

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क्या PM मोदी की अपील के बाद ब्राज़ील और स्विट्जरलैंड में भी लोगों ने फ़्लैश-लाइट जलाकर मुहिम में हिस्सा लिया?
6th April 2020
Kinjal



Kinjal@HereisKinjal

देश में कोरोना वायरस की वजह से 24 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की. लॉकडाउन के दौरान देश के लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल को रात 9 बजे, 9 मिनट तक घर की सभी लाइटें बंद करके घर की बालकनी या छत से दिया, लाइट, टॉर्च या मोबाइल की फ़्लैश-लाइट ऑन करने की अपील की थी. इसी के चलते 5 अप्रैल को ज़्यादातर देशवासियों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया. इसी बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर होने लगा. वीडियो में लोगों को सड़कों पर मोबाईल की फ़्लैश-लाइट जला कर हाथ हिलाते हुए देखा जा सकता है. दावा है कि ये वीडियो स्विट्जरलैंड का है और वहां के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी की बात मानकर इस मुहिम में हिस्सा लिया है.
हिन्दू हिंदुस्तान नाम के एक अकाउंट ने ये वीडियो 5 अप्रैल 2020 को शेयर किया. वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा -“ब्राज़ील के टेलीविज़न चैनलों ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी का भाषण अपने देश में दिखाया और कल रात यानी 4 अप्रैल को ही ब्राज़ीलिओ ने ये कर दिखाया।” उनकी पोस्ट से शेयर किये गए इस वीडियो को आर्टिकल लिखे जाने तक 3,300 बार शेयर किया जा चुका है. (फ़ेसबुक पोस्ट का आर्काइव लिंक)

ट्विटर यूज़र किरण सिन्हा ने ये वीडियो एक और मेसेज के साथ शेयर किया है -“यह देखिए स्विट्जरलैंड में ओर इसी तरह अन्य देशों में भी हो रहा हैं।भारत में दीया जलाने भर कहने से लोगों केदिल जलने दो दिन पहले से ही शुरू हो गया था.Thinking faceThinking faceThinking faceSmiling face with smiling eyes.” (आर्काइव किया हुआ ट्वीट)

Kiran Sinha किरण सिन्हा@KiranSi27813888

https://twitter.com/KiranSi27813888/status/1246615299912155136

यह देखिए स्विट्जरलैंड में ओर इसी तरह अन्य देशों में भी हो रहा हैं।
भारत में दीया जलाने भर कहने से लोगों के
दिल जलने दो दिन पहले से ही शुरू हो गया था


Embedded video


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07:17 - 5 Apr 2020
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ऑल्ट न्यूज़ के ऑफ़िशियल एंड्रॉइड ऐप पर इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए कुछ रीक्वेस्ट भी मिलीं.



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये अपील 3 अप्रैल 2020 को की थी.
फ़ैक्ट-चेक
वायरल वीडियो को कई फ़्रेम्स में तोड़कर रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमने पाया कि ये वीडियो फ़ेसबुक पर 28 मार्च 2020 को पोस्ट किया गया था. ‘नेम अबव ऑल नेम्स’ नाम के एक फ़ेसबुक पेज ने ये वीडियो पोस्ट किया था. पेज ने इस वीडियो को ब्राज़ील का बताया है. उनका दावा है कि ब्राज़ील के लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं.

इसके अलावा ‘ब्राज़ील पेरा क्राइस्ट’ नाम के एक फ़ेसबुक पेज ने भी ये वीडियो 27 मार्च को पोस्ट किया था.

इस तरह ये बात साफ़ हो जाती है कि इस वीडियो का प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई अपील से कोई लेना-देना नहीं है. मोदी ने ये अपील 3 अप्रैल को की थी जबकि ये वीडियो सोशल मीडिया में 27 मार्च से शेयर हो रहा है. हालांकि हम स्वतंत्र रूप से इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए है कि ये वीडियो ब्राज़ील का है या नहीं लेकिन ये बात साफ़ है कि इसका प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई अपील से कोई लेना-देना नहीं है.
इसी दावे से कई जगहों पर वायरल है ये वीडियो
ये वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाले मेसेज के साथ फ़ेसबुक और ट्विटर पर खूब शेयर हो रहा है.



इसके अलावा दूसरे मेसेज से भी ये वीडियो फ़ेसबुक और ट्विटर पर खूब वायरल हुआ है. ये सभी दावे ग़लत और बेबुनियाद हैं. ये वीडियो प्रधानमंत्री मोदी की अपील के कई दिन पहले का है.

नोट : भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4,300 के पार जा पहुंची है. इसकी वजह से सरकार ने बुनियादी ज़रुरतों से जुड़ी चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है. दुनिया भर में 12 लाख से ज़्यादा कन्फ़र्म केस सामने आये हैं और 70 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और इसी वजह से वो बिना जांच-पड़ताल किये किसी भी ख़बर पर विश्वास कर रहे हैं. लोग ग़लत जानकारियों का शिकार बन रहे हैं जो कि उनके लिए घातक भी साबित हो सकता है. ऐसे कई वीडियो या तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो कि घरेलू नुस्खों और बेबुनियाद जानकारियों को बढ़ावा दे रही हैं. आपके इरादे ठीक हो सकते हैं लेकिन ऐसी भयावह स्थिति में यूं ग़लत जानकारियां जानलेवा हो सकती हैं. हम पाठकों से ये अपील करते हैं कि वो बिना जांचे-परखे और वेरीफ़ाई किये किसी भी मेसेज पर विश्वास न करें और उन्हें किसी भी जगह फ़ॉरवर्ड भी न करें.



क्या PM मोदी की अपील के बाद ब्राज़ील और स्विट्जरलैंड में भी लोगों ने फ़्लैश-लाइट जलाकर मुहिम में हिस्सा लिया?
 

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कोरोना वायरस : पुलिस पर थूकने वाला वायरल वीडियो मुंबई का है, इसका निज़ामुद्दीन मरकज़ से कोई सम्बन्ध नहीं है


3rd April 2020
Pooja Chaudhuri



Pooja Chaudhuri



दिल्ली का निज़ामुद्दीन कोरोना वायरस के बड़े केंद्र के रूप में सामने आया है. मार्च के बीच में यहां तबलीगी जमात में हिस्सा लेने के लिए आये कई लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. जब से ये ख़बर सामने आई है, सोशल मीडिया और मीडिया का एक बहुत बड़ा तबका कोरोना वायरस के पूरे मसले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश में लगा हुआ है. इसी क्रम में एक वीडियो और सामने आया है. इसमें एक आदमी पुलिस वैन में बैठा दिखाई दे रहा है. वो एक पुलिस वाले पर थूकता है. इस वीडियो को कई लोगों ने ऑनलाइन शेयर किया है. ऑल्ट न्यूज़ को इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए अपने ऑफिशियल मोबाइल ऐप पर कई रिक्वेस्ट्स मिलीं. इन सभी रिक्वेस्ट्स में दावा यही था कि वीडियो में दिख रहा शख्स निज़ामुद्दीन में हुए धार्मिक आयोजन में शामिल था.

यही वीडियो फ़ेसबुक पर भी वायरल होता हुआ दिखा जहां इसके साथ ये मेसेज वायरल था – “जिनको सबूत चाहिए वो ये देख लों फरिश्तों की करतूतें । शान्ति से थूक का परिचय देते हुए । ये कल भी थूक रहे थे आज भी” नीचे मेघराज चौधरी का एक फ़ेसबुक पोस्ट है जिसमें वीडियो को 1 लाख से ज़्यादा व्यूज़ और 10 हज़ार से ज़्यादा शेयर मिले हैं.

एक फ़ेसबुक पेज है जिसका नाम है – ‘Salo Ab tm dost ko SIKHaOge‘. (नाम ही ऐसा है, इसलिये लिखना पड़ा.) इस पेज से शेयर हुई इस क्लिप को 450 बार शेयर किया गया. ट्विटर पर भी ये वायरल है. वहां इसे @Being_Ridhima हैंडल से 2,000 से भी ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया है.

ये वीडियो ऐसे वक़्त में वायरल हो रहा है, जब उत्तरी रेलवे के CRPO ने दावा किया था कि तबलीगी जमात के लोगों ने उद्दंडता की और मेडिकल वर्कर्स पर थूका.

फ़ैक्ट-चेक
जिन लोगों ने निज़ामुद्दीन मरकज़ में हुए आयोजन में हिस्सा लिया था, उन्हें बसों से अस्पताल और क्वारंटीन हाउसेज़ में ले जाया गया. इस वीडियो में दिख रही गाड़ी एक पुलिस की वैन मालूम दे रही है. इसके अलावा, वीडियो में कोई भी हेल्थ वर्कर मास्क पहने नहीं दिखाई दे रहा है.
यूट्यूब पर ‘man spits police van’ सर्च करने से हमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक वीडियो रिपोर्ट मिली. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, “एक कैदी जिसपर अभी मुक़दमा चल रहा था, उसने शनिवार को मुंबई पुलिस के कुछ लोगों पर थूक दिया. बताया गया है कि वो पुलिसवालों से नाराज़ था क्यूंकि उन्होंने उसे उसके घर से आया खाना खाने की इजाज़त नहीं दी थी.”



मुंबई मिरर ने 29 फ़रवरी 2020 को इस घटना को रिपोर्ट किया था. इस घटना में शामिल शख्स का नाम मोहम्मद सोहेल शौकत अली है. उसके परिवारवाले उसके लिए घर से खाना लेकर आये थे जो कि पुलिस ने उसे खाने नहीं दिया. इस वीडियो में अली को मुंबई की थाणे पुलिस से बहस करते हुए और गालियां देते हुए सुना जा सकता है.
इसलिये ये वीडियो तबलीगी जमात से कोई वास्ता नहीं रखता है. और इसे वहां आये किसी शख्स से जोड़ कर ग़लत जानकारी फैलाई जा रही है. हमने इससे पहले भी बोहरा समुदाय से जुड़े मुस्लिम व्यक्तियों के प्लेट चाटने के वीडियो की सच्चाई भी बतायी थी. उस वीडियो को ये कहकर चलाया जा रहा था कि निज़ामुद्दीन में मुस्लिम लड़के कोरोना वायरस फैलाने कल इए बर्तनों को चाट रहे थे.



नोट : भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 2600 के पार जा पहुंची है. इसकी वजह से सरकार ने बुनियादी ज़रुरतों से जुड़ी चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है. दुनिया भर में 1 करोड़ से ज़्यादा कन्फ़र्म केस सामने आये हैं और 54 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और इसी वजह से वो बिना जांच-पड़ताल किये किसी भी ख़बर पर विश्वास कर रहे हैं. लोग ग़लत जानकारियों का शिकार बन रहे हैं जो कि उनके लिए घातक भी साबित हो सकता है. ऐसे कई वीडियो या तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो कि घरेलू नुस्खों और बेबुनियाद जानकारियों को बढ़ावा दे रही हैं. आपके इरादे ठीक हो सकते हैं लेकिन ऐसी भयावह स्थिति में यूं ग़लत जानकारियां जानलेवा हो सकती हैं. हम पाठकों से ये अपील करते हैं कि वो बिना जांचे-परखे और वेरीफ़ाई किये किसी भी मेसेज पर विश्वास न करें और उन्हें किसी भी जगह फ़ॉरवर्ड भी न करें.
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कोरोना वायरस : पुलिस पर थूकने वाला वायरल वीडियो मुंबई का है, इसका निज़ामुद्दीन मरकज़ से कोई सम्बन्ध नहीं है
 

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कोरोना वायरस : डॉ. रमेश गुप्ता की लिखी 12वीं की किताब में जिस बीमारी के बारे में लिखा है वो COVID-19 नहीं है
26th March 2020

Dr. Sharfaroz Satani
Pooja Chaudhuri
Dr. Sharfaroz SataniDr_Sharfaroz


Pooja ChaudhuriPooja_Chaudhuri





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डॉ. रमेश गुप्ता की लिखी एक ज़ूलॉजी (जंतु विज्ञान) बुक के एक पन्ने की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. कई यूजर्स ने तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया कि इस किताब में COVID-19 के इलाज के बारे में लिखा है.

ट्विटर पर सुनीता प्रधान ने लिखा, ‘#WHO आपको डॉ. रमेश गुप्ता की 12वीं किताब के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस के बारे में लिखा है कि ये कोई नई बीमारी नहीं है. और उसमें उन्होंने इसके इलाज के बारे में भी लिखा है… और कौन कन्फ्यूज्ड है यहां #JantaCurfewMarch22 #pmoindia #NarendraModi #coronavirus,”

Sunita [email protected]

https://twitter.com/SunitaP22163768/status/1241642833355747331

#WHO you have not gone through the book of 12th standard written by Dr Ramesh Chand Gupta where he has mentioned about coronavirus so this is not a recent disease and he mentioned the cure too...who else is confused here #JantaCurfewMarch22 #pmoindia #NarendraModi#coronavirus
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17

13:58 - 22 Mar 2020
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ये दावा और भी कई जगह शेयर किया गया है. “भाइयों काफी किताबों में ढूंढने के बाद बड़ी मुश्किल से कोरोना वायरस की दवा मिली है…दवा इंटरमीडिएट की जन्तु विज्ञान की किताब में दी गई है…और यह कोई नई बीमारी नहीं है…”
इस किताब के ‘कॉमन कोल्ड’ सेक्शन में कोरोना वायरस के बारे में लिखा गया है. इसके अनुसार, कॉमन कोल्ड कई तरह के होते हैं, जिसमें से 75 फीसदी राइनो वायरस या कोरोना वायरस की वजह से होते हैं. अंत में, एक्सर्प्ट में उन दवाइयों के बारे में लिखा है जिन्हें इसके संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल में लाया जा सकता है – एस्पिरिन, एंटीहिस्टामाइंस और नेजल स्प्रे.

kapil [email protected]_khatter

https://twitter.com/102_khatter/status/1241592183204937730

As per Intermediate book of Jantu-science, written by Dr. Ramesh Gupta. Mentioned the medicine of #CoronaVirus on page 1072. We can help effective people by this.

Doctors are requested to analysis the medicine and advise.

Medicines are Aspirin, anti-histamines & Nasal spray.
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10:36 - 22 Mar 2020
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दावा:
1. नोवेल कोरोना वायरस (nCoV) या कोविड-19 कोई नई बीमारी नहीं है.
2. इसका इलाज बहुत पहले ढूंढा जा चुका है.
3. कोरोना वायरस को एस्पिरिन, एंटीहिस्टामाइंस और नेजल स्प्रे से ठीक किया जा सकता है.
नतीजा:
झूठ.
फ़ैक्ट-चेक:

सोशल मीडिया पर किए जा रहे तीनों दावे पूरी तरह से ग़लत हैं.
1. नोवेल कोरोना वायरस (nCoV) एक नए किस्म का कोरोना वायरस है.
नोवेल कोरोना वायरस, कोरोना वायरस फ़ैमिली का नया सदस्य है. इसकी विशेषताएं अद्वितीय हैं और इसे पहले कभी नहीं देखा गया.

World Health Organization (WHO)

✔@WHO

https://twitter.com/WHO/status/1234871623322341377
Replying to @WHO @DrTedros

"This #coronavirus is not SARS, it’s not MERS & it’s not influenza. It is a unique virus with unique characteristics.

Both #COVID19 & influenza cause respiratory disease & spread the same way, via small droplets of fluid from the nose & mouth of someone who is sick"-@DrTedros

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21:31 - 3 Mar 2020
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चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि nCoV संभवत: वुहान के सीफ़ूड मार्केट से आया. उस मार्केट में जंगली जानवरों का अवैध व्यापार हो रहा था. चीनी शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि ये वायरस “किसी संक्रमित जानवर से अवैध पेंगुलिन्स में आया और फिर इंसानों में’’ फैला. एशियाई बाज़ारों में भोजन और दवा के तौर पर पेंगुलिन्स की भारी मांग रहती है. इस रिपोर्ट में ये भी लिखा है, “वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि चमगादड़ या सांप इस वायरस के स्रोत हो सकते हैं.”
नोवेल कोरोना वायरस, कोरोना वायरस का एक नया प्रकार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, “कोरोना वायरस (CoV) वायरसों के बड़े समूह होते हैं, जिनकी वजह से सामान्य बुखार से लेकर MERS-CoV और SARS-CoV जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.” इंसानों में नोवेल कोरोना वायरस (nCoV) और इसका प्रकोप पहले कभी नहीं देखा गया. लक्षणों में बुखार, थकावट औऱ सूखी खांसी मुख्य हैं. गंभीर मामलों में, सांस लेने में दिक्कत, टूटन और दर्द, गले में खटास या रेयर मामलों में, डायरिया, उल्टी या नाक बहने की समस्या दिखती है.
सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (CDC) के अनुसार, मानवी कोरोना वायरस की पहचान पहली बार 1960 के दशक के मध्य में हुई थी. “कई बार जानवरों को संक्रमित करने वाले कोरोना वायरस विकसित होकर इंसानों को कमज़ोर बना देते हैं और नए इंसानी कोरोना वायरस बन जाते हैं. इसके तीन हालिया उदाहरण हैं nCoV, SARS-CoV, and MERS-CoV.”
SARS-CoV असल में सीवियर एक्यूट रिस्पायरेट्री सिंड्रोम है जिसकी पहचान 2003 में हुई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ये जानवरों में पाया जाने वाला वायरस है. ये “शायद चमगादड़ से दूसरे जानवरों में फैला (बिल्लियों के बच्चों) और 2002 में पहली बार दक्षिणी चीन के गुआंगदोंग प्रांत में इसकी वजह से इंसानों को संक्रमण हुआ.”
मिडिल ईस्ट रिस्पायरेट्री सिंड्रोम (MERS-CoV) कोरोना वायरस से होने वाली एक सांस संबंधी बीमारी है. पहली बार इसकी पहचान 2012 में सऊदी अरब में हुई थी.
इससे पहले भी कोरोना वायरस की अलग-अलग किस्में पहले भी पहचानी जा चुकी हैं, इसलिए नोवेल कोरोना वायरस (nCoV या SARS-CoV-2) नया है.
2. अभी तक नोवेल कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं मिला है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, “कोविड-19 से बचाव या इसके उपचार के लिए कोई वैक्सीन या स्पेसिफिक एंटीवायरल दवा नहीं है.” असलियत में, SARS-CoV और MERS-CoV के लिए भी कोई वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी है.
आमतौर पर एक नई वैक्सीन तैयार करने में 10 से 15 साल का समय लगता है. हालांकि, तकनीकी विकास की वजह से वैक्सीन बनाने की रफ्तार तेज हुई है. हाल ही में, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने क्लोरोक़्विन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक़्विन को कोरोना वायरस का संभावित इलाज बताया था, जिसके बाद यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने क्लोरोक़्विन के क्लीनिकल ट्रायल को मान्यता दे दी थी. हालांकि, एरिज़ोना में एक व्यक्ति ने क्लोरोक़्विन से अपना इलाज करने की कोशिश की, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. उसकी पत्नी की हालत गंभीर बनी हुई है.
फोर्ब्स ट्रैकर के मुताबिक़, कई दवा कंपनियां, विश्वविद्यालय और बायोटेक स्टार्ट-अप कंपनियां इस बीमारी का इलाज और बचाव का रास्ता खोजने के लिए लगातार रिसर्च कर रही हैं. सभी उपाय अभी विकास के पहले चरण में हैं या उनका जानवरों और इंसानों पर ट्रायल चल रहा है.
3. कोरोना वायरस को एस्पिरिन, एंटीहिस्टामाइन्स और नेजल स्प्रे से ठीक नहीं किया जा सकता.
जब किसी भी कोरोना वायरस (या फिर राइनो वायरस) से कॉमन कोल्ड होता है, डॉक्टर्स का लक्ष्य होता है, (1) एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण को रोकना और (2) लक्षणों के आधार पर उपचार. इसकी वजह ये है कि कॉमन कोल्ड खुद तक सीमित रहने वाली बीमारी है. ये खुद से ही ठीक होता है. इसी वजह से, कॉमन कोल्ड में एंटी वायरल या एंटीबायोटिक्स नहीं दिया जाता है. सामान्य परिस्थिति में, कॉमन कोल्ड की वजह ढूंढने की ज़रूरत भी नहीं होती क्योंकि इससे इसके इलाज पर कोई असर नहीं पड़ता. कॉमन कोल्ड के लक्षणात्मक उपचार के लिए NSAIDs (एस्पिरिन इनमें से एक है), एंटीहिस्टामाइन्स, एंटीकोलिनर्जिक दवाएं और डिकंजेस्टेंट्स जैसी एंटी-इनफ़्लेमेट्री दवाएं सबसे कारगर होती हैं. इन दवाओं को डॉक्टर्स की सलाह के बिना भी मेडिकल स्टोर से खरीदा जा सकता है.
हालांकि, जब SARS, MERS और नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) जैसे कोरोना वायरसों की वजह से निमोनिया, एक्यूट रिस्पायरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सेप्टिक शॉक जैसी गंभीर बीमारी होती है, उस हालत में आपातकालीन केयर और सही दवाईयों से उपचार किया जाता है.
इसलिए, कॉमन कोल्ड के इलाज को सभी तरह के कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के तौर पर पेश करना काफ़ी ग़लत होगा.
टेक्स्टबुक में भी ग़लत और अनुचित उपचार के बारे में लिखा गया है. “नेजल स्प्रे” सिर्फ़ नाक के रास्ते दिए जाने वाली दवा को कहा जाता है. ऐसी बहुत सारी दवाइयां हैं जो नाक के रास्ते दी जाती हैं. कॉमन कोल्ड के लिए इस्तेमाल होने वाली डीकंजेस्टेंट्स उनमें से सिर्फ़ एक हैं.

निष्कर्ष
जंतु विज्ञान की एक पाठ्यपुस्तक में कॉमन कोल्ड के बारे में बताई गई बुनियादी बातों को अलग तरह से लिया गया. दुनिया में सिर्फ़ एक तरह का कोरोना वायरस है और उससे सिर्फ़ कॉमन कोल्ड होता है, इस ग़लत धारणा के आधार पर दावे किए गए. असलियत में, कोरोना वायरस कई तरह के होते हैं जो अलग-अलग तरह के जानवरों को संक्रमित करते हैं. 1960 के दशक के मध्य से अभी तक, सात कोरोना वायरसों का संक्रमण इंसानों में हुआ है. SARS, MERS और नोवेल कोविड-19 इन्हीं में से हैं. ये वायरस कॉमन कोल्ड से लेकर एक्यूट रिस्पायरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम जैसी बीमारियां दे सकते हैं. इसलिए कोरोना वायरस के उपचार की उपलब्धता को लेकर वायरल हो रहे ट्वीट लोगों को गुमराह कर रहे हैं. इससे इस तरह की कॉन्सपिरेसी थ्योरी को भी हवा मिलती है कि हालिया कोरोना वायरस महामारी नई नहीं है.
भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 600 के पार जा पहुंची है. इसकी वजह से सरकार ने बुनियादी ज़रुरतों से जुड़ी चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है. दुनिया भर में 4 लाख से ज़्यादा कन्फ़र्म केसेज़ सामने आये हैं और 22 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और इसी वजह से वो बिना जांच-पड़ताल किये किसी भी ख़बर पर विश्वास कर रहे हैं. लोग ग़लत जानकारियों का शिकार बन रहे हैं जो कि उनके लिए घातक भी साबित हो सकता है. ऐसे कई वीडियो या तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो कि घरेलू नुस्खों और बेबुनियाद जानकारियों को बढ़ावा दे रही हैं. आपके इरादे ठीक हो सकते हैं लेकिन ऐसी भयावह स्थिति में यूं ग़लत जानकारियां जानलेवा हो सकती हैं. हम पाठकों से ये अपील करते हैं कि वो बिना जांचे-परखे और वेरीफ़ाई किये किसी भी मेसेज पर विश्वास न करें और उन्हें किसी भी जगह फ़ॉरवर्ड भी न करें.


कोरोना वायरस : डॉ. रमेश गुप्ता की लिखी 12वीं की किताब में जिस बीमारी के बारे में लिखा है वो COVID-19 नहीं है
 

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1981 के एक चाइनीज़ नॉवेल में कोरोना वायरस के फैलने की भविष्यवाणी नहीं की गयी है
16th March 2020

Pooja Chaudhuri



Pooja Chaudhuri



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कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने ट्वीट किया – “क्या कोरोना वायरस एक बायोलॉजिकल हथियार है जिसे चीन ने बनाया है और जिसका नाम वुहान-400 है? ये किताब 1981 में छपी थी. इसका ये अंश ज़रूर पढ़ें.” मनीष तिवारी जिस किताब के बारे में बात कर रहे हैं वो है डीन कूंट्ज़ की लिखी ‘द आय ऑफ़ डार्कनेस’. किताब के इस हिस्से में चीन के एक वैज्ञानिक द्वारा बनाए गए नाम ‘वुहान-400’ का उल्लेख मिलता है.

Manish Tewari

✔@ManishTewari

https://twitter.com/ManishTewari/status/1228982903356436480

Is Coranavirus a biological Weapon developed by the Chinese called Wuhan -400? This book was published in 1981. Do read the excerpt.
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876

15:32 - 16 Feb 2020
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कूंट्ज़ के इस उपन्यास में बायोलॉजिकल हथियार कोरोना वायरस (COVID-19) के दुनिया भर में फैलने की ‘भविष्यवाणी’ की गई थी. ये दावा दुनिया भर में तमाम भाषाओं में फ़ैल रहा है. नीचे दिया गया ट्वीट इंडोनेशिया की भाषा में है.

Ridwan [email protected]

https://twitter.com/ridwanhr/status/1229684934844928000

Buku The Eyes of Darkness tahun 90an udah ngomongin 2020 ada virus yang menyerang pernafasan

Terus nama biological weaponnya Wuhan 400

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14:01 - 18 Feb 2020
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यही दावा स्पैनिश भाषा में भी फ़ैल रहा है.

हिंदी में लिखे हुए एक मेसेज के साथ किताब का एक पन्ना वायरल हो रहा है. वायरल हो रहा मेसेज कुछ ऐसा है – “चीन में ये किताब पहले ही आ गई थी जिसमे कहा गया था कोरॉना चीन में सरकार गरीबी हटाने के लिए इस वायरस का उपयोग करेगी चीनी सरकार ऐसा वॉट्सएप पर कहा जा रहा है.”


फ़ैक्ट-चेक
इस उपन्यास में वुहान-400 के बारे में ये बातें लिखी हुई हैं:
1. इसे एक चीन के वैज्ञानिक ने वुहान शहर से कुछ दूर एक RDNA लैब में विकसित किया था.
2. वुहान-400 से महज़ इंसानों को ही संक्रमण हो सकता है. और कोई भी जीवित ईकाई इससे संक्रमित नहीं होगी.
3. जीवित इंसान के शरीर के बाहर ये जैविक हथियार (वायरस) एक मिनट से ज़्यादा नहीं ज़िन्दा रह सकता है.
COVID-19 के बारे में जो भी जानकारी मुहैया करवाई गयी हैं, उनसे ऊपर दी गयी जानकारी मेल नहीं खाती है.

कोरोना वायरस इंसानों द्वारा विकसित नहीं किया गया है. इस वायरस को जानवर भी होस्ट कर सकते हैं.
इससे पहले भी कई नेशनल और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स द्वारा कोरोना वायरस के जैविक हथियार होने के दावों को खारिज किया जा चुका है. द लैंसेट नाम के मेडिकल जर्नल में पब्लिक हेल्थ साइंटिस्ट्स द्वारा दिए गए स्टेटमेंट में कहा – “हम सभी मिलकर उन सभी दावों को सिरे से खारिज़ करते हैं जो कहते हैं कि COVID-19 को इंसानों द्वारा बनाया गया है. कई देशों के वैज्ञानिकों ने इस वायरस की जीनोम्स (Genomes)का अध्ययन किया है और अपनी खोज के बारे में सभी को बताया है. इसके साथ ही SARS कोरोनावायरस 2 (SARS-CoV-2) का भी अध्ययन किया गया. और सभी मिलकर इस नतीजे पर पहुंचे कि बैक्टीरिया, वायरस या और जीवाश्मों से पैदा होने वाली तमाम उभर रही बीमारियों की तरह इसकी उत्पत्ति भी जीवों में ही हुई है.
अल-जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार – “चीन की हेल्थ अथॉरिटीज़ अभी भी इस वायरस की उत्पत्ति की खोज कर रहे हैं. उनका मानना है कि बहुत हद तक इसकी उत्पत्ति वुहान में सीफ़ूड मार्केट में हुई जहां गैर-कानूनी तरीके से और भी जानवर बेचे जा रहे थे.” ये बात एक दफ़ा फिर उस दावे को ख़ारिज कर देती है जो कहता है कि कोरोना वायरस सिर्फ़ इंसानों में रह सकता है.
इस रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि चीन के रीसर्चर्स ने कहा कि वायरस ‘ग़ैर-क़ानूनी तरीके से ले जाए जा रहे एक संक्रमित प्रजाति से इंसानों में आया होगा.’ ये प्रजातियां एशिया में खाने और दवाइयों के काम आती हैं. “वैज्ञानिकों ने कहा है कि बहुत हद तक इसकी वजह चमगादड़ या सांप हो सकते हैं.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कहता है, “कोरोना वायरस एक बड़े वायरस समूह का हिस्सा है जो कि आम खांसी-ज़ुकाम से लेकर MERS-CoV और SARS-Cov जैसी घातक बीमारियां भी पैदा कर सकता है.” इससे पहले कभी नोवेल कोरोना वायरस (nCoV) से इंसानों को संक्रमण नहीं हुआ था.
WHO ने साथ में कहा, “कोरोना वायरस ज़ूनोटिक है. यानी ये किसी भी दूसरी प्रजाति से इंसानों में आ सकती है. गहराई में की गयी जांचों से मालूम चला कि SARS-CoV असल में एक ख़ास तरह की बिल्लियों (Civet Cats) से इंसानों में आया था और MERS-CoV ड्रोमडेरी ऊंटों से. कई कोरोना वायरस अभी भी जानवरों में मौजूद हैं और उनसे इंसानों को संक्रमण नहीं हुआ है.”
वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अध्ययन से मालूम पड़ा है कि सिर्फ़ कुछ घंटे ही नहीं बल्कि इंसानी शरीर के बाहर कोरोना वायरस कई दिनों तक ज़िन्दा रह सकता है.
ऑल्ट न्यूज़ की साइंस एडिटर डॉक्टर सुमैया शेख और डॉक्टर शरफ़रोज़ द्वारा पहले किये गए फ़ैक्ट चेक में अमरीकी वैज्ञानिकों की एक न्यू-प्रीप्रिंट स्टडी (Doremalen et al 2020) का ज़िक्र किया गया था. स्टडी के मुताबिक़ COVID-19 हवा में कई घंटों तक ज़िन्दा रह सकता है और कई सतहों पर ये 2 से 3 दिनों तक रह सकता है. यहां ये भी मालूम चलता है कि वायरस हवा के ज़रिये भी और संक्रमित सतहों को छूने से भी फैलता है.
वैज्ञानिकों ने वायरस को हवा में छोड़ा. इसे एक न्यूबलाइज़र के ज़रिये किया गया. ये इंसानी खांसी से हवा में छूटने वाले जीवाश्मों के बराबर होता है. यहां से मालूम चला कि ये वायरस हवा में 3 घंटों तक मौजूद थे. ताम्बे की एक सतह पर लगभग 4 घंटे तक, कार्डबोर्ड पर 24 और प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतहों पर 2 से 3 दिनों तक ज़िन्दा थे.
1981 में छपने वाले कूंट्ज़ के उपन्यास में वुहान का कोई ज़िक्र नहीं है
1981 के ‘द आय ऑफ़ डार्कनेस’ के संस्करण में गूगल बुक्स पर जब खोजा गया तो मालूम पड़ा कि इसमें जैविक हथियार का नाम ‘गोर्की-400’ है.



साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के एक आर्टिकल के मुताबिक़ कूंट्ज़ ने अपने उपन्यास में वायरस की उत्पत्ति रूस में हुई बताई है. “किताब को जब दोबारा लिखा गया तो कहानी सोवियत यूनियन के गिरने के बाद शुरू हुई मालूम देती है क्यूंकि वहां गोर्की शहर के कम्युनिज़म जैसा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था.” आर्टिकल में ये भी बताया गया कि इस किताब को जब सबसे पहली दफ़ा लिखा गया था तो कूंट्ज़ ने अपना दूसरा नाम लाइ निकोलस इस्तेमाल किया था. गूगल बुक्स पर 1981 के संस्करण में भी यही नाम दिखायी देता है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने इस किताब के पहले संस्करण से एक अंश भी छापा जहां रूस और गोर्की-400 का ज़िक्र हुआ है.



आर्टिकल में आगे लिखा है – “1989 में जब कूंट्ज़ ने अपने नाम से इस किताब को फिर से मोटी ज़िल्द में छापा तब इसमें वुहान का ज़िक्र आया. इस क़िताब के नए संस्करण का साल – 1989 काफ़ी अहमियत भरा है. इसी साल शीत युद्ध (कोल्ड वॉर) ख़त्म हुआ था. और सोवियत यूनियन के गिरने के बाद ये देश अब कम्युनिस्ट नहीं था. अगर एक अमरीकी लेखक अपनी कल्पना के दम पर भी रूस पर इल्ज़ाम लगाता तो ये ठीक नहीं होता, इसलिए ‘आय ऑफ़ डार्कनेस’ को एक नए विलेन की ज़रुरत थी.”
इसलिए कोरोना वायरस से जुड़े सोशल मीडिया पर किये जा रहे तमाम दावे हर तरफ़ से झूठे साबित होते हैं. डीन कूंट्ज़ ने न ही 1981 की अपनी किताब में कहीं भी वुहान में बनाए जा रहे जैविक हथियार का ज़िक्र किया और न ही उन्होंने COVID-19 के फ़ैलने से जुड़ी कोई भी भविष्यवाणी की थी. और हां, गोर्की-400 (जिसका बाद में नाम वुहान-400 कर दिया गया था) किसी भी तरह से कोरोना वायरस जैसा नहीं दिखाई पड़ता.



1981 के एक चाइनीज़ नॉवेल में कोरोना वायरस के फैलने की भविष्यवाणी नहीं की गयी है
 

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कोरोना वायरस (COVID-19) को ख़त्म करने के लिए कोई स्पेशल साबुन नहीं बल्कि आम साबुन काफ़ी है
16th March 2020
Dr. Sumaiya Shaikh
Dr. Sumaiya Shaikhneurophysik
दुनिया भर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के साथ-साथ सोशल मीडिया में इससे जुड़ी हुई सलाहें शेयर हो रही हैं. शेयर की गई ऐसी ही एक सलाह में साबुन के प्रयोग के बारे में बताया गया है.
दावा
कुछ लोग साबुन के असर और इसकी वायरस को ख़त्वाम करने की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं. उनका सवाल है कि क्या साबुन से कोरोना वायरस खत्म हो सकता है?
shehla
जवाब
हां
फ़ैक्ट-चेक

WHO ने हाल ही में कोरोना वायरस के चलते हाथ धोने के बारे में कुछ बातें बताईं थीं. जिसके अनुसार साबुन और पानी से कोरोना वायरस ख़त्म किया जा सकता है. नीचे दी गई तस्वीर देखें. COVID-19 वायरस का ऊपरी लेयर फ़ैट से बना होता है. इसे तस्वीर में ग्रे रंग का देखा जा सकता है. और ये सबसे कमज़ोर लेयर है जो पूरे स्ट्रक्चर को बांधे रखता है. इस ऊपरी लेयर में प्रोटीन भी होता है जो जेनेटिक मटीरियल को अंदर से पकड़ कर रखता है. सिर्फ़ पानी इस फ़ैटी लेयर को नहीं तोड़ सकता है.
CDC से ली हुई तस्वीर
अब साबुन पर आते हैं. आम साबुन एक एम्फ़िफ़ाइल (amphiphile) है. यानी इसमें पानी और फैट, दोनों को खींचने के गुण होते हैं. इस वजह से ये फैटी लेयर से चिपक जाते हैं और फिर इस लेयर को ये तोड़ देते हैं. इससे वायरस का पूरा स्ट्रक्चर टूट जाता है और वायरस ख़त्म हो जाता है.
अगर सही ढंग से इस्तेमाल हो तो इस काम के लिए आम साबुन काफ़ी है. साबुन में ऐन्टी-बैक्टीरियल पदार्थ जैसे कि डेटोल डालने से ज़्यादा कुछ फ़र्क नहीं पड़ता है. हां, इससे माइक्रोब्स से लड़ने की ताक़त बढ़ जाती है.
ज़्यादातर एंटी-बैक्टीरियल लिक्विड्स या साबुन बैक्टीरिया के ख़िलाफ़ टेस्ट किया जाता है, वायरस के ख़िलाफ़ नहीं. साबुन के अलावा, शुद्ध अल्कोहल का भारी कंसंट्रेशन (80-95%) भी स्किन या किसी भी सतह से वायरस का खात्मा कर सकता है.

World Health Organization (WHO)

✔@WHO

https://twitter.com/WHO/status/1238404251933704193

There are simple things we each must do to protect ourselves from #COVID19, including
washing with
&
or alcohol-based rub.
WHO is launching the #SafeHands Challenge to promote the power of clean
to fight #coronavirus.
Join the challenge & share your
washing video!

Embedded video


22.7K

15:29 - 13 Mar 2020
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निष्कर्ष
साधारण साबुन और पानी का सही तरीके से इस्तेमाल करने से वायरस से बचा जा सकता है. किसी खास साबुन, सेनिटाइज़र या एंटी बैक्टीरियल एजेंट की ज़रूरत नहीं है.


कोरोना वायरस (COVID-19) को ख़त्म करने के लिए कोई स्पेशल साबुन नहीं बल्कि आम साबुन काफ़ी है
 

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कोरोना वायरस : वुहान की मीट मार्केट के नाम पर इंडोनेशिया का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
23rd March 2020
Jignesh Patel



Jignesh Patel


कोरोना वायरस का संक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. इसी बीच दया राम मीना नाम के यूज़र ने 44 सेकंड का वीडियो ट्वीट किया है. वीडियो में एक बाज़ार में काफ़ी गंदे तरीके से जानवरों का मांस रखा हुआ है. दावा है कि ये वीडियो चीन के वुहान का है. ट्वीट करते हुए मीना ने लिखा – “*चाईना का वो मार्केट जहां से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई। देखिए कि जहां राक्षस भी इनके खानपान मार्केट में घुसने पर घबरा जायें.”


Daya Ram [email protected]_

https://twitter.com/DayaRamMeena_/status/1240306833287348224

*चाईना का वो मार्केट जहां से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई। देखिए कि जहां राक्षस भी इनके खानपान मार्केट में घुसने पर घबरा जायें
Whuan market, China. The origin of the #Corona virus#...*@DevprakashIRS @RamlalAluda @Poojaaluda @bhagwanmeena53 @HansrajMeena @TribalArmy

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6

21:29 - 18 Mar 2020
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ये वीडियो फ़रवरी 2020 से ही ट्विटर और फ़ेसबुक पर शेयर हो रहा है.

Mukesh Kamalkant [email protected]

https://twitter.com/KamalkantMukesh/status/1223275814386462721

*चाईना का वो मार्केट जहां से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई। देखिए कि जहां राक्षस भी इनके खानपान मार्केट में घुसने पर घबरा जायें
Whuan market, China. The origin of the #Corona virus#...*

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https://twitter.com/intent/like?tweet_id=1223275814386462721
21:34 - 31 Jan 2020 · Maharashtra, India
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फ़ैक्ट-चेक
फ़ेसबुक पर की-वर्ड्स सर्च करने पर इस वीडियो का लंबा वर्ज़न मिला जो तकरीबन 5 मिनट का है.

वीडियो की शुरुआत में ही ‘Pasar EXTREAM Langowan’ लिखा हुआ है. इसके बाद जब गूगल पर सर्च किया तो हमें 19 जुलाई 2019 कोअपलोड किया हुआ अच्छी क्वालिटी वाला यूट्यूब वीडियो मिला.

ऊपर के वीडियो में 20 सेकंड पर हमें एक बोर्ड दिखाई देता है जिसमें “Kantor Pasar Langowan” लिखा हुआ है. इंडोनेशिया में इसका मतलब ‘मार्केट ऑफ़िस Langowan’ होता है. ‘Langowan मार्केट’ एक ऐसा मार्केट है जहां पर जंगली जानवरों का मांस बेचा जाता है. ये इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावेसी मिनहासा (Minahasa Regency) में मौजूद है.

हमने YouTube चैनल ‘डॉग मीट फ़्री इंडोनेशिया’ द्वारा अपलोड और भी वीडियो देखे. एक ही बाज़ार के दो और वीडियो (वीडियो नंबर 1, वीडियो नंबर 2) से हमने स्थान की पुष्टि की है. ये एक वैश्विक अभियान है जो इंडोनेशिया सरकार ने कुत्तों के मांस व्यापार और उपभोग समाप्त करने के लिए शुरू किया गया है.
TRT ने इंडोनेशिया के वीडियो को वुहान के मार्केट का बताया
इस वीडियो की पड़ताल के दौरान हमने ये भी देखा कि तुर्की का एक मीडिया आउटलेट ‘TRT’ ने इंडोनेशिया के इस मार्केट के वीडियो का कुछ हिस्सा वुहान का बताकर चलाया है. नीचे के वीडियो में वो हिस्सा 32 सेकंड से देखा जा सकता है. वीडियो को चलाते हुए एंकर कहती हैं – “कोरोना वायरस जानवरों में होना काफ़ी आम है लेकिन इस ख़ास वायरस को वुहान में एक बाजार में पाया गया था. यहां जानवरों को अवैध रूप से बेचा जाता है.” ये वीडियो 30 जनवरी को ट्वीट किया गया है. मीडिया आउटलेट ने इस विज़ुअल का सोर्स एक यूट्यूब चैनल को दिया है जहां इसे वुहान का बताया गया था. यूट्यूब चैनल ने इसे 27 जनवरी को अपलोड किया था.

TRT World

✔@trtworld

https://twitter.com/trtworld/status/1222869571067170817

170 have now died and more than 7,000 people have been infected as the coronavirus has spread to every region in China. Here is what you need to know about the outbreak that began in a seafood market in China and spread to more than a dozen countries across the world

Embedded video


165

18:40 - 30 Jan 2020
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इस तरह इंडोनेशिया के बाज़ार का एक वीडियो इस ग़लत दावे के साथ शेयर किया गया कि ये वुहान, चीन के ‘गीले बाज़ार’ का है जहां कोरोना वायरस की उत्पत्ति हुई है. यहां तक कि एक अंतर्राष्ट्रीय तुर्की मीडिया आउटलेट ने भी इसे वुहान के मार्केट के रूप में दिखाया.


कोरोना वायरस : वुहान की मीट मार्केट के नाम पर इंडोनेशिया का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
 

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कोरोना वायरस : फलों को चाटने वाले मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो असल में MP की पुरानी घटना का है
4th April 2020
Jignesh PatelMohammed Zubair
Jignesh Patelthisisjignesh
Mohammed Zubair
सोशल मीडिया में एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसमें फल बेचने वाला एक व्यक्ति ठेले के फलों को एक जगह से दूसरी जगह रखते वक़्त अपनी उंगलियां चाटता हुआ दिखाई दे रहा है. ट्विटर यूज़र ‘देशी मोहीतो’ ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा -“ये तो अलग ही लेवल है…सुरक्षित और सावधान रहिये.” इस ट्वीट को 4,500 बार रीट्वीट किया जा चुका है.

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भाजपा मेम्बर मेजर सुरेन्द्र पुनिया, स्वराज्य कॉलमिस्ट शेफाली वैद्या, दक्षिण पंथी सोशल मीडिया यूज़र सोनम महाजन, संक्रांत सानु, मोहम्मद तौहीदी (@Imamofpeace), ये सभी नाम उन जाने-माने सोशल मीडिया यूज़र्स के हैं जिन्होंने इस वीडियो को इसी दावे से शेयर किया है. उनके ट्वीट्स को 13,000 से भी ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया है.

ऑल्ट न्यूज़ के ऑफ़िशियल ऐप पर इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए कई रीक्वेस्ट मिली हैं.

फ़ैक्ट-चेक
ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ये वीडियो मध्य प्रदेश के रायसेन में फ़रवरी 2020 को हुई घटना का है. गूगल पर की-वर्ड्स से सर्च करने पर 3 अप्रैल 2020 की ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में दिख रहा व्यक्ति शेरू खान रायसेन का रहने वाला है. वो मेन मार्केट में अपना ठेला लगाते है. 3 अप्रैल 2020 को इस ठेले वाले के खिलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के तहत मामला दर्ज़ किया गया.
FIR में बताया गया है कि वीडियो में दिख रही घटना 16 फ़रवरी 2020 को हुई थी. शिकायत करने वाले बोधराज टिपटा ने बताया कि उन्होंने ये वीडियो तब रिकॉर्ड किया जब वो अपने दोस्त भविष्य कुमार की पान की दुकान पर बैठे हुए थे. उन्होंने देखा कि ठेलेवाला अपने हाथ मुंह में डालकर उसी हाथों से फ़लों को छू रहा था. अपने बयान में टिपटा ने पुलिस को बताया कि ये वीडियो उन्होंने 16 फ़रवरी 2020 को रिकॉर्ड किया था. उनके हिसाब से इस तरह मुंह में डाले हुए हाथों से फ़लों को छूना किसी इन्फ़ेक्शन को फैला सकता है.

हालांकि खान की बेटी फ़िज़ा ने बताया कि उनके पिता मानसिक रूप से ठीक नहीं है. उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज़ होने के बाद पुलिस ने उनके पिता की पिटाई की थी. फ़िज़ा के मुताबिक जिस तरीके उनके पिता फलों को छू रहे हैं उसी तरीके से वो नोटों को भी गिनते हैं. ये उनकी आदत है. हम फ़िज़ा के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाए हैं.

फिज़ा ने कहा कि उनके पिता को जब भी फल बेचने का मन करता है तो वो अपने दोस्त का ठेला उधार लेते है.

मीडिया से बात करते हुए रायसेन के एसपी ने बताया कि ये घटना पुरानी है और इसकी जांच चल रही है. लोगों को आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि कोई फ़िक्र की बात नहीं है और रायसेन ज़िले में अभी तक कोई भी कोरोना का केस दर्ज़ नहीं हुआ है. सर्च करने पर हमने पाया कि एसपी मोनिका शुक्ला का दावा सही था और रायसेन में कोरोना का कोई केस अभी तक दर्ज़ नहीं हुआ है.

इस तरह मुस्लिम ठेलेवाले को मुंह में हाथ डालकर फलों को छूने का वीडियो मिड-फ़रवरी का है. देश में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी 2020 को दर्ज़ किया गया था. हालांकि सरकार ने 14 मार्च को इसे महामारी घोषित किया था. ये वीडियो 16 फ़रवरी को रिकॉर्ड किया गया था जबकि मध्यप्रदेश में COVID-19 का पहला मामला 20 मार्च को सामने आया था. ठेलेवाले की इस हरकत को सही नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन सोशल मीडिया में ये वीडियो शेयर करते हुए कई लोग मुस्लिम ठेलेवालों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे है.
ऐसे वीडियो उस वक़्त से शेयर हो रहे हैं जब तबलीग़ी जमात द्वारा मार्च महीने के बीच में आयोजित किये गए एक कार्यक्रम के बाद एक मामला सामने आया जिसमें शामिल होने वाले कई लोगों के कोरोना वायरस टेस्ट पाज़िटिव आए हैं. इसके बाद निज़ामुद्दीन को कोरोना का हॉटस्पॉट बताया जाने लगा. इससे पहले सूफ़ी रिवाज़ कर रहे मुस्लिमों का एक वीडियो शेयर करते हुए उनपर दिल्ली की निज़ामुद्दीन मस्जिद में छींक कर कोरोना फैलाने का झूठा आरोप लगाया गया.



नोट : नोट: भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 3,000 के पार जा पहुंची है. इसकी वजह से सरकार ने बुनियादी ज़रुरतों से जुड़ी चीज़ों को छोड़कर बाकी सभी चीज़ों पर पाबंदी लगा दी है. दुनिया भर में 11 लाख से ज़्यादा कन्फ़र्म केस सामने आये हैं और 58 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और इसी वजह से वो बिना जांच-पड़ताल किये किसी भी ख़बर पर विश्वास कर रहे हैं. लोग ग़लत जानकारियों का शिकार बन रहे हैं जो कि उनके लिए घातक भी साबित हो सकता है. ऐसे कई वीडियो या तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो कि घरेलू नुस्खों और बेबुनियाद जानकारियों को बढ़ावा दे रही हैं. आपके इरादे ठीक हो सकते हैं लेकिन ऐसी भयावह स्थिति में यूं ग़लत जानकारियां जानलेवा हो सकती हैं. हम पाठकों से ये अपील करते हैं कि वो बिना जांचे-परखे और वेरीफ़ाई किये किसी भी मेसेज पर विश्वास न करें और उन्हें किसी भी जगह फ़ॉरवर्ड भी न करें.



कोरोना वायरस : फलों को चाटने वाले मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो असल में MP की पुरानी घटना का है
 

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कोरोना वायरस : COVID-19 टेस्ट किट की तस्वीर को वायरस की नयी वैक्सीन बता कर शेयर किया
25th March 2020
Jignesh Patel
Jignesh Patelthisisjignesh
व्हाट्सऐप पर एक मैसेज सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बना ली है. इस दावे के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि “रोशे मेडिकल कंपनी” इसे इस रविवार को लॉन्च करेगी. वायरल हो रहे मैसेज में लिखा है, “बढ़िया खबर! कोरोना वैक्सीन तैयार है. ये इंजेक्शन के तीन घंटे के भीतर रोगी को ठीक कर देगी. अमेरिकी वैज्ञानिकों को सलाम. अभी-अभी ट्रंप ने घोषणा की है कि रोशे मेडिकल कंपनी अगले रविवार को इससे लॉन्च करेगी और इसकी लाखों खेप तैयार है.”

ये ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी वायरल हो रहा है.

ऑल्ट न्यूज़ को इस दावे की सत्यता जांचने के लिए ऑफ़िशियल एंड्राइड ऐप पर कई लोगों ने रिक्वेस्ट की हैं.

फ़ैक्ट-चेक
फ़िलहाल, कोरोना वायरस के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है. लेकिन इसके लिए ट्रायल हो रहे हैं और रिसर्च लगातार चल रही है. ऑल्ट न्यूज़ ने पहले भी एक वीडियो का पर्दाफ़ाश किया था जिसमें दावा किया गया था कि दवा बनाने वाली कंपनी रोशे ने कोरोना वायरस वैक्सीन लॉन्च कर दिया है. सोशल मीडिया पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की एक वीडियो क्लिप शेयर हो रही थी, जहां पर रोशे डाइगनोस्टिक्स के सीईओ टेस्टिंग के बारे में बात कर रहे थे, न कि वैक्सीन के बारे में. इस संबंध में हमारी फ़ैक्ट-चेक स्टोरी आप विस्तार से यहां पढ़ सकते हैं.
क्या ये तस्वीर कोरोना वायरस की वैक्सीन की है?
गूगल पर सर्च करने पर पता चला कि ये कोई वैक्सीन नहीं है बल्कि नोवेल कोरोना वायरस की टेस्ट किट है. इसे टेक्निकल शब्दों में SARS-CoV-2 का नाम दिया गया है. कोविड-19 IgM/IgG एक गोल्ड-नैनोपार्टिकल आधारित इम्युनोक्रोमेटोग्राफिक टेस्ट किट है. ये टेस्ट किट बनाने वाली कंपनी, श्यूगेनटेक, की वेबसाइट पर लिखी जानकारी के अनुसार, इसका इस्तेमाल मनुष्य के शरीर (ऊंगली का छिद्र या नस) में कोविड-19 के IgM और IgG एंटीबॉडीज, सीरम और प्लाजमा की गुणवत्ता को पहचानने के लिए किया जाता है. श्यूगेनटेक दक्षिण कोरिया की कंपनी है. इसकी वेबसाइट के ‘अबाउट अस’ सेक्शन के अनुसार ‘ये कंपनी बीटी-आइटी-एनटी तकनीक के आधार पर इन-विट्रो डाइगनोस्टिक्स सिस्टम्स बनाती है’.

दक्षिण कोरिया की एक और कंपनी है SD Biosensor, जो ‘नोवेल कोरोना वायरस कोविड के IgM और IgG की गुणवत्तापूर्ण पहचान करने वाली’ टेस्ट किट्स बनाती है.
इसलिए, नोवेल कोरोना वायरस की टेस्ट किट की तस्वीर को सोशल मीडिया पर ये बताकर शेयर किया गया अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोविड-19 की वैक्सीन तैयार कर ली है और दवाएं बनाने वाली कंपनी रोशे डाइगनोस्टिक्स अगले रविवार को इसे लॉन्च करने वाली है.



कोरोना वायरस : COVID-19 टेस्ट किट की तस्वीर को वायरस की नयी वैक्सीन बता कर शेयर किया
 

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Video Of Boy Washing Apples In A Sewer In Pakistan Given Hindu-Muslim Spin In India A video showing a boy washing apples in a sewer in Pakistan is given a communal spin in India. By - BOOM FACT Check Team | 26 Sep 2018 6:01 PM
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A video that appears to be from Pakistan showing a young apple seller wash the fruit in an open sewer, is being shared on social media in India with a communal spin. The 23-seconds clip shows a young boy rinse apples in a drain before placing them on his cart at a street corner. The video was shared by a Facebook user in India on September 20, 2018 and has since been shared over 950 times on the social networking site. It has been viewed over 34,000 times. The post by Manav Buddhadev does not specify where the video is from but instead gives the incident a communal spin by sarcastically urging Hindus, who are on fast during Navaratri, to buy fruits from the boy.

https://www.facebook.com/5b0d420f-151e-4d18-97f7-b987d4e6e602


Similarly the video was also posted on a unofficial public group called राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(RSS) with a caption urging Hindus to abstain from buying fruits from Muslims during the festival of Navaratri. (इस नवरात्रि कोई भी मुस्लिम लोगो से फल ना खरीदे। देख लो इनका हरामी कारोबार)


1586466880738.png


The post has received over 2,300 shares. (View an archived version of it, here) The group had 83,755 members at the time of writing this story.

1586466918396.png



FACT-CHECK
However, a fact-check of the video shows that the boy in the video is speaking in Pashto, a language spoken mainly in Afghanistan and Pakistan.


A reverse image search of one of the key frames of the video shows that video surfaced on the Internet around the third week of August this year and that it is not from India.

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We were also able to find the video on two Pakistani Facebook pages Kohenoor news on August 21 and Native Pakistan on August 27 had posted the same clip. BOOM was also able to find a YouTube video which stated the incident took place in KPK or Khyber Pakhtunkhwa. Formerly the North-West Frontier Province, (NWFP) Khyber-Pakhtunkhwa, runs for over 1,100 kilometres along the border with Afghanistan. Its capital is Peshawar.


A reference to the video was also made by Karachi-headquartered newspaper The News International in its editorial about raising awareness about hygiene and sanitation. While we cannot conclusively say that the video is from KPK there is enough evidence to conclude it is not from India and most likely to be from Pakistan.

Video Of Boy Washing Apples In A Sewer In Pakistan Given Hindu-Muslim Spin In India



There are many other videos where others are also doing similar things in India.

Vegetable washing from waste drain water
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•Apr 13, 2016


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Manjit Sharma

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Man in India washing vegetable greens in dirty gutter water
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•Aug 4, 2015



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Zenr
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Man in India washing vegetable greens in dirty gutter water Translation: The voice of the man washing is inaudible. First man: Why dont you wash at your home instead of washing here If you wash here and give to customers they will get sick. Please you also see what he is doing...nobody to question him. Second man: Are you giving it to the newspaper ? Why are you washing in this dirty water Sir is giving the video to the newspaper.
 
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