Who's awake right now?

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इससे अच्छी पोस्ट मैंने अपनी ज़िंदगी में आज तक नही पढ़ी, आप भी जरूर पढियेगा।

"बेटा! थोड़ा खाना खाकर जा ..!! दो दिन से तुने कुछ खाया नहीं है।" लाचार माता के शब्द है अपने बेटे को समझाने के लिये।

"देख मम्मी! मैंने मेरी बारहवीं बोर्ड की परीक्षा के बाद वेकेशन में सेकेंड हैंड बाइक मांगी थी और पापा ने प्रोमिस किया था। आज मेरे आखरी पेपर के बाद दीदी को कह देना कि जैसे ही मैं परीक्षा खंड से बाहर आऊंगा तब पैसा लेकर बाहर खडी रहे। मेरे दोस्त की पुरानी बाइक आज ही मुझे लेनी है। और हाँ, यदि दीदी वहाँ पैसे लेकर नहीं आयी तो मैं घर वापस नहीं आऊंगा।"

एक गरीब घर में बेटे मोहन की जिद्द और माता की लाचारी आमने सामने टकरा रही थी।

"बेटा! तेरे पापा तुझे बाइक लेकर देने ही वाले थे, लेकिन पिछले महीने हुए एक्सिडेंट ..

मम्मी कुछ बोले उसके पहले मोहन बोला "मैं कुछ नहीं जानता .. मुझे तो बाइक चाहिये ही चाहिये ..!!"

ऐसा बोलकर मोहन अपनी मम्मी को गरीबी एवं लाचारी की मझधार में छोड़ कर घर से बाहर निकल गया।

12वीं बोर्ड की परीक्षा के बाद भागवत 'सर एक अनोखी परीक्षा का आयोजन करते थे। हालाँकि भागवत सर का विषय गणित था, किन्तु विद्यार्थियों को जीवन का भी गणित भी समझाते थे और उनके सभी विद्यार्थी विविधतासभर ये परीक्षा अचूक देने जाते थे।

इस साल परीक्षा का विषय था "मेरी पारिवारिक भूमिका"

मोहन परीक्षा खंड में आकर बैठ गया। उसने मन में गांठ बांध ली थी कि यदि मुझे बाइक लेकर देंगे तो मैं घर नहीं जाऊंगा।

भागवत सर के क्लास में सभी को पेपर वितरित हो गया। पेपर में 10 प्रश्न थे। उत्तर देने के लिये एक घंटे का समय दिया गया था।

मोहन ने पहला प्रश्न पढा और जवाब लिखने की शुरुआत की।

#प्रश्न नंबर १ :- आपके घर में आपके पिताजी, माताजी, बहन, भाई और आप कितने घंटे काम करते हो? सविस्तर बताइये?

मोहन ने जवाब लिखना शुरू कर दिया।

जवाबः
पापा सुबह छह बजे टिफिन के साथ अपनी ऑटोरिक्शा लेकर निकल जाते हैं और रात को नौ बजे वापस आते हैं। कभी कभार वर्धी में जाना पड़ता है। ऐसे में लगभग पंद्रह घंटे।
मम्मी सुबह चार बजे उठकर पापा का टिफिन तैयार कर, बाद में घर का सारा काम करती हैं। दोपहर को सिलाई का काम करती है और सभी लोगों के सो जाने के बाद वह सोती हैं। लगभग रोज के सोलह घंटे।
दीदी सुबह कालेज जाती हैं। शाम को 4 से 8 पार्ट टाइम जॉब करती हैं और रात्रि को मम्मी को काम में मदद करती हैं। लगभग बारह से तेरह घंटे।
मैं सुबह छह बजे उठता हूँ और दोपहर स्कूल से आकर खाना खाकर सो जाता हूँ। शाम को अपने दोस्तों के साथ टहलता हूँ। रात्रि को ग्यारह बजे तक पढता हूँ। लगभग दस घंटे।
(इससे मोहन को मन ही मन लगा, कि उनका कामकाज में औसत सबसे कम है।)

पहले सवाल के जवाब के बाद मोहन ने दूसरा प्रश्न पढा।

#प्रश्न नंबर २ :- आपके घर की कुल मासिक आमदनी कितनी है?

जवाबः
पापा की आमदनी लगभग दस हजार हैं। मम्मी एवं दीदी मिलकर पांंच हजार जोडते हैं। कुल आमदनी पंद्रह हजार।

#प्रश्न नंबर ३ :- मोबाइल रिचार्ज प्लान, आपकी मनपसंद टीवी पर आ रही तीन सीरियल के नाम, शहर के एक सिनेमा हाॅल का पता और अभी वहां चल रही मूवी का नाम बताइये?

सभी प्रश्नों के जवाब आसान होने से फटाफट दो मिनट में लिख दिये।

#प्रश्न नंबर ४ :- एक किलो आलू और भिन्डी के अभी हाल की कीमत क्या है? एक किलो गेहूं, चावल और तेल की कीमत बताइये? जहाँ पर घर का गेहूं पिसाने जाते हो उस आटा चक्की का पता दीजिये।

मोहन को इस सवाल का जवाब नहीं आया। उसे समझ में आया कि हमारी दैनिक आवश्यक जरुरतों की चीजों के बारे में तो उसे लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है। मम्मी जब भी कोई काम बताती थी तो वो मना कर देता था। आज उसे ज्ञान हुआ कि अनावश्यक चीजें मोबाइल रिचार्ज, मुवी का ज्ञान इतना उपयोगी नहीं है। अपने घर के काम की
जवाबदेही लेने से या तो हाथ बटोर कर साथ देने से हम कतराते रहे हैं।

#प्रश्न नंबर ५ :- आप अपने घर में भोजन को लेकर कभी तकरार या गुस्सा करते हो?

जवाबः
हां, मुझे आलू के सिवा कोई भी सब्जी पसंद नहीं है। यदि मम्मी और कोई सब्जी बनायें तो मेरे घर में झगड़ा होता है। कभी मैं बगैर खाना खायें उठ खडा हो जाता हूँ।
(इतना लिखते ही मोहन को याद आया कि आलू की सब्जी से मम्मी को गैस की तकलीफ होती हैं। पेट में दर्द होता है। अपनी सब्जी में एक बडी चम्मच वो अजवाइन डालकर खाती हैं। एक दिन मैंने गलती से मम्मी की सब्जी खा ली और फिर मैंने थूक दिया था। फिर मैंने पूछा कि मम्मी तुम ऐसा क्यों खाती हो? तब दीदी ने बताया था कि हमारे घर की स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि हम दो सब्जी बनाकर खायें। तुम्हारी जिद के कारण मम्मी बेचारी क्या करें?) मोहन ने अपनी यादों से बाहर आकर
अगले प्रश्न को पढा।

#प्रश्न नंबर ६ :- आपने अपने घर में की हुई आखरी जिद के बारे में लिखिये।

जवाब:
मोहन ने जवाब लिखना शुरू किया। मेरी बोर्ड की परीक्षा पूर्ण होने के बाद दूसरे ही दिन बाइक के लिये जीद्द की थी। पापा ने कोई जवाब नहीं दिया था, मम्मी ने समझाया कि घर में पैसे नहीं है। लेकिन मैं नहीं माना। मैंने दो दिन से घर में खाना खाना भी छोड़ दिया है। जब तक बाइक नहीं लेकर दोगे मैं खाना नहीं खाऊंगा और आज तो मैं वापस घर नहीं जाऊंगा कहकर निकला हूँ। अपनी जिद का प्रामाणिकता से मोहन ने जवाब लिखा।

#प्रश्न नंबर ७ :- आपको अपने घर से मिल रही पोकेट मनी का आप क्या करते हो? आपके भाई-बहन कैसे खर्च करते हैं?

जवाब:
हर महीने पापा मुझे सौ रुपये देते हैं। उसमें से मैं, मनपसंद पर्फ्यूम, गोगल्स लेता हूं, या अपने दोस्तों की छोटी मोटी पार्टियों में खर्च करता हूँ। मेरी दीदी को भी पापा सौ रुपये देते हैं। वो खुद कमाती हैं और पगार के पैसे से मम्मी को आर्थिक मदद करती हैं। हां, उसको दिये गये पोकेटमनी को वो गल्ले में डालकर बचत करती हैं। उसे कोई मौजशौक नहीं है, क्योंकि वो कंजूस भी हैं।

#प्रश्न नंबर ८ :- आप अपनी खुद की पारिवारिक भूमिका को समझते हो?

जवाब:
प्रश्न अटपटा और जटिल होने के बाद भी मोहन ने जवाब लिखा। परिवार के साथ जुड़े रहना, एक दूसरे के प्रति समझदारी से व्यवहार करना एवं मददरूप होना चाहिये और ऐसे अपनी जवाबदेही निभानी चाहिये। यह लिखते लिखते ही अंतरात्मा से आवाज आयी कि अरे मोहन! तुम खुद अपनी पारिवारिक भूमिका को योग्य रूप से निभा रहे हो? अंतरात्मा से जवाब आया कि ना बिल्कुल नहीं ..!!

#प्रश्न नंबर ९ :- आपके परिणाम से आपके माता-पिता खुश हैं? क्या वह अच्छे परिणाम के लिये आपसे जिद करते हैं? आपको डांटते रहते हैं?

जवाब:
(इस प्रश्न का जवाब लिखने से पहले हुए मोहन की आंखें भर आयी। अब वह परिवार के प्रति अपनी भूमिका बराबर समझ चुका था।)

लिखने की शुरुआत की ..

वैसे तो मैं कभी भी मेरे माता-पिता को आज तक संतोषजनक परिणाम नहीं दे पाया हूँ। लेकिन इसके लिये उन्होंने कभी भी जिद नहीं की है। मैंने बहुत बार अच्छे रिजल्ट के प्रोमिस तोडे हैं। फिर भी हल्की सी डांट के बाद वही प्रेम और वात्सल्य बना रहता था।

#प्रश्न नंबर १० :- पारिवारिक जीवन में असरकारक भूमिका निभाने के लिये इस वेकेशन में आप कैसे परिवार को मददरूप होंगें?

जवाब में मोहन की कलम चले इससे पहले उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और जवाब लिखने से पहले ही कलम रुक गई। मोहन बेंच के नीचे मुंह रखकर रोने लगा। फिर से कलम उठायी, तब भी वो कुछ भी न लिख पाया। दसवां प्रश्न अनुत्तरित छोड़कर पेपर सबमिट कर दिया।

स्कूल के दरवाजे पर दीदी को देखकर उसकी ओर दौड़ पडा।

"भैया, ये ले आठ हजार रुपये, मम्मी ने कहा है कि बाइक लेकर ही घर आना।" दीदी ने मोहन के सामने पैसे धर दिये।

"कहाँ से लायी ये पैसे?" मोहन ने पूछा।

दीदी ने बताया "मैंने मेरी ओफिस से एक महीने की सेलेरी एडवांस मांग ली। मम्मी भी जहां काम करती हैं वहीं से उधार ले लिया और मेरी पोकेटमनी की बचत से निकाल लिये। ऐसा करके तुम्हारी बाइक के पैसे की व्यवस्था हो गई हैं।"

मोहन की दृष्टि पैसे पर स्थिर हो गई।

दीदी फिर बोली "भाई, तुम मम्मी को बोलकर निकले थे कि पैसे नहीं दोगे तो मैं घर पर नहीं आऊंगा! अब तुम्हें समझना चाहिये कि तुम्हारी भी घर के प्रति जिम्मेदारी है। मुझे भी बहुत से शौक हैं लेकिन अपने शौक से अपने परिवार को मैं सबसे ज्यादा महत्व देती हूं। तुम हमारे परिवार के सबसे लाडले हो। पापा को पैर की तकलीफ हैं फिर भी तेरी बाइक के लिये पैसे कमाने और तुम्हें दिये प्रोमिस को पूरा करने, अपना पैर फ्रेक्चर होने के बावजूद काम किये जा रहे हैं। तेरी बाइक के लिये। यदि तुम समझ सको तो अच्छा है, कल रात को अपने प्रोमिस को पूरा नहीं कर सकने के कारण बहुत दुःखी थे और इसके पीछे उनकी मजबूरी है। बाकी तुमने तो अनेकों बार अपने प्रोमिस तोडे ही है न?" मेरे हाथ में पैसे थमाकर दीदी घर की ओर चल निकली।

उसी समय उनका दोस्त वहां अपनी बाइक लेकर आ गया, अच्छे से चमका कर ले आया था। "ले, मोहन आज से ये बाइक तुम्हारी, सब बारह हजार में मांग रहे हैं, मगर ये तुम्हारे लिये आठ हजार में।"

मोहन बाइक की ओर टकर-टकर देख रहा था और थोड़ी देर के बाद बोला "दोस्त तुम अपनी बाइक उस बारह हजार वाले को ही दे देना! मेरे पास पैसे की व्यवस्था नहीं हो पायी हैं और होने की हाल संभावना भी नहीं है।"

और वो सीधा भागवत सर की केबिन में जा पहूंचा।

"अरे मोहन! कैसा लिखा है पेपर में?"
भागवत सर ने मोहन की ओर देख कर पूछा।

"सर ..!!, यह कोई पेपर नहीं था, ये तो मेरे जीवन के लिये दिशानिर्देश था। मैंने एक प्रश्न का जवाब छोड़ दिया है। किन्तु ये जवाब लिखकर नहीं अपने जीवन की जवाबदेही निभाकर दूंगा।" मोहन भागवत सर को चरण स्पर्श कर अपने घर की ओर निकल पडा।

घर पहुंचते ही मम्मी, पापा और दीदी सब उसकी राह देखते खडे थे।

"बेटा! बाइक कहाँ हैं?" मम्मी ने पूछा। मोहन ने दीदी के हाथों में पैसे थमा दिये और कहा कि "साॅरी, मुझे बाइक नहीं चाहिये और पापा मुझे ओटो की चाभी दो, आज से मैं पूरे वेकेशन तक ओटो चलाऊंगा। आप थोड़े दिन आराम करेंगे। मम्मी आज से मेरी पहली कमाई शुरू होगी इसलिये तुम अपनी पसंद की मैथी की भाजी और बैगन ले आना, रात को हम सब साथ मिलकर के खाना खायेंगे।"

मोहन के स्वभाव में आये परिवर्तन को देखकर मम्मी ने उसको गले लगा लिया और कहा कि "बेटा! सुबह जो कहकर तुम गये थे, वो बात मैंने तुम्हारे पापा को बतायी थी और इसलिये वो दुःखी हो गये। काम छोड़ कर वापस घर आ गये। भले ही मुझे पेट में दर्द होता हो लेकिन आज तो मैं तेरी पसंद की ही सब्जी बनाऊंगी।" मोहन ने कहा
"नहीं मम्मी! अब मेरी समझ गया है कि मेरे घर परिवार में मेरी भूमिका क्या है? मैं रात को बैंगन मैथी की सब्जी ही खाऊंगा। परीक्षा में मैंने आखरी जवाब नहीं लिखा हैं, वह प्रेक्टिकल करके ही दिखाना है। और हाँ मम्मी हम गेहूं को पिसाने कहां जाते हैं, उस आटा चक्की का नाम और पता भी मुझे दे दो।"

उसी समय भागवत सर ने मोहन के घर में प्रवेश किया और बोले "वाह! मोहन जो जवाब तुमनें लिखकर नहीं दिये वे प्रेक्टिकल जीवन में जीकर कर दोगे।"

"सर! आप और यहाँ?" मोहन भागवत सर को देख कर आश्चर्य चकित हो गया।

"मुझे मिलकर तुम चले गये। उसके बाद मैंने तुम्हारा पेपर पढा, इसलिये तुम्हारे घर की ओर निकल पडा। मैं बहुत देर से तुम्हारे अंदर आये परिवर्तन को सुन रहा था। मेरी अनोखी परीक्षा सफल रही और इस परीक्षा में तुमने पहला नंबर पाया है।" ऐसा बोलकर भागवत सर ने मोहन के सर पर हाथ रखा।

मोहन ने तुरंत ही भागवत सर के पैर छुएँ और ऑटो रिक्शा चलाने के लिये निकल पडा।
 

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MOTORING
Highlights from the Consumer Electronics Show 2020

Jaiveer Mehra

JANUARY 16, 2020 12:53 IST
UPDATED: JANUARY 16, 2020 14:22 IST




Carmakers and auto-component suppliers showcase seemingly far-fetched auto tech
The Consumer Electronics Show held at Las Vegas is the largest tech, gadget and electronics event of the year; but it is not just about phones, TVs, drones etc. Carmakers and auto-component suppliers have also gone big at CES, using the event to showcase seemingly far-fetched auto tech. Read on to know more about some of the automotive highlights...


1. Mercedes Vision AVTR
The play on the word ‘avatar’ is there for a reason. The Vision AVTR — or Advanced Vehicle Transformation — was developed with input from the team behind the blockbuster Avatar movie franchise by James Cameron. The futuristic concept doesn’t preview a production model, and while the sleek flowing line from the front is attractive, the active flaps — the concept has 33 of them — on the rear panel could split opinion. Also unique to the concept are spherical tyres and the ability to crawl sideways at an angle of up to 30 degrees. The futuristic elements carry on to the cabin as well; everything is handled via a holographic display that spans the width of the cabin and there is a lack of any conventional control surfaces — steering included. Power comes from two electric motors; one on each axle.

2. Hyundai S-A1
Another year, another flying car — this time around, it’s by Hyundai. Co-developed with ride-hailing service Uber, the S-A1 previews another take at aerial mobility. The car has vertical take-off and landing capabilities and the ability to seat four passengers and a pilot — the latter would eventually be replaced by an AI. The electric flying car concept also has a claimed charge time of as little as 5-7 minutes. The S-A1 was part of a larger display by Hyundai, which included a Purpose Built Vehicle (PBV) — an autonomous shuttle-style vehicle that previewed the future of intra-city travel.

3. Fisker Ocean
Fisker showcased its all-electric SUV to the public for the first time at CES. The all-electric SUV has a claimed range of up to 482km, is powered by two axle-mounted motors and has a cabin made using recycled and eco-friendly materials to increase its green quotient. Highlights of the SUV include a mode that opens all the windows (including the rear quarter glass and windscreen) to give a pseudo open-top experience, and a full-length solar roof. The big news is that this model could be on its way to India with a launch sometime in late-2022 being under consideration.

4. Sony Vision-S
While gamers waited with bated breath for new info on the upcoming PlayStation 5, Sony surprised car nuts with the Vision-S concept car. The Vision-S previews the electronics giant’s offerings for in-car entertainment and connectivity technology. And with dual 272hp electric motors, the concept isn’t a slouch in terms of performance, either. However, one big question remains: does this mean that will Sony make its own car?

5. Chrysler Airflow Vision concept
FCA seemed to reach back into the history of one of its brands, with the name of the Chrysler Airflow Vision concept. Back in the 1930s, Chrysler made a streamlined (for its time) model called the Airflow. The Airflow Vision concept, though, is based on the Pacifica MPV and features a sleek design and a roomy four-seat cabin with a number of displays — the instrument cluster, an infotainment system, one for the front passenger, one for the air-con controls and the rear-seat entertainment displays.

6. Bosch Virtual Visor
Bosch brought an innovative new active visor utilising LCD, camera and AI technology. A see-through LCD panel with a honeycomb pattern sits in place of the traditional sun-visor. An occupant-facing camera and AI technology are used to identify the occupant’s eyes and the angle of sunlight. Based on the input, individual honeycombs turn opaque to prevent sunlight from falling directly onto the person’s eyes.

7. Sennheiser and Continental speaker-less audio system
It’s a rather intriguing concept. It uses specially developed actuators to vibrate trims and surfaces within a car’s cabin (in a similar fashion to a speaker’s diaphragm) to generate sound in different frequency ranges.

8. In-Car Wireless charging
A US-based start-up, Yank Technologies, revealed a wireless charging solution capable of charging multiple electronic devices within the car at the same time. The essence of the tech is simple: charging your phone or electronic device anywhere within the car without the need for a charging pad. The phone or device will have to support wireless charging for it to work. The company also says that its wireless system generates less radiation than a mobile phone placed on a person’s ear.

9. Nawa Racer concept
The retro-inspired e-bike concept from French company Nawa Technologies was a technology preview from the company. The highlight of the bike was its hybrid battery system, which paired the company’s ultracapacitors with conventional lithium-ion cells — a world-first. The system comprised a 0.1kWh ultracapacitor, which assisted a 9kWh battery and gave the bike an up to 300km range and tipped the scales at just 150kg. The concept was powered by a 100hp hubless-rim electric motor.

10. Aston Martin, Gentex Camera Monitoring System
The camera monitoring system basically uses three rear-facing cameras, one hidden within each wing mirror — the mirrors are not replaced by cameras — and one at the rear provides a live feed to a display integrated into the internal rear view mirror. The system uses Gentex’s Full Display Mirror — the rear-view mirror can function as a regular unit when the display is off — to meet regulations as well as allow drivers to set up the digital feed to their liking. Aston Martin will be using the system, it’s just not known which will be the first model to use it.



Highlights from the Consumer Electronics Show 2020
 

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LIFE & STYLE
Vloggers from Kerala capital speak about what keeps them going

Harikumar J S


THIRUVANANTHAPURAM, JANUARY 17, 2020 14:03 IST
UPDATED: JANUARY 17, 2020 14:03 IST


Vloggers during the recent meet in Varkala


Vloggers during the recent meet in Varkala | Photo Credit: Special Arrangement

MORE-IN


With videos becoming the zeitgeist, vloggers Thiruvananthapuram are commanding a substantial viewership in the digital space, aided by the boom of social media

Have you heard of Dravyapara? Well, cycling enthusiast Vishnu Lal R just came up with a post in his vlog Kcyclopedia — Kerala’s Cycling Encyclopedia about this picturesque spot at Amboori on the outskirts of the city where he went for a cycling trip. Maintained with his friend Krishnamoorthy G V, the YouTube vlog aims at promoting the benefits of cycling.
“It may not be obvious in terms of page views or subscription numbers, but the influence goes beyond. If at least one person a day decides to go cycling after watching our vlogs, wouldn’t that be great?” asks Vishnu. He points out the “instant impact” of visuals over wordy text. “Visuals stay better in one’s mind. After all, it’s the age of Netflix and videos are a way of communication that’s growing more popular,” he adds.


Cycling vloggers Vishnu Lal R (left) and Krishnamoorthy G V


Cycling vloggers Vishnu Lal R (left) and Krishnamoorthy G V | Photo Credit: Special Arrangement

With videos becoming the zeitgeist, vloggers from the city, like Vishnu, are commanding a substantial viewership in the digital space, aided by the boom of social media. With content on diverse topics — from travel, food, tech, books, automobiles, agriculture and even law and finance – grabbing eyeballs, the trend of vlogging has caught on. Recently, TechnoparkToday, an online publication, organised a Trivandrum Vloggers’ Meet, bringing together video bloggers from and around the district at the lush green environs of Green Tsavorite in Varkala to help connect them for exchange of ideas, experiences and techniques of their craft.
“We had sent out invitations and 25 vloggers were selected depending on the quality and reach of their videos. The focus was on knowledge-sharing as each vlogger employs a different approach,” says Suryajith Kattappana, co-founder of TechnoparkToday.
It’s YouTube channel, launched six years ago and with close to 2,700 subscribers, chiefly chronicles lives of techies and life in the city. “Anything of interest to techies, be it lifestyle, food, hang-out spots or emerging trends, find space in the channel, apart from interviews with achievers,” says Suryajith.
Lifestyle, more specifically travel and food, seems to top in terms of popularity, with cinema too finding many takers. Lifestyle vlogger Kiran Deepu, whose YouTube vlog Nikkis Cafe has about 14,000 subscribers, says he essentially vlogs about “my interests and whatever I spend my time on.” A techie, Kiran started Nikkis Cafe four years ago while working in Chennai. Initially, he chronicled his life and travels in Tamil Nadu.

Kiran Deepu


Kiran Deepu | Photo Credit: Special Arrangement
“My first video was a documentary of sorts on AVM when the famous production house completed 70 years. Later, I did one on actor Ajith, which went viral. Now, I don’t restrict himself to any topics or categories,” he says. Kiran is happy to point out that his video review of the recent box-office hit Anjaam Pathiraa was shared by its lead star Kunchacko Boban on his Facebook page.
Anupriya Raj, who works with Doordarshan, is a travel junkie and her YouTube channel, Anu Vibes, captures her excitement off the beaten track. “I once made a travel video on a Munnar trip I undertook and that boosted my confidence to vlog more,” says Anupriya, who was part of the vloggers’ meet in Varkala.

Anupriya Raj


Anupriya Raj | Photo Credit: Special Arrangement

She then learnt to use home video-editing software Windows Filimora and Final Cut Pro for her posts. “When you travel, you may otherwise just see the sights or click photos. But vlogging helps me mingle with more people and ask more questions. It’s a good way to learn about the places,” she adds.
For vlogger couple Vishakh Babu and Amala Gopan, a visit to Langkawi in Malaysia after their wedding six months ago provided a launchpad for their channel, Travel Techies. Vishakh, a shutterbug, says their vlog is an amalgamation of his twin passions — travel and photography.


Start, camera, action (Clockwise from left) Couple vloggers Vishakh Babu and Amala Gopan; vloggers during the meet in Varkala; Kiran Deepu; Anjana Gopakumar; Anupriya Raj


Start, camera, action (Clockwise from left) Couple vloggers Vishakh Babu and Amala Gopan; vloggers during the meet in Varkala; Kiran Deepu; Anjana Gopakumar; Anupriya Raj | Photo Credit: Special Arrangement

“Travel comes as a break from work for us. But instead of simply going for a trip and forgetting the experience, we want to chronicle it. Such memories will be there on our channel, which we can revisit and re-live any time,” he explains. They also bring out videos on “general, useful” topics such as ‘All about FASTtag’ and ‘How tea is manufactured.’
From a young age, reading has been a passion for Smitha Jayakar. So much so that she started her YouTube channel, Reads & Roads Cafe, in 2017 to help others inculcate the habit.


Book vlogger Smitha Jayakar


Book vlogger Smitha Jayakar | Photo Credit: Special Arrangement
“A good way to keep one’s interest going is by sharing your experiences with others. My vlogs are an extension of my hobby,” says the Kochi native who works for an IT firm in the city.
With the spurt in number of restaurants, the food culture in the city has witnessed a massive growth in the last few years and we have food vloggers unearthing new flavours and trends for gourmets. Like Anjana Gopakumar who regularly posts “mini videos” about her culinary experiences on her food blog ‘Thank God I am Fat.’


Food vlogger Anjana Gopakumar


Food vlogger Anjana Gopakumar | Photo Credit: Special Arrangement
While she focussed more on food reviews earlier, Anjana, who studied culinary arts at Manipal University, says she is now zeroing in on “telling stories about people” and their adventures involving food. “I like to explore the nuances of each cuisine. For example, if someone asks me for the difference between a dimsum and a dumpling, I’ll be happy to explain,” says Anjana, a member of the EAT — Eat at Trivandrum team. She is planning to launch her own dedicated YouTube channel soon.
As competition hots up in the “game for numbers” due to a cornucopia of material to choose from, for followers, quality and quantity too matters.
“The reach of vlogs is vast and unpredictable, thanks to multiple platforms for sharing. An interesting video can immediately go viral. Perhaps, today, more people are watching videos than reading text,” says Renjith Ramachandran, co-founder of TechnoparkToday, while stressing the importance of making the presentation and narrative attractive for more “hits.”
So, let’s vlog on to...


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AI vendor once confidently bragged to us that their tool could look at a job description, evaluate 100 CVs and pick the best five suited for the job. Photo: iStock


AI vendor once confidently bragged to us that their tool could look at a job description, evaluate 100 CVs and pick the best five suited for the job. Photo: iStock

The hits and misses of using Artificial intelligence for recruitment
4 min read . Updated: 15 Jan 2020, 05:53 PM ISTT.N. Hari
  • Facial recognition is another problem that has been solved and has wide applications that touch everyday lives


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Artificial intelligence

Artificial intelligence is making huge strides and has been occupying some of the best minds of this century, but the hype around it is just as massive. Artificial intelligence is entering everyday lives and products, and many of us find ourselves in positions, both in our professional and personal lives, where we need to evaluate the genuineness of claims to using AI. And if we can’t separate the hype from the truth, we’d end up spending money on fake products and services.
Over the years that I’ve spent with startups, I’ve come across both genuine AI products and fakes. I’ll start with the ones that truly solved problems using AI.
A few years ago, one of the co-founders of Liv.ai, a Bengaluru-based AI start-up, met me and demonstrated their product that used natural language processing (NLP) to convert speech to text in multiple Indian languages. Converting speech to text in multiple languages was a hard problem to solve. I was a bit skeptical at first, but when I saw the product, I was quite blown away. Flipkart acquired it and built a shopping assistant, Saathi, with text and voice interface to support shoppers in the smaller towns.

Facial recognition is another problem that has been solved and has wide applications that touch everyday lives, including unlocking one’s smartphone. Work is in progress for image recognition applications in other fields, including in horticulture.
And now, I come to what I call fake products riding the AI wave. A vendor once approached us claiming their product could predict criminal tendency in an individual with an accuracy of 60%, and suggested we use this tool to evaluate our delivery boys. This means there is a 40% probability that it would classify someone with no criminal tendency as one with a criminal tendency. Do you need anything else to decide whether you should pay this vendor and run all your new hires through a test like this?

Another AI vendor once confidently bragged to us that their tool could look at a job description, evaluate 100 CVs and pick the best five suited for the job. When we asked, ‘How?’, they resorted to deep jargon: ‘We use a deep learning algorithm’. When we tested the tool and got it to look at 100-odd CVs and shortlist the best five, there was a zero match with what a good recruiter and hiring manager with years of experience had shortlisted.
Claims like these give AI a bad name. Arvind Narayanan, a computer science professor at Princeton, puts it more succinctly, “Much of what’s being sold as ‘AI’ today is snake oil — it does not and cannot work. Why is this happening? How can we recognize flawed AI claims and push back?"

He has classified AI into three broad buckets:
1. Areas where AI is genuine and making rapid progress like facial recognition, medical diagnosis from scans, etc.
2. Areas that are imperfect but improving like detection of spam, hate speech, etc.
3. Fundamentally dubious areas like predicting job success, recidivism, at-risk kids etc.
The last category, which is really about predicting social outcomes, is essentially the snake oil being sold to gullible users and used as a pretext for collecting a large amount of data. Users are made to believe that magical insights can somehow be extracted from large amounts of data and more the data better the insights.
Professor Narayanan writes that there has been no real improvement in the third category, despite how much data you throw at it; he further goes on to show that for predicting social outcomes, AI is worse off than manual scoring using just a few features.

In another questionable claim, Ginni Rometty of IBM said last year that IBM artificial intelligence can predict with 95% accuracy which workers are about to quit their jobs. In my opinion, using AI to predict human and social behaviour will always be flawed because human beings aren’t all that predictable. They’re individualistic, and their behaviours depend on a number of factors that can’t always be reduced to ‘data points’.
The protagonists of predicting social outcomes will no doubt claim that it is only a matter of time before AI gets better. I believe this is untrue.
Those who have heard of ‘chaos theory’ (more commonly known as the butterfly effect) understand that small differences in initial conditions—such as those due to rounding errors—can yield widely diverging outcomes even for deterministic systems where an approximate present cannot determine an approximate future. So, one can imagine how much more indeterminate or irrelevant the predictions would be for inherently non-deterministic systems like social behaviours and outcomes. Just as the Heisenberg’s uncertainty principle places fundamental limitations at an atomic level, chaos theory places a similar limitation in areas like social outcomes.

Vested interests will always have a motive for creating the myth of being able to predict social outcomes using vast data. This myth needs to be dispelled.


T.N. Hari is head of human resources at Bigbasket.com and adviser to several venture capital firms and startups. He is the co-author of Saying No To Jugaad: The Making Of BigBasket.

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Artificial intelligence is making huge strides and has been occupying some of the best minds of this century, but the hype around it is just as massive.

Artificial intelligence is entering everyday lives and products, and many of us find ourselves in positions, both in our professional and personal lives, where we need to evaluate the genuineness of claims to using AI.


Arvind Narayanan, a computer science professor at Princeton, puts it more succinctly, “Much of what’s being sold as ‘AI’ today is snake oil — it does not and cannot work. Why is this happening? How can we recognize flawed AI claims and push back?"

He has classified AI into three broad buckets:
1. Areas where AI is genuine and making rapid progress like facial recognition, medical diagnosis from scans, etc.
2. Areas that are imperfect but improving like detection of spam, hate speech, etc.
3. Fundamentally dubious areas like predicting job success, recidivism, at-risk kids etc.
The last category, which is really about predicting social outcomes, is essentially the snake oil being sold to gullible users and used as a pretext for collecting a large amount of data. Users are made to believe that magical insights can somehow be extracted from large amounts of data and more the data better the insights.


Professor Narayanan writes that there has been no real improvement in the third category, despite how much data you throw at it; he further goes on to show that for predicting social outcomes, AI is worse off than manual scoring using just a few features.


Vested interests will always have a motive for creating the myth of being able to predict social outcomes using vast data. This myth needs to be dispelled.


T.N. Hari is head of human resources at Bigbasket.com and adviser to several venture capital firms and startups. He is the co-author of Saying No To Jugaad: The Making Of BigBasket.
Good, good. I even feel relief to see it. The basis of it - the hype and nonsense written by media people - is what i've been saying all along.
And this written in academic style, not journalist style.

Note they (media people etc.) also confuse AI with what is just more advanced automation systems and robots. Most do not involve AI, basically because robots are designed for specific or specialised purposes, not for general purpose, not to be adaptable like humans. So, advanced if-else logic is suitable, no need of AI. Robot walking/talking/etc. is an old story of Hollywood fiction.
 

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Good, good. I even feel relief to see it. The basis of it - the hype and nonsense written by media people - is what i've been saying all along.
And this written in academic style, not journalist style.

Note they (media people etc.) also confuse AI with what is just more advanced automation systems and robots. Most do not involve AI, basically because robots are designed for specific or specialised purposes, not for general purpose, not to be adaptable like humans. So, advanced if-else logic is suitable, no need of AI. Robot walking/talking/etc. is an old story of Hollywood fiction.
Those who understand value of Human resource can only understand all the hype.

These so called apps in Financial Sectors are trying to use AI but are worst in case of understanding the UI by a new customer. Old ones also feel it like a dumb is given the job. Even for Customer Complaints, they are using this shit as it is pushed as a Technological Advancement.
IVR came, it is accepted upto some extent only.
If there is a problem and you want to complain, it is worst thing to wait for a human to respond.
In cases of Emergency or online card frauds, these things fail miserably.
Only experienced people know how to handle upto a limit.
 
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