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Corona काल में घर बैठे दूरदर्शन पर बाबा Amarnath के लाइव दर्शन, प्रतिदिन 500 यात्रियों को अनुमति

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•Jul 4, 2020


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News18 India

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जम्मू और कश्मीर में श्री अमरनाथजी यात्रा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उप-समिति की एक बैठक आयोजित की गई थी। श्री अमरनाथजी यात्रा 2020 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए, मुख्य सचिव ने कहा कि COVID-19 महामारी के मद्देनजर, Disaster Management Act के तहत गठित राज्य कार्यकारी समिति ने मानक Standard Operating Protocols (SoPs) जारी किया है, जिसमें अंतर, 100% निर्धारित है. J&K में यात्रा करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए RTPCR टेस्ट. जम्मू और कश्मीर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों का सैंपल, परीक्षण और संगरोध करना होगा, जब तक कि वे नकारात्मक होने की सूचना न दें. अमरनाथ आरती का लाइव प्रसारण दूरदर्शन पर होगा, जिससे कोरोना काल में घर बैठे लोग कर सकेंगे दर्शन.
 

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Amarnath Aarti To Be Telecast Live On Doordarshan; 500 Yatris Allowed Daily Darshan

Amarnath Aarti to be telecast live on Doordarshan; 500 yatris allowed daily darshan


Photo Credit :

04July, 2020
by ANI
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Srinagar (Jammu and Kashmir) [India], July 4 (ANI): In view of the prevailing Covid-19 pandemic, the Amarnath 'Aarti' this year will be telecast live on Doordarshan and only a maximum of 500 yatris will proceed from Jammu by road per day to perform darshan.
"Given the constraints, a maximum of 500 yatris only could be allowed per day by road from Jammu. It was informed that Baba Amarnath Aarti this year will be telecast live on Doordarshan," Jammu and Kashmir Chief Secretary B V R Subrahmanyam said.
Subrahmanyam on Saturday chaired a meeting of the sub-committee constituted by the Supreme Court for Amarnath Yatra. He emphasised that adequate arrangements should be made to ensure unhindered telecast of the Aarti.
As per the official release, Subrahmanyam said that all entrants into Jammu and Kashmir will have to be sampled, tested and quarantined till they are reported to be negative.
"The camping facilities earlier utilised for yatris, especially at entry points are currently being utilised as quarantine centres. Keeping in view of the circumstances, the yatra this year would have to be undertaken in a restricted manner so that the standard operating procedures (SOPs) for COVID-19 are strictly adhered to during the conduct of the yatra," said the release.
In the meeting, officials informed the Chief Secretary that adequate stock of drugs, consumable items, sleeping bags, besides PPE kits and masks are being made available to the doctors and paramedical staff being deployed for yatra duty.
Officials further informed him that two base hospitals are also being established along Baltal route. Isolation facilities will have to be created to ensure any COVID-19 challenges are addressed on an emergent basis at the camp itself.
Divisional Commissioner, Kashmir, Deputy Commissioners and SSPs of Ganderbal and Anantnag districts, Additional CEO, Shri Amarnathji Shrine Board (SASB) besides other senior functionaries of the concerned departments attended the meeting through video conference.
Earlier, Mahant Deependra Giri, the custodian of the holy mace of Lord Shiva, had announced the schedule for this year's Amarnath Yatra.
As per the schedule, after performing the Chhari-Pujan at Dashnami Akhara Srinagar on the occasion of 'Nag-Panchami' on July 25, Mahant Giri will carry the holy mace to the holy shrine of Swami Amarnath to have 'darshan' on 'Shravan-Purnima' on August 3. (ANI)


Amarnath Aarti to be telecast live on Doordarshan; 500 yatris allowed daily darshan
 

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Amarnath Yatra के इतिहास में पहली बार हुआ आरती का LIVE प्रसारण, श्रद्धालुओं ने घर बैठे किए दर्शन

Updated: | Sun, 05 Jul 2020 10:48 PM (IST)
Amarnath Yatra के इतिहास में पहली बार हुआ आरती का LIVE प्रसारण, श्रद्धालुओं ने घर बैठे किए दर्शन
Amarnath Yatra : इस साल यात्रा 23 जून को शुरू होनी थी, लेकिन कोरोना के कारण यात्रा की तारीख घोषित नहीं की गई। यात्रा शुरू करने की तैयारी तेजी से चल रही हैं।


Amarnath Yatra : कोरोना महामारी के चलते इस बार बाबा अमरनाथ की यात्रा नहीं हो पाई। रविवार को इस पवित्र यात्रा के इतिहास में पहली बार लाइव आरती का प्रसारण हुआ। गुफा में विशेष आरती की गई। दूरदर्शन पर अब रोज आरती का सीधा प्रसारण सुबह साढ़े सात बजे और शाम साढ़े पांच बजे होगा। यह पहली बार है जब पवित्र गुफा में विराजमान भोले बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं ने घर बैठे किए। तीन अगस्त रक्षा बंधन वाले दिन तक श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा में होने वाले आरती के दर्शन करने का मौका मिलेगा। तिथि निर्धारित नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन तेजी के साथ प्रबंधों को अंतिम रूप दे रहा है। जम्मू से रोज पांच सौ यात्रियों को सड़क के रास्ते से श्रद्धालुओं को बालटाल जाने की अनुमति होगी।
इस साल यात्रा 23 जून को शुरू होनी थी, लेकिन कोरोना के कारण यात्रा की तारीख घोषित नहीं की गई। यात्रा शुरू करने की तैयारी तेजी से चल रही हैं। दक्षिण कश्मीर में श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी करीब 13 फीट में विराजमान हैं। उपराज्यपाल ने गुफा में जम्मू-कश्मीर में शांति और खुशहाली की प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने कोरोना के जल्द खात्मे की कामना की।



उपराज्यपाल ने पवित्र गुफा स्थल पर यात्रा के प्रबंधों का जायजा लिया। मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना में उपराज्यपाल जीसी मुर्मू अपने परिवार के सदस्यों, पुजारी व श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों के साथ मौजूद रहे। दूसरी ओर, व्यास पूर्णिमा पर पवित्र छड़ी मुबारक के संरक्षक और दशनामी अखाड़ा के महंत दीपेंद्र गिरी पहलगाम में लिद्दर दरिया किनारे शिव मंदिर में भूमि पूजन और ध्वजारोहण किया।



1996 में भी प्राकृतिक आपदा के कारण विकट स्थिति बनी थी
श्री अमरनाथ यात्रा के लिए रविवार सुबह छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची। करीब सौ साधु संतों व अन्य श्रद्धालुओं के साथ सुबह छह बजे दशनामी अखाड़ा श्रीनगर से पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे छड़ी मुबारक का भूमि पूजन, नवग्रह पूजन और ध्वजारोहण की रस्म पूरी की गई। छड़ी मुबारक का नेतृत्व करने वाले दीपेंद्र गिरि ने कहा कि साल 1996 में भी प्राकृतिक आपदा के कारण विकट स्थिति बनी थी।

Posted By: Navodit Saktawat


Amarnath Yatra के इतिहास में पहली बार हुआ आरती का LIVE प्रसारण श्रद्धालुओं ने घर बैठे किए दर्शन
 

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बैजनाथ के पास तेजोलिंग रूप में विराजमान हैं श्री महाकाल
June 30, 2020



देवभूमि हिमाचल में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास द्वापर, त्रेता या किसी अन्य युग से जुड़ा हुआ है. एक ऐसा ही मंदिर जो बैजनाथ से करीब पांच किमी. की दूरी पर स्थित है. यह मंदिर महाकाल मंदिर के नाम से जाना जाता है. महाकाल मंदिर के दर्शन करने व पूजा-अर्चना के लिए वर्ष भर श्रद्धालु आते रहते हैं. स्थानीय लोग अपने घरों में विवाह-शादी या अन्य कोई भी शुभ कार्य करने से पहले या बाद में बैजनाथ शिव मंदिर और महाकाल मंदिर में माथा टेकना कभी नहीं भूलते.

मेलों में होती है खूब भीड़
खासकर मेलों के दौरान तो इस मंदिर में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती है. किवदंती के अनुसार भाद्रपद मास में शनि भगवान अपने गुरु श्री महाकाल के चरणों में वास करते हैं. यहां भाद्रपद मास के शनिवार को मेलों का आयोजन होता है. श्री महाकाल स्वयंभू लिंगों में से एक है. उज्जैन मध्यप्रदेश में यह ज्योर्तिलिंग के रूप में विराजमान हैं.

श्री शनिदेव मंदिर
हिमाचल प्रदेश में श्री महाकाल तेजोलिंग रूप में है. महाकाल जी के साथ परिसर में भगवान शनिदेव की पूजा आदिकाल से होती रही है. लेकिन, वर्तमान में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण भगवान शनि की शिला रूप और मूर्ति रूप में स्थापना कर दी गई है.






यहाँ हैं 4 पवित्र जल कुंड
श्री महाकाल मंदिर की परिक्रमा में चार पवित्र जल के कुंड हैं. जिनका जल प्राचीन काल में ऋषि लोग स्नान और महाकाल को अभिषेक करने के लिए इस्तेमाल करते थे. महाकाल मंदिर परिसर में से श्मशान भूमि को स्वामी रामानंद जी द्वारा बाहर स्थानांतरित कर दिया गया था. यहां पर लोग शनि शांति के लिए शनि पूजन और तेल से अभिषेक करते हैं.

माँ दुर्गा मंदिर
यहां मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर लगभग 450 साल पहले मंडी के राजा ने बनवाया था, लेकिन मूर्ति स्थापना में विघ्न आने के कारण देवी की स्थापना नहीं हो पाई. सन् 1982 में स्वामी रामानंद जी द्वारा दुर्गा माता की स्थापना की गई. मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग प्रवेश द्वार के साथ प्रांगण में गणेश, पार्वती, भैरव, नंदी तथा अन्य देवी-देवता विराजमान हैं। मंदिर की भीति दीवारों पर योगियों तथा अन्य असुरों के वध करने जैसे कलात्मक चित्रों को भी उकेरा गया है.

सामुदायिक भवन
मंदिर के पास कुछ दूरी पर सामुदायिक भवन विद्यमान है. जिसमें श्रद्धालु विश्राम कर सकते हैं. मेलों के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की जाती है. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से शिवलिंग पर विल्व पत्र, दूध , दही व गंगाजल चढ़ाकर स्नान करवाते हैं, उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है.

पांडवों ने भी की थी पूजा
पुजारी बताते हैं कि ग्रहों के सताए हुए लोग यहां पर पूजा-अर्चना करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इस स्थान पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने भी पूजा की थी, जिसका साक्ष्य मंदिर के पास बने कुंती कुंड से मिलता हैं. यह भी कहा जाता है कि मंदिर बनवाने के बाद पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां पर महाकाल की आराधना की थी. इसे अघोरी साधकों और तंत्र विद्या का केंद्र भी माना जाता है. यहां पर शिव के साथ अपरोक्ष रूप से महाकाली का वास भी बताया जाता है.

सप्त कुंड
पहले ऐसी मान्यता थी कि यहां अगर कोई शव जलने न आए, तो घास का पुतला जलाया जाता था. मान्यता यह भी है कि सप्तर्षि जब इस क्षेत्र में प्रवास पर थे, तब सात कुंडों की स्थापना की गई थी. इनमें से चार कुंड ब्रह्म कुंड, विष्णु कुंड, शिव कुंड और सती कुंड आज भी मंदिर में मौजूद हैं.
तीन कुंड लक्ष्मी कुंड, कुंती कुंड और सूर्य कुंड मंदिर परिसर के बाहर बताए जाते हैं। कहा जाता है बह्म कुंड का पानी पीने के लिए, शिव कुंड के पानी से महाकाल का अभिषेक और इस पानी को नहाने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है, जबकि सती कुंड के पानी को प्रयोग में नहीं लाया जाता है. कहा जाता है कि किसी दौरान में इस स्थान पर तीन रानियां सती हुई थीं.



बैजनाथ के पास तेजोलिंग रूप में विराजमान हैं श्री महाकाल | हिम टाइम्स - Him Times
 
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