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हिमाचली भाषा की लिपि ‘टांकरी’ का संरक्षण जरुरी
April 22, 2017


जब हम देश के बहुत सारे राज्यों जैसे पंजाब, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल आदि को उनकी स्थानीय भाषा और लिपि में संवाद करते देखते हैं तो मन में ये प्रश्न आता है कि क्या हिमाचल प्रदेश की भी कोई लिपि है जिसमें हम अपनी भाषा को लिपिबद्ध कर सकते हैं या कभी करते होंगे? हिमाचल प्रदेश के अधिकतर लोग ये नहीं जानते होंगे की हमारी पहाड़ी भाषा की कोई लिपि भी है। जी हाँ, यह लिपि है टांकरी
टांकरी लिपि, पहाड़ी भाषा समेत उत्तर भारत की कई अन्य भाषाओँ को लिखने के लिए प्रयोग की जाने वाली लिपि है। पुराने समय में कुल्लू से लेकर रावलपिंडी तक पढने लिखने का हर तरह का काम टांकरी लिपि में ही किया जाता था। आज भी पुराने राजस्व रिकॉर्ड, पुराने मंदिरों की घंटियों या किसी पुराने बर्तन में टांकरी में लिखे शब्द देखे जा सकते हैं।


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टांकरी वर्णमाला
टांकरी लिपि ब्राह्मी परिवार की लिपियों का हिस्सा है जोकि कश्मीरी में प्रयोग होने वाली शारदा लिपि से निकली है। जम्मू कश्मीर की डोगरी, हिमाचल प्रदेश की चम्बियाली, कुल्लुवी और उत्तराखंड की गढ़वाली समेत कई भाषाएं टांकरी में लिखी जाती थी। हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा, ऊना, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर में व्यापारिक व राजस्व रिकॉर्ड और संचार इत्यादि के लिए भी टांकरी का ही प्रयोग होता था।
लेकिन पिछले कुछ समय में टांकरी लिपि लगभग विलुप्त हो चुकी है। हिंदी और अंग्रेजी के उत्थान के साथ टांकरी ने अपना पतन देखा। जाहिर बात है कि हम पहाड़ों की अपनी समृद्ध कला, संस्कृति और इतिहास को सहेजने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। हमारे पडोसी राज्य पंजाब ने अपनी भाषा और लिपि को सहेज कर आगे बढ़ाया लेकिन हिमाचली लोग अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को लेकर शर्मिंदगी और हीनभावना से ग्रसित रहे और बाहरी क्षेत्रों और देशों के रहन-सहन और भाषा को अपनाने में अपनी शान समझते रहे।
वर्तमान में बमुश्किल चंद लोग होंगे जो टांकरी को लिख पढ़ सकते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं काँगड़ा जिला के रैत गावं में जन्मे श्री हरीकृष्ण मुरारी। श्री हरीकृष्ण मुरारी को हिम साहित्य परिषद मंडी की और से पहाड़ी साहित्य सम्मान से पुरूस्कृत किया गया है। इसके साथ ही जैमनी अकादमी ने इन्हें आचार्य की मानिंद उपाधि से सम्मानित किया है। हिमाचल से सम्बन्ध रखने वाली ‘सांभ’ नामक संस्था ने टांकरी के श्री हरिकृष्ण मुरारी जी के साथ मिल कर टांकरी को पुनर्जीवित करने की ओर कदम उठाया है।





श्री हरीकृष्ण मुरारी टांकरी के सरंक्षण की आवश्कयता पर जोर देते हैं





‘सांभ’ संस्था ने लगभग 2 वर्षों के अनुसन्धान के बाद विभिन संग्रहालयों, खाताबहियों, शिलालेखों, राजस्व रिकॉर्ड से हासिल किये पत्रों की मदद से टांकरी का फॉन्ट तैयार करने में सफलता हासिल की है। इसके साथ ही ‘सांभ’ श्री हरीकृष्ण मुरारी की सहायता से सेमिनार और वर्कशॉप का आयोजन करके टांकरी का प्रचार-प्रसार करके इसे बचाने के लिए कोशिश कर रही है।
कुल्लू के खूबराम कराड़सू ने लिपि को सिखाने के लिए दशकों पहले नग्गर में एक स्कूल खोला था लेकिन वयोवृद्ध हो जाने के चलते अब यह करना उनके लिए संभव नहीं रह गया है। उन्होंने घाटी में पाए जानेे वाले टांकरी लिखित कई हस्तलिखित मनु-स्मृतियों का अनुवाद कर दिया है लेकिन अभी कई ऐसी पुस्तकें प्राप्त हो रही हैं जिनका अनुवाद होना बाकी है। टांकरी के विद्वान खूबराम कराड़सू का कहना है कि इसे सहेजने के लिए सरकार और समाज को विशेष प्रयास करने होंगे।
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से हर जिले में भाषा विभाग बने हुए हैं लेकिन फिलहाल हिमाचल प्रदेश सरकार के पास टांकरी के सरंक्षण के लिए कोई योजना नहीं है।

(सांभ संस्था की वैबसाईट, MyStateInfo और यूट्यूब वीडियो से मिले इनपुट्स पर आधारित)

( http://www.mystateinfo.com/blog-detail.php?post-title=हमारी+भूली+बिसरी+टांकरीMy is shifted to : https://himalayanxp.com/tankri-script-pahari-language )

हिमाचली भाषा की लिपि ‘टांकरी’ का संरक्षण जरुरी | हिम टाइम्स - Him Times
 
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ksk लंबे समय से नेपाली लेबर लाने की मांग कर रहे बागबानों के लिए अच्छी खबर
by K.S.K.

July 5, 2020

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in Breaking, खबरे :: सरसरी तौर


भारत-नेपाल के बीच संबंधों में खटास आने और लॉकडाउन के चलते नेपाल से श्रमिक सेब सीजन से पहले हिमाचल नहीं पहुंच पाए।
बागवान सेब की ढुलाई को नेपाली मजदूरों पर निर्भर रहते हैं। बगीचों में सेब तुड़ान और पैकिंग के काम में भी नेपाली मजदूरों की मदद ली जाती है।
बागवान लंबे समय से नेपाली श्रमिकों को हिमाचल लाने की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
अब जाकर हिमाचल में सेब सीजन के लिए नेपाल से श्रमिक लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सरकार के निर्देश पर सेब उत्पादक क्षेत्रों में जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।
संबंधित इलाकों के एसडीएम ने क्षेत्र के बागवानों से नेपाल से आने वाले श्रमिकों की सूची जुटानी शुरू कर दी है।
एसडीएम ने बागवानों को सूचना पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया की मदद भी ली है।
नेपाली मजदूरों को हिमाचल लाने में मदद करने का मामला सरकार ने केंद्र से भी उठाया है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी सेब सीजन की तैयारियों पर समीक्षा बैठक में संबंधित जिलों के डीसी को निर्देश दिए थे कि सीजन के लिए श्रमिकों की व्यवस्था की जाए। इसके बाद जिला उपायुक्तों ने एसडीएम की मदद से बागवानों से श्रमिकों की सूची जुटानी शुरू कर दी है।
दूसरी ओर, जिला शिमला के उपायुक्त अमित कश्यप ने कहा कि बागवानों से नेपाली मजदूरों के नामों की सूची जुटाई जा रही है।
हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि अगर सरकार और जिला प्रशासन ने नेपाली मजदूरों को सीजन में हिमाचल लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है तो यह बागवानों के लिए शुभ है। बागवान लंबे समय से नेपाली लेबर लाने की मांग कर रहे हैं।



ksk लंबे समय से नेपाली लेबर लाने की मांग कर रहे बागब
 

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*Tech News*

Instagram is reportedly testing a TikTok-like feature called Reels in India

'TikTok will not hand Indian users' data to Beijing': Company chief after ban on 59 Chinese apps

Horizon Zero Dawn Will Be Available On Epic Games And Steam On 7 August

Bharti Airtel Is Likely To Launch A Video-Conferencing Tool For Businesses

Asus to launch a new AMD-powered notebook in India today

Twitter says it will add an 'edit' feature when 'everyone means everyone' wears a mask

Amazon Prime Video desktop app for Windows 10 launched; will allow streaming, downloading videos for offline viewing

Facebook to pull the plug on its TikTok-like app called Lasso on 10 July

Facebook appears to be shutting down Lasso as its focus shifts to Instagram's Reels.

Facebook, Instagram to remind users to wear masks amid COVID-19 pandemic

️Fortnite brings new Captain America-themed skin for all Marvel fans
 

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“Drink water from the spring where horses drink. The horse will never drink bad water.
Lay your bed where the cat sleeps.
Eat the fruit that has been touched by a worm.
Boldly pick the mushroom on which the insects sit.
Plant the tree where the mole digs.
Build your house where the snake sits to warm itself.
Dig your fountain where the birds hide from heat.
Go to sleep and wake up at the same time with the birds – you will reap all of the days golden grains.
Eat more green – you will have strong legs and a resistant heart, like the beings of the forest.
Swim often and you will feel on earth like the fish in the water.
Look at the sky as often as possible and your thoughts will become light and clear.
Be quiet a lot, speak little – and silence will come in your heart, and your spirit will be calm and full of peace.”

Saint Seraphim of Sarov
via Emily Olga Dillon
 

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I am awake becaus of a girl I met online, she means my whole world. I think about her too much, or probably not enough. Here eyes so dark you get lost in. She has got style with attitude, rockin that bod she's sah cute. Her voice makes my head spin.
Beware of Romeos watching all this.

They may vanish with the subject mentioned here.

Don't Blame me.

LOL !
 
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