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Believe It Or Not, This Potato Tower Can Grow 100 Pounds Of Potatoes
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Natural Ways


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Wondering if you have enough space to plant potatoes in your garden? If you have a sunny corner, just two feet by two feet, that's all the space you need to grow 100 pounds of potatoes. Instead of the typical mounded rows that take up a lot of real estate in the garden, try planting potatoes in a tower. It will take some planning, but the payoff will be worth it. Keep watching to learn how to make it happen at home:
 

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Supreme Court Says That Contract Of Insurance Is Of Utmost Good Faith

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, जीवन बीमा लेते वक्त बीमारी छिपाई तो रद्द हो सकता है क्लेम

पीटीआई, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Oct 2020 08:29 PM IST


जीवन बीमा लेते समय यह बीमा लेने वाले की जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी बीमारियों से संबंधित सभी और सही जानकारियां बीमा कंपनी के साथ साझा करे। ऐसा न करने पर बीमा कंपनी दावा खारिज कर सकती है। इसी से संबंधित एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला दिया।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, इंदू मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बीमा अनुबंध अत्यधिक भरोसे पर आधारित होता है। ऐसे में जीवन बीमा लेने के इच्छुक लोगों के लिए हर वैसी जानकारियों का खुलासा करना उनका दायित्व हो जाता है, जिनका संबंधित मुद्दों पर किसी प्रकार का असर हो सकता है।
अदालत ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के इस साल मार्च के एक फैसले को निरस्त करते हुए यह टिप्पणी की। एक बीमा कंपनी ने मृतक की माता को ब्याज के साथ दावे की पूरी राशि का भुगतान करने के आदेश के खिलाफ आयोग में याचिका दायर की थी, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया था।

बीमारियों का अलग से खुलासा करने की जरूरत
पीठ ने कहा कि प्रस्ताव के फॉर्म में पुरानी बीमारियों का अलग से खुलासा करने की जरूरत होती है। ताकि, बीमा करने वाली कंपनी बीमांकिक जोखिम के आधार पर एक विचारशील निर्णय पर पहुंचने में सक्षम हो सके। पीठ ने कहा, बीमे का अनुबंध अत्यधिक भरोसे पर आधारित होता है। यह बीमा लेने के इच्छुक हर व्यक्ति का दायित्व हो जाता है कि वह संबंधित मुद्दे को प्रभावित करने वाली सारी जानकारियों का खुलासा करे, ताकि बीमा करने वाली कंपनी बीमांकिक जोखिम के आधार पर किसी विवेकपूर्ण निर्णय पर पहुंच सके।

नहीं दी बीमारी की जानकारी, खारिज हुआ दावा
बीमा कंपनी ने आयोग के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की थी। राष्ट्रीय आयोग ने संबंधित मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी।

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण आयोग के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि बीमा लेने वाले व्यक्ति ने अपनी पुरानी बीमारियों के बारे में जानकारियों का खुलासा नहीं किया था। उसने यह भी नहीं बताया था कि बीमा लेने के महज एक महीने पहले उसे खून की उल्टियां हुई थीं।

पीठ ने कहा, ‘बीमा कंपनी के द्वारा की गई जांच में पता चला है कि बीमा धारक पुरानी बीमारियों से जूझ रहा था, जो लंबे समय तक शराब का सेवन करने के कारण उसे हुई थीं। उसने उन तथ्यों की भी जानकारी बीमा कंपनी को नहीं दी थी, जिनके बारे में वह अच्छी तरह से जानता था।’

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, जीवन बीमा लेते वक्त बीमारी छिपाई तो रद्द हो सकता है क्लेम
 
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