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ठंड से ठिठुर कर कूड़े के ढ़ेर से खाना खोजते मिला शार्प शूटर पुलिस वाला, सामने आया हैरान करने वाला सच

November 15, 2020
4 Min Read






Prakash Pandey

मध्यप्रदेश का ग्वालियर. कहा जाता है समय बड़ा बलवान होता है. परिस्थितियां आदमी को अर्श से फर्श पर और फर्श से अर्श पर पहुंचा देती हैं. आज जिस व्यक्ति की हम बात करने जा रहे हैं वह कभी दतिया के इंस्पेक्टर हुआ करते थे जो अब दरबदर भटक रहे हैं और भीख मांग कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं. कई बार भिखारी को देख कर लोग नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन इन भिखारियों में कोई सूरमा भी हो सकता है, ऐसा मामला ग्वालियर में सामने आया है.

क्या है मामला
दरअसल मध्य प्रदेश के ग्वालियर पुलिस की अपराध शाखा के डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर अपनी गाड़ी से कहीं जा रहे थे. रास्ते में उन्होंने एक भिखारी को ठंड से ठिठुरते और कांपते देखा. भिखारी की स्थिति का अंदाजा लगाकर डीएसपी उसकी मदद के लिए गाड़ी रुकवा कर उसके पास गये लेकिन जैसे ही भिखारी ने उनका नाम लिया वह पूरी तरह से चौंक गए. क्योंकि वह भिखारी कोई और नहीं बल्कि डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर के साथ 15 साल पहले काम करने वाला जांबाज पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा निकला.

अफसर की हालत देख बेचैन हुए डीएसपी
अपराध शाखा के डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर ने शनिवार को पूरे मामले को मीडिया के साथ साझा किया. उन्होंने बताया कि
“वह और उसके साथी डीएसपी विजय बहादुर सिंह मंगलवार रात को यहां एक मैरिज हॉल के पास अपनी गाड़ी में थे. तभी उन्हें मानसिक रूप से विक्षिप्त एक भिखारी जैसा दिखने वाला व्यक्ति ठंड से बुरी तरह कांपते हुए कचरे के ढेर से खाना ढूंढता हुआ दिखाई दिया. उसे देखने के बाद हम दोनों गाड़ी से उतरे और हममें से एक ने उस व्यक्ति को अपनी गरम जैकेट पहनने को दी. तभी उस व्यक्ति ने हम दोनों को हमारे पहले नाम से पुकारा तो हम दोनों चौंक गए. बाद में गौर से देखने पर हमने पाया कि वह कोई और नहीं बल्कि पुलिस बल में हमारे पूर्व सहकर्मी मनीष मिश्रा हैं जो 2005 में दतिया में निरीक्षक के पद पर रहते हुए लापता हो गए थे.”
ग्वालियर पुलिस की अपराध शाखा में डीएसपी तोमर ने कहा कि इतने सालों में किसी को भी उनके ठिकाने का पता नहीं था.

बेहतरीन शार्प सूटर के साथ शानदार एथलीट थे मिश्रा
डीएसपी तोमर ने अपनी बात को आगे जारी रखते हुए बताया कि
उन्होंने और उनके साथी डीएसपी विजय सिंह ने उन्हें घर चलने के लिए कहा जिस पर मनीष मिश्रा ने मना कर दिया. मनीष मिश्रा के मना करने के बाद उन्होंने मिश्रा को एक गैर सरकारी संगठन एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय स्थल में ले जाकर छोड़ दिया. उन्होंने बताया कि अगली व्यवस्था तक मिश्रा को आश्रम में ही रखा जाएगा.”
बकौल तोमर
“मिश्रा एक अच्छे एथिलीट और शार्प शूटर थे. वह हमारे साथ 1999 में पुलिस बल में शामिल हुए थे. वह कुछ वर्षों बाद मानसिक समस्याओं से पीड़ित हो गए थे. उनके परिवार ने उनका उपचार भी कराया था लेकिन कुछ समय बाद वह लापता हो गए थे. डीएसपी ने कहा कि हम सभी उनके दोस्त यह कोशिश करेंगे कि मिश्रा का अच्छे से उपचार कराया जाए ताकि वह फिर से अपना सामान्य जीवन जी सकें.
एसपी के बेटे और भतीजे मिश्रा का हो चुका है तलाक

मनीष का पूरा परिवार पुलिस महकमे में है. मनीष के भाई भी थानेदार हैं. पिता और चाचा एसपी के पद से रिटायर हुए हैं. उनकी एक बहन किसी दूतावास में अच्छे पद पर हैं. मनीष की तलाकशुदा पत्नी भी न्यायिक विभाग में पदस्थ हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनीष मिश्रा ने 2005 तक पुलिस की नौकरी की. लास्ट ड्यूटी के तौर पर दतिया में बतौर निरीक्षक के पद पर तैनात थे. मानसिक स्थिति खराब होने के चलते घर के लोग उनसे परेशान हो गए. उन्हें इलाज के लिए कई स्थानों पर ले जाया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. एक दिन वह परिवार वालों की नजरों से बचकर खुद गायब हो गए. काफी खोजबीन के बाद भी जब मनीष मिश्रा का पता नहीं चल पाया तो उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़ कर चली गई. पत्नी ने तलाक ले लिया. रिपोर्टस के मुताबिक पिछले 15 साल से स्थिति खराब होने के चलते मनीष भीख मांगने लगे. फिलवक्त मनीष के दोनों दोस्तों ने उनका इलाज फिर से शुरू करा दिया है और वह एक आश्रय स्थल में रुके हुए हैं.
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि वर्षों तक मध्य प्रदेश पुलिस का एक जांबाज अधिकारी मानसिक बीमारी से जूझता रहा लेकिन उसकी खबर ना प्रशासन ने ली और ना ही परिवार वालों ने. आखिर एक शानदार ऑफिसर उपेक्षा और मानसिक विक्षिप्तता का शिकार कैसे हो गया.


 

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कई बार खुद के किस्मत पर भी यकीन नहीं होता...यकीन नहीं होता अपनी तकदीर पर...गुमनाम किसी अंधेरे में रह कर भी, खुशी की तलाश करती है किस्मत...मुक्कदर में कुछ और, जिंदगी कुछ और कहानी कहती है| कई बार ऐसा होता है जिसे देखकर खुद पर भी भरोसा नहीं होता है| ऐसी ही एक कहानी है मध्य प्रदेश के ग्वालियर से....
 

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