Who's awake right now?

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Delhi Speed Limits :

4 wheeler : 60-70 kmph Max
3 wheeler : 40 kmph Max
2 wheeler : 50-60 kmph Max

1623438035787.png
 

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Himachal Pradesh - NO RTPCR required from 14 June 2021

1623438605169.png



हिमाचल कैबिनेट बैठक: शाम पांच बजे तक खुली रहेंगी दुकानें, बसें चलानें को भी मंजूरी

हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक शुक्रवार को राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कोविड-19 के मामले घटने के बाद कोरोना कर्फ्यू में कई रियायतें देने पर चर्चा की गई।

कैबिनेट ने फैसला लिया कि सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक आठ घंटे कोरोना कर्फ्यू में ढील रहेगी। इस दौरान सभी दुकानें खुली रहेंगी। वहीं प्रदेश में 14 जून से बसे चलेंगी। इसके लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश के भीतर 50 फीसदी क्षमता के साथ बस सेवा शुरू की जाएगी। बाहरी राज्यों के लिए अभी बस सेवाएं शुरू नहीं होंगी।
 

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Manali Leh highway updates please....

Open....

Traveling Operators are operating batches on almost daily basis....



The highway is open via Atal Tunnel, Rohtang is still not completely cleared. All the other passes are opened.
You have to get a RT-PCR test done to enter Himachal Pradesh and Ladakh. So time your trip so that you would need to do only 1 RT-PCR test, which will work for both the borders. Artigen test will also be done at the Ladakh border. The rules are same for vaccinated and not vaccinated travelers.

--------------------------

Is the highway open in September and October also?

September yes, October is a big doubt, as the later passes - from Manali, starts receiving snowfall. However, Srinagar-Leh highway may remain open for traffic until October end or early November.


_____________________


Tourists will be allowed visit Rohtang Pass via Gulaba from tomorrow 14 th .June onwards.The permit will be issued manually by SDM office Manali.Only local taxies allowed for conveyance of the tourists.No private car / conveyance will be permitted.May inform all guests staying in hotels / tourism units accordingly.Movement to Rohtang Pass will be from 9 AM to 6 PM subject to weather conditions.

The Tribune India: Intrastate bus service to resume in Himachal, RT-PCR report not mandatory.
 

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
Monsoon likely to reach Delhi in next 48 hours, nearly two weeks ahead of schedule

Monsoon may arrive in Delhi in the next 48 hours as several states witness the advance of southwest monsoon, nearly two weeks ahead of the schedule.




Kumar Kunal
New Delhi
June 13, 2021
UPDATED: June 13, 2021 19:53 IST

Monsoon likely to reach Delhi in next 48 hours, nearly two weeks ahead of schedule


Parts of Delhi-NCR and Haryana are likely to witness heavy rain and thunderstorm on Sunday. (Photo: PTI)

Southwest monsoon may reach Delhi in the next 48 hours having already advanced into parts of Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Uttarakhand, North Haryana, North Punjab among other states, the Indian Meteorological Department (IMD) said on Sunday.
Southwest monsoon has arrived in several states 12 to 13 days ahead of the normal schedule, according to IMD.
Most parts of Delhi-NCR and Haryana are likely to witness heavy rain and thunderstorm on Sunday as monsoon advances, the weather department forecasted.
As per IMD, the southwest monsoon has advanced into entire Chhattisgarh, Odisha, West Bengal, Jharkhand, Bihar Uttarakhand, Himachal Pradesh and Jammu & Kashmir, Ladakh, Gilgit-Baltistan, and Muzaffarabad.

Furthermore, most parts of East Uttar Pradesh and some parts of West Uttar Pradesh, North Haryana, Chandigarh and North Punjab have also witnessed the arrival of monsoon.

According to the weather department, the conditions are favorable for further advance of southwest monsoon into most parts Madhya Pradesh, remaining parts of east Uttar Pradesh, Delhi, and some more parts of west Uttar Pradesh, Harayan and Punjab during the next 48 hours.

Monsoon likely to reach Delhi in next 48 hours, nearly two weeks ahead of schedule
 
Last edited:

adsatinder

Plz Help Himabuj (Amit Tyagi) in Corona Fighting
चमोली हादसे की असली वजहः 500 मीटर चौड़ा पत्थर 80 मीटर मोटी बर्फ के साथ टूटा

aajtak.in
नई दिल्ली,
11 जून 2021,
अपडेटेड 7:19 PM IST

1623613218140.png


7 फरवरी 2021 को उत्तराखंड के चमोली जिले की धौलीगंगा में हुए हादसे की वजह से करीब 200 लोगों की जान गई या लापता हैं. बहुत बड़े इलाके में बाढ़ आई थी. साथ ही 20 फीट गहरा कीचड़ जमा हो गया था. अब जाकर वैज्ञानिकों ने यह पता कर लिया है कि यह हादसा हुआ क्यों? कैसे धौलीगंगा, ऋषिगंगा और अलकनंदा में अचानक बाढ़ आई. कैसे हिमस्खलन हुआ. सिर्फ एक बड़े पत्थर के टूटकर ग्लेशियर पर गिरने की वजह से हिमस्खलन हुआ और यह हिमस्खन नीचे जमा ग्लेशियर से बनी प्राकृतिक झील को तोड़ते हुए नदियों में आ गया.
(फोटोः AAAS)



[Image: Cause of Chamoli disaster]


1623613233365.png


हादसे की शुरुआत हुई रोंटी पीक (Ronti Peak) से. यहां पर करीब आधा किलोमीटर चौड़े पत्थर, जिसके ऊपर भारी मात्रा में बर्फ जमी थी, वह टूटकर नीचे गिरा. 1 जनवरी 2021 को ली गई सैटेलाइट तस्वीर में रोंटी पीक के ऊपरी हिस्से में एक छोटी सी दरार दिखती है. 5 फरवरी 2021 तक यह दरार और बड़ी हो जाती है. 7 फरवरी को इस दरार की वजह से 500 मीटर चौड़ा एक पत्थर जिसके ऊपर बड़ी मात्रा में बर्फ लदा था, वह टूट गया. 10 फरवरी को आप रोंटी पीक के ऊपरी हिस्से में बड़े तिकोन पत्थर और बर्फ की मोटी चादर को गायब देख सकते हैं. (फोटोः AAAS)




1623613267309.png



वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में बताया कि रोंटी पीक के ऊपर जो पत्थर टूटा, उसके ऊपर भारी मात्रा में बर्फ जम गई थी. जिसका वजन वह सह नहीं पा रहा था. इस दौरान हिमालय रेंजेंस में आने वाले छोटे-मोटे भूकंपों की वजह से पत्थर में दरार आ गई. इसी दरार ने दर्द का सैलाब ला दिया. हिमालय पर नुकीलीं चोटियां, गहरी खाइयां, भूकंपीय गतिविधियां आदि बेहद खतरनाक होती है. दुनिया में अब तक सबसे बड़ा इस तरह का हादसा पेरू में 1970 में हुआ था. यहां हुआस्कारन हिमस्खलन हुआ था. यह दुनिया का सबसे बड़ा, खतरनाक और जानलेवा हादसा था. इसमें करीब 6 हजार लोग मारे गए थे. (फोटोः AAAS)




1623613296853.png


इसके बाद साल 2013 में केदारनाथ में हुए हादसे में 4000 लोग मारे गए. 1894 से 2021 तक उत्तराखंड में मौजूद हिमालय की 16 बड़े हादसे हो चुके हैं. इसमें फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड यानी भूस्खलन, हिमस्खलन और भूकंप शामिल है. हिमालय पर लगातार बढ़ रही इंसानी गतिविधियों से क्रायोस्फेयर यानी बर्फ की चादरों वाले इलाके खतरनाक होते जा रहे हैं. हिमालय पर बन रहे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, लगातार बढ़ती ऊर्जा की मांग, आर्थिक विकास और लो-कार्बन सोसाइटी की ओर जाने के प्रयासों से नुकसान हो रहा है. (फोटोःगेटी)




1623613319277.png


7 फरवरी 2021 को 6063 मीटर ऊंचे रोंटी पीक से बड़ा पत्थर टूटा. यह पत्थर 5500 मीटर नीचे स्थित रोंटी गैड यानी छोटी सी नदी की शाखा से टकराई. यह शाखा जमीन से 1800 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है. टक्कर इतनी जोर की थी कि इससे दो बार भूंकप महसूस हुआ. पहला 4 बजकर 51 मिनट 13 सेकेंड पर और दूसरा 4 बजकर 51 मिनट 21 सेकेंड पर. उसके बाद हिमस्खलन हुआ क्योंकि वहां पर बहुत ज्यादा बर्फ थी. ये सारे तेजी से नीचे आए तो ऋषिगंगा और धौलीगंगा में अचानक से बाढ़ आ गई. इन दोनों नदियों में स्थित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से बर्बाद हो गए. (फोटोः AAAS)





1623613349626.png




रोंटी पीक की ऊंचाई से नीचे गिरने वाले पत्थर और हिमस्खलन की गति 205 से 216 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. क्योंकि वहां पर रोंटी पीक का कोण 35 डिग्री है. वैज्ञानिकों ने इसे समझने के लिए डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) बनाया. इससे ही पता चला कि रोंटी पीक पर दरार आने की वजह से पत्थर टूटा. इसके ऊपर करीब 80 मीटर ऊंची बर्फ जमा थी. पत्थर के इस टुकड़े की चौड़ाई करीब 550 मीटर थी. अब आप ही सोचिए एक आधा किलोमीटर चौड़ा पत्थर और उसके ऊपर जमा 80 मीटर ऊंची बर्फ की परत 5500 मीटर की ऊंचाई से गिरेंगे तो वो क्या तबाही मचाएंगे? (फोटोः AAAS)

__________________________________

On Feb 7, a torrent of water, debris, & ice cascaded down Ronti Gad, Rishiganga, & Dhauliganga valleys in Uttarakhand, India. Today in @sciencemagazine, @waterSHEDlab & colleagues provide a comprehensive explanation of the event & ensuing disaster 1/nhttps://t.co/oQoBFx3wSw pic.twitter.com/dG5QxrTjfJ
— Dr Dan Shugar (@WaterSHEDLab) June 10, 2021
[Image: Cause of Chamoli disaster]


__________________________________




1623613422135.png



वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल फीचर ट्रैकिंग से पता किया कि आखिरकार यह पत्थर इतनी आसानी से तो टूटा नहीं होगा. तो पता चला कि इस पत्थर में साल 2016 से ही दरार आने लगी थी. यह अपनी जड़ों से हिलना शुरु कर चुका था. साल 2017 और 18 की गर्मियों में इसमें ज्यादा मूवमेंट हुआ. इसकी वजह से पत्थर के ऊपर जमा ग्लेशियर पर 80 मीटर चौड़ी दरार आ गई. ऊपर से मलबा गिरा उसमें 80 फीसदी पत्थर और 20 फीसदी बर्फ थी. जब यह नदियों में मिले तो ये टूटे. कई पत्थर तो 20 फीट चौड़े थे. इनके साथ बर्फ के बड़े-बड़े टुकड़े भी थे. (फोटोः गेटी)





1623613461910.png



नदियों में पानी रहने की वजह से इनकी गति को और बढ़ावा मिल गया. रोंटी गैड और ऋषिगंगा के संगम पर 40 मीटर मोटा मलबा आकर मिलने लगा. यह पर एक मोड़ था जिसकी वजह से ऊपर से गिरे पत्थर और बर्फ मलबे के साथ नदी के पानी में मिलकर तेज गति से नीचे की ओर आने लगे. लेकिन रोंटी गैड और ऋषिगंगा नदी के संगम के ठीक ऊपर मलबा जमा होने की वजह से वहां एक 700 मीटर व्यास की छोटी सी झील बन गई है. जो अब लगातार अपना आकार बढ़ा रही है. इस संगम से एक किलोमीटर नीचे ही मलबा का ज्यादा बहाव था. यहां पर मलबे की मोटाई करीब 100 मीटर है. (फोटोः गेटी)





1623613498047.png


वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने बताया कि अचानक हुए इस हादसे में जो मलबा (बारीक कीचड़, पानी, बर्फ, पत्थर, लकड़िया और पेड़) आया, उसने ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदी के संगम पर बहाव को रोक दिया. वहां एक बॉटलनेक बन गया. इससे करीब वहां पर 150 से 200 मीटर ऊंचा मलबा जमा होता गया. लेकिन यह ज्यादा देर टिक नहीं पाया. ऊपर से आ रहे मलबे के दबाव की वजह से यह टूट गया और धौलीगंगा के उत्तरी किनारे पर स्थित मंदिर को ध्वस्त कर दिया. (फोटोः गेटी)





1623613524687.png


चमोली में हुए हादसे की वजह से नदियों में जो गंदगी आई, उसका असर 900 किलोमीटर दूर तक देखने को मिला. यानी कानपुर तक गंगा नदी में गंदगी देखने को मिली. दिल्ली वाटर क्वालिटी बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस हादसे के बाद गंगा का पानी 8 दिनों तक गंदा था. इसकी वजह से 13.2 मेगावॉट का ऋषिगंगा प्रोजेक्ट और 530 मेगावॉट का तपोवन प्रोजेक्ट ठप हो गया. (फोटोः गेटी)





1623613552903.png


रोंटी पीक से जो पत्थर टूटा था वह क्षेत्रीय पर्माफ्रॉस्ट से 1 किलोमीटर ऊपर था. लेकिन इसके नीचे के इलाके तापमान के मामले में 0 डिग्री सेल्सियस से कम थे. जबकि इसकी विपरीत दिशा में तापमान ज्यादा था. वह करीब 0 डिग्री सेल्सियस मापा गया. यानी विपरीत दिशा से आने वाली गर्मी की वजह से भी ग्लेशियर पर असर पड़ा होगा. इस समय रोंटी गैड और ऋषिगंगा के संगम पर निगरानी रखने की जरूरत है क्योंकि न जाने वह कब टूटकर जाए. उसके लिए बड़े पैमाने की जांच करनी होगी. (फोटोः AAAS)
[Image: Cause of Chamoli disaster]





1623613591431.png



वैज्ञानिकों ने चमोली हादसे की जो वजह बताई है उसमें तीन प्रमुख हैं. पहला- ऊंचाई से टूटकर गिरने वाला पत्थर और बर्फ की मोटी चादर, दूसरा- पत्थर और बर्फ का अनुपात, जिसकी वजह से ग्लेशियर पिघली और टूटी, इसकी वजह से ही मलबे में तेज बहाव आया और तीसरा - हाइड्रोपावर स्टेशन की दुर्भाग्यशाली मौजूदगी. यह बहाव के मार्ग में थे. इसलिए यहां कोई चेतावनी जारी ही नहीं हो पाई और सैकड़ों लोग मारे गए या लापता हो गए. (फोटोःगेटी)


चमोली हादसे की असली वजहः 500 मीटर चौड़ा पत्थर 80 मीटर मोटी बर्फ के साथ टूटा
 
Top